#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यू��ीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं ��े साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
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@yadavakhilesh विभागीय नियमों के अनुकूल 25-30 वर्ष पूर्व में नियुक्त शिक्षकों से वर्तमान में एक और परीक्षा उत्तीर्ण कराने की अनिवार्यत�� शिक्षकों के साथ अन्याय है ।
#JusticeForTeachers
देश के सभी राज्यों में आरटीई लागू होने के पूर्व राज्यों द्वारा निर्धारित अर्हता रखने वाले अभ्यर्थियों को ही शिक्षक पद पर नियुक्त किया गया है जोकि 25-30 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं ।
परन्तु आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।
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#NoTetBeforeRteAct
यह शिक्षक वर्ग हैं ,सब समझते हैं ।
आरटीई में 2017 में संशोधन करके सभी कार्यरत शिक्षकों को टेट आपने अनिवार्य किया है ।तो पिछली सरकार की क्या गलती है ?पिछली सरकार ने तो 23 अगस्त 2010 के राजपत्र में आरटीई से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को स्पष्ट छूट दी है ।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अध्यादेश भारत सरकार लायेगी ,तो पश्चिम बंगाल की सरकार से इसका क्या लेना देना है?
यह इस प्रकार की गारण्टी है जैसे 2014 के यूपी चुनाव में शिक्षा मित्रों के लिए ली गई थी ।जिसका परिणाम सब देख रहे हैं ।20 लाख शिक्षक तनाव में हैं,कुछ तो आत्महत्या कर चुके हैं।वकीलों की फीस हेतु शिक्षकों की मेहनत की कमाई जा रही है और आप राजनीतिक बयान दे ���हे हैं ।
यदि इसी सत्र में यह ��ध्यादेश लाते हैं तो सही है ,अन्यथा शिक्षक सड़क पर उतर कर आंदोलन करने के लिए तैयार रहें ।
#NoTetBeforeRteAct
शिक्षकों के साथ वार्ता में जो बयान देते हैं ,संसद में उसके विपरीत बयान दे रहे हैं ।
तो फिर सभी राज्यों से जो आँकड़े और सूचना माँगी गई है क्या वो सब मिथ्या है ।यदि आप शिक्षकों के साथ है तो उत्तर में सभी राज्यों से सूचना माँगे जाने और विचार करने का उल्लेख आना चाहिए था ।आपके इस बयान की जितनी निंदा की जाये वो कम है ।ऐसा लगता है कि शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार ने कसम खा ली है,कि देश में किसी को शान्ति से नहीं बैठने देंगे ।देश के 20 लाख शिक्षक जो आपके द्वारा निर्धारित योग्यता हासिल करके शिक्षक बने हैं उन्हें सेवा में आने के 20-25 वर्ष वर्तमान की योग्यता हासिल करने को बाध्य करना कितना न्यायोचित है?
20 वर्ष पहले पुलिस,सेना या अर्धसैनिक बलों में 10 किमी की रेस लगाकर भर्ती अधिकारी या सैनिक को यदि आज दौड़ा दिया जाए तो विभाग ख़ाली हो जाएगा ।
देश में कितने माननीय न्यायाधीश हैं ज��� आज CLAT EXAM में बैठने को तैयार हैं?50-55 वर्ष के शिक्षकों को आज परीक्षा में बैठने को मजबूर किया जा रहा है और शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार तमाशा देख रहा है ।
देश के नागरिक अपने सांसद इसलिए चुनते हैं कि संसद में उनके हितों की रक्षा करेंगे ।देश की संसद में सभी राज्यों से सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदो ने गत संसद सत्र में इस विषय को उठाया था लेकिन उसके बाद भी इस प्रकार का उत्तर देना यह सिद्ध करता है कि इनको किसी के हितों से कोई मतलब नहीं है ।
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किसी भर्ती के पूर्व सरकार द्वारा संबंधित पद हेतु जो भी योग्यता निर्धारित की जाती है उसको पूर्ण करने वाले अभ्यर्थी ही भर्ती किये जाते हैं ।प्रदेश सरकार द्वारा समय समय पर शिक्षकों की भर्ती हेतु जो भी योग्यता निर्धारित की गई उसको पूरा करने पर ही शिक्षक भर्ती हुए हैं
जैसे हाईस्कूल बीटीसी,इण्टर बीटीसी,स्नात��� बीटीसी/बिशिष्ट बीटीसी ,स्नातक बीटीसी/बिशिष्ट बीटीसी /बी एड इत्यादि
25- 30 वर्ष पूर्व निर्धारित योग्यता पर नियुक्त शिक्षकों पर वर्तमान भर्ती हेतु निर्धारित योग्यता थोपने हेतु बनाया गया कोई भी कानून केवल काला कानून ही कहा जायेगा ।
23 अगस्त 2010 की एनसीटीई की गाइड लाइन में संशोधन देश भर के शिक्षकों के साथ छल कपट व धोखा है जिसे देश का शिक्षक सहन नहीं करेगा ।हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस अन्��ाय के विरुद्ध देश के शिक्षकों को सड़क पर उतरने हेतु मजबूर न किया जाये ।भारत सरकार इस काले कानून को वापस लेकर शिक्षकों के साथ न्याय करे ।
#काला_कानून_वापस_लो