I feel sorry for him.
He will be called an enemy of the state because he dared to question the whole narrative of India's affirmative action, which will render him persona non grata for the establishment.
Also, nothing will change.
"plus ça change, plus c'est la même chose."
कुछ यूट्यूबर्स दावा करते हैं कि E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से माइलेज 50% तक गिर जाता है। मेरा अनुभव ऐसा नहीं है।
लेकिन सरकार का यह दावा भी कि माइलेज में केवल 3–6% की कमी आती है, मेरे व्यक्तिगत अनुभव से मेल नहीं खाता।
मेरी Maruti Brezza पहले लगभग 17–18 km/L का औसत देती थी। अब वही औसत 14–15 km/L पर आ गया है। यानी मेरे अनुभव के अनुसार माइलेज में लगभग 20–22% की गिरावट आई है।
यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। हो सकता है अन्य लोगों की गाड़ियों, ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति, रखरखाव और ट्रैफिक के अनुसार परिणाम अलग हों। लेकिन यदि बड़ी संख्या में वाहन मालिक इसी तरह की गिरावट महसूस कर रहे हैं, तो इस विषय पर स्वतंत्र और पारदर्शी अध्ययन होना चाहिए, ताकि वास्तविक प्रभाव जनता के सामने आ सके।
E20 और इथेनॉल पर सरकार के दावों और आम लोगों के अनुभवों में बड़ा अंतर दिखाई देता है। जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इस विषय पर बयान देते हैं, तो बहुत से लोगों को लगता है कि उनकी बात ज़मीनी अनुभव से मेल नहीं खाती। इसका असर केवल उनकी व्यक्तिगत विश्वसनीयता पर नहीं, बल्कि पूरी सरकार की छवि पर भी पड़ता है। ऐसे में सरकार को दावों के बजाय पारदर्शी डेटा और स्वतंत्र अध्ययन के आधार पर जनता को जवाब देना चाहिए।
On Nov 1, 2025, Amaira, a Class 4 student, died by suicide after jumping from the fourth floor of the Neerja Modi School in Jaipur.
She had been bullied for 18 months, with classmates targeting her using "bad words," many of which carried sexual undertones. However, her class teacher repeatedly dismissed complaints from both Amaira and her parents, telling them instead that she needed to adjust to the other kids.
The parents have now released the school CCTV footage they obtained to the public. The footage reveals that even on the day of her death, Amaira approached the teacher multiple times for help but was ignored.
Hard to believe that teachers, even at such posh schools, are not trained to handle severe bullying or recognize a child in deep psychological distress. Totally preventable death.
@JioCare@reliancejio
भाई तुम लोग सौ पचास और बढ़ा लो महीने के लेकिन नेटवर्क दे दो दुर्गति कर दिए हो, 4G तक ढंग से नहीं पकड़ रहा है 5G तो भूल जाओ , ऊपर से लाइट जाते ही नेटवर्क गायब होने लगता है टावर पर डीजल भिजवाओ भले इथेनॉल वाला ही हो... मोनोपली के नाम पर गंध न मचाओ सुविधा दो.
क्रिस गेल को लोग टी 20 पावर हिटर के तौर पर जानते हैं पर उसके वनडे में 10 हज़ार रन हैं।
42 के औसत से 7000 टेस्ट रन हैं। टेस्ट में तिहरा शतक है।
ऑस्ट्रेलिया में 49 , इंग्लैंड में 36,न्यूजीलैंड में 67, साउथ अफ्रीका में 57, श्रीलंका में 42 टेस्ट औसत है।
तो कुल मिलाकर एक पॉपुलर टी 20 एंटरटेनर क्रिस गेल आपको टेस्ट स्पेशलिस्ट पुजारा और रहाणे से बड़ा क्रिकेटर दिखेगा जब आप वास्तविक आंकड़े देखेंगे तो।
कल अमिताभ और नसीरुद्दीन शाह की बात हो रही थी न?
