बड़ी खबर!
राम मंदिर में पूरी तरह सुरक्षित हैं दान किए गए समान।
अयोध्या में जिन चीज़ों के चोरी होने की बात कही गई थी, वो मीटिंग के बाद प्रेस के लिए डिस्प्ले में रखी गईं।
इनमें सोने की रामचरितमानस, चांदी के कागभुशुंडी, चरणपादुका और हार पूरी तरह सुरक्षित है।
पत्रांक संख्या 74/44 के अंतर्गत प्राप्त जन सूचना प• संख्या NNBRL/R/2026/6003 जो सूचना आपके द्वारा प्राप्त हुई है वह अपूर्ण है कृपा करके पूर्ण सूचना देने की कृपा करें।@NigamAligarh
@amitasheriias
संपूर्ण हिंदू समाज भाजपा से सांस्कृतिक व धार्मिक मूल्यों की रक्षा की बड़ी अपेक्षा रखता है, जिससे आपका दायित्व और बढ़ जाता है।
निवेदन है कि इस योजना के जिम्मेदार लोगों को चिन्हित कर सचेत किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो
@BJP4India@BJP4UP@NitinNabin
लखनऊ में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जी की शोभायात्रा में श्री हनुमान जी के स्वरूप का नृत्य कराना घोर निंदनीय व मर्यादा के विपरीत है। सनातन संस्कृति में बजरंगबली आराध्य हैं, मनोरंजन की वस्तु नहीं।भाजपा नेतृत्व से आग्रह है कि इस पर कड़ा संज्ञान लें
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थ्रेड पोस्ट (2/3)
महाभारत युद्ध में हनुमान जी अर्जुन के रथ के शीर्ष पर आरूढ़ थे, तब धर्म की विजय हुई थी। इस गौरवशाली इतिहास को भूलकर स्वागत सत्कार में ऐसा गरिमाहीन प्रदर्शन करना अनुचित है।
We demands that in Ayodhya Ram Mandir case...
1. FIR should be filled
2. Investigation be expedited
3. Fast rack court to take-up the matter on day to Day basis and;
4. Guilty persons to suffer their punishment
- Alok Kumar, Int'l President VHP
अप्रतिम शौर्य की प्रतिमूर्ति, नारी शंक्ति, मातृभूमिं की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली एवं वीरता की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर शत शत नमन्
@DmPithoragarh@BROindia पंगवावे मे हुए लैंड स्लाइड मे भारी सख्या मे पर्यटक फसे हुए है निवेदन है की सडक का काम शीघ्र पूरा करें ताकि 500 से अधिक लोग अपने घर सकुशल पहुंच सके। 9554997777
बदल गया बंगाल!
कोलकाता के प्रसिद्ध राजा बाजार रोड पर पिछले वर्षों में बकरीद पर सड़क पर बड़ी संख्या में लोग नमाज पढ़ते थे।
आज बंगाल में सरकार बदलने के बाद राजा बाजार रोड पूरी तरह खाली है और आवागमन चालू है।
प्रेस वक्तव्य:
गौ हत्या असंवैधानिक व अक्षम्य अपराध; हिंदू समाज इसे बर्दास्त नहीं करेगा: डॉ सुरेंद्र जैन
नई दिल्ली। मई 23, 2026। विश्व हिंदू परिषद ने कोलकाता उच्च न्यायालय के उस निर्णय का स्वागत किया है जिसमें बकरीद के अवसर पर गौहत्या पर लगाए गए प्रतिबंधों को उचित ठहराते हुए कहा गया है कि गाय काटना मुस्लिम समाज का धार्मिक अधिकार नहीं है। विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने कहा है कि कोलकाता उच्च न्यायालय ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में दिए गए एक निर्णय का संदर्भ भी दिया है जिसमें गौहत्या पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकारों द्वारा बनाए गए अधिनियमों को उचित ठहराया था। अब यह स्पष्ट हो गया है कि भारत में गौहत्या करना कानूनी अपराध है और हिंदू समाज इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत के अधिकांश राज्यों में गौ हत्या निषेध का कानून पहले से है। शेष राज्य सरकारों को भी न्यायपालिका व हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपने-अपने राज्यों में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए। इन राज्यों को भी स्पष्ट कर देना चाहिए कि वे भारतीय संविधान के साथ हैं या गौहत्यारों के।
