#ખણખોદ
“ગાંધીનગર પોલીસે રાષ્ટ્રીય નેતાની ગાડી પાસ હોવા છતા કમલમના ગેટ સુધી ન જવા દિધી”
આજે કમલમ પર રાષ્ટ્રીય અધ્યક્ષ આવી રહ્યાં હોવાથી મોટી સંખ્યામાં કાર્યકર્તાઓ ઉમટ્યા હતા એવામાં વ્યવસ્થાના ભાગરૂપે કમલમના ગેટ સુધી વાહનો ન જાય એટલા માટે સિલેક્ટેડ નેતાઓની જ કાર કમલમના ગેટ સુધી જવા દેવાનો નિર્ણય કરવામાં આવ્યો હતો એવામાં રાષ્ટ્રીય અધ્યક્ષ કમલમ પહોંચે એ પહેલા રાષ્ટ્રીય નેતા કમલમ પહોંચ્યા પરંતુ પોલીસે તેમની કાર મુખ્ય ગેટથી દૂર અટકાવી દિધી… કેટલાક લોકોએ પોલીસને કહ્યું છતા કાર આવવા ન દેવાઈ… રાષ્ટ્રીય નેતા એટલા સરળ હતા કે કારમાંથી ઉતરી ચાલતા ચાલતા કમલમ સુધી પહોંચી ગયા.
એ રાષ્ટ્રીય નેતા રાજ્યમાં એક ચક્કર મારે તો પણ સમગ્ર બીજેપીમાં ચર્ચાનો વિષય બની જતો હોય છે 😊
@Amockx2022 Calling allegations baseless is easy. Proving them wrong in a debate is leadership. Parliament isn’t a monologue stage it’s for accountability. Confidence debates. Insecurity dismisses. Walk the talk.
The Epstein Files: A Strictly Factual Overview
Jeffrey Epstein was an American financier who faced federal charges related to sex trafficking of minors. In July 2019, he was arrested in New York and charged by the United States Department of Justice with sex trafficking and conspiracy involving underage girls. Prosecutors alleged that the abuse occurred between 2002 and 2005 in New York and Florida.
On August 10, 2019, Epstein was found unresponsive in his cell at the Metropolitan Correctional Center in Manhattan. The New York City medical examiner ruled his death a suicide by hanging. The case was investigated by the Federal Bureau of Investigation and the Department of Justice’s Office of the Inspector General, which later released findings detailing procedural failures and negligence at the facility.
Prior to the 2019 federal charges, Epstein had faced state-level prosecution in Florida. In 2008, under a non-prosecution agreement with federal prosecutors in the Southern District of Florida, he pleaded guilty to state charges of solicitation of prostitution and procurement of minors for prostitution. He served approximately 13 months in custody, during which he was allowed work-release privileges. The agreement later drew significant public and legal scrutiny.
Epstein maintained associations with numerous political leaders, business figures, academics, and celebrities over several decades. Following his death, court documents connected to civil lawsuits and criminal proceedings were unsealed in phases. These documents included deposition transcripts, flight logs, contact books, and references to individuals within Epstein’s social and professional network. Being named in these documents does not in itself constitute criminal wrongdoing, and many individuals referenced have not been charged with crimes related to Epstein.
Ghislaine Maxwell, a longtime associate of Epstein, was arrested in July 2020. In December 2021, she was convicted in federal court in New York of sex trafficking and conspiracy charges related to recruiting and grooming underage girls for Epstein. In 2022, she was sentenced to 20 years in federal prison.
Epstein owned properties in New York, Florida, New Mexico, Paris, and the U.S. Virgin Islands, including a private island in the United States Virgin Islands. Civil lawsuits filed by victims have led to financial settlements with Epstein’s estate and, in some cases, other parties.
Multiple congressional inquiries, civil proceedings, and media investigations have examined the handling of Epstein’s prior plea agreement, jail supervision procedures, and the broader scope of individuals connected to him. As of now, Maxwell remains the only former associate convicted in connection with the federal sex trafficking case linked directly to Epstein’s criminal conduct.
The Epstein case continues to be referenced in legal, political, and media discussions due to the high-profile nature of his associations, the prior plea agreement controversy, and the circumstances surrounding his death.
