बड़ा ज्ञाता तो नहीं हूं मैं. लेकिन, निरंतर जानने क�� प्रयास करता हूं. और ऐसे में, जब पटना हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान आपकी चर्चा हो, तो सुखद अनुभूति होती है. आज की ही बात है. एक वरिष्ठ न्यायाधीश की अदालत में Validity Of Act पर ठीक-ठाक उम्र वाले एक वकील साहब बहस कर रहे थे. सरकार की योजना को चैलेंज कर रहे थे.
जज साहब ने संविधान में कहां की बात कर दी. वकील साहब थोड़ा लड़खड़ा गए. तब जज साहब ने पास ही खड़े दूसरे वकील साहब, जो लाइव सिटीज के पैनलिस्ट भी हैं, उनसे कहा- इन्हें आप ज्ञानेश्वर के साथ अपनी कक्षा में कभी-कभी शामिल कर लिया करें, देश- दुनिया की बहस और बदलाव के बारे में तब बिलकुल अपडेटेड रहेंगे.
#PatnaHighCourt #ज्ञानेश्वर_की_डायरी
बिहार में केटरिंग कंपनी बेल्ट्रोन को मैनपावर दे रहा है, वो भी शिक्षा विभाग में ऑफिसर लेवल का। और सालाना आमदनी है सौ करोड़ से ऊपर का।
बेल्ट्रोन का धांधली भयंकर लेवल का है…
@Gyaneshwar_Jour सरकार से या बेल्टरोन या उर्मिला से डायरेक्ट सवाल कीजिए।पोस्ट कर रहे ह बहुत अच्छा बात है।मुझे पूरा बिस्वास है कि आप वीडियो के माध्यम से भी सवाल पूछिएगा| तब और खुशी होगी जब आप सरकार से हमारी मांग डायरेक्ट सरकार से पूछिएगा । बहुत ध्यानवाद हमारी मांग को उठाने के लिए @Gyaneshwar_Jour
#Beltron में खोट तो है. नहीं तो नाराजगी और असंतोष इतना नहीं होता. हमने कल बताया था, बिहार सरकार मैनपावर आउटसोर्सिंग में बेल्ट्रॉन की मोनोपॉली तोड़ने पर विचार कर रही है. विभागों को दायित्व मिल सकता है. बस इस सूचना ने बेल्ट्रॉन से संबद्ध हजारों कर्मियों को खुश कर दिया. कमेंट्स से स्पष्ट होने लगा कि कथित शोषण से ये मुक्ति चाहते हैं. लेकिन, बेल्ट्रॉन का कंपनियों के साथ गड़बड़झाला ऐसा है कि पूछिए मत. आरोप और शिकायतें सुना रहे लोग, सरकार को ध्यान देना चाहिए.
हमने तो कहा ही है बिहार सरकार अभी परिवर्तन की अवस्था में है. इसलिए, नई सरकार के बनने के बाद सच-झूठ / जाल-फरेब सब बयां करेंगे. खैर, कल के पोस्ट पर आई टिप्पणियों के अवलोकन से ये बातें सरकार के संज्ञान में जरुर आनी चाहिए –
1. बहाल कर्मी बेल्ट्रॉन की वर��तमान व्य��स्था से मुक्ति चाहते हैं. वह बेल्ट्रॉन को एसएससी की तरह जरुर मानने को तैयार हैं, लेकिन किसी निजी कंपनी के गुलाम नहीं होना चाहते.
2. कर्मियों की आउटसोर्सिंग की जिम्मेवारी अलग-अलग विभागों को मिले, तो ये अधिक खