सरकार को घर - घर राशन अनाज बांटने की जगह , ऐसे जरूरतमंद लोगों को चिन्हित कर उन्हें राशन व अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए । आजादी के 75 साल बाद भी देश में कोई भूख से मर जाए इससे बड़ी शर्म की बात क्या होगी सरकार के लिए
"पिताजी भूख से छटपटा कर मर गए। घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं था, इसलिए मां राशन लाने मौसी के घर गई थीं। जब वह वहां से लौटीं तो पिताजी खाट पर मरे पड़े थे।
पड़ोसियों से बॉडी चेक करने के लिए कहा, लेकिन किसी ने उन्हें छूना भी नहीं चाहा। बाद में जब शव से बदबू आने लगी, तब लोगों ने आनन-फानन में उनका अंतिम संस्कार करा दिया।"
खगड़िया में 55 वर्षीय मन्नू साह की बेटी ने अपने पिता की मौत को लेकर यह जानकारी दी। बुधवार को अपने पिता की मौत के बाद वो उत्तर प्रदेश के बरेली से खगड़िया सदर प्रखंड स्थित अपने मायके पहुंची थीं।
ग्रामीण अमित ने कहा कि मन्नू साह की मौत के बाद करीब 48 घंटे तक शव घर में ही पड़ा रहा। शव से दुर्गंध आने के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उनका अंतिम संस्कार कराया गया।
@aksharmaBharat माननीय मंत्री जी बिजली विभाग द्वारा अपने कृत्यों के माध्यम से आपकी छवि पूरे प्रदेश में धूमिल की जा रही है ।
कृपया संज्ञान ले कर न्यायोचित कार्यवाही करे ।
और सुनिश्चित करे कि ऐसे कुकृत्य कम हो जहां शिकायत के बाद भी लीपा पोती कर के उपभोक्ता को परेशान किया जा रहा है
छात्र आंदोलन के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ।
अगर शुरुआत में ही जिम्मेदारी तय कर ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई की गई होती, तो शायद मामला इतना नहीं बढ़ता, न इतना विरोध होता और न ही बार-बार लीपापोती करने की नौबत आती।
लोकतंत्र में जनता और छात्रों की आवाज़ को समय रहते सुनना ही सबसे बेहतर समाधान होता है। देर से लिया गया फैसला नुकसान की भरपाई नहीं करता, बल्कि यह बताता है कि समय पर निर्णय लेना कितना जरूरी था।
#CJParty #इस्तीफ़ा
छात्र आंदोलन के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ।
अगर शुरुआत में ही जिम्मेदारी तय कर ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई की गई होती, तो शायद मामला इतना नहीं बढ़ता, न इतना विरोध होता और न ही बार-बार लीपापोती करने की नौबत आती।
लोकतंत्र में जनता और छात्रों की आवाज़ को समय रहते सुनना ही सबसे बेहतर समाधान होता है। देर से लिया गया फैसला नुकसान की भरपाई नहीं करता, बल्कि यह बताता है कि समय पर निर्णय लेना कितना जरूरी था।
#CJParty #इस्तीफ़ा
असल में लाठी चार्ज का प्रावधान इन्हीं लोगों के लिए किया गया है इनको ढूंढ ढूंढ के इनका इलाज करना चाहिए। छात्र आंदोलन को पूरी तरह से बदनाम कर दिये है ऐसे लोग , इसी बहाने अलग अलग राजनीतिक पार्टियों के समर्थक एवं कार्यकर्ता इसी बहती गंगा में हाथ धो लेना चाहते है ।
@yadavakhilesh छात्र हित में शानदार विरोध दर्ज कराने के लिए हार्दिक बधाई एवं साधुवाद , आशा है ऐसे ही आप आगे भी जनता के असल मुद्दों पर पुरजोर आवाज उठाएंगे ।
असल में लाठी चार्ज का प्रावधान इन्हीं लोगों के लिए किया गया है इनको ढूंढ ढूंढ के इनका इलाज करना चाहिए। छात्र आंदोलन को पूरी तरह से बदनाम कर दिये है ऐसे लोग , इसी बहाने अलग अलग राजनीतिक पार्टियों के समर्थक एवं कार्यकर्ता इसी बहती गंगा में हाथ धो लेना चाहते है ।
बिहारी लोग अपना संपत्ति क्यों तोड़ रहा है
