एग्जिट पोल के अनुसार केरल में UDF यानी Congress की वापसी हो रही है.
LDF यानी वामपंथी पार्टियां बुरी तरह चुनाव हार रही है.
केरल में LDF ने चुनाव प्रचार के समय BJP, RSS और MODI जी पर एक शब्द नही बोला.
पूरे चुनाव में केरल के मुख्यमंत्री पी.विजयन ने भी BJP पर नरम रुख अख्तियार किया हुआ था.
केरल में साफ संदेश गया LDF और BJP मिले हुए हैं. LDF को हराने के लिए और बीजेपी को रोकने के लिए जनता ने Congress को वोट दिया.
राघव चढ़ा हमने आपको फॉलो किया क्योंकि आप राज्यसभा में वे बाकी से गरीबों का और आम जनता का आवाज उठाते थे अब आप बीजेपी में चले गए हैं अब आपको राज्यसभा में विभाग के साथ बोलते जाएगा और मुझे मालूम नहीं था क्या आप बीजेपी में शामिल हो जाएंगे इसलिए मैं आपको अनफॉलो करता हूं
मैं एक आम यात्री हूँ और आज सुबह 19 मार्च 2026 को ठीक 8:00 AM बजे मैंने ट्रेन संख्या 22643 (ERS PNBE SF EXP) में 18 मई 2026 की यात्रा के लिए टिकट बुक करने की कोशिश की।
जैसे ही बुकिंग विंडो खुली, मैंने तुरंत सारी जानकारी भरी, लेकिन 8:01 AM तक सिस्टम ने 'REGRET' दिखाना
टिकट या कम से कम वेटिंग लिस्ट मिलने का मौका क्यों नहीं मिल रहा है?
इस तरह की स्थिति से IRCTC की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। कृपया इस मामले की तुरंत जांच करें और आम यात्रियों के लिए टिकट मिलना आसान बनाएं।
जब सही सर्विस नहीं दे सकते हैं तो जनता को परेशान क्यों करते हैं?
एक जॉइन खाता खुलवाने के लिए आपके बैंक का कितनी बार चक्कर लगाएगा?
आखिर खाता न खुलने की वजह क्या है ?
मुझे अगर पहले मालूम होता की सबसे घटिया सर्विस आपका है तो कभी भी खाता खुलवाने के लिए नहीं जाता
मुझे बहुत दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि 5 महीना 9 दिन हो चुका है मेरा मदरसा खैरूस सलाम के नाम से एक ज्वाइन खाता नहीं खोल पा रहे है जब की हमने सारा कागज जमा भी कर दिया है।
मैं कभी भी किसी को यूको बैंक में खाता खोलने की राय नहीं दूंगा
5 महीना से बैंक वाले परेशान कर रहे है
Dear @UCOBankOfficial
मुझे बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हमे आपके बैंक में जॉइन खाता खोलने का मौका मिला!
लेकिन अफसोस के साथ मुझे यह भी कहना पड़ रहा है कि फार्म जमा करने से 5 महीना 1 दिन हो चुका है लेकिन अभी तक खाता नहीं खुला है कभी यह कागज लाओ वह कागज लाओ खुल जाएगा ऐसा कहते
कहते आज 5 महीना हो चुका है
सारा कागज दे भी दिया है
आखिर आपके बैंक में खाता खुलवाने के लिए कितनी बार चक्कर लगाना पड़ेगा?
आखिर यूको बैंक के पर भरोसा कैसे करें?
मुझे उम्मीद है कि आप इस पर कुछ संज्ञान लेंगे
बलुआचक पुरैनी भागलपुर बिहार
IFSC कोड UCBA0001217
1 - Overconfidence
2 - असदुद्दीन ओवैसी से गठबन्धन ना होना
3- मुकेश सहनी से गठबन्धन और उप मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा जिसका कोई जनाधार भी नहीं
4- मुस्लिम नेताओं को एक्सट्रीमिस्ट बोलना
5- आबादी के हिसाब से मुसलमानो टिकट नहीं देना
6- तेजस्वी के बेवकूफ़ चाणक्य
आपलोगो के अनुसार राजद पार्टी के करारी हार के मुख्य कारण क्या क्या है? कृपया 4-5 मुख्य कारण बताये जो सच मे पार्टी से भूल हुई।
आपके सुझाव ही बदलाव की नीव है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी के पति प्रकला प्रभाकर ने खोल दी ज्ञानेश कुमार की पोल।
प्रकला प्रभाकर के अनुसार बिहार में कुल वोट पड़े 67.13% यानी 5,00,29,880
वोट गिने गए 5,02,97,553
1,7,7673 मतों का अंतर।
ये extra votes कहां से आए ?
