मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर पूरी बीजेपी छाती पीटने में लग गई है। गोदी मीडिया को भी लगा दिया है। मगर अपनी मूल गए।
ज़रा ग़ौर से सुनिए ये क्या कह रहे हैं। क्या राहुल गांधी की दादी को ये सम्मानपूर्वक याद कर रहे हैं।
ग़ालियां देने के मामले में संघियों का रिकॉर्ड सबसे ज़्यादा ख़राब है। ये तो संसद के अंदर तक ग़ाली-ग़लौज़ करते आए हैं।
और प्रधानमंत्री मोदी का तो कहना ही क्या। वे सबसे ज़्यादा ग़ालियां देने वाले प्रधानमंत्री के रूप में रिकार्ड बना चुके हैं।
💔 BREAKING NEWS
अत्यंत दुखद व अफ़सोसजनक!
अरुणाचल का वीर सपूत देश के लिए शहीद...
भारत-चीन सीमा पर तैनात भारतीय सेना के 32 वर्षीय जवान Lance Naik Ebet Paloh ने 19 अक्टूबर को उत्तरी सिक्किम क्षेत्र में कर्तव्य पथ पर अपने प्राणों की आहुति दी, जो भारतीय सेना की गजराज कोर की दूसरी अरुणाचल स्काउट रेजिमेंट से ताल्लुक रखते थे।
सवाल यह है...
क्या हमारी चीन के साथ WAR शुरू हो चुकी है ?
अगर हां तो सरकार इसे स्वीकार क्यों नहीं करती ?
अगर न तो इस 32 वर्षीय युवा की शहादत कैसे हुई ?
जब देश को फ़र्क़ ही नहीं पड़ रहा कि चीन कितना अंदर घुस आया है, तो हमारे जवान आख़िर किसके लिए जान दे रहे हैं?
ऐसी सरकार को इन शहीदों को श्रद्धांजलि देने का भी हक़ नहीं है।
अश्रुपूरित श्रद्धांजलि! 🙏🇮🇳
शर्मनाक 😡
ITBP DG का बड़ा खुलासा.... 50 साल पुरानी तकनीक से लड़ रही है हमारी सेना,
और चीन 6-7 किमी अंदर घुस बैठा है!
सबसे शर्मनाक बात यह है कि ITBP के DG शत्रुजीत कपूर ने खुद माना है कि चीन ने अपनी सेना का जबरदस्त Modernization कर लिया है, जबकि हमारी सेना के पास आज भी 50 साल पुरानी तकनीक और पुराने हथियार हैं।
चीन से पारंपरिक युद्ध में मुकाबला करना आज बेहद कठिन हो गया है।
जब रूस के मुकाबले कई गुना छोटा यूक्रेन सालों से एक महाशक्ति से डटकर लोहा ले सकता है, तो खुद को 'विश्वगुरु' कहने वाली सरकार हमारी सेना को आधुनिक हथियारों से लैस क्यों नहीं कर पा रही है?
अरुणाचल प्रदेश के टक्सिंग इलाके में चीनी सेना (PLA) एलएसी से 6-7 किलोमीटर अंदर घुसकर तंबू गाड़ चुकी है।
हमारे पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर रोक लगा दी गई है, और सरकार सिर्फ़ अपनी झूठी छवि चमकाने में व्यस्त है।
आखिर सरकार सेना के आधुनिकीकरण पर पैसा खर्च क्यों नहीं करती?
इन फिजूलखर्ची और प्रचार के कामों के बिना देश का काम आसानी से चल सकता था...
अरबों रुपये के सरकारी विज्ञापनों और प्रधानमंत्री के भव्य प्रचार अभियानों के बिना।
चुनिंदा पूंजीपति मित्रों (अदानी-अंबानी) के लाखों-करोड़ों रुपये के लोन माफ करने और उन्हें फायदा पहुँचाने के बिना।
दिखावटी इवेंट्स, राजनीतिक समारोहों और विदेश दौरों पर पानी की तरह पैसा बहाने के बिना।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ अंदरखाने राजनीतिक बैठकें करने के बिना।
राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ ऐसा भयंकर खिलवाड़ देश बर्दाश्त नहीं करेगा।
सीमा पर जवान अपनी जान हथेली पर ले कर बैठे हैं और सरकार उन्हें 50 साल पीछे की तकनीक से लड़वा रही है।
सरकार को प्रचार और ढोंग बंद करके तुरंत सेना को अत्याधुनिक हथियारों से लैस करना चाहिए !