डॉ जैन ने कहा कि बंगाल व दिल्ली की सरकारों ने अपने ताजा आदेशों में बकरीद के अवसर पर होने वाली गौहत्या ही नहीं रोकी अपितु उस के लिए ऐसी व्यवस्था भी बनाई है जो पर्यावरण को खतरा पैदा ना कर सके और बर्बर रक्तपात के सार्वजनिक प्रदर्शन द्वारा शांतिप्रिय समाज को भी आहत न करे। विहिप इन दोनों सरकारों का अभिनंदन करती है और शेष राज्य सरकारों से आग्रह करती है कि वे भी न्यायपालिका, पर्यावरण व शांतिप्रिय समाज की भावनाओं का सम्मान करें तथा गोवंश हत्या रोकने तथा कथित कुर्बानी को व्यवस्थित करने के लिए शीघ्र ही आवश्यक आदेश जारी करें ।
गौहत्या के लिए भड़काने वाले मुस्लिम नेताओं व मुल्ला मौलवियों से उन्होंने पूछा कि भारत के अलावा कहीं और का मुसलमान गौहत्या के लिए जिद क्यों नहीं करता? क्या केवल हिंदू समाज को चिढ़ाने के लिए वे सर्व कल्याणकारी गौ माता की हत्या करवाते हैं? ऐसा कर वे न केवल हिंदू समाज की भावनाओं को आहत करते हैं अपितु संविधान विरोधी कुकृत्य भी करते हैं। सड़क पर नमाज के बाद अब गौ हत्या के लिए उकसा कर वे मुस्लिम समाज के मन में हिंदुओं और न्यायपालिका के प्रति घृणा निर्माण कर रहे हैं जो कि उन के हित में नहीं है। कानून व हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करके ही वे शांतिपूर्ण सह अस्तित्व में सहभागी बन सकते हैं।
गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने के एक फेक नैरेटिव फैलाने वाले मुल्ले मौलवी बताएं कि जब वे राष्ट्र गीत वंदेमातरम् का ही खुल्ले में विरोध करते हैं तो भला वे कथित राष्ट्रीय पशु का सम्मान कैसे करेंगे? वे सब इस माध्यम से गौ हत्या के सजा से बचने का सिर्फ एक आसान मार्ग ढूंढ रहे हैं। गौ हत्यारों को कठोर सजा ही सही समाधान है।
गोहत्या के महापाप को रोकना हिंदू का हमेशा से संकल्प रहा है। विहिप के गौरक्षा विभाग और बजरंग दल की गौरक्षा समितियां पूरे देश में निगरानी करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि सब न्यायपालिका के आदेश और संविधान का पालन करें।
जारी कर्ता:
विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता
विश्व हिंदू परिषद
मंदिर मुक्ति हेतु सर्वोच्च न्यायालय में पुनः शुरू होगी ऐतिहासिक सुनवाई
:आलोक कुमार (@AlokKumarLIVE), सीनियर एडवोकेट, (अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद् )
भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन काल में अंग्रेज अधिकारियों के द्वारा तमिलनाडु और बंगाल में हिन्दू मंदिरों का व्यापक सर्वेक्षण हुआ था। इस सर्वेक्षण से मालुम पड़ा कि लगभग सब हिन्दू मंदिरों में छोटा या बड़ा गुरुकुल और गौ-शाला थी। समाज अपने उत्सव जैसे नवरात्री और दीपावली इत्यादि मिलकर मंदिरों में मनाता था। परिवारों के शादी, मुंडन, शोकसभा जैसे सब कार्यक्रम भी मंदिरों में होते थे। समाज के झगड़े भी मंदिर में गर्भगृह की साक्षी में समाज के वरिष्ठ लोगों द्वारा निपटाएं जाते थे।
