‘भाले से मारते, कुत्ते से कटवाते’
UP में बंधुआ मज़दूरी का खौफनाक सच
13 बच पाए, 3 को मार कर गाड़ दिया।
जो बचे उनकी कहानी आपको झकझोर देगी
Inside Muzaffarnagar’s Bonded Labour Horror
Watch @Saurabh_Unmute’s Exclusive Ground Report on The Red Mike YouTube channel.
This is not discipline. This is cruelty.
A child was allegedly stripped, beaten and humiliated — and the silence around such abuse is the real shame.
When a man is accused, society screams before facts.
But when a woman is seen abusing a child, suddenly people search for excuses, trauma, stress and sympathy.
Enough.
Motherhood is not a licence to torture.
A woman is not above accountability.
A child’s pain is not less because the abuser is female.
Someone must step in, protect that child, and ensure strict legal action.
Abuse is abuse.
Even when the abuser is a woman.
SOURCE- @Intl_Relations0
'किसी को भी 5 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दिया जाएगा. डीजल देते वक्त आधार कार्ड देखा जाएगा.
अगर ये किसान नहीं हुए, इनके पास खेत नहीं हुआ, तो कठोर कार्रवाई होगी.'
- यूपी के महराजगंज में पुलिस ये अनाउंसमेंट पेट्रोल पंप पर कर रही है
किसानों को सिंचाई के लिए इस वक्त डीजल चाहिए. इसलिए पेट्रोल पंप पर दबाकर भीड़ जुट रही है.
‘आप वीडियो कॉल पर रहना, लाइव मर्डर दिखाएंगे। मर्डर का पूरा वीडियो आपको बाद में भेज देंगे। आपको जब कान में पति की आखिरी चीख सुनाई दे तभी बाकी पैसे UPI करना।
माहौल शांत हो जाएगा तो आपके घर को तोड़ने वाली लड़की को भी टपका देंगे। पति की लोकेशन आपको देनी पड़ेगी। बॉडीगार्ड साथ में रहा तो उसको भी गोली मार देंगे।
हमारे पास 5 शूटर्स की टीम है। सुपारी ले ली तो यमराज भी नहीं बचा पाएंगे। अब तक कई को मौत के घाट उतार चुका हूं..।’
ये डील 5 शूटर्स की गैंग चलाने वाला कॉन्ट्रैक्ट किलर कर रहा है। महिला रिपोर्टर के हाथ में पिस्टल रखकर शूटर ने दावा किया कि इसी से मारूंगा। उसने रिपोर्टर से कहा, एक साथ 9 गोली मारेंगे।। 9 से ज्यादा गोली लगी तो रेट 5 लाख से ऊपर हो सकता है।
https://t.co/gUQ0sbv9lK
बेशर्म हो चुकी है @RailMinIndia@RailwaySeva@IRCTCofficial@AshwiniVaishnaw जी कम से कम बिल तो आप दे सकते हो शिकायत करने के बाद भी यदि बिल नहीं आता तो शिकायत को बंद कर दिया जाता है तो सबसे बड़ा भ्रष्टाचार तो आप ही लोग कर रहे हो
कितनी शर्म की बात है भारतीय रेलवे कहती है NO बिल NO पेमेंट 🚆 संख्या 14014 मैने एक शिकायत दर्ज करवाई जिसका संख्या नंबर 2026050301828 है जिसे बिना किसी समाधान के closed कर दिया गया @IRCTCofficial@RailMinIndia@AshwiniVaishnaw
कितनी शर्म की बात है भारतीय रेलवे कहती है NO बिल NO पेमेंट 🚆 संख्या 14014 मैने एक शिकायत दर्ज करवाई जिसका संख्या नंबर 2026050301828 है जिसे बिना किसी समाधान के closed कर दिया गया @IRCTCofficial@RailMinIndia@AshwiniVaishnaw
Trn:15668
PNR-6701854514
इस ट्रेन Overcharging की सारी सीमाये पर कर चुकी है Railneer 20, Biryani - 100, Mazza- 50 और ओ भी dublicate आख़िर railway इसके साथ कब तक comparmise करता रहेगा | passanger के जिंदगी से खिलवाड़ कब तक चलेगा ? जवाब दे @IRCTCofficial@RailMinIndia@RailwaySeva
कोर्ट में पेपर पर आखिरी साइन होते ही वकील मुस्कुराया और बोला, “लो मैडम, अब आपका डिवोर्स हो गया है। कोर्ट ने आपको 10 लाख रुपये हर्जाने के तौर पर दिए हैं, और आपको हर महीने खर्च के लिए 10,000 रुपये मिलते रहेंगे।
क्या अब आप खुश हैं?”
