Ex. Editor in Chief cum Chief Executive,Lok Sabha Television.worked as Senior Political Journalist in Aajtak, IBN7, DD News & Zee News.Views are personal.
परीक्षा चल रही है. किन्तु पत्रकारिता के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विकल्प का विशेषांक निकालना याद रहा. एक गोष्ठी में पूर्वज पत्रकार महापुरुषों का स्मरण करना भी नहीं भूले. नई पीढ़ी के प्रति विश्वास बढ़ाने वाली उम्दा पहल. सबको बधाई.
A married couple raja and sonam raghuvanshi from Indore who were in Meghalaya on a honeymoon have gone missing in East Khasi Hills district...
The couple were last seen on Friday after they rented a two-wheeler from Keating Road in Shillong to travel to Sohra (popularly known as Cherrapunjee) one of the state’s most visited tourist destinations...
The Government of Meghalaya is urged to take prompt and decisive action to locate the missing couple and ensure their safety.
@CMO_Meghalaya@BJP4Meghalaya@MeghalayaPolice@SangmaConrad
मोमबत्तियों की रोशनी में यह शाम और गहरी उदासी से भर गई. सामने तस्वीर में एक नवविवाहिता लाश बन चुके अपने जीवनसाथी के बगल में अकेली है. यह पहलगाम का मातम है. वह तस्वीर नहीं, एक बदकिस्मत फ्रेम है. कल इसमें किसी की भी तस्वीर हो सकती है..
@narendramodi@AmitShah@rashtrapatibhvn
महत्वपूर्ण यह नहीं कि कोई महान हुआ, महत्वपूर्ण यह है कि वह किन हालातों से निकलकर कहाँ पहुँचा, क्या कहा, क्या किया और कैसे महानता की ऊंचाइयों को छू सका. आज एक ऐसे ही सच्चे महामानव का जयंती प्रसंग है. परमात्मा सबको बाबा साहेब जैसी शक्ति और बुद्धि दे. हम सब बीज से वृक्ष बन सकें.
@MCNUJC_Bhopal में हमने तय किया कि फूलमाला और बुके की जगह अपने मेहमानों का बुक से स्वागत करें. लकड़ी-धातु के स्मृति चिन्ह भी नहीं. केवल किताब. इस निर्णय के बाद आज पहले अतिथि हुए पंकज त्रिपाठी और विजय विक्रम सिंह. दोनों एक्टर पढ़ाकू. पुस्तक पाकर परम प्रसन्न.
@TripathiiPankaj
#Aurangazeb क्रूर पिचाश था, वह विदेशी भी था। पर दुखद है कि इसके नाम सड़कें हैं और एक शहर है। इसके बारे में हमें इतना पढ़ाया गया जितना छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज, संता जी आदि के बारे में कभी नहीं बताया गया। इस प्रकार के पाठ्यक्रम से #secular औलादें पैदा हुई जो आज भी हमारे लिए बोझ और बेताल की तरह हमारे कंधों पर सवार हैं। ऐसे लोगों में स्वाभिमान नाम की कोई चीज़ नही हैं।
सनातन का आधार शांति, प्रेम व सहयोग है। इसके छाते में सभी सुरक्षित हैं ।
माननीय @narendramodi जी @dpradhanbjp जी, पाठ्यक्रम में शीघ्रतिशीघ्र अनुकूल परिवर्तन किए जायें।
ये माँ भारती की इच्छा है । ॐ
#change_syllabus
((सभी पाठक इसे अधिक से अधिक repost कीजिए))
#Chava #छावा टीम को बधाई
पंकज त्रिपाठी संघर्ष से प्राप्त सफलता की एक सबसे ताज़ा कहानी के नायक हैं. साधारण से असाधारण बनने की उनकी यात्रा हर क्षेत्र में उत्सुक युवाओं के लिए प्रेरक है. भारत में मीडिया की प्रतिष्ठित विद्यापीठ में हमारे अनूठे अदाकार का स्वागत है.
@TripathiiPankaj@MCNUJC_Bhopal
चंदेरी की ज्वाला – भारत की अस्मिता का प्रतीक!
29 जनवरी 1528 का दिन इतिहास में स्वाभिमान और बलिदान का उदाहरण बन गया। चंदेरी की वीरांगनाओं ने धर्म और सम्मान की रक्षा हेतु जौहर कर भारत माता की गरिमा बनाए रखी। #ChanderiJauhar
“चंदेरी का जौहर - स्वाभिमान की अखंड लौ!”
चंदेरी की रणभूमि आज भी वीरता और बलिदान की गवाही देती है। हम उन मातृशक्तियों को नमन करते हैं जिन्होंने इतिहास में अपनी अमर छाप छोड़ी। #ChanderiJauhar
धर्म और सम्मान की रक्षा के लिए जौहर ! जनवरी , 1528 में जब बाबर की सेना ने चंदेरी पर हमला किया, तब वीर महिलाओं ने अपनी मर्यादा की रक्षा के लिए जौहर कर दिया। यह बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता! #ChanderiJauhar
चंदेरी की आत्मबलिदान गाथा हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी!
इस वीर प्रसंग को याद करें, अपनी मातृभूमि और संस्कृति की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले वीरों को नमन करें। #ChanderiJauhar
चंदेरी जौहर: भारत के स्वाभिमान की अमर गाथा!
जब अत्याचारी शक्तियाँ बढ़ीं, तब चंदेरी की वीरांगनाओं ने आत्मबलिदान कर इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में लिख दिया। #ChanderiJauhar
बलिदान की ज्वाला से जलता रहेगा चंदेरी का इतिहास!”
बाबर की सेना के सामने झुकने के बजाय, राजपूत योद्धाओं ने शौर्य दिखाया और नारियों ने जौहर कर अपने सम्मान की रक्षा की। यह सच्चा राष्ट्रधर्म था! #ChanderiJauhar
इतिहास की वो रात जब अग्नि की ज्वालाओं में आत्मगौरव अमर हो गया!
चंदेरी की वीरांगनाओं ने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया, लेकिन मुगलों की दासी बनना स्वीकार नहीं किया। यह बलिदान सदा अमर रहेगा। #ChanderiJauhar
स्वाभिमान से बढ़कर कुछ नहीं”
29 जनवरी 1528—चंदेरी की रणभूमि रक्त से लाल थी, लेकिन मुगलों के आगे झुकने के बजाय वीर नारियों ने जौहर करना स्वीकार किया। #ChanderiJauhar
वीरता, स्वाभिमान और आत्मत्याग की भूमि हैं -चंदेरी!
मुगल आक्रांताओं से लड़ते हुए राजपूत योद्धाओं ने अंतिम सांस तक युद्ध किया और वीरांगनाओं ने जौहर कर अपने सम्मान की रक्षा की। उनकी गाथा अमर है! #ChanderiJauhar