शांतिपूर्वक प्रदर्शन नहीं कर सकते तुम लोग
इसमें जितना सब आया लोफर आया इनको
Neet का full फॉर्म नहीं पता होगा
@Bihar_se_hai
यही ट्रेंड जारी रहा तो हो न हो कुछ दिन में ये तथाकथित गेंद जी लोग नग्न हो कर मोदी को गाली देंगे देखने वाला विरोध दर्ज कराने के साथ साथ आनंद भी प्राप्त करता रहे ।
धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे , कठोर कानून बने और भविष्य में ऐसे कृत्यों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाए वहां तक तो ठीक है लेकिन अब वहाँ जुट रहे 80% लोग रीलबाजी गाली गलौज कर , समाज के कुछ लोग को गुदगुदा कर इंस्टाग्राम पर प्रसिद्धि पाने के लिए इकट्ठे हो रहे ।
अब होड़ मची है कौन कितना गंदा बोल सकता है मोदी मदर**द और क्या क्या
उसके साथ एक और होड़ है अश्लीलता फैलाने की जितना कम कपड़े में गाली दे उतना रील वायरल जाने का चांस है ।
@aksharmaBharat माननीय मंत्री जी बिजली विभाग द्वारा अपने कृत्यों के माध्यम से आपकी छवि पूरे प्रदेश में धूमिल की जा रही है ।
कृपया संज्ञान ले कर न्यायोचित कार्यवाही करे ।
और सुनिश्चित करे कि ऐसे कुकृत्य कम हो जहां शिकायत के बाद भी लीपा पोती कर के उपभोक्ता को परेशान किया जा रहा है
माननीय मुख्यमंत्री जी एवं माननीय ऊर्जा मंत्री जी, कृपया आम उपभोक्ताओं को ऊर्जा विभाग की मनमानी से बचाइए।
एक उपभोक्ता के यहां 4 KW ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट स्थापित होने के बावजूद लगभग 6 माह का ₹3,45,000 का बिजली बिल जारी कर दिया गया। शिकायत करने पर बिना किसी निष्पक्ष तकनीकी जांच के उसी बिल को संशोधित कर ₹65,000 कर दिया गया, जो आज भी पूरी तरह अनुचित, अव्यावहारिक एवं वास्तविक खपत के विपरीत है।
कृपया उपभोक्ता द्वारा वास्तव में उपभोग की गई विद्युत तथा सोलर प्लांट से विभाग को निर्यात (Export) की गई विद्युत ऊर्जा का सत्यापन कराते हुए स्मार्ट मीटर एवं नेट मीटरिंग प्रणाली की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए तथा वास्तविक खपत के आधार पर न्यायोचित विद्युत बिल जारी करने का कष्ट करें।
प्रकरण से संबंधित सभी आवश्यक विवरण एवं साक्ष्य नीचे संलग्न हैं।
@CMOfficeUP@aksharmaBharat@EMofficeUP@PuVVNLHQ@mduppcl@PMOIndia@narendramodi
विषय: विषय: 4 किलोवाट ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट होने के बावजूद 6 माह का पहले ₹3,45,000 एवं शिकायत के उपरांत ₹65,000 का अत्यधिक, अनुचित एवं अव्यावहारिक विद्युत बिल जारी किए जाने तथा दोषपूर्ण स्मार्ट मीटर/नेट मीटरिंग की स्वतंत्र तकनीकी जांच कर वास्तविक बिल संशोधित किए जाने के संबंध में।
उपभोक्ता संख्या: 6589771039 | मीटर संख्या: AL5795733 | खंड: EUDD सारनाथ, वाराणसी | उपखंड: EUDSD लेढूपुर, वाराणसी
महोदय,
मैंने पूर्व में जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि मेरे परिसर में स्थापित स्मार्ट मीटर में गंभीर त्रुटि के कारण लगभग 6 माह का ₹3,45,000 का विद्युत बिल जारी कर दिया गया था। उस समय विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मुझे बताया गया कि बिल पूर्णतः सही है और इतनी ही राशि देय है। शिकायत के उपरांत बिना किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच के उसी बिल को संशोधित कर ₹65,000 कर दिया गया तथा अब यह कहा जा रहा है कि यही सही बिल है और इसमें कोई त्रुटि नहीं है। यदि वास्तव में कोई गड़बड़ी नहीं थी, तो ₹3,45,000 से ₹65,000 तक का संशोधन किस आधार पर किया गया? जबकि ₹65,000 का बिल भी वास्तविक खपत की तुलना में अत्यधिक एवं पूर्णतः अव्यावहारिक है।