वह थोड़ा मुस्कुराई और बोली, “हाँ… मैं खुश हूँ… मुझे अब किसी से कुछ नहीं चाहिए।”
वकील ने पेपर्स इकट्ठा करना शुरू कर दिया और अश्विनी अपने मम्मी-पापा के साथ बाहर चली गई।
नवनाथ—उसका पति—कोने में खड़ा चुपचाप सब कुछ देख रहा था। अश्विनी ने एक बार भी उसकी तरफ नहीं देखा।
कार का दरवाज़ा बंद हो गया…और रिश्ता भी।
पहला महीना -
घर में सब लोग बड़े प्यार से पेश आते थे।
अश्विनी को लगा…यही आज़ादी है…यही शांति है!
दूसरा महीना -
घरवालों का माहौल थोड़ा बदलने लगा।
कभी भाई गुस्से में बोलता,
भाभी ताना मारती…“बड़ी हो गयी हो, कुछ ज़िम्मेदारी लो…”
भतीजे भी कहने लगे, “बुवा, तुम यहाँ कब तक रहोगे?”
तीसरा महीना—
घर का माहौल बदलने लगा।
जहाँ पहले प्यार था, अब वहाँ बोझ था।
अश्विनी शांत रहती थी…लेकिन उसके दिल में दर्द बढ़ता जा रहा था।
चौथा महीना—
वे उसकी हर हरकत पर नज़र रखने लगे।
जब भी वह बाहर जाती, पड़ोसी फुसफुसाते—
“उसका तलाक हो गया है…क्या अब वह इसी घर में रहेगी?”
अश्विनी के अंदर कुछ टूट रहा था।
पहली बार उसे एहसास हुआ—
ससुराल का रिश्ता मुश्किल था, लेकिन वह उसका अपना घर था। इस घर पर वह न तो मेहमान थी और न ही घर की सदस्य—बस एक बोझ।
एक रात, छत पर बैठकर वह सोचने लगी, "मुझे पैसे मिल गए... मुझे आज़ादी मिल गई... लेकिन इज़्ज़त? प्यार? और एक घर?"
उसने खुद से फुसफुसाया, "मैंने गलती की... मैंने फ़ैसले लेते समय सिर्फ़ दर्द देखा, लेकिन उसके नतीजे नहीं देखे..."
उसे एहसास हुआ कि रिश्ता टूटने के बाद एक औरत को सबसे ज़्यादा सहारे की ज़रूरत होती है, लेकिन समाज उसे पहले जज करता है।
और पीहर…?
“पीहर तो है, लेकिन कोई अधिकार नहीं है। मैंने अपने अहंकार की वजह से अपना असली घर छोड़ दिया…”
उसकी आँखों में आँसू आ गए।
अब उसे इस फैसले की कीमत समझ में आई।
चार महीने बीत चुके थे…
अश्विनी को हर दिन एक ही सवाल परेशान करने लगा…“मैंने क्या खोया…?
मैंने इतना बड़ा फैसला सिर्फ़ गुस्से और तानों की वजह से लिया…?”
वह आसमान की तरफ़ देखती रहती…
नवनाथ की यादें उसके पीछे दौड़ती रहतीं…उसकी आदतें, छोटे-मोटे झगड़े, और सबसे बढ़कर?…उसका साथ देना।
एक रात, उसका दिल पूरी तरह टूट गया।
उसने फ़ोन उठाया…नंबर डायल किया।
“हेलो?”, नवनाथ
अश्विनी ने कांपती आवाज़ में कहा, “नवनाथ… क्या हम… अपने रिश्ते को एक और मौका दे सकते हैं? मैं तुम्हें बहुत मिस करती हूँ… मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ…”
दोनों तरफ़ एक पल की खामोशी…
नवनाथ ने धीरे से कहा, “मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता… यह हमारी गलती थी, हम दोनों को मिलकर इसे सुधारना होगा। अगर तुम ‘हाँ’ कहो… तो मैं अभी चला जाऊँगा।”
अश्विनी के गालों पर आँसू बहने लगे।
“हाँ… मैं तैयार हूँ।”
रात के 12 बज रहे थे।
नवनाथ ने कार ली और निकल गया।
ठंडी, सुनसान सड़क…
लेकिन उसके मन में बस एक ही आवाज़ थी…“मैं उसे वापस घर लाना चाहता हूँ।”
वह लगातार 5 घंटे गाड़ी चलाता रहा।
वह न रुका और न ही थका।
सुबह 5 बजे, वह अश्विनी के घर के दरवाज़े पर खड़ा था।
अश्विनी बाहर आई… डरी हुई, शर्मिंदा… लेकिन चेहरे पर राहत लिए।
उसके मम्मी-पापा ने दरवाज़ा खोला। नवनाथ ने विनम्रता से सिर झुकाया।
अश्विनी ने बैग उठाया।
कोई बात नहीं, कोई बहस नहीं।
दोनों जानते थे कि यह फैसला दिल से लिया गया था।
कार स्टार्ट हुई…और अश्विनी अपने घर—अपने असली घर की ओर चल पड़ी।
दोस्तों…
रिश्ते टूटते नहीं।
कभी-कभी आपको बस उन पर से धूल झाड़ने की ज़रूरत होती है।
सही समय पर उठाया गया एक छोटा सा कदम पूरी ज़िंदगी बचा सकता है…
नमोस्तुते!
