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जब हिंदी भाषी सांसद मराठियों से मराठी में बात कर सकते हैं तो फिर मराठी हिंदी भाषा में क्यों नहीं? नेपाल से रेस्क्यू किए गए मराठी लोगों को सीतामढ़ी में आसरा दिया गया,खाना खिलाया गया सीतामढ़ी सांसद ने इनके परिजनों से मराठी भाषा में बात की और इन्हें सुरक्षित घर पहुँचाने का भरोसा दिया। बिहारी हमेसा देश जोड़ने का बात करते हैं और मराठी देश तोड़ने का। अब लोग जब घर जाएँगे तो इनके मन जरूर हिंदी भाषियो के लिए मन में सम्मान होगा।
मराठी लोग बिहारी से हमेशा भाषा के नाम पर मारपीट करते हैं उन्हें एक बिहारी से सीखना चाहिये।
देखिए कैसे हमारे सीतामढ़ी के सांसद नेपाल के त्रासदी में फंसे हुए मराठी लोगो को जो नेपाल से चलकर सीतामढ़ी पहुचे है उनकी मदद कर रहे हैं।
आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।
साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
आपकी अपनी,
दिव्या मित्तल
A scientific roadmap is turning Delhi’s landfill sites into reclaimed land.
So far, 85-95 acres of land reclaimed across Okhla, Bhalswa and Ghazipur bringing a cleaner environment and better quality of life for nearby communities.
This is the BJP’s working model: fulfil today’s promises, plan for tomorrow with four new Waste-to-Energy plants to process Delhi’s daily waste.
#ViksitDelhi
Prayers for Nepal: we stand in solidarity with the people of Nepal 🇳🇵 in this hour of crisis. My heartfelt condolence to the families who lost their loved one.
My sand art at Puri beach in Odisha. 🙏
#PrayForNepal#StandWithNepal#Nepal
नेपाल : हर दृश्य डरावना है। नेपाल-तिब्बत सीमा पर एक घर बाढ़ के बीच में
आ गया, चारों तरफ़ उठे चक्रवात में फंसे वाहन चक्कर काट रहे है, और लोग बचने के लिए बालकनियों, छतों पर खड़े है। पता नहीं कोई बच पाया होगा या नहीं।
“हे ईश्वर सबकी रक्षा करना”
VC : @WeatherMonitors