रोहिणी घावरी जी अपनी पढाई पूरी करके लौटी हैं। ये बता रही हैं कि ऐसे नेताओं (चंद्रशेखर रावण के बारे में) का चरित्र क्या है, ये यदि किसी के साथ भी होते हैं, तो वो उस व्यक्ति को सपोर्ट नहीं कर रहे होते; ये अपनी स्वयं की राजनीति कर रहे होते हैं।
ये जिस समाज से आती हैं, इनका समाज वास्तव में बहुत सताया हुआ समाज है। इनको सताने वाले लोग वास्तव में चन्द्रशेखर और दूसरे समाज से लोग आते हैं। इन्होंने स्वयं ही बोला कि इन समाजों में आपस में इतना डिस्क्रिमिनेशन है, तो इनसे जो तथाकथित रूप से नीचे की जातियाँ हैं, तो उनमे कितना भयावह रूप में भेद्भाव होता होगा।
और यही कारण है कि कोटा within कोटा की बातों पर ये बिफर जाते हैं और आंदोलन करने के लिए निकल जाते हैं। अब बाल्मिकि समुदाय को, मुसहर समुदाय को, और मैं कहूँगा कि हर राज्य के हर वो समुदाय के लोग जो सबसे नीचे आते हैं, उनके नेता कहाँ हैं?
रोहिणी जी बोल रही हैं कि, “मैं अभी आई हूँ, मुझे 6 महीने का समय दीजिये।” तो मुझे लग रहा है कि रोहिणी जी अपने समाज के लिए, यदि दलितों में भी SC1 & ST2 & so on इस तरीके से वर्गीकरण कर सके (जिन्हें एक्चुअल में कुछ नहीं मिला है), तो हो सकता है ये उस समाज की नेत्री के रूप में स्थापित हो जाए।
और मैं ऐसे हर नेता या नेत्री के समर्थन हमेशा ही खड़ा रहूँगा, जो वास्तव में अपने पिछड़े समाज की बातों को आगे लेकर चलने को तैयार है। तो रोहिणी जी यदि राजनीति में आ रही हैं, तो उनका बहुत-बहुत स्वागत हैं, और मैं कहता हूँ कि आना चाहिए।
We need more girls, women like Rohini, या उनके समाज के नए लड़के (25-30 वर्ष के), आप निकलिए, अपने लिए लड़ना शुरू कीजिये। ये चुनाव नहीं, तो अगले चुनाव में आपका इम्पैक्ट दिखेगा। आप लगातार काम करो। आपके समाज को आपकी अत्यधिक आवश्यकता है, और किसी पार्टी पर rely न करो। आप अपने समाज के लिए अपनी पार्टी बनाओ, अपने genuine concerns उठाओ।
आरक्षण हो, ठीक है; और SC/ST act में भी देखो कि कहाँ पर क्या चल रहा है। और अपने समाज को आप इस तरह समझाओ कि, “देखो, रहना आपको इसी गाँव में है। आप क्यों बिना काम के, किसी और के कहने पर या किसी एक्ट का दुरूपयोग, हथियार बनाकर क्यों कर रहे हो?” ये सारा दायित्व एक अच्छे नेत्री/नेता पर होता है।
मुझे जानकारी मिली है कि UP में, संभवतः मुरादाबाद में, एक बड़ी रैली/आयोजन होने वाला है, तो आप ये सभी बातें वहाँ पर discus करें। आप बातें करें कि आपसे सवर्ण hate नहीं करता है; आपसे hate वो करता है, जो एक्चुअल में आपका हक़ मार रहा है। सवर्ण ने तो हाथ खड़े कर दिए।
मैं मानता हूँ कि 5-10% हर जगह चिरकुट होते हैं। सवर्णों में भी कुछ आधा-एक परसेंट अपवाद स्वरूप ही होते होंगे। पर फिर भी, क्या हम peaceful coexistence नहीं देखते? हमारे सामने अलग-अलग तरह के शत्रु हैं। हमें तो वो भी ध्यान देना होगा कि ये कौन लोग हैं, हम इनसे कैसे लड़ें?
भाजपा का हमने किस तरह से नीतियों का समर्थन किया था, और ये किस तरह से फटते हुए दिखाई दे रहे हैं। जब तक ये course correct नहीं करेंगे, मैं हर तरह के नकारात्मक विश्लेषण का प्रयोग करूँगा। मेरा ये एजेंडा है। मैं घोषित रूप से इस एजेंडा के साथ चल रहा हूँ कि, जब तक ये सुधार नहीं करेंगे, मैं लोगो के मन में ये विश्वास का बीज डाल दूंगा कि भाजपा जातिवादी है।
इस कारण से आप सभी लोग आइये और समाज को एक cohesive unit बनाइए। हम सब एक साथ मिलकर के रहने वाले लोग हैं।
बिहार में SC समुदाय की 21 जातियों में 20 आज भी वंचित/पिछड़ी हैं तो आरक्षण का फायदा किसको मिल रहा इसकी समीक्षा क्यों न हो?
राज्य सरकारों की ख़ुद की रिपोर्ट्स में SC समुदाय को लेकर आरक्षण का बराबर फ़ायदा न मिलने की बात है बावजूद इसके ऑटो पायलट मोड में चले जा रहा है आरक्षण।
गजबे है
अभी यही वीडियो किसी भाजपा शासित प्रदेश का होता तो पूरा ट्विटर हाय दैय्या तानाशाह कहीं का लिखकर पोस्ट कर रहे होते,
लेकिन बात झारखंड की है तो सब कान में तेल और मुँह में दही जमा के बैठे हैं
Ab resignation toh ho gaya. Ab baat karle actual REFORMATION ki. Accountability toh hogayee. Ab Badlao laane ki baari. Fair education for each & everyone. Fair reservation only for the needy ones irrespective of caste, creed & religion.
#Endreservation