आम व्यक्ति किसी देश की एम्बेसी से वीजा लेता है, तो उसके पासपोर्ट नंबर की एंट्री हो जाती है।
फिर एयरपोर्ट पर,जैसे ही वह इमिग्रेशन पर खड़ा होता है, वहाँ -पासपोर्ट औऱ वीजा दोनों स्केन होते है। उसका डेस्टिनेशन, फ्लाइट डिटेल्स, सब कुछ विदेश मंत्रालय की निगाह मे होता है।
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पर अगर वह व्यक्ति सांसद - MP है -
तो उसके पास टाइप D डिप्लोमेटिक पासपोर्ट है।
अब उसे किसी भी यात्रा के लिए सरकार से प्रायर "पॉलिटिकल क्लियरेंस" की जरूरत है।
आवेदन कम से कम यात्रा के 3 हफ्ते पहले दिया जाता है। जिसे पूरी ऐटेनरी पढ़, समझ, जानकर ही - सरकार अनुमति देती हैं।
फिर संबंधित एम्बेसी को "पॉलिटिकल क्लियरेंस" की सूचना दी जाती है, ताकि उस देश मे हमारी एम्बेसी, पॉलिटिकल क्लियरेंस की शर्तो नियमों का कम्प्लायंस पक्का करवा सके।
इसके बाद ही, किसी MP की विदेश यात्रा संभव हो पाती है।
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अब अगर वह LOP हैं
तो आपने सुरक्षा कर्मी भी दिए है। जो साथ घूम रहा है। वह सरकारी कर्मचारी है, पर असल मे सरकारी खबरी है। यह बात तो ऑफिशियल हैं, सबको पता है।
अनऑफिशियल, उसके स्टाफ मे आपने तमाम आदमी घुसा रखें है। फोन मे पैगासस डाल रखा है। यात्रा की इटेनरी आपके पास है, तो उसके होटल, कमरे मे बग डाले होंगे।
कई दर्जन जासूस सादे कपड़ो मे होंगे।।
फोटो बाजी हो रही होगी।
दूरबीने लगी होंगी।
(न लगी, तो आप गधे हो)
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अब त्रिवेदी जी की मानी जाये, तो राहुल गाँधी, बिना पासपोर्ट, बिना वीजा, बिना मोदी गवर्मेँट की पॉलिटिकल क्लियरेंस के - शायद किसी स्मगलर की डोंगी मे बैठकर, कोस्ट गार्ड से बच बचा के किसी "अज्ञात" देश गए है???
औऱ "संदिग्ध "लोगो से मिल रहे है??
जिनकी पहचान, फोटो, खबर कुछ भी नहीं।
तो वो नहीं , आपका पूरा गैंग पप्पू है।
यह तो त्रिवेदी जी के विदेश मंत्रालय, इंटेलीजेंस सर्विसेज, तमाम खुफिया तंत्र, औऱ उस देहाती जेम्स बॉन्ड के गाल पर धूमधाम से मारा गया तमाचा है।
यदि त्रिवेदी जी की बात सत्य है, तो उन्हें ऐसी भोंदू सरकार से तुरंत इस्तीफा मांगना चाहिए।
🙏😊
"चीन बहुत आगे निकल चुका है,
उसका मुकाबला हम नही कर सकते।"
ये सिर्फ सेना का बयान नही है, मोदी जी की नाकामी का कुबूलनामा है।
अडानी को देश सौंपने की जगह, और पार्टियां तोड़ने की जगह अगर सेना को Mordern Warfare के लिए तैयार किया गया होता तो क्या आज ऐसे हालात होते?
🔥 कमाए आम जनता, उड़ाए नेता। हमारे टैक्स से किसकी जेब भर रही है?
हमारे चुने हुए नेताओं की सैलरी देखिए...
