चलिए आपको बताते हैं कि मोदी सरकार कैसे चुनाव लड़ती है? कैसे युवाओं को बेवकूफ बनाया जाता है?
बिहार में चुनाव से पहले अनुकंपा के आधार पर आर्टिकल 309 के तहत 6400 लिपिक और परिचारकों की बहाली हुई।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और शिक्षा मंत्री ने इनको चुनाव के समय राज्यकर्मी का दर्जा दे दिया । सभी बहुत खुश हुए। नीतीश जी के गठबंधन तकरीबन 20 से 25 लाख वोट इन्ही नौकरी पाने वालों और उनके परिजनों ने दिया।
लेकिन चुनाव खत्म होने के 6 महीने के बाद अब इनको नियत वेतन का लॉलीपॉप थमा दिया गया। एक साथी फोन करके कहते हैं भईया केवल 16,500 मिल रहा। कहा गया कि तुमको विद्यालय सहायकों की तरह वेतन दिया जाएगा।
वो कहते हैं कि भइया रील से ही इतना कमा लेते हैं, मोदी जी ठीक कह रहे थे, अब वही करना होगा।
सच यह है कि भाजपा के राज में शिक्षा विभाग ने संवैधानिक नियमों की धज्जियां उड़ा के रख दी है। बताइए देश के किस राज्य में राज्यकर्मी को नियत वेतन मिलता है? वो
बिहार में बहार है
नीतीशे कुमार है
ये है बिहार सरकार का शिक्षा विभाग का कारनामा 👇
पिछले चुनाव से पहले अनुकंपा के आधार आर्टिकल 309 के तहत 6400 लिपिक और परिचारियों की बहाली हुई।
मुख्यमंत्री @NitishKumar और शिक्षा मंत्री @sunilkbv द्वारा इनको चुनाव के समय राज्यकर्मी का दर्जा देने का झांसा दिया गया था.
6 महीना के बाद इनको नियत वेतन का लॉलीपॉप थमा दिया गया. राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने संविधान के बनाए हुए नियम का धज्जियां उड़ा कर रख दिया है।
बताइए देश के किस राज्य में राज्यकर्मी को नियत वेतन मिलता है..? अधिकारी खुलेआम संविधान और नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
बिहार में बहार है
नीतीशे कुमार है।
विकल्प 1: सीधा सवाल
यह ट्वीट सरकार को चुनौती देता है।5 साल का लंबा इंतज़ार, और मिला क्या? मात्र ₹16,500? माननीय मुख्यमंत्री @NitishKumar जी और शिक्षा मंत्री जी, क्या ₹16,500 में किसी मंत्री या अधिकारी का परिवार चल सकता है? अगर नहीं, तो विद्यालय लिपिकों के साथ मजाक क्यों ?
बिहार के शिक्षा मंत्री जी,https://t.co/rOrlx884E8
राजकर्मी के कमरे में विद्यालय लिपिक की नियुक्ति की गई।
हमसे सारे documents, qualification, verification — सब कुछ लिया गया।
हम रोज़ स्कूल में उपस्थित रहते हैं,
#BiharEducation#ClerkRights#ShikshaVibhag#JusticeForEmployees