इतना ही नहीं, विभाग द्वारा जारी बिल में अप्रैल 2026 माह की विद्युत खपत 10,03,005.62 यूनिट दर्शाई गई है, जो किसी भी सामान्य घरेलू उपभोक्ता के लिए असंभव एवं अविश्वसनीय है। यह तथ्य स्वयं स्मार्ट मीटर अथवा बिलिंग प्रणाली में गंभीर तकनीकी त्रुटि का स्पष्ट संकेत देता है।
मेरे घर पर 4 किलोवाट क्षमता का ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट स्थापित है। सोलर प्लांट लगने के बाद सामान्य परिस्थितियों में मेरा मासिक विद्युत बिल लगभग ₹200 से ₹500 (अधिकतम ₹800) के बीच ही आता रहा है। ऐसे में ₹65,000 का बिल भी पूरी तरह वास्तविक खपत एवं सोलर उत्पादन के विपरीत है।
शिकायत के दौरान विभाग के कर्मचारी कई बार मीटर रीडिंग लेने आए। प्रत्येक बार मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि स्मार्ट मीटर में खराबी है अथवा वह सोलर प्लांट द्वारा उत्पन्न एवं ग्रिड में निर्यात (Export) की गई विद्युत ऊर्जा का सही समायोजन (Net Metering) नहीं कर रहा है। इसके बावजूद न तो मीटर की तकनीकी जांच कराई गई और न ही सोलर प्लांट के उत्पादन एवं निर्यात के आंकड़ों का सत्यापन किया गया।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, स्मार्ट मीटर एवं नेट मीटरिंग प्रणाली की कार्यप्रणाली की जांच की जाए, सोलर प्लांट के उत्पादन एवं निर्यात के रिकॉर्ड का मिलान किया जाए तथा वास्तविक खपत के आधार पर मेरा विद्युत बिल पुनः संशोधित किया जाए। साथ ही, बिना पूर्ण जांच के केवल आंशिक संशोधन कर शिकायत का निराकरण दर्शाने की कार्रवाई को निरस्त करते हुए मुझे न्यायोचित राहत प्रदान करने का कष्ट करें।
धन्यवाद।
माननीय मुख्यमंत्री जी एवं माननीय ऊर्जा मंत्री जी, कृपया आम उपभोक्ताओं को ऊर्जा विभाग की मनमानी से बचाइए।
एक उपभोक्ता के यहां 4 KW ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट स्थापित होने के बावजूद लगभग 6 माह का ₹3,45,000 का बिजली बिल जारी कर दिया गया। शिकायत करने पर बिना किसी निष्पक्ष तकनीकी जांच के उसी बिल को संशोधित कर ₹65,000 कर दिया गया, जो आज भी पूरी तरह अनुचित, अव्यावहारिक एवं वास्तविक खपत के विपरीत है।
कृपया उपभोक्ता द्वारा वास्तव में उपभोग की गई विद्युत तथा सोलर प्लांट से विभाग को निर्यात (Export) की गई विद्युत ऊर्जा का सत्यापन कराते हुए स्मार्ट मीटर एवं नेट मीटरिंग प्रणाली की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए तथा वास्तविक खपत के आधार पर न्यायोचित विद्युत बिल जारी करने का कष्ट करें।
प्रकरण से संबंधित सभी आवश्यक विवरण एवं साक्ष्य नीचे संलग्न हैं।
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विषय: विषय: 4 किलोवाट ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट होने के बावजूद 6 माह का पहले ₹3,45,000 एवं शिकायत के उपरांत ₹65,000 का अत्यधिक, अनुचित एवं अव्यावहारिक विद्युत बिल जारी किए जाने तथा दोषपूर्ण स्मार्ट मीटर/नेट मीटरिंग की स्वतंत्र तकनीकी जांच कर वास्तविक बिल संशोधित किए जाने के संबंध में।
उपभोक्ता संख्या: 6589771039 | मीटर संख्या: AL5795733 | खंड: EUDD सारनाथ, वाराणसी | उपखंड: EUDSD लेढूपुर, वाराणसी
महोदय,
