संत ज्ञानेश्वर कहते हैं कि #सर्वव्यापी_ज्ञानामृत_श्रीमद्भगवतगीता मोक्षसुख का आधार है,आज गीतारूपी माता से मनुष्य रूपी बालक वियुक्त हो चुका है,इन्हें आपस मे मिलाने की सेवा सर्वोत्तम सेवा है।
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हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 27 अकतूबर से 2 नवंबर तक Sant Shri Asaram Bapu Ji आश्रम, अहमदाबाद द्वारा दिवाली अनुष्ठान शिविर का आयोजन किया जा रहा है जिसका लाभ बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक किसी भी आयु, वर्ग के लोग भाग ले सकते हैं।
#UniqueWayToMendYoungMinds
क्षमा व संयम की मूर्ति Sant Shri Asaram Bapu Ji पूरे विश्व को शांति, सौहार्द का सन्देश ही नहीं देते बल्कि उनके जीवन से पूर्णतः परिलक्षित भी होता है।
निर्दोष होते भी वो 6 वर्ष से जेल में हैं।
#बापूजी पर इस सदी का सबसे बड़ा षड्यन्त्र और अन्याय हुआ है।
#PeaceLovingSaint
पश्चात अंधानुकरण मैं दिवाली के दिनों का विशेष महत्व लोग भूलते जा रहे हैं इन दिवाली के 5 दिनों में जप , ध्यान से आध्यात्मिक उन्नति विशेष रूप से विकसित होगी |तो आइए बच्चों की उन्नति के लिए बच्चों को ले आएं अहमदाबाद दिवाली अनुष्ठान शिविर
#DiwaliShivir2019
https://t.co/q3WqXI5zwC
@shivhindustani विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं एकाग्रता शक्ति बढ़ाने हेतु अद्भुत निःशुल्क शिविर- विद्यार्थी उज्जवल भविष्य निर्माण शिविर जो आयोजित है 27 अक्टूबर से 2 नवंबर 2019 , Sant Shri Asaram Bapu Ji आश्रम अहमदाबाद में ।
#DiwaliShivir2019
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राष्ट्रभाषा दिवस : 14 सितंबर
संसार की उन्नत भाषाओं में हिंदी सबसे अधिक व्यवस्थित भाषा है।
हिंदी दुनिया की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।
राष्ट्रभाषा राष्ट्र का गौरव है । इसे अपनाना और इसकी अभिवृद्धि करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है ।
https://t.co/w0WKjvoP7H
@BBCHindi
@AzaadBharatOrg@SureshChavhanke#श्राद्ध_क्यों_करें
हिंदू धर्म में अत्यंत सुरभित पुष्प है कृतज्ञता की भावना, जो बालक में अपने Parents के प्रति दिखती है।
हिंदू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है।
'श्राद्ध-विधि' इसी भावना पर आधारित है।
ईसाई पादरी बिशप फ्रैंको
13 बार बलात्कार करने का पुख्ता सबूत
21 दिन में मिल गई जमानत
85 वर्षीय हिंदू संत आसाराम बापू को षडयंत्र के तहत फ़साने व निर्दोष होने के पुख्ता सबूत होते हुए भी 6 साल से जेल
नहीं दी जा रही बेल
न्यायव्यवस्था पर उठ रहे प्रश्नचिन्ह
@SureshChavhanke
#श्राद्ध_क्यों_करें
हिंदू धर्म में अत्यंत सुरभित पुष्प है कृतज्ञता की भावना, जो बालक में अपने Parents के प्रति दिखती है।
हिंदू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है।
'श्राद्ध-विधि' इसी भावना पर आधारित है।
@AsaramBapuJi#श्राद्ध_क्यों_करें
हिंदू धर्म में अत्यंत सुरभित पुष्प है कृतज्ञता की भावना, जो बालक में अपने Parents के प्रति दिखती है।
हिंदू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है।
'श्राद्ध-विधि' इसी भावना पर आधारित है।
@AsaramBapuJi#श्राद्ध_क्यों_करें
हिंदू धर्म में अत्यंत सुरभित पुष्प है कृतज्ञता की भावना, जो बालक में अपने Parents के प्रति दिखती है।
हिंदू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है।
'श्राद्ध-विधि' इसी भावना पर आधारित है।
श्राद्ध में पालने योग्य नियम
श्राद्धकाल में शरीर,द्रव्य,स्त्री,भूमि,मन,मंत्र और ब्राह्मण की विशेष शुद्ध होनी चाहिए।
तीन बातों को ध्यान में रखना चाहिएः शुद्धि, अक्रोध और अत्वरा
जिनकी देहावसना-तिथि का पता नहीं है, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन करना चाहिए।
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@Balsanskarsewa#श्राद्ध_क्यों_करें
हिंदू धर्म में अत्यंत सुरभित पुष्प है कृतज्ञता की भावना, जो बालक में अपने Parents के प्रति दिखती है।
हिंदू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है।
'श्राद्ध-विधि' इसी भावना पर आधारित है।
#श्राद्ध_क्यों_करें
हिंदू धर्म में अत्यंत सुरभित पुष्प है कृतज्ञता की भावना, जो बालक में अपने Parents के प्रति दिखती है।
हिंदू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है।
'श्राद्ध-विधि' इसी भावना पर आधारित है।
@Balsanskarsewa#श्राद्ध_क्यों_करें
हिंदू धर्म में अत्यंत सुरभित पुष्प है कृतज्ञता की भावना, जो बालक में अपने Parents के प्रति दिखती है।
हिंदू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है।
'श्राद्ध-विधि' इसी भावना पर आधारित है।
‘नास्तिकता से अथवा चंचलता से जो पुरुष तर्पण नहीं करता, उसके पितर पिपासित (प्यास से व्याकुल) होते हैं और देह से निकले हुए अपवित्र जल को पीते हैं । जो लोग पितृपक्ष में अपने पितरों के लिए श्राद्ध नहीं करते, उनके पितर उन्हें भीषण शाप देते हैं।'
#श्राद्ध_क्यों_करें
#श्राद्ध_क्यों_करें
हिंदू धर्म में अत्यंत सुरभित पुष्प है कृतज्ञता की भावना, जो बालक में अपने Parents के प्रति दिखती है।
हिंदू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है।
'श्राद्ध-विधि' इसी भावना पर आधारित है।
पूज्य Sant Shri Asaram Bapu Ji की पावन प्रेरणा से देशभर में विभिन्न इलाकों में हुए भिन्न-भिन्न सेवाकार्य...
#धुलिया#पौंटा_साहिब#श्योपुर#गोंदिया#भैरवी#भोपाल
आदि स्थानों पर हुए सेवाकार्यों की झलकियाँ...
#श्राद्ध_क्यों_करें
हिंदू धर्म में अत्यंत सुरभित पुष्प है कृतज्ञता की भावना, जो बालक में अपने Parents के प्रति दिखती है।
हिंदू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है।
'श्राद्ध-विधि' इसी भावना पर आधारित है।
#श्राद्ध- 13 से 28 सितंबर
#श्राद्ध_क्यों_करें "जिन पितरों के प्रति हम कृतज्ञतापूर्वक श्राद्ध करते हैं वे तृप्त व संतुष्ट होते हैं और हमारी सहायता करते हैं।"#FridayMotivation
किस मंत्र से करें तर्पण? बता रहे हैं पूज्य @AsaramBapuJi.
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