आदरणीय लोकतंत्र के माई बाप चुनाव आयोग जी @ECISVEEP, उन सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले जो पत्रकारों ने चुनाव के पहले और SIR के बाद उठाए थे। चलिए यही कह दीजिए नीचे लगाए गए आरोप झूठे हैं।
साथी नितिन की टीम ने द रिपोर्टर्स कलेक्टिव में SIR के बाद जो आपत्तियाँ उठाई थी। उनमें से प्रमुख आपत्तियाँ सुनिए –
-243 विधानसभाओं में 14.35 लाख संदिग्ध डुप्लिकेट वोटर मिले,
– 3.4 लाख में नाम, रिश्तेदार और उम्र पूरी तरह मेल खा रही थी।
– 39 सीटों पर 3.76 लाख संदिग्ध मतदाता मिले , जिनमें 1.88 लाख नाम दो बार दर्ज थे।
– वाल्मीकिनगर में 5,000 यूपी के डुप्लिकेट वोटर पाये गए जबकि यह पूर्वी चंपारण की मजबूत सीट मानी जा रही थी।
– चंपारण के 3 सीटों (पिपरा, मोतिहारी, बगहा) पर 80,000 गलत पते मिले।
आपने दावा-आपत्ति अवधि में सुधार का वादा किया, लेकिन असर नगण्य रहा। मृत/अनुपस्थित मतदाता मृतकों और गायब मतदाताओं के नाम नहीं हटाए गए। SIR ने इनकी जाँच नहीं की। लाखों मृत नाम बने रहे।
मुस्लिम -बहुल सीटों से नाम हटाने के प्रयास किया गया उन्हें BJP द्वारा ‘गैर-नागरिक’ के तौर पर चिह्नित किया गया ढाका सीट पर 78,384 नाम ‘गैर-नागरिक’ बताकर हटाने का प्रयास हुआ । विपक्ष यह बात बार बार कहता था कि 7 करोड़+ मतदाताओं का 30 दिनों में सत्यापन असंभव है लेकिन आप नहीं माने।
@grok बस यही घमंड का फल है।
अभी तो सीमांचल ही है पूरे भारत में mim का पर्चा लहरेगा
कांग्रेस का यही घमंड उनको बर्बाद कर रही है
अगर वक्त से पहले ना समझे तो उनके लिए और भी परेशानि बढ़ा सकती है
बिहार विधानसभा चुनाव में बहन मायावती जी ने 192 और अरविंद केजरीवाल जी ने 99 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे.
अरविंद केजरीवाल जी के सभी उम्मीदवारों की जमानत ज़ब्त हुई और आम आदमी पार्टी को लगभग 1.5 लाख वोट मिले.
बहन मायावती जी के 192 उम्मीदवार में से 1 को जीत हासिल हुई,
बसपा को लगभग 8 लाख वोट मिले जिसमें से जीते हुए उम्मीदवार को लगभगब 70 हजार वोट मिले. 8 लाख में से 70 हजार घटाओ तो बचते है 7 लाख 30 हज़ार.
क्या किसी ने बहन मायावती जी और अरविंद केजरीवाल जी पर वोट काटने का आरोप लगाया? क्या बसपा और आप को वोट कटुवा कहा? नहीं ना!
तो इन हरामखोर जुम्मन्स को मजलिस पर ही क्यों इल्ज़ाम लगाने होते है!
जुम्मनों, तुम्हारे दो टके के लॉजिक के हिसाब से मायावती जी और अरविंद जी वोट कटुवा नहीं हुए...
लइयो मेरा जूता 👞 कहाँ हैं