मैंने पूर्व में जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि मेरे परिसर में स्थापित स्मार्ट मीटर में गंभीर त्रुटि के कारण लगभग 6 माह का ₹3,45,000 का विद्युत बिल जारी कर दिया गया था। उस समय विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मुझे बताया गया कि बिल पूर्णतः सही है और इतनी ही राशि देय है। शिकायत के उपरांत बिना किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच के उसी बिल को संशोधित कर ₹65,000 कर दिया गया तथा अब यह कहा जा रहा है कि यही सही बिल है और इसमें कोई त्रुटि नहीं है। यदि वास्तव में कोई गड़बड़ी नहीं थी, तो ₹3,45,000 से ₹65,000 तक का संशोधन किस आधार पर किया गया? जबकि ₹65,000 का बिल भी वास्तविक खपत की तुलना में अत्यधिक एवं पूर्णतः अव्यावहारिक है।
इतना ही नहीं, विभाग द्वारा जारी बिल में अप्रैल 2026 माह की विद्युत खपत 10,03,005.62 यूनिट दर्शाई गई है, जो किसी भी सामान्य घरेलू उपभोक्ता के लिए असंभव एवं अविश्वसनीय है। यह तथ्य स्वयं स्मार्ट मीटर अथवा बिलिंग प्रणाली में गंभीर तकनीकी त्रुटि का स्पष्ट संकेत देता है।
मेरे घर पर 4 किलोवाट क्षमता का ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट स्थापित है। सोलर प्लांट लगने के बाद सामान्य परिस्थितियों में मेरा मासिक विद्युत बिल लगभग ₹200 से ₹500 (अधिकतम ₹800) के बीच ही आता रहा है। ऐसे में ₹65,000 का बिल भी पूरी तरह वास्तविक खपत एवं सोलर उत्पादन के विपरीत है।
शिकायत के दौरान विभाग के कर्मचारी कई बार मीटर रीडिंग लेने आए। प्रत्येक बार मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि स्मार्ट मीटर में खराबी है अथवा वह सोलर प्लांट द्वारा उत्पन्न एवं ग्रिड में निर्यात (Export) की गई विद्युत ऊर्जा का सही समायोजन (Net Metering) नहीं कर रहा है। इसके बावजूद न तो मीटर की तकनीकी जांच कराई गई और न ही सोलर प्लांट के उत्पादन एवं निर्यात के आंकड़ों का सत्यापन किया गया।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, स्मार्ट मीटर एवं नेट मीटरिंग प्रणाली की कार्यप्रणाली की जांच की जाए, सोलर प्लांट के उत्पादन एवं निर्यात के रिकॉर्ड का मिलान किया जाए तथा वास्तविक खपत के आधार पर मेरा विद्युत बिल पुनः संशोधित किया जाए। साथ ही, बिना पूर्ण जांच के केवल आंशिक संशोधन कर शिकायत का निराकरण दर्शाने की कार्रवाई को निरस्त करते हुए मुझे न्यायोचित राहत प्रदान करने का कष्ट करें।
धन्यवाद।
माननीय मुख्यमंत्री जी एवं माननीय ऊर्जा मंत्री जी, कृपया आम उपभोक्ताओं को ऊर्जा विभाग की मनमानी से बचाइए।
एक उपभोक्ता के यहां 4 KW ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट स्थापित होने के बावजूद लगभग 6 माह का ₹3,45,000 का बिजली बिल जारी कर दिया गया। शिकायत करने पर बिना किसी निष्पक्ष तकनीकी जांच के उसी बिल को संशोधित कर ₹65,000 कर दिया गया, जो आज भी पूरी तरह अनुचित, अव्यावहारिक एवं वास्तविक खपत के विपरीत है।
कृपया उपभोक्ता द्वारा वास्तव में उपभोग की गई विद्युत तथा सोलर प्लांट से विभाग को निर्यात (Export) की गई विद्युत ऊर्जा का सत्यापन कराते हुए स्मार्ट मीटर एवं नेट मीटरिंग प्रणाली की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए तथा वास्तविक खपत के आधार पर न्यायोचित विद्युत बिल जारी करने का कष्ट करें।
प्रकरण से संबंधित सभी आवश्यक विवरण एवं साक्ष्य नीचे संलग्न हैं।
@CMOfficeUP@aksharmaBharat@EMofficeUP@PuVVNLHQ@mduppcl@PMOIndia@narendramodi