यही फर्क है।
जो पुजारा और रहाणे कर सकते थे,वो क्रिस गेल भी कर सकते थे, पर जो क्रिस गेल कर सकते थे, वो पुजारा और रहाणे नहीं कर सकते।
सचिन 16 साल की उम्र में पूरे ओवर फील्डिंग और कुछ ओवर गेंदबाजी भी कर सकते थे।।
बेसिकली सचिन एक मध्यक्रम बल्लेबाज थे और उनकी तकनीक ओल्ड स्कूल थी।
इमरान वसीम वकार बॉथम, डोनाल्ड, ब्रेट शुल्ट्ज,मैकडरमाट, कादिर, वाल्श एम्ब्रोज़ को इंटरनेशनल मैचों में सिर्फ खेलना ही बड़ी बात थी, रन की बात नहीं कर रहा।
वैभव की बैट स्विंग अच्छी है और बैकफुट खेल भी अच्छा पर थोड़ा स्विंग लेती और टर्न लेती पिचों पर अभी साबित करना बाकी है।
अभी ये केवल पावर हिटर है।
फील्डिंग खास नहीं और बॉलिंग करता नहीं।
कुल मिला कर सूर्यवंशी इस युग का सचिन तो कहा जा सकता है पर इसके आज के युग के सचिन होने पर ठप्पा तभी लगेगा जब इंटरनेशनल खेलने का मौका मिलेगा और उसमें अच्छा करेगा।
लब्बोलुआब ये कि आईपीएल में अच्छे प्रदर्शन और इंटरनेशनल में अच्छे प्रदर्शन के बीच तुलना का औचित्य नहीं।
आइपीएल के हिसाब से वैभव सूर्यवंशी सचिन से बहुत अच्छा माना जायेगा पर क्रिकेट सिर्फ आईपीएल नहीं होता।
अयोग्यता’ ही पाकिस्तान की सबसे बड़ी ताकत है!
अमेरिका-ईरान युद्ध में मध्यस्थता की चर्चाओं के बीच बहुत सारे पाकिस्तानी एक्सपर्ट पाकिस्तान को दुनिया का केंद्र बता रहे हैं। इसे भारत की डिप्लोमैटिक हार माना जा रहा है।
जबकि पाकिस्तान की हैसियत यह है कि उसे वर्ल्ड बैंक से 1.2 अरब डॉलर का लोन लेना पड़ रहा है और भारत में आईपीएल की सबसे कमज़ोर टीम राजस्थान रॉयल्स की कीमत 1.6 अरब डॉलर है। भारत से पाँचवां हिस्सा आबादी होने के बावजूद पाकिस्तान की 45 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है, जबकि भारत में यह आंकड़ा लगभग 5 फीसदी है।
पाकिस्तान में कुल विदेशी निवेश लगभग 2 अरब डॉलर का हुआ है,जबकि भारत में यह आंकड़ा 82 अरब डॉलर से ज़्यादा है। इस तरह के न जाने और कितने आंकड़े दिए जा सकते हैं। हालांकि, यहां ऐसी तुलना करना मेरा मकसद नहीं है। लेकिन सिर्फ एक जियो पॉलिटिकल घटनाक्रम के बाद, जब पाकिस्तान खुद को दुनिया का केंद्र समझने लगे, तो ज़रूरी हो जाता है कि हम उस केंद्र की हकीकत भी समझ लें।
पाकिस्तान अगर अमेरिका-ईरान युद्ध में किसी भी तरह की मध्यस्थता निभा रहा है, तो इसके पीछे उसकी डिप्लोमेसी नहीं, बल्कि उसकी ‘अयोग्यता’ है।
ठीक उसी तरह जैसे ऑफिस में बॉस का सबसे करीबी आदमी ऑफिस का सबसे टैलेंटेड आदमी नहीं, बल्कि ऑफिस का सबसे नकारा आदमी होता है। ऐसा आदमी, जिसे बॉस खुद के लिए कभी थ्रेट नहीं मानता, और बाद में उस नकारा आदमी की नौकरी बची ही इस शर्त पर रहती है कि वो बॉस के पास आकर किस-किस की चुगली करता है। अमेरिका से पाकिस्तान की नज़दीकी भी ऐसे ही हालात की उपज है।
