VIDEO | Delhi: Reacting to the judicial custody of CJP co-convenors Saurav Das and Ashutosh Ranka, CJP legal head Ratna Singh says, "We have been here since morning. We were told that the entire hearing would take place at 12.00 pm. Today, everything was complete, the verification was done, and all requirements were met. We have been waiting here since noon. The SEM (Special Executive Magistrate) was at the police station by 1:30 pm, but he did not enter the courtroom until 5.00 pm. When he finally arrived, he refused to hear our case on its merits regarding whether Saurav and Ashutosh should be released from judicial custody. Instead, he made arbitrary remarks. The public prosecutor, who had not appeared at the police station for the last four days, was present today. Within about five minutes of the proceedings, the SEM told the court that he had received a threatening message. From that point on, the entire discussion revolved solely around that message. It is clear that this entire episode was orchestrated. They had decided beforehand to come into the courtroom and focus exclusively on this alleged threatening message, completely bypassing whether the formalities required for Saurav and Ashutosh's release were fulfilled. Given how this process has been deliberately delayed and handled, I am utterly disappointed..."
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)
@whattalawyer Have patience, let them do whatever they want. This itself is protests.
Gradually they will loose moral authority, so please wait patiently.
COUNTRY IS CLOSELY WATCHING THIS. EVEN JUDICIARY IS ON TEST.
Use this to claim moral support of the world
@ravish_journo आप नंगे राजा की कहानी सुने हैं कि नही।
उस कहानी में आगे की बात ये थी कि
राजपुरोहित, न्यायाधियाति और सेनापति
रोज नंगे होकर नाचते थे, राजा कि नजर से जो बच जाती थीं, उसके लिए लड़ते थे।
राजा को बात पता चला, बड़ा नाराज हुआ।
फ़िर खुलेआम नंगे घुमने का तरीका निकाला
@Cockroachisback
इस दलाल @ABPNews को पता है कि ये किसी भी लड़की को कुछ भी अनाप-शनाप बोल देगा तब भी इसका कुछ नहीं बिगड़ेगा.
ये कॉन्फिडेंस सरकार का आशीर्वाद मिले बिना नहीं आ सकता. इस @ABPNews को लगता है कि सरकार से सवाल पूछने वाली लड़की को ये कॉल गर्ल बोल देगा तो इसकी दलाली की रकम बढ़ जाएगी.
अब कोर्ट में मुलाक़ात होगी.
खूब नारी वंदन करवा हैं आप मोदीजी…@narendramodi
सुधार की आड़ में देश में अराजकता फैलाने वालों का असली चेहरा अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।🚨
यह लड़ाई नीतियों की नहीं, बल्कि CJP, AAP और कांग्रेस जैसे मोहरों एवं प्रशांत भूषण और नेहा बोरा जैसे दिमाग़ी नक्सल्स के सहारे देश की जड़ों को हिलाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की साजिश है।
सुनिए, समझिए, और ऐसी ख़ून बहाने वाली राजनीति से दूर रहिए!
मोदी सरकार ने अब जनगणना 2027 के लिए गणनाकर्मियों के रूप में नियुक्त किए जा सकने वाले लोगों का दायरा बढ़ा दिया है। इसके पीछे काफी गड़बड़झाला है।
10 से 12 जुलाई 2026 के दौरान RSS ने बेलगाम में अपने कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था, जिसका एकमात्र एजेंडा जनगणना 2027 था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 26 मई 2026 को गठित डेमोग्राफिक बदलावों पर उच्चस्तरीय समिति ने अब देश की डेमोग्राफी में हो रहे बदलावों को लेकर आम जनता के साथ-साथ भारतीय और विदेशी संगठनों से भी सुझाव मांगे हैं। इस समिति में उच्चस्तरीय केवल एक ही बात है-इसके सदस्यों का RSS से जुड़े संगठनों और लोगों से संबंध। इसलिए हम जानते हैं कि ये सुझाव कहां से आएंगे।
16 अक्टूबर 2026 को जारी जनगणना के नोटिफिकेशन को 10 से 12 जुलाई 2026 के RSS के प्रशिक्षण शिविर और 14अक्टूबर 2026 को डेमोग्राफी में बदलावों पर बनी समिति द्वारा सुझाव मांगने के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
यह साफ है कि यह हजारों RSS/BJP कार्यकर्ताओं के लिए एक रोजगार गारंटी योजना है। इससे पहले ही बिगाड़ी जा चुकी जनगणना की प्रक्रिया और भी दूषित होगी। एक और संस्था को बर्बाद किया जा रहा है। SIR की तरह जनगणना के आंकड़ों में भी खतरनाक तरीके से हेरफेर किया जाएगा।
PM-HM की जोड़ी के षड्यंत्रकारी मंसूबों की कोई सीमा नहीं है।
आपलोग पहले तय कर लें
ज्ञानेश कुमार का क्या करना है?
