@ZeptoNow
After sending mails , for an order two times payment collected but not giving back refund after 2-3 mails.
Very unfortunate, still I could not understand if an order is placed for 'Cash on delivery ' why payment for UPI was sent.
दोस्तों, आजकल सोशल मीडिया और क्रिकेट चर्चाओं में रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर काफी बहस हो रही है। कुछ लोग कह रहे हैं कि 38-39 साल की उम्र में अब नया ट्रांजिशन चाहिए, युवा खिलाड़ी तैयार हैं। कोई बात नहीं, क्रिकेट आगे बढ़ता है। लेकिन एक बात गले से नीचे नहीं उतरती! हिटमैन ने जो देश के लिए किया है, उसका हिसाब सिर्फ आंकड़ों से नहीं लगाया जा सकता।
रोहित शर्मा वो खिलाड़ी हैं जिन्होंने 2019 वर्ल्ड कप में भारत को सेमीफाइनल तक पहुंचाया। T20 वर्ल्ड कप 2024 की कप्तानी करके ट्रॉफी दिलाई। चैंपियंस ट्रॉफ़ी में लीड किया। ODI में 50+ शतक लगाए। हिटमैन अवतार में मैच फिनिश किए। मुश्किल समय में टीम को संभाला, खासकर 2023 World Cup फाइनल के बाद जब सब टूटे हुए थे।
ऐसे खिलाड़ी को अचानक ड्रॉप करके या बिना बताए बाहर कर देने से क्या संदेश जाता है? कि योगदान के बाद भी सिर्फ परफॉर्मेंस और उम्र देखी जाती है, इज्जत नहीं? यह गलत है।
भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमने देखा है कि सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, राहुल द्रविड़, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर इन सबको घरेलू मैदान पर भावुक विदाई मिली। फैंस ने स्टैंडिंग ओवेशन दिया, आंखें नम हुईं, और खिलाड़ी भी आखिरी बार जर्सी पहनकर मैदान पर भावुक हुए। यही तो क्रिकेट की खूबसूरती है।
रोहित के मामले में भी यही होना चाहिए। अगर BCCI और टीम मैनेजमेंट को लगता है कि 2027 एक दिवसीय वर्ल्ड कप के लिए रोहित फिट नहीं हैं।हालांकि अभी शुभनम गिल ने खुद कहा है कि रोहित और विराट प्लान का हिस्सा हैं तो ठीक है। लेकिन घरेलू सीरीज में चाहे इंग्लैंड के खिलाफ हो, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हो या न्यूज़ीलैंड के खिलाफ एक मैच पहले घोषणा कर दी जाए।इडेन गार्डन, वानखड़े, चेपक या मोटेरा जैसे मैदान पर रोहित आखिरी बार बैटिंग करें ताकि फैंस उन्हें थैंक यू कह सकें। पूरा स्टेडियम Ro-hit! Ro-hit के नारों से गूंजे। BCCI उन्हें एक डिनर या स्पेशल सेरेमनी देकर भी सम्मानित करे।
यह सिर्फ एक खिलाड़ी की विदाई नहीं, बल्कि एक युग के अंत का सम्मान है। रोहित ने कभी बहाने नहीं बनाए। खराब फॉर्म में भी टीम के लिए खड़े रहे। कप्तानी में कई ट्रॉफी दिलाईं। अब समय आ गया है कि क्रिकेट सिस्टम भी उनके साथ खड़ा हो।
अंत में एक छोटी सी अपील रोहित, चाहे आप 2027 तक खेलें या पहले रुक जाएं, आपका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। आपने दिखाया कि आत्मविश्वास और सही टाइमिंग से कोई भी खिलाड़ी वापसी कर सकता है। लेकिन BCCI, कृपया इस विदाई को जल्दबाजी में खराब न होने दें।
जो फैंस इस बात से सहमत हैं, वे शेयर करें। क्रिकेट सिर्फ जीत-हार का खेल नहीं, भावनाओं और सम्मान का भी खेल है। 🇮🇳❤️
#RespectForRohit #ThankYouHitman #DignifiedFarewell
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए थे। हिन्दुओं की आस्था तब भी नहीं डिगी। महान प्रभास पाटन तीर्थ अपने भव्य रूप में पुनर्निर्मित हुआ, गाँधी-नेहरू के असहयोग के बावजूद।
अतः, जो भी हिन्दू विरोधी ये स्वप्न पालकर प्रसन्न हो रहे हैं कि चंदा चोरी की घटना से उस विग्रह में जन-आस्था घट जाएगी जिसे उचित गर्भगृह में स्थापित करने के लिए हमारी कई पीढ़ियों ने 500 वर्षों तक संघर्ष किया - उनका स्वप्न, स्वप्न ही रह जाएगा। आर्य समाज ने मंदिरों में चल रही कई प्रथाओं व पुरोहितों के व्यवहार को लेकर व्यापक आंदोलन चलाया, मंदिर और पुजारी पुनः अपने-अपने गौरवशाली दौर में लौट आए। आस्था नहीं डिगी।
चंदा चोरी कुछ दिनों का प्रकरण है। दोषियों को सज़ा मिलेगी, ग़ैर-ज़िम्मेदार हटाए जाएँगे। फिर दर्शन-पूजन पूर्ववत ही होता रहेगा।
19वीं सदी में पुष्टिमार्ग संप्रदाय के कुछ गुरुओं द्वारा किए जा रहे अनाचार के विरुद्ध अदालत में केस चला और देशभर में इसकी चर्चा हुई। 2024 में आमिर ख़ान के बेटे ने इसपर 'महाराज' फ़िल्म बनाई। क्या इससे वैष्णव संप्रदाय पर कुछ फ़र्क़ पड़ा? क्या इससे महान वल्लभाचार्य या उनके द्वारा प्रतिपादित शुद्धाद्वैत दर्शन की महत्ता कम हो गई?