अमेरिका यह तो चाहेगा नहीं कि उसकी लड़ाई में चीन और रूस कोई भूमिका निभाते दिखें। न ही अपनी लड़ाई में भारत को शामिल कर वह भारत का कद बढ़ाना चाहेगा।
ईरान-चीन की नज़दीकी से भी सब वाकिफ हैं। चीन भी कभी ईरान को यह सलाह नहीं देगा कि वह अपने झगड़े में भारत को शामिल करके उसकी हैसियत बढ़ाए। कतर और तुर्की अक्सर ऐसी जंगों में मध्यस्थ की भूमिका निभाते रहे हैं, लेकिन इस बार, चूंकि ईरान ने उन पर भी हमला किया है, तो वह संभावना भी खत्म हो गई।
तो ले-देकर बचा कौन? पाकिस्तान—जो अमेरिका का पिछलग्गू भी है, एक मुस्लिम राष्ट्र भी है, और जिसके ईरान से दिखावे भर के संबंध भी हैं। और सबसे बड़ी बात—वह इतना insignificant है कि किसी को उससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कहीं उसका कद तो नहीं बढ़ जाएगा। क्योंकि जो मुल्क एक-एक अरब डॉलर की मदद के लिए दुनिया से गुहार लगाता है, वो किसी के लिए क्या थ्रेट होगा?
ले-देकर बस एक चीज़ है, जो उसके पक्ष में जाती है—वो है उसकी जियोपॉलिटिकल लोकेशन। इसी वजह से वो चीन से लेकर अमेरिका—दोनों के लिए ज़रूरी हो जाता है। अमेरिका को लगता है कि इसके ज़रिए वह अफगानिस्तान और ईरान पर नज़र रख सकता है, बलूचिस्तान के मिनरल्स पर कब्ज़ा कर सकता है।
वहीं चीन को लगता है कि पाकिस्तान के ज़रिए वह मिडिल ईस्ट तक अपनी पहुंच बना सकता है।
इसी कारण चीन ने ग्वादर बंदरगाह पर 60 अरब डॉलर का निवेश किया है, और पाकिस्तान को एक गुंडे की तरह इस्तेमाल कर भारत को उसमें उलझाए रख सकता है।
मगर अपनी इस लोकेशन में पाकिस्तान का कोई हाथ नहीं है। यह वैसे ही है जैसे आपके दादा ने सालों पहले ज़मीन खरीदी और आज आपकी ज़मीन हाईवे के रास्ते में आ गई, और आपको करोड़ों का मुआवज़ा मिल गया। तो ये जो करोड़ों रुपए आपके पास आए हैं, ये आपकी कमाई नहीं, किस्मत हैं। अंग्रेज़ों ने विभाजन किया ही इस तरह से था कि पाकिस्तान के ज़रिए ये सारी चीज़ें साधी जा सकें।
लेकिन इन सच्चाइयों को स्वीकार करने के बजाय अगर किसी को यह लगता है कि पाकिस्तान ने यह सब अपनी डिप्लोमेसी से अर्जित किया है, तो वो वैसे ही मुगालते में जी रहा है, जैसे किसी को यह लगता है कि 3 घंटे 50 मिनट की धुरंधर इसलिए चल रही है क्योंकि उसमें 10 मिनट का बीजेपी का प्रोपेगैंडा है।
वरना, गहराई में तो पाकिस्तान भी शायद यह जानता है कि उसकी ‘अयोग्यता’ ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उसके शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग उसका दिमाग नहीं, उसकी जीभ है।
उसका बेगैरत होना ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। वरना, जितने पैसे वह वर्ल्ड बैंक से मांग रहा है, उससे ज़्यादा पैसों की तो अनंत अंबानी के हाथी खिचड़ी खा जाते हैं।
-Neeraj Badhwar
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