"सरकारी नौकरियों से सिर्फ शादियां होती है सपने नहीं पूरे होते हैं"।
एक लड़का कावासाकी बाइक लेकर ट्रॅफिक में होता है।
पुलिस वाले भाई साहब – मस्त बाइक है।👌
कभी सेल्फी लेंगे इस बाइक के साथ
बाइक वाला लड़का – सेल्फी क्या चला भी सकते हो आप का ही बाइक है।
पुलिस वाले भाई – मेरे नाम से ट्रांसफर कर दो
बाइक वाला लड़का – कर देंगे आप का ही ट्रांसफर करने की क्या जरूरत है।😂
तब तक बगल से कोई बोलता है बाइक 25 लाख की है।
पुलिस वाले भाई – 😱😱 25 लाख की है
बाइक वाला लड़का – हां 25 लाख की है
पुलिस वाले भाई – अपनी पूरी प्रॉपर्टी बेच दूंगा फिर भी नहीं ले पाऊंगा।....see more
एक बार बदायूँ में मुख्यमंत्री की सभा होनी थी, आचार संहिता लागू थी और IAS सूर्य प्रताप अपना कर्तव्य निभाते हुए उनका हेलीकॉप्टर लैंड नही होने दिया।
सरकार बनते ही IAS सूर्य प्रताप के सस्पेंशन के कयास लगने लगे, पर उन्होंने सूर्य प्रताप क़ो मुजफ़्फरनगर का कलेक्टर बना दिया।
CM का नाम था - मुलायम सिंह यादव, ये था नेताजी का कद।
आज उनके जन्म जयंती पर उन्हें नमन करने के साथ साथ मौजूदा सरकारों को आईना दिखाने की भी जरूरत है।
आज जहां एक ट्वीट एक बयान तक कार्यकुशलता और दक्षता पर हावी हो जाता है। आप सरकार के आलोचक हैं तो आपके साथ किसी अपराधी की तरह व्यवहार होगा।
ये है मौजूदा लोकतंत्र की कहानी।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ धीरे धीरे खेला हो गया, पर किसी को खबर तक नहीं 🙂↔️
NDA में जेडीयू और बीजेपी ने लगभग बराबर सीट जीती पर
बीजेपी के 14 मंत्री बनाये गए वही जेडीयू में 8 मंत्री बनाये गए।
विभाग आवंटन में नीतीश कुमार से गृहमंत्री पद छीन लिया गया, अब गृहमंत्रालय बीजेपी के खाते में सम्राट चौधरी को दिया गया।
गृहविभाग और राजस्व विभाग जैसे मलाई दार विभाग अब बीजेपी के पास है।
नीतीश कुमार अब सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री रह गए हैं।
एक और लफड़ा लोड हो गया है।
दल्लनटॉप छोड़ने के बाद न्यूज पिंच के नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाले अहंकारी अभिनव पांडे ने..
महिला पत्रकारों पर अमर्यादित टिप्पणी की। माना कि ये महिलाएं गोदी पत्रकार हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि...
आप चित्रा त्रिपाठी को जाहिल, गंवार और अनपढ़ जैसे शब्द बोलेंगे..!!
आगे कहते हैं कि 4 लाईन ख़ुद से बोल नहीं पाएगी अगर हम जैसे लिख कर ना दे तो।
कुंठित संघी ब्रिगेड अक्सर यह राग अलापती है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री रहते हुए ख़ुद को ही भारत रत्न दे दिया। अब ज़रा इसकी पूरी सच्चाई जानिये।
बात उन दिनों की है जब दुनिया शीत युद्ध के घेरे में थी और तीसरे विश्वयुद्ध खटका हमेशा बना रहता था। उस दौर में विश्व नेता पंडित नेहरू 13 जुलाई, 1955 को तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) और यूरोपीय देशों के सफल दौरे से भारत लौटे. वैश्विक मामलों में भारत की बड़ी भूमिका को स्थापित करने की प्रधानमंत्री की कोशिशों को उस यात्रा के दौरान व्यापक समर्थन भी मिला. उसका नतीजा यह हुआ कि वह यात्रा काफी चर्चित रही.
इसी कारण जब पंडित नेहरू स्वदेश लौटे तो राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद प्रोटोकॉल तोड़ते हुए उनको रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे. नेहरू के स्वागत के लिए जबर्दस्त भीड़ भी दिल्ली एयरपोर्ट के बाहर जमा हो गई थी. नतीजतन नेहरू ने उपस्थित जनसमूह के समक्ष एक छोटा सा भाषण भी दिया.
उसके बाद 15 जुलाई, 1955 को डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति भवन में एक विशेष भोज का आयोजन किया. नेहरूजी को भोज में आमंत्रित किया गया। भोज का कार्यक्रम गरिमा और उत्साह के साथ चल रहा था तभी अचानक डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि वे पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारत रत्न से सम्मानित कर रहे हैं।
नेहरूजी के लिए यह बेहद चौंकाने वाली बात थी। क्योंकि उनकी सरकार ने इस तरह की कोई सिफ़ारिश राष्ट्रपति को नहीं भेजी थी। भारत रत्न देने के लिए जो भी औपचारिक प्रक्रिया है उसमें नेहरु जी का नाम कहीं नहीं था।
दो दिन पहले प्रोटोकॉल तोड़कर पंडित नेहरू को एयरपोर्ट पर रिसीव करने वाले राजेंद्र प्रसाद ने एक बार फिर प्रोटोकॉल तोड़कर उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने का फ़ैसला किया था।
16 जुलाई, 1955 की द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में इस घटनाक्रम का ज़िक्र है। उसमें बताया गया कि किस तरह इस फैसले को आयोजन से पहले गुप्त रखा गया. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राष्ट्रपति ने खुद ही स्वीकार किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री या कैबिनेट की सलाह या सुझाव के बिना खुद ही पंडित नेहरू को यह सम्मान देने की घोषणा की.
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जानते थे कि पंडित नेहरू आधुनिक भारत के निर्माता हैं, दुनिया में महात्मा गांधी के बाद शांति के सबसे बड़े मसीहा हैं और देश की सेवा के लिए उन्होंने 10 साल जेल में बिताए हैं। जिस व्यक्ति को स्वयं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 'हिंद का जवाहर" अर्थात 'भारत रत्न" कहा हो, उसे भारत रत्न देना महज औपचारिकता थी। अंग्रेजों के संघी मुखबिर इस सच्चाई को नहीं पचा पाएंगे।
अमित शाह उन चंद लोगों में थे जिन्हें इस फैसले की जानकारी पहले से ही थी और उन्होंने ही सार्वजनिक सफाई भी दी. गुपचुप की गई नोटबंदी ने लगभग सभी लोगों को हैरान कर दिया था. फौरन बाद हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में यह पार्टी के लिए वरदान लेकिन अर्थतंत्र के लिए शाप साबित हुआ. लेकिन इस अनुभव से जो नतीजा आता है और जिसे मोदी और शाह ने अपने कामकाज का तरीका बनाया है, वह स्पष्ट है : अगर मोदी और शाह को राजनीतिक लाभ की कीमत पर गणतंत्र का बेड़ा गर्क करना पड़े तो भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा.
कुछ ऐसा ही हुआ था जब सरकार ने जम्मू कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जे को खत्म किया था. कानूनी पेचों के नाटक को बारीकी से निपटाया गया और शाह ने संसद में जोरदार तरीके से फैसले का बचाव किया. नोटबंदी की तरह ही इस कदम में चालबाजी थी और नोटबंदी की तरह ही यह फैसला राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फलक पर लंबे दौर की शर्मिंदगी का कारण बन रहा है.
राष्ट्रीय सुरक्षा ऐसे दो शब्द हैं जिसके नाम पर मोदी और शाह ने यह कारनामा किया है. इस बात की बहुत कम संभावना है कि जो भारी-भरकम सैन्य और अर्धसैनिक बंदोबस्त किया गया है वह ढीला होगा. जिन मामलों में भारत की आतंक विरोधी मुहिम सफल साबित हुई है, उनमें स्थानीय पुलिस की बड़ी भागीदारी थी. लेकिन जम्मू-कश्मीर में अब लंबे समय तक पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकेगा क्योंकि सरकार ने विशेष दर्जा खत्म करने से पहले अपमानित करते हुए उसके हथियार डलवा लिए थे.
मोदी और शाह के जमाने में पुलिस और सुरक्षाबलों में जिस तरह का नेतृत्व उभर कर आया, वह ऐसा है जिसमें कोई भी वरिष्ठ अधिकारी अपने जवानों के लिए खड़ा नहीं होता और ऐसी उम्मीद करना कि ऐसे अफसरों के प्रति जवान वफादार बने रहेंगे, भलमनसाहत के सिवा कुछ नहीं है.
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नेहरू की कथा कहता हूं
जब जब नेहरू का जिक्र आता है तो मुझे यूनान के एक पुराने देवता प्रोमीथियस, जिसे हिंदी में प्रमथ्यु भी कहते हैं, की कथा याद आती है. प्रोमीथियस स्वर्ग से धरती को देखता था. नीचे देखता तो इंसान बड़ी बदहाली में दिखाई देता. कभी उसके बच्चों को जंगली जानवर खा जाते, तो कभी वे जाड़े से मर जाते. देवताओं की तरह दो पांवों पर चलने वाला यह प्राणि सारे चौपायों से गया गुजरा नजर आता.
तब प्रोमीथियस को एक युक्ति सूझी. उसने देखा की स्वर्ग में आग है. इस आग ने देवताओं को बहुत से सुख, शक्ति और सुरक्षा दी है. अगर यह आग किसी तरह धरती पर इंसान के पास पहुंचा दी जाए, तो इंसान अपनी बहुत सी पीड़ाओं से मुक्त हो जाएगा.
आग पर स्वर्ग और देवताओं का कॉपीराइट था. प्रोमीथियस क्या करता. उसने स्वर्ग से आग चुरा ली. चुपके से आग धरती पर इंसानों को दे आया. आग मिलते ही इंसान की रातें रोशन हो गईं, उसका भोजन पकने लगा, जंगली जानवर उससे डरने लगे. धरती पर सुख की ऊष्मा पसरने लगी. सुख आया तो देवताओं की चाकरी बंद होने लगी. मनुष्य अब उन्हें कम अर्घ्य चढ़ाने लगा.
देवताओं ने जांच की तो पता चला कि कांड हो चुका है. देवताओं की बपौती आग, धरती पर पहुंच चुकी है. आदमी आत्मनिर्भर हो रहा है. यह पता लगते भी देर न लगी कि आग प्रमथ्यु ने धरती तक पहुंचाई है. प्रमथ्यु को बंदी बनाकर देवताओं के राजा के सामने पेश किया गया. हर कोई उसे कड़ी सजा देता चाहता था. ज्यादातर तो मृत्युदंड ही चाहते थे. लेकिन मृत्युदंड संभव नहीं था, देवता अमर होते हैं, वे भला कैसे मरें.
तब यूनान के इंद्र ने एक ज्यादा खतरनाक सजा सोची. प्रमथ्यु को स्वर्ग से निकालकर जमीन पर लाया गया. वहां इंसान की बस्ती के पास कम ऊंची पहाड़ी पर उसे सलीब पर टांग दिया गया. ठीक वैसे ही जिस तरह ईसा मसीह की सलीब पर टंगी तस्वीर हम देखते हैं. उसके शरीर में ठुकी कीलों से रक्त की धारा बह निकली. प्रोमीथियस असहनीय वेदना में टंगा हुआ था. फिर उसके कंधे पर एक गिद्ध बैठाया गया. यह गिद्ध दिनभर जीवित प्रमथ्यु का मांस नोचकर खाता. रात में जब गिद्ध सोता तो प्रमथ्यु का मांस फिर से भर जाता क्योंकि वह अमर देवता था. सुबह से गिद्ध फिर वही क्रम शुरू कर देता.
प्रमथ्यु की चीखें इंसानों की बस्ती तक पहुंचती रहतीं. सुबह की पहली किरण के साथ बस्ती वाले उस पहाड़ के नीचे पहुंच जाते. वे दिनभर प्रमथ्यु की चीखों को तमाशे की तरह देखते और शाम को फिर अपने घर आ जाते.
जिन मनुष्यों के लिए सलीब पर टंगा प्रमथ्यु अपना मांस नुचवा रहा था और असहनीय पीड़ा झेल रहा था, वे उसकी लाई आग से आगे बढ़ रहे थे और उसकी बेबसी का उत्सव मना रहे थे.
कथा यहीं समाप्त होती है. लेकिन कथा में बताई बात कभी खत्म नहीं होती. वह हर महापुरुष पर लागू होती है, जिसे गोली से नहीं मारा जा सका. लिंकन और गांधी सौभाग्यशाली थे कि उन्हें गोली से मार दिया गया. नेहरू अभागे थे, जो देश की मरते दम तक सेवा करते रहे. जब तक वे सेवा कर रहे थे, जब तक वे स्वर्ग की आग भारत तक ला रहे थे, वे बहुत लाड़ले थे. उनके जाने के बाद हमने उनके पूरे किरदार को सलीब पर टांग दिया और गिद्ध की तरह उसे नोच रहे हैं.