राम मंदिर में हिन्दुओं की आस्था कभी कम नहीं हो सकती है, न ही अपने आराध्य श्रीराम में।
बेजान शरीर है—
न बोल सकते हैं, न सुन सकते हैं, न चल सकते हैं और न कोई इसरा कर सकते हैं ।
घर वालों की उम्मीद है कि कभी ठीक होंगे—
बेटी पापा का इलाज कराने के लिए शोसल मीडिया का सहारा लेती है! सोचिए आर्थिक स्थिति क्या होगी?
पत्नी दिन रात सेवा करती है, रिश्ते नाते सब दूर हो गए हैं! परिवार की हालत क्या होगी यह समझ सको शायद!😭
ऐसे लोगों की पैसे से मदद सब कर सकते हैं, उनकी पोस्ट को वायरल करो —
हमारे देश में ऐसे बहुत लोग हैं जो किसी की पीड़ा समझकर उनकी आर्थिक मदद करेंगे या शोसल मीडिया से ही कुछ अर्निंग हो सकती है!
अगर चर्च में पादरी का धर्मांतरण हो जाए , तो क्या वह पादरी बना रह सकता है ? इसी प्रकार अगर पाहन का धर्मांतरण हो जाता है , तो वह पाहन पद क्यों नहीं छोड़ रहा है ?
👉🏽दरअसल पाहन को अपनी जिम्मेदारियों के बदले , पहनाई ज़मीन दी जाती है । इसी ज़मीन के लालच के कारण पद नहीं छोड़ा जा रहा है
👉🏽उसी प्रकार अन्य पारंपरिक पद के भी लाभ के लालच में , पद नहीं छोड़ा जा रहा है
👉🏽ग्राम सभा केवल प्रशासनिक केंद्र नहीं है - वह धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र भी है !
👉🏽इन आदिवासी पारंपरिक पद पर बैठे धर्मांतरित आदिवासी , सामाजिक जिम्मेदारी तो निभा लेते हैं , लेकिन धार्मिक जिम्मेदारी नहीं निभा पाते हैं
👉🏽 धर्मांतरित आदिवासी को स्वेच्छा से पद को छोड़ देना चाहिए । दोहरा मापदंड नहीं चलेगा ।
मोदी जी के तीसरे टर्म के शुरूआत से ही लगातार मन में मंथन चल रहा था कि आखिर मोदी जी 240 पर कैसे अटक गये। फिर कई बाते विचार करने योग्य निकलीं।
आपने अपने दो टर्म में कई अभूतपूर्व काम किए, साथ ही संसार में यश और नाम खूब बढ़ा। हमें बहुत खुशी हो रही थी। मजा आ रहा था।
फिर भी बहुत तकलीफ थी। जिस जिहादी कौम का भरोसा पृथ्वीराज चौहान भी नही जीत पाए, उनका भरोसा आप जीतने में लगे रहे। दस सालों में आप मध्यम वर्ग को भूल गये.
अमीरों को मांगने की जरूरत नही होती.. गरीबों को राशन, मकान, दे रहे हो, फिर मध्यम वर्ग को क्या मिला कभी सोचा नहीं सोचा..
अल्पसंख्यकों को मिलाने के लिए आपके अनूठे प्रयोगों से कोर वोटर नाराज़ होते रहे.. ये आपने ही कहा था ना कि मुसलमानों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ मे कंप्यूटर होना चाहिए.. ठीक बिलकुल ठीक.. फिर हिन्दुओं के हाथ में क्या होना चाहिए? कभी बताया नहीं आपने। खैर बदले में मुसलमानों ने आपके हाथ मे घंटा पकड़ा दिया।
पूरे साठ सालों में जितना लाभ उनको कांग्रेस ने नहीं दिया, उससे कई गुना ज्यादा आपने इनको 10 सालो में, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, गैस, बिजली, पानी, सड़क, रेल, सब कुछ दिया..
आपके फ़ैसले से आपके लोग दुखी हुए, फ़िर भी आपके साथ दुखी भाव से खड़े रहे.. लेकिन जब चुनाव का वक्त आया तो आपने सरकार बचाने या चुनाव जीतने का नारा ही नहीं दिया, जबकि साइकोलॉजिकल नैरेटिव "अबकी बार चार सौ पार" का कर दिया..