स्वाती गाडेकर की FB पेज से साभार…
उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग की इतनी बड़ी लापरवाही खंभा कही भी लगा देते है परन्तु उसपर तार डालने के लिए इनके पास बजट नहीं होता पिछले 10 वर्षों से इनके पास कोई तार उपलब्ध नहीं है @aksharmaBharat जी ये आपका ही विभाग है @MVVNLHQ कृप्या ध्यान दें।
उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग की इतनी बड़ी लापरवाही खंभा कही भी लगा देते है परन्तु उसपर तार डालने के लिए इनके पास बजट नहीं होता पिछले 10 वर्षों से इनके पास कोई तार उपलब्ध नहीं है @aksharmaBharat जी ये आपका ही विभाग है @MVVNLHQ कृप्या ध्यान दें।
दक्षिणी दिल्ली: बुराड़ी के रहने वाले परिवार पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब उनकी 10 वर्षीय बच्ची के दिमाग ने लगभग काम करना बंद कर दिया। छोटी-छोटी बात भी उसे याद नहीं। खुद चलना-फिरना भी मुश्किल। हालत खराब होती गई।
जांच में पता चला कि लिवर फेल हो चुका है। शरीर में विषाक्त पदार्थों के संक्रमण की वजह से दिमाग में सूजन आ गई है। आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। उसकी यह हालत मोमोज जैसे फास्ट फूड ने की।
माता-पिता दोनों वर्किंग हैं। दिनभर काम के चलते जब घर पर नहीं होते तो बच्ची दादा से पैसे लेकर बाहर से मोमोज वगैरह लेकर आती और चाव से खाती। प्लाज्माफेरेसिस से जान बचने के बाद अब उसने मोमोज से तौबा कर ली है।
माता सावित्री माथुर बताती हैं कि उनके पति किशोर मोबाइल का काम करते हैं। घर चलाने के लिए वे भी मुखर्जी नगर में केयरटेकर की जाॅब करती हैं। उनकी दो बच्चियां हैं। बड़ी बेटी तान्या 10 वर्ष की है तो वहीं छोटी बेटी गौरी आठ वर्ष की है।
बच्चों के घर का बना खाना ही देते हैं। पति और मैं काम के सिलसिले में दिनभर बाहर ही रहते हैं। स्कूल से आने के बाद तान्या दादा से पैसे लेकर कभी मोमोज तो कभी चिप्स लाती थी। शुरुआत में वह चीजें भूलने लगी। थकान रहती।
बाद में उससे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था। पास के अस्पताल ले गए, जहां जांच के बाद पता चला की पीलिया काफी बढ़ा हुआ है। हालत इतनी खराब थी कि लगा कि अब बेटी को खो देंगे। यथार्थ हाॅस्पिटल माॅडल टाउन में भर्ती कराया।
पहले चिकित्सकों ने लिवर ट्रांसप्लांंट का सुझाव दिया, पर प्लाज्माफेरेसिस से बच्ची ठीक हो गई। बाल रोग विभाग के डाॅ. शैलेश शर्मा के मुताबिक दिल्ली के करीब 35 प्रतिशत बच्चों में फैटी लिवर के लक्षण मिल रहे हैं।
फास्ट फूड, स्क्रीन टाइम और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। अब कम उम्र में भी गंभीर लिवर फेल्योर के केस सामने आ रहे हैं, जैसा इस मामले में देखने को मिला।
पहले चिकित्सकों ने लिवर ट्रांसप्लांंट का सुझाव दिया, पर प्लाज्माफेरेसिस से बच्ची ठीक हो गई। बाल रोग विभाग के डाॅ. शैलेश शर्मा के मुताबिक दिल्ली के करीब 35 प्रतिशत बच्चों में फैटी लिवर के लक्षण मिल रहे हैं।
फास्ट फूड, स्क्रीन टाइम और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। अब कम उम्र में भी गंभीर लिवर फेल्योर के केस सामने आ रहे हैं, जैसा इस मामले में देखने को मिला।
#DainikJagran #Delhi #Momos