पहाड़ी के नीचे खड़े होकर उनकी पीड़ा का तमाशा देखने का सिलसिला अब इतना लंबा हो गया है कि तमाशाइयों की नई पीढ़ी यह भूल ही गई है कि इस शख्स को किस बात की सजा दी जा रही है. आज नेहरू फिर याद दिलाता हूं कि नेहरू का जुर्म यही था कि जब अंग्रेजी राज में वह सारे सुख भोग सकता था, तब वह बागी हो गया. जब नौजवान ही था तब उसने जलिंया वाला बाग हत्याकांड की रिपोर्ट विस्तार से तैयार की. वह उन चंद लोगों में था जो लोकमान्य तिलक की अंतिम यात्रा में गांधी के साथ चल रहा था. वह उन लोगों में था जिसके प्रभाव में आकर उसके पिता ने अपना घर-मकान सब कांग्रेस को दे दिया था. वह उन लोगों में था जो पहली बार अपने पिता के साथ जेल गया था. वह उन लोगों में था जो सरदार भगत सिंह से मिलने जेल गया था. और भगत सिंह की रिहाई के लिए अंग्रेजों से लड़ रहा था. कांग्रेस के अंदर वह सुभाष चंद्र बोस का सच्चा दोस्त था. अपनी पत्नी कमला की मौत के बाद उनकी चिता की एक चुटकी राख वह जीवन भर अपने साथ रखता रहा. महात्मा गांधी के अंतिम उपवास में चुपचाप खुद भी उपवास करने वाला वह विरला प्रधानमंत्री था. जब वह संसद में ट्रिस्ट विद डेस्टिनी का भाषण दे रहा था, तब उसके दिमाग में लाहौर के वे हिंदू मुहल्ले चल रहे थे, जहां का पानी काट दिया गया था.
वह इतना बुरा था कि जब दुनिया बमों के ढेर पर बैठी थी, तब भी शांति की बात करता था. उसकी शांति का ऐसा जलवा था कि कोरिया के गृहयुद्ध को अंतत: उसी ने एक समझौते पर पहुंचाया था. वह पूरी दुनिया में सम्मानित था और रहेगा.
आज आपका जन्मदिन है। मेरे पिता आपको चाचा नेहरू कहते थे, नाना इस बात का गर्व करते थे कि उन्होंने आपको देखा है। माँ आज भी पंडित जी कहती हैं।
मैंने आपको किताबों से जाना। यूनिवर्सिटी की डिबेट में इनाम मिली थी डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया और पहली बार व्यथित तरीक़े से अपने देश का इतिहास पढ़ा। फिर आत्मकथा पढ़ी आपकी उसी उम्र में और बाक़ी किताबें भी धीरे-धीरे।
आभारी हूँ आपका। आपने गाँव-गाँव स्कूल पहुँचाये तो पूर्वांचल के दूरस्थ गाँव में बेहद सामान्य परिवार में पैदा हुए पिता भौतिक विज्ञान में डॉक्टरेट तक पहुँच सके, आपने इंजीनियरिंग कॉलेज बनवाने पर ज़ोर दिया तो चाचा इंजीनियर बन सके। आपने वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दिया तो हम मनुष्य बन सके।
1940-50 के दशक में आज़ाद हुए मुल्कों में तानाशाहियों के क़िस्से पढ़ता हूँ तो सर झुकता है आपके सामने कि हमारे देश में आपने लोकतंत्र स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
याद आते हैं पाकिस्तान के राष्ट्र कवि हफ़ीज़ जालंधरी के वाक्य- पाकिस्तान और भारत के बीच सबसे बड़ा फ़र्क़ पंडित नेहरू हैं।
आपको मिटाने का ख़्वाब देखते लोग मिट जाएँगे लेकिन काल के कपाल पर आपका नाम सदा-सर्वदा अंकित रहेगा।
प्रणाम 🙏
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने दूरदर्शी और निडर नेतृत्व से स्वतंत्र भारत में संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव रखी और देश को एक नई दिशा प्रदान की।
उनके आदर्श और मूल्य आज भी हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। 'हिंद के जवाहर' को जयंती पर सादर नमन।
Farmer leader Ankush Chaudhary dragged Irrigation Department JE Sachin Pal by the collar and made him roll in mud, because the irrigation dept had dumped the slidge from the canal on the pathway and had left
Bravo sir 👏 👏 👏