आप के वोटर बाहर ही नहीं निकले, क्योंकि सब यही सोचते रहे अरे 400 पार तो हो ही जायेगा, एक मेरे वोट से क्या होगा।
आपने कांग्रेस, राहुल गांधी, और विरोधियों को सड़क पर उतार दिया। आपसे दूसरी बड़ी गलती यही हो गई।
बंगाल मे आप के कार्यकर्ता मरते रहे, प्रताड़ित होते रहे, रोते रहे, कलपते रहे.. मगर पूर्ण बहुमत की सरकार होते हुए भी आपने कुछ नहीं किया। अजी कार्यकर्ता तो छोड़िए, CBI, ED को भी पीटते रहे, आपने कुछ नहीं किया। ममता को हटाया क्यूँ नहीं? बर्खास्त करना चाहिए था।
आज उस राहुल का कद इतना बड़ा हो गया कि उसने अपने मामूली से कार्यकर्ता से आपकी अमेठी वाली प्रत्याशी, जिसने कभी स्वयं राहुल को हराया था, को भारी अंतर से पटकवा दिया.. खैर
आप नहीं माने। बीजेपी वाशिंग पाउडर से धो धो कर दूसरी पार्टी के भ्रष्टाचारियों को पनाह देते रहे.. क्योंकि आपको विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनना था।
जो आप के पुराने कार्यकर्ता थे वो मुँह ताकते रहे, आप गैरों को टिकट देते रहे। ये आपके वही कार्यकर्ता थे जो 2014 और 2019 के चुनाव में जान और धन लुटाते रहे।
अभी भी वक्त है, पैंतरे बदलिए और खुद को संभालिए।
बीजेपी फैजाबाद से हार गई। जानते है क्यों हारे?
आपने राम भक्तो पर गोलियाँ चलवाने वाले को पदम् श्री आदि से सुशोभित किया। किया ना?
तो फिर वहाँ की पब्लिक ने राम द्रोही को जितवा दिया, तो क्या गलत किया?
इससे बड़ा और प्रमाण क्या चाहिए की देशद्रोहियों को सिर्फ आपका फ्री माल चाहिए, लेकिन वे आपको वोट नहीं देंगे।
शुक्र मनाइए कि अच्छे काम की वजह से जागृत हिन्दू के कारण आपकी सरकार अंतिम समय में बन गई। अपने इस टर्म में राजनीति से ऊपर उठकर विकास और हिन्दुत्व का ऐसा मापदंड तय कीजिए कि विश्व के मानचित्र पर विकसित, समृद्ध, और सशक्त भारत की मजबूत और सुदृढ़ स्थिति हो।
आखिर में, आपने पार्टी और देश को टू मैन कम्पनी के तरीके से 10 वर्ष चलाया है। इस रवैये को अब थोड़ा बदल दीजिये, और थोड़ा अपने कार्यकर्ताओं की बात पर ध्यान देना शुरू करिए। थोड़ा हिन्दू मध्यम वर्ग की भी चिंता कीजिये, जिसने भाजपा और जनसंघ को अपने खून से पाला है।
🙏🙏🙏🙏
कही कोई शोर नहीं सब चुप चाप हो रहा है
कोई नेता मंत्री किसी ने कोई आवाज़ उठाई क्या ?
किसी ने बात करनी भी जरूरी समझी क्या ?
बस इसी तरीके से देश पर क़ब्ज़ा हो रहा है
जब आप जागोगे बहुत देर हो चुकी होगी
राम राम
कैसे अदालतें हमें न्याय देंगी…?
कौन-सा जज हमारे पक्ष में खड़ा होगा…?
हम इतने कमजोर कब हो गए कि हिंदुओं को दीप जलाने की अनुमति देने वाले जज के खिलाफ महाभियोग लाया जा रहा है, और हम चुप बैठे हैं?
ना शोसल मिडिया पर पोस्ट कर रहे हैं…
ना किसी की पोस्ट को लाइक-रीट्वीट-कमेंट करके उसका साथ दे पा रहे हैं।
आवाज़ भी नहीं उठा पा रहे,
और जो उठा रहे हैं, हम उनके साथ भी खड़े नहीं हो पा रहे।
न्यायमूर्ति जी. आर. स्वामीनाथन पर विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव कई गंभीर सवाल खड़ा करता है।
सिर्फ सात साल में 64,700 से अधिक फैसले देने वाले, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे गए न्यायाधीश पर अचानक “विचारधारा-प्रेरित” होने का आरोप, क्या यह सिर्फ संयोग है? या फिर विपक्ष की नीयत में ही खोट है?
असल विवाद थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति को लेकर था। सरकार और अदालत का मतभेद, पर विपक्ष ने इसे राजनीतिक लड़ाई में बदल दिया।
क्या एक धार्मिक परंपरा को निभाने की अनुमति देना इतना बड़ा अपराध है कि जज को संसद में घसीटा जाए?
या फिर विपक्ष अपनी कमजोर होती राजनीतिक ज़मीन को बचाने के लिए न्यायपालिका पर दबाव बनाने में लगा है?
और हाँ…
जर्मन शेफर्ड की मानें तो तानाशाह तो मोदी है…!