विषय: विषय: 4 किलोवाट ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट होने के बावजूद 6 माह का पहले ₹3,45,000 एवं शिकायत के उपरांत ₹65,000 का अत्यधिक, अनुचित एवं अव्यावहारिक विद्युत बिल जारी किए जाने तथा दोषपूर्ण स्मार्ट मीटर/नेट मीटरिंग की स्वतंत्र तकनीकी जांच कर वास्तविक बिल संशोधित किए जाने के संबंध में।
उपभोक्ता संख्या: 6589771039 | मीटर संख्या: AL5795733 | खंड: EUDD सारनाथ, वाराणसी | उपखंड: EUDSD लेढूपुर, वाराणसी
महोदय,
मैंने पूर्व में जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि मेरे परिसर में स्थापित स्मार्ट मीटर में गंभीर त्रुटि के कारण लगभग 6 माह का ₹3,45,000 का विद्युत बिल जारी कर दिया गया था। उस समय विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मुझे बताया गया कि बिल पूर्णतः सही है और इतनी ही राशि देय है। शिकायत के उपरांत बिना किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच के उसी बिल को संशोधित कर ₹65,000 कर दिया गया तथा अब यह कहा जा रहा है कि यही सही बिल है और इसमें कोई त्रुटि नहीं है। यदि वास्तव में कोई गड़बड़ी नहीं थी, तो ₹3,45,000 से ₹65,000 तक का संशोधन किस आधार पर किया गया? जबकि ₹65,000 का बिल भी वास्तविक खपत की तुलना में अत्यधिक एवं पूर्णतः अव्यावहारिक है।
इतना ही नहीं, विभाग द्वारा जारी बिल में अप्रैल 2026 माह की विद्युत खपत 10,03,005.62 यूनिट दर्शाई गई है, जो किसी भी सामान्य घरेलू उपभोक्ता के लिए असंभव एवं अविश्वसनीय है। यह तथ्य स्वयं स्मार्ट मीटर अथवा बिलिंग प्रणाली में गंभीर तकनीकी त्रुटि का स्पष्ट संकेत देता है।
मेरे घर पर 4 किलोवाट क्षमता का ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट स्थापित है। सोलर प्लांट लगने के बाद सामान्य परिस्थितियों में मेरा मासिक विद्युत बिल लगभग ₹200 से ₹500 (अधिकतम ₹800) के बीच ही आता रहा है। ऐसे में ₹65,000 का बिल भी पूरी तरह वास्तविक खपत एवं सोलर उत्पादन के विपरीत है।
शिकायत के दौरान विभाग के कर्मचारी कई बार मीटर रीडिंग लेने आए। प्रत्येक बार मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि स्मार्ट मीटर में खराबी है अथवा वह सोलर प्लांट द्वारा उत्पन्न एवं ग्रिड में निर्यात (Export) की गई विद्युत ऊर्जा का सही समायोजन (Net Metering) नहीं कर रहा है। इसके बावजूद न तो मीटर की तकनीकी जांच कराई गई और न ही सोलर प्लांट के उत्पादन एवं निर्यात के आंकड़ों का सत्यापन किया गया।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, स्मार्ट मीटर एवं नेट मीटरिंग प्रणाली की कार्यप्रणाली की जांच की जाए, सोलर प्लांट के उत्पादन एवं निर्यात के रिकॉर्ड का मिलान किया जाए तथा वास्तविक खपत के आधार पर मेरा विद्युत बिल पुनः संशोधित किया जाए। साथ ही, बिना पूर्ण जांच के केवल आंशिक संशोधन कर शिकायत का निराकरण दर्शाने की कार्रवाई को निरस्त करते हुए मुझे न्यायोचित राहत प्रदान करने का कष्ट करें।
धन्यवाद।
@AnilYadavmedia1 मछलीशहर की मैडम और कौशांबी के सर भी इसी लिस्ट में है । पिता जी नेता नहीं होते तो दोनों लोग जीवनभर राजनीति कर के प्रधान भी नहीं बन पाते।
अब आम कार्यकर्ता के लिए किसी भी पार्टी से चुनाव लड़ना असंभव होता जा रहा ।
🔥 आज के “Direct Selling” का सच —
ये कंपनियाँ करोड़पति बनने के झूठे सपने दिखाकर युवाओं का भविष्य निगल रही हैं।
ना बिज़नेस, ना स्किल — बस चेन बनाओ और फँस जाओ।
ऊपर वाले ऐश करें, नीचे वाले बरबाद हों।
सरकार को ऐसे MLM ठगों पर नकेल कसनी चाहिए!
#FraudAlert#MLMScam#YouthDuped