सड़क पर नमाज़ रोकने वालों को चिराग पासवान का बड़ा मैसेज-
ये सब फालतू की बात है
मैं अपने सहयोगियों से भी कहूँगा कि मैं इस तरह की राजनीति से सहमत नहीं हूँ
वक़्फ संशोधन बिल लाना सरकार द्वारा दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है,
सरकार की नियत में खोट है और सरकार वक़्फ को हड़पना और मुस्लिम समुदाय को लाभ पहुंचाना नहीं बल्कि मुसलमानों को उनकी वक्र्फ संपत्तियों से वंचित करना तथा वक्फ संपत्तियों से मुसलमानों के दावे को कमज़ोर बना देना है, वक्फ हमारा धार्मिक मामला है, इसलिए मुसलमान किसी भी कीमत पर वक्फ संशोधन विधेयक को स्वीकार नहीं करेंगें।
#RejectWaqfBill
वक़्फ़ संशोधन बिल भारत के धर्म निरपेक्ष लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है और भारतीय संविधान का स्वरूप 12 से 35 मे मौजूद बुनियादी अधिकारों का उनलंघन करता है। साथ ही यह बिल 25 करोड़ से ज्यादा अल्पसंखियांक नागरिको के भावनाओ को कष्ट देने के बराबर है। अर्थात हम इसे पूरी तरह अस्वीकार करते हैं और सरकार से तुरंत वापस लेने की मांग करते हैं।
#RejectWaqfBill
लोकसभा सांसद @BhimArmyChief ने मुस्लिमों के साथ हो रहे दोहरे रवैये का मुद्दा उठाया है। @AzadSamajParty सुप्रीमो ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरवाने और रमज़ान के महीने को लेकर कहा “क्या देश में सिर्फ एक ही धर्म की आस्था है मुस्लिमों की आस्था आस्था नहीं है।”
जब दूसरे धर्मों की संस्थाएं, कमेटियां उनके हिसाब से चलती हैं तो मुसलमानों के वक्फ बोर्ड में हस्तक्षेप क्यों?
– मा. सांसद इक़रा हसन जी
#WaqfAmendmentBill#Waqf#IqraHasan
2013 में महाकुंभ मेले के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री आज़म खान प्रभारी थे, उस वक़्त बजट भी पानी की तरह नही बहाया गया था, जो बजट था उससे श्रद्धालुओं को आज़म खान ने सुविधाएं दी और एक भी व्यक्ति को खरोंच तक नही आने दी, अफ़सोस उस नेता को जेल में रखा गया हुआ है!
2013 का महाकुंभ इसलिए खास है कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री AKHILESH YADAV ने महाकुंभ आयोजन करने का प्रभारी AZAM KHAN को बनाया.
AZAM KHAN ने बहुत भी शानदार, सुविधाजनक और सुरक्षित महाकुंभ आयोजित करके दिखाया. यह मैं नही कह रहा हूँ साधु संत और श्रद्धालु कह रहे हैं कि 2013 के महाकुंभ को AZAM KHAN ने बहुत ही व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया था.
तत्कालीन सरकार और AZAM KHAN ने अपने काम और बेहतरीन आयोजन का प्रचार नही किया. ना ही जनता को कुंभ मेले में जबर्दस्ती आने के लिए उकसाया.
AZAM KHAN ने रामपुर के शाही परिवार और सामंती ताकतों से लड़ाई लड़ी. वर्तमान सरकार ने जानबूझकर AZAM KHAN और उनकी यूनिवर्सिटी को टारगेट किया.
संभल में शांति की अपील के साथ ही ये भी अपील है कि कोई भी इंसाफ़ की उम्मीद न छोड़े। नाइंसाफ़ी का हुक्म ज़्यादा दिन नहीं चलता सरकार बदलेगी और न्याय का युग आएगा।
जो आशिक़ाने रसूल सल्लल्लाहों अलैहि व सल्लम की मोहब्बत में चलो मुंबई तिरंगा रैली में नहीं पहुँच सके उनसे अदबन गुज़ारिश है वो गुस्ताखे रसूल रामगिरि को हिरासत में लेने की माँग करते रहे।
RT करे #ArrestRamgiriMaharaj
बुलडोज़र कार्रवाई पर अंतरिम रोक
आशा है कि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला पीड़ितों के पक्ष में होगाः
अदालत की यह कड़ी टिप्पणी इस बात का इशारा है इसका जो मार्गदर्शक या अंतिम फैसला आएगा वो न केवल पीड़ितों के हित में होगा बल्कि उससे न्यायपालिका पर विश्वास बढ़ेगा। यह बात किसी विडंबना से कम नहीं कि सांप्रदायिक मानसिकता ताक़त के नशे में ख़ुद को न्यायपालिका और कानून से ऊपर समझने लगी है, इस प्रकार की सोच इन अर्थों में घातक है कि देश का लोकतांत्रिक ढांचा जिन स्तंभों पर खड़ा है उनमें सबसे मज़बूत स्तंभ न्यायपालिका है जहां बेसहारा हो जानेवाले लोगों को अपना लोकतांत्रिक अधिकार मिलता है, और न्यायपालिका की सर्वोच्चता को कमज़ोर करने का प्रयास वास्तव में लोकतंत्र को कमज़ोर करने का प्रयास है। आज के सभ्य समाज में बुलडोज़र जैसी कार्रवाई लोकतंत्र के माथे पर कलंक है।