नेहा बोरा को कुछ नही होगा. दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को छोड़ दिया है.
नेहा बोरा के सुरक्षा की जिम्मेदारी भी दिल्ली पुलिस की है.
नेहा बोरा जंतर मंतर 2.0 आंदोलन को एन्जॉय कर रही हैं.
उन्हें किसी का डर नही है. क्यों कि वो कोई आम लड़की नही हैं. एक बड़े वामपंथी संगठन की लीडर हैं. वृंदा करात का सहयोग है.
नेहा बोरा को जनता और युवाओं का भी जन समर्थन मिल रहा है. इसी कारण उनके मन में सरकार या पुलिस का डर नही है.
जब कोई व्यक्ति किसी लॉबी या सिस्टम का हिस्सा बन जाता है तो उसके लिए ज्यादा चिंता और दुबला होने की जरूरत नही है.
जंतर मंतर 1.0 का क्रेडिट कॉकरोच जनता पार्टी के हिस्से में गया था.
सोनम वांगचुक ने जब अपना अनशन खत्म कर लिया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पीछे हट गए, तब
अभिजीत दीपके और उनकी टीम आख़री तक धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी रही.
इस बार अगर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हुआ तो जंतर मंतर 2.0 का सबसे बड़ा क्रेडिट नेहा बोरा को मिलेगा.
काफी चोटिल होने के बावजूद दिल्ली ही हीट में वो आंदोलन को लीड कर रही है. युवा तबका नेताओं से ज्यादा अभिजीत दीपके और नेहा बोरा का संघर्ष देखकर इस शांतिपूर्ण ढंग से चलने वाले आंदोलन से जुड़ रहा है.
📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मुस्लिम महिला को देखिए, पुलिस कैसे हिरासत में लेकर ईको गार्डन ले जा रही है।
चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर योगेंद्र यादव, प्रशांत किशोर, कपिल सिब्बल और नेहा बोरा का जंतर मंतर पर आंदोलन कर रहे हैं.
CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने मुंबई के शिवाजी पार्क इलाके में बड़ी रैली हो रही है.
अब CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर दोनों ठाकरे भाई भी मुंबई के आजाद मैदान में बड़ा प्रदर्शन कर रहे हैं.
आजाद मैदान में कभी गांधी जी ने अंग्रेजों को भगाने के लिए बड़ा आंदोलन चलाया था. आज वही उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे मिलकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे हैं.
जिस तरह धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ धीरे धीरे आंदोलन बड़ा और नतीजा आंदोलन बड़ा हो गया. लग रहा उसी तरह ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी जन आंदोलन बढ़ते जा रहा है.
नेहा एक परिपक्व, संघर्षशील और स्पष्ट विचारधारा वाली लड़की है। भारत की हर लड़की को अपने अधिकारों के प्रति ऐसे ही जागरूक, तर्कशील और अपने विचारों पर मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
सिर्फ दो सवाल सरकार से..
1.CEC ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ सड़कों पर हो रहे सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन को इतनी सुरक्षा क्यों दे रही है?
2. ज्ञानेश के ख़िलाफ़ विरोध को दबाने के लिए जनता का पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है?
अन्ना हजारे आंदोलन में बहुजन समाज ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था. लेजिन मंच पर एक भी दलित समाज से लीडरशिप नही थी.
आशुतोष गुप्ता, किरण बेदी, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वास, अनुपम खेर और बीके सिंह सभी अपर कास्ट से थे.
कॉकरोच जनता पार्टी की लीडरशिप दलित समाज के अभिजीत दीपके के पास है यह बात कुछ लोगों को हजम नही हो रही है.
कॉकरोच जनता पार्टी को कुछ लोग आम आदमी पार्टी की B-टीम बताकर बदनाम कर रहे हैं. यह आरोप वही लोग लगा रहे जो 2011-12 में अन्ना आंदोलन में आंख बंद कर हिस्सा ले रहे थे.
अन्ना आंदोलन किस संस्कृति संगठन की B-टीम था पता नही था जो कॉकरोच जनता पार्टी पर आम आदमी पार्टी की B-टीम होने का आरोप लगाया जा रहा है ?
जब कभी भी कोई दलित समाज का व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ता है या लीड करता है तो अपर कास्ट का इको सिस्टम उसके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करने में जुट जाता है.
एडिटिंग करने वाले ने गजब ही कर दिया !
नेहा बोरा आज सोशल मीडिया का ट्रेंडिंग फेस बन चुकी है,
नेहा जब बोलती है तो दिल्ली की दीवारों में दरारे आ जाती है !
किसी की हिम्मत नहीं ज्ञानेश कुमार को हटा दे... ये लोग चिल्लाते रहेंगे।
~ मंत्री दिलीप घोष(पश्चिम बंगाल)
आवाज़ में ये ठसक कहाँ से आती है?
EVM से, ज्ञानेश से या फिर दोनों से?