• राष्ट्रपति: ₹5,00,000 प्रति माह
• उपराष्ट्रपति: ₹4,00,000 प्रति माह
• प्रधानमंत्री: लगभग ₹2,80,000 प्रति माह
• केंद्रीय मंत्री: लगभग ₹2,86,000 प्रति माह (मूल वेतन और भत्तों सहित)
• सांसद (MP): लगभग ₹2,86,000 प्रति माह (मूल वेतन, निर्वाचन क्षेत्र और कार्यालय भत्ता सहित)
• विधायक (MLA): राज्यों के अनुसार औसतन ₹90,000 से ₹2,30,000 प्रति माह
▪️जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली मुफ्त सरकारी सुविधाएं...
• मुफ्त सरकारी आवास और बिजली-पानी की सुविधाएँ मिलती हैं।
• मुफ्त टेलीफोन, इंटरनेट, कार्यालय स्टाफ और नौकर-चाकर की सुविधा मिलती है।
• भारतीय रेलवे द्वारा मुफ्त प्रथम श्रेणी/एसी यात्रा और विमान यात्रा के कूपन व सुविधाएँ मिलती हैं।
• आने-जाने के लिए सरकारी वाहन और कड़े सुरक्षा गार्ड (VIP सिक्योरिटी) मिलते हैं।
• जनप्रतिनिधियों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए उच्च स्तर की मुफ्त मेडिकल सुविधाएँ मिलती हैं।
▪️पेंशन लाभ: एक दिन भी पद पर रहने पर जीवनभर की भारी-भरकम सरकारी पेंशन और पूर्व-सांसदों को भी मुफ्त यात्रा सुविधाएं।
हमें क्या मिलता है....
• न्यूनतम मजदूरी (अकुशल श्रमिक): औसतन ₹300 से ₹900 प्रतिदिन
• मनरेगा (MGNREGA) श्रमिक: औसतन ₹260 से ₹400 प्रतिदिन
हमारी कमाई का हिस्सा GST, इनकम टैक्स, रोड टैक्स, और पेट्रोल-डीजल ड्यूटी में कट जाता है।
नेता और मंत्री अपनी इस ऐशो-आराम की जिंदगी पर जो पानी की तरह पैसा बहाते हैं, वह सब हमारी और आपकी खून-पसीने की कमाई यानी टैक्स का होता है।
जनता के पैसों से इन्हें सब कुछ मुफ्त मिलता है, लेकिन इसके बदले आम आदमी को क्या मिलता है?
सिर्फ़ कमरतोड़ महंगाई, रिकॉर्ड बेरोजगारी और अपने ही हक की आवाज उठाने पर पुलिस की बर्बर लाठियां और पेलेट गन!
आज हर आम इंसान इस शोषक व्यवस्था से बुरी तरह परेशान है।
तो क्या सच में अब इस देश में एक आर-पार के बड़े बदलाव या क्रांति की ज़रूरत नहीं है?
सभी देशवासियों को मेरा नमस्कार!, मैं प्रबल प्रताप हूँ सुप्रीम कोर्ट से, मैंने 10 जुलाई को CJI वाली घटना को अंजाम इसलिए दिया था ताकि न्यायपालिका में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार पर खुली चर्चा देश में शुरू हो सके,
और अब मैं बहुत बड़े स्तर पर भारतीय न्याय व्यवस्था परिवर्तन अभियान आरंभ करने जा रहा हूं, जिसमें मुझे सभी देशवासियों के सहयोग की आवश्यकता होगी,
हमारा उद्देश्य ये है कि लोगों को कोर्ट जाने से डर खत्म हो और सभी को न्याय समय पर मिल सके,
आप सभी लोगों से मेरी प्रार्थना है कि इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि जो लोग हमसे जुड़ना चाहते हैं, वे जुड़ सकें,
इसके बाद हम अपने इस अभियान और संगठन HRA के बारे में सारी बातें सामने डिटेल में रखेंगे और अपने बारे में भी सारी बातें बताऊंगा,
यह अभियान देश के उस मुद्दे को सुधारने वाला है, जिसपे कोई ध्यान नहीं देता है, कोई वकील भी नहीं, नेता भी नहीं, और आम जनता पिसती रहती है,
इसलिए मेरा आप सभी देशवासियों से अनुरोध है कि आप इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और इस न्याय के युद्ध में हमारे साथ खड़े हों,
और जिस तरह हो सके, हमारा सहयोग करें,
मेरी सभी देशवासियों से अपील है कि जुडिशियल सर्वेंट से काम लेने का वक्त आ गया है, आप हमारा सहयोग करें,
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भाषा में कहें तो
"तुम मेरा सहयोग दो, मैं तुम्हें न्याय देने वाली न्यायपालिका दूँगा"
Waiting for your response.