अंग्रेजों ने समझ लिया कि हिन्दू धर्म के प्राण मंदिरों में बसते हैं। अंग्रेज सरकारों ने मंदिरों का प्रबंधन सुशासन के नाम पर अपने हाथों में ले लिया। धीरे-धीरे अब मंदिर केवल व्यक्तिगत पूजा के स्थान बन रहे हैं। इससे हिन्दू धर्म कमजोर हो रहा है।
सरकार गुरुद्वारे, चर्च, मस्जिद, जैन-स्थानक और बौद्ध-विहार नहीं चलाती। भारत का शासन संविधान की मर्यादा में धर्मनिरपेक्ष है। फिर भी अनेक राज्यों में सरकारें हिन्दू मंदिरों को अपने मुट्ठी में क्यों दबाये हुए हैं। मंदिरों के चढ़ावे का एक बड़ा हिस्सा सरकारी खजाने में जाता है। मंदिरों में सरकार के ऑफिसर कार्यकारी अधिकारी के नाते लगा दिए जाते है और उनका वेतन और भत्ते मंदिर की आय में से लिए जाते है। मंदिरों और मठों का नियंत्रण मठाधिपति या धार्मिक संत इत्यादि के हाथों में न रहकर इन बाबुओं के हाथ में रहता है।
हिन्दू समाज ने निर्णय किया है कि वह अपने मंदिरों का नियंत्रण सरकार के हाथों से वापस लेगा। समाज ने यह भी निर्णय किया कि हिन्दू मंदिरों का पैसा हिन्दुओं के लिए ही खर्च होना चाहिए।
इस उद्देश्य से पूज्य स्वामी दयानन्द सरस्वती ने सन 2012 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिका डाल कर कहा कि सरकार हिन्दू मंदिरों का सञ्चालन वापिस हिन्दू समाज को सौंपें। यह याचिका मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र, तेलंगाना और पुडुचेरी के सन्दर्भ में लगायी गयी थी। इसमें सरकारों को नोटिस हुआ और उनका जवाब रिकॉर्ड पर आया। कई बार इस याचिका में बहस के लिए तारीख निश्चित हुई पर किसी न किसी कारण से टलती गयी।
अंततः अप्रैल 2025 को यह मामला न्यायालय के समक्ष रखा गया। प्रतिपक्षी वकीलों ने कहा कि इस याचिका में कई राज्यों के कानूनों को चुनौती दी गयी है। यह सब कानून एक जैसे नहीं हैं। मांग की गयी कि सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका को ख़ारिज करके याचिकाकर्ताओं को अपने-अपने राज्य में इन कानूनों को चुनौती देने की छूट दे दें। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करके 13 साल से लंबित यह याचिका ख़ारिज कर दी।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका को ख़ारिज करने के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका करने का आग्रह किया। इस प्रक्रिया में समय लगा। याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने सोमवार 18 मई 2026 के आदेश में यह स्वीकार किया कि इस याचिका को गुण-दोष के आधार पर सुना जाना आवश्यक है। कोर्ट ने अप्रैल 2025 के उस आदेश को वापस ले लिया जिसके द्वारा इस याचिका को ख़ारिज कर दिया गया था।
अब यह विषय जुलाई में सुनवाई के लिए नियत किया गया है। हिन्दू अपने मंदिरों का स्वयं सञ्चालन करें और मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो। हिन्दुओं का पैसा हिन्दुओं के काम में आये। हिन्दू मंदिर स्वाधीन होने पर हिन्दू का संगठन, उसकी तेजस्विता और संस्कार युक्त जीवन पुनः अपने समाज को प्राप्त हो। मुकदमे में तथ्य और तर्क हमारे साथ हैं। श्री भगवान के आशीर्वाद से हम न्यायालय में सफल होंगे।
प्रेस वक्तव्य:
सड़कों पर नमाज - नमाज़ नहीं फ़साद है; यह शक्ति प्रदर्शन बंद हो: विहिप
नई दिल्ली। मई 20, 2026। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने आज कहा है कि सड़कों पर नमाज, नमाज नहीं फसाद है। यह केवल संविधान विरोधी ही नहीं है अपितु, मानवता और इस्लाम विरोधी भी है। इसके दुष्परिणामों को देखते हुए ही सात उच्च न्यायालयों ने सड़कों पर नमाज रोकने के आदेश दिए थे। माननीय सर्वोच्च न्यायालय भी ऐसे संकेत दे चुकी है। इसका अर्थ है सड़क पर नमाज पढ़ने की जिद न्यायपालिका की अवमानना भी है।
उन्होंने कहा कि यह केवल 5 मिनट का मामला नहीं है। दिल्ली के सभी महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों पर घंटे ट्रेन बाधित हो जाती थी, जब पटरियों पर बैठकर नमाज पढ़ी जाती थी। गुरुग्राम से गुजरने वाले जयपुर हाईवे पर 8-8 घंटे ट्रैफिक जाम होता था। स्कूल बसें जाम में फंस जाती थी। मासूम बच्चे बिलखते रहते थे। एंबुलेंस के फंसने के कारण मरीजों की जान पर भी बन जाती थी लेकिन, किसी नमाज़ी का दिल नहीं पिघलता था।
डॉ जैन ने कहा कि कई हदीसों में भी सड़क पर नमाज पढ़ने के लिए मना किया है। इसलिए कई मुस्लिम देशों में भी इस पर प्रतिबंध है। किसी भी सभ्य समाज में इसको अनुमति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने पूछा कि भारत में वे यह जिद क्यों करना चाहते हैं? वे कहते हैं कि हमें मस्जिदों में जगह नहीं मिलती तो हम सड़क पर उतरते हैं। जब गुरुग्राम में 38 जगह सड़के रोक कर नमाज पढ़ी जाती थी तब, समाज को गुस्सा आया और इसे रोकने के लिए आंदोलन हुए। उस समय पत्रकार बंधुओं ने दिखाया था कि गुरुग्राम से 40 किलोमीटर दूर से ट्रकों में चटाइयां लाई जा रही हैं, लोग लाए जा रहे हैं। रास्ते में पड़ने वाली बीसियों मस्जिदें खाली रहती थीं। इससे स्पष्ट है कि यह तर्क केवल धोखा देने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है। वास्तव में तो यह एक शक्ति प्रदर्शन है। वे प्रशासन और हिंदू समाज को अपना संख्या बल दिखाकर आतंकित करना चाहते हैं। यह आतंकवाद का ही एक प्रकार है।
विश्व हिंदू परिषद सभी राज्य सरकारों से अपील करती है कि वे सख्ती से सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगा न्यायपालिका और संविधान का पालन करने के लिए सबको प्रेरित करें। किसी भी तरह से सड़क पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मुल्ला - मौलवियों को भी चाहिए कि वे मुस्लिम समाज को कानून का पालन करने की प्रेरणा दें, ना कि उन्हें आतंकवाद के एक और मार्ग पर धकेलें।
जारीकर्ता:
विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता
विश्व हिंदू परिषद
@AligarhNagarN@PremPrakash1979
अवगत कराना है कि ग्रीन फ्यूचर कलेक्टिव ट्रस्ट नामक संस्था के ट्रस्टीयों के मध्य जिला
जज न्यायालय, शाहजहांपुर में वाद विचाराधीन है। उक्त प्रकरण न्यायालय में लंबित होने के कारण संस्था की ओर से किसी भी प्रकार का कोई भी अनुबंध ना किया जाए।
@AligarhNagarN@PremPrakash1979
अवगत कराना है कि ग्रीन फ्यूचर कलेक्टिव ट्रस्ट नामक संस्था के ट्रस्टीयों के मध्य जिला
जज न्यायालय, शाहजहांपुर में वाद विचाराधीन है। उक्त प्रकरण न्यायालय में लंबित होने के कारण संस्था की ओर से किसी भी प्रकार का कोई भी अनुबंध ना किया जाए।