याद रखिये,सब कुछ जनता के
सामने है।अब इंतजार सिर्फ इस बात का है
कि आप लोगों की करतूतों पर जाँच और कार्यवाही कब होगी
6000 करोड़ अवैध चुनावीआप लोगों के पास है
जगहजगह 5 स्टार पार्टी कार्यालय है
वक्त आने दें,ईश्वर न्याय करेंगें ही
पहले सलमान खुर्शीद, फिर नेहा बोरा, प्रशांत भूषण और अब ध्रुव राठी जैसे लोगों द्वारा यह कहना कि "भारत की स्थिति बांग्लादेश जैसी होगी" और "सेना को सड़क पर उतरना चाहिए" - यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
NEET, SIR या CEC के इस्तीफे की मांग तो सिर्फ बहाने हैं, इनका असली मक़सद बिना चुनाव के सत्ता परिवर्तन करना है।
ऐसे बयान देश में अराजकता फैलाने की मानसिकता और हताशा को साफ दर्शाते हैं।
#NationFirst #DelhiProtest #RegimeChange
Cockroach Janta Party की call पर दिल्ली और मुंबई में बुलाया गया 'तिरंगा मार्च' पूरी तरह flop हो गया. दिल्ली का कनॉट प्लेस हो या मुंबई का आज़ाद मैदान हर जगह गिने-चुने लोग ही नज़र आए.
दिल्ली में जो लोग मार्च करते दिखे, उनमें से ज़्यादातर लोग या तो left parties के student wing से थे या फिर आम आदमी पार्टी के समर्थक थे.
दिल्ली में मेट्रो खुली रही, इंटरनेट बंद नहीं किया गया, दुकानें भी खुलीं. सिर्फ कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क बंद रखा गया था.
CJP का 'तिरंगा मार्च' flop क्यों हुआ?
दरअसल अब पुलिस को ये समझ आ गया है कि Cockroach Janta Party का अपना कोई जनाधार नहीं है. इसका प्रभाव सोशल मीडिया तक सीमित है. दूसरी बात ये कि NEET पेपर लीक पर छात्र आंदोलन की तरह ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट का कोई emotional connect नहीं है.
CJP दो संगठनों पर समर्थन के लिए निर्भर थी, आम आदमी पार्टी और left parties के student wing. कल इन पार्टियों की कोशिश को भी पुलिस ने नाकाम कर दिया. हालांकि, इसके लिए पुलिस को काफ़ी मशक़्क़त करनी पड़ी.
दरअसल ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ सब पार्टियों ने मिलकर जो माहौल बनाया था, उसकी हवा दो लोगों ने निकाल दी. नेहा बोरा ने बांग्लादेश की तरह तख़्ता पलटने की बात करके और प्रशांत भूषण ने ये कहकर कि मक़सद SIR नहीं, सरकार को पलटना है. कांग्रेस ने अच्छा किया कि इस विचार का समर्थन नहीं किया. इस तरह की मुहिम को पब्लिक का समर्थन कैसे मिल सकता है? लोग इतना तो समझते हैं कि देश सर्वोपरि है.