तब तक के लिए जय हिंद! नमस्कार! सभी साथियों को।
आपलोगों ने मुझे इतना प्यार दिया, उसके लिए दिल की गहराइयों से बहुत बहुत धन्यवाद!
@PMOIndia@firstpost@timesofindia@htTweets
#prabalpratap #CJI_Suryakant
दिल्ली में NSUI की साथी @Ritubarala जी के साथ की गई बर्बरता के मामले में जयपुर पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही है।
इसके विरोध में राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष @GovindDotasra जी और NSUI अध्यक्ष @VinodJakharIN जी समेत राजस्थान के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता धरने पर बैठे हैं।
रितु बराला जी को न्याय दिलाने और दोषियों की जवाबदेही तय करवाने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
न्याय की इस लड़ाई में हम पीछे हटने वाले नहीं हैं, अन्याय के खिलाफ मजबूती से लड़ते रहेंगे ✊
📍 राजस्थान
देश की जनता को याद रखना चाहिए
कैसे एक बेटी को बेटी बचाओ का नारा देने वालों ने बदनाम किया
फिर भी मुझे गर्व है @nehafolksinger पर जिन्होंने हिम्मत नहीं हारी और डटकर मुकाबला किया गोदी मीडिया के चैनल @ABPNews ने मांगी माफी
लेकिन अब मुलाकात होगी कोर्ट में
Follow kijiye - @rajendersingh56
ताकि देश की किसी भी बेटी के इंसाफ के लिए मैं आवाज़ उठा सकूं और वो आवाज़ दूर तक जाए इसलिए follow kijiye
🚨 ख़तरे की घंटी कब की बज चुकी है
रुपया बचाने के लिए सरकार ने क्या-क्या किया?
सोने पर रोक, डॉलर की बिक्री, फिर भी रिज़र्व में 59 अरब डॉलर की गिरावट!
रुपये को बचाने के लिए मोदी सरकार और RBI के अब तक के कदम:
▪️ 10 मई: PM मोदी की अपील, एक साल तक सोना न खरीदें और विदेश यात्रा टालें
▪️ सोने-चाँदी पर 3% IGST, फिर 13 मई को आयात शुल्क 6% से 15%
▪️ जून से RBI का स्वैप विंडो। सरकार के मुताबिक अगस्त तक 73 अरब डॉलर जुटे
▪️ 8 जून से RBI ने अनुमानित 75–80 अरब डॉलर बेचे (आधिकारिक आँकड़ा नहीं)
▪️ 10 अक्टूबर: सरकारी तेल कंपनियों के लिए डॉलर विंडो, डेरिवेटिव पर 20% रिस्क रिज़र्व
▪️ 16 अक्टूबर: SEBI के निर्देश पर Gold FoF में नया निवेश बंद
नतीजा? 4 सितंबर को रिज़र्व 785.71 अरब डॉलर था, जो अब 726 अरब डॉलर है। लगातार पाँच हफ़्ते गिरावट आई, क़रीब 59.7 अरब डॉलर। इस महीने रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 96.96 के क़रीब पहुँचा और अभी 94.96 पर है।
भाई जब जनता से सोना और विदेश यात्रा छोड़ने को कहना पड़े और निवेश के रास्ते बंद हों, तो हालात "सब ठीक है" वाले नहीं हैं।
अगर कदम सही थे, तो रिज़र्व क्यों घट रहा है?
#Rupee #RBI
इस वीडियो को देखिए - वाराणसी, UP से है।
महिला बता रही है - "आने दे रहे हैं, जाने नहीं दे रहे हैं। बोल रहे हैं भाषण सुन के जाना है। हम क्यों भाषण सुनें? गांव में काम है।"
ना जाने दो तो बोल रहे हैं - "अरेस्ट कर देंगे, लाठीचार्ज कर देंगे।"
ये है योगी जी का रामराज्य, जहाँ भाषण सुनना अनिवार्य है, नहीं सुना तो FIR, अरेस्ट और लाठीचार्ज की धमकी!
लोगों को बंधक बनाकर भाषण सुनाया जा रहा है।
मिलते हैं कोर्ट में... घटिया न्यूज वालों को सीधा सा जवाब दिया है। एक लड़की ने हिम्मत करके जवाब दिया दूसरी कोई होती तो घर में रोते हुए जाने क्या कदम उठा लेती।
इन मीडिया वालों को किसी की जान की परवाह नहीं है। आज नेहा जी को पूरा समर्थन है। बात अस्मिता की आएगी तो मैं हमेशा साथ हूँ।
ये video देखकर किसी पत्थर का दिल भी पिघल जाएगा, लेकिन ABP News वालों का नहीं पिघला।
नेहा सिंह राठौर phone पर ABP के Rajneesh Ahuja से पूछ रही हैं — "Sir, मैं कोई call girl नहीं हूँ, मैं कोई prostitute नहीं हूँ, मेरा कोई hostel नहीं है जहाँ sex racket चलता है। आपको पता है मैं कौन हूँ?"
जवाब आता है — "Singer।"
यानी channel को पता है कि वो एक singer है। फिर भी उसके नाम और photo के साथ "sex racket, police का छापा" वाली खबर चला दी। ये गलती नहीं है, ये जानबूझकर की गई बदनामी है।
नेहा बार-बार बस एक ही सवाल पूछती रही — "मेरे hostel का नाम बता दीजिए, जहाँ छापा पड़ा है। आपके reporter वहाँ गए होंगे, बता दीजिए।"
और सामने से क्या जवाब मिला?
"Madam, मैं पता कर लेता हूँ।"
फिर phone काट दिया गया।
सोचो ज़रा। एक लड़की रोते-रोते, काँपती आवाज़ में अपनी इज्ज़त की भीख माँग रही है, और देश का बड़ा news channel phone काटकर भाग जाता है। खबर चलाते वक्त reporter नहीं भेजा, photo लगाने से पहले एक बार check नहीं किया, और जब लड़की खुद phone करके पूछ रही है, तो बात करने की भी हिम्मत नहीं है।
इसी ABP ने बाद में चुपचाप माफ़ी माँग ली कि खबर "तथ्यों के आधार पर गलत" थी।
वाह! पहले पूरे देश के सामने एक लड़की को sex racket से जोड़ दो, photo लगा दो, raid की footage चला दो। फिर जब वो court जाने की बात कहे, तो दो line की माफ़ी लिखकर डाल दो। ना उस आदमी का नाम जिसने खबर बनाई, ना किसी पर कोई कार्रवाई।
यही है आज का RSS-BJP वाला Godi media।
जो लड़की गाने में सरकार से सवाल पूछे, उसको पहले notice भेजो, फिर FIR करो, और जब वो फिर भी ना झुके, तो उसके character पर हमला कर दो। क्योंकि इनको पता है, एक लड़की को बदनाम करना सबसे आसान हथियार है।
नेहा ने बिल्कुल सही कहा था — जो लड़कियाँ विरोध नहीं कर सकतीं, बोल नहीं सकतीं, उनको तो ये media आत्महत्या तक पहुँचा देगा।
इसलिए ABP News को सिर्फ़ शर्म नहीं आनी चाहिए, इस पूरे Godi media का boycott होना चाहिए। इनके channel बंद करो, इनकी TRP बंद करो, इनके झूठ को फैलाना बंद करो।
ये journalism नहीं है। ये सत्ता के इशारे पर किसी की बेटी की इज्ज़त नीलाम करने का धंधा है।
नेहा, तुम अकेली नहीं हो। तुम phone पर रो रही थीं, लेकिन आज पूरा देश तुम्हारे साथ खड़ा है। Court में इन्हें जवाब देना ही पड़ेगा।
बहुत कुछ कहना है मगर इस वक़्त यह देख कर अफ़सोस से भर गया हूँ। शर्म आ रही है। गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है। इसका कभी इस हवाले कभी उस हवाले से बचाव करने वाले भी इसमें शामिल हैं। यह कोई मामूली ग़लती तो नहीं जो हो जाती है। जो गोदी मीडिया वोट चोरी का बचाव कर सकता है उससे मुझे उम्मीद नहीं कि इसके ख़िलाफ़ बोलेगा। जिस चैनल का नाम नेहा ने लिया है उसे जवाब तो देना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ, कैसे हुई? क्या गोदी मीडिया का कोई भी चैनल इस पर डिबेट करेगा? रिजीम चेंज की नौटंकी वाले क्या एक महिला के साथ हुई इस घृणित कार्रवाई पर बहस कर पाएंगे कि उन्हें और कहाँ तक गिरना है और कब तक इस खाई में गिरते रहना है?
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी इतने न गिरो हैं कि अपने ABP गोदी मीडिया से देश की लड़की नेहा सिंह राठौड़ के सम्बंध में बदनाम करने के लिए सेक्स रैकेट के झूठी खबरें चलवा रहे हैं।
ABP न्यूज़ के रजनीश आहूजा थोड़ी सी शर्म करले तेरे घर में भी बहन बेटी होगी उसे भी कोई चैनल सेक्स रैकेट में रखेगा तो तुझे कैसा लगेगा।
@narendramodi@ABPNews @IamRajnishAhuja
प्रिय CJI सूर्यकांत!
सत्ता में बैठे लोगों की चापलूसी में इतने अंधे मत हो जाइए कि आप संविधान को ही भूल जाएं!
CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की है, "अगर हर नागरिक पत्रकार बन जाए, तो इससे सभी के लिए मुश्किलें पैदा हो जाएंगी।"
CJI सूर्यकांत का यह बयान चौंकाने वाला है! 🤯
आपके इस दावे पर—कि "अगर हर नागरिक पत्रकार बन जाए, तो इससे सभी के लिए मुश्किलें पैदा हो जाएंगी"—
ज़रा एक पल रुकिए और सोचिए:
किसके लिए मुश्किलें?
> उस नागरिक के लिए जिसने अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने का वीडियो बनाया—या फिर सत्ता तंत्र और पुलिस के उन क्रूर अधिकारियों के लिए?
> उस छात्र के लिए जिसने प्रदर्शनकारियों को घसीटकर बसों में ठूंसे जाने का फुटेज रिकॉर्ड किया—या फिर सत्ता तंत्र और पुलिस के उन क्रूर अधिकारियों के लिए?
> उस मोबाइल फोन के लिए जिसने वह सब कुछ कैद कर लिया जिसे 'गोदी मीडिया' (पालतू मीडिया) ने दिखाने से इनकार कर दिया था—या फिर सत्ता तंत्र और पुलिस के उन क्रूर अधिकारियों के लिए?
प्रिय CJI, ये वीडियो और तस्वीरें लोकतंत्र के लिए समस्या नहीं हैं; ये एक 'अन्यायी शासन' के लिए समस्या हैं।
जब TV एंकरों, अखबारों और पत्रकारों ने सवाल पूछना बंद कर दिया, तो आम भारतीयों ने अपने फोन उठाए और खुद ही यह काम करना शुरू कर दिया।
हर नागरिक पेशेवर पत्रकार नहीं है, लेकिन हर नागरिक के पास 'अनुच्छेद 19' (Article 19) के तहत अधिकार हैं, जो बोलने और अभिव्यक्ति की आज़ादी देते हैं। आपको इस अनुच्छेद से जुड़ी संविधान सभा की बहसों को फिर से देखना चाहिए। संविधान निर्माताओं ने आपको इसका संरक्षक बनाया था, लेकिन ऐसा लगता है कि आप इसके विनाशक बनने के लिए उत्सुक हैं।
प्रिय चीफ जस्टिस, 'संविधान' के साथ खड़े हों—'सत्ता' के चरणों में गिरकर चापलूसी करने वाले न बनें। 🙏🗿🔥
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CJI Surya Kant, Justice Surya Kant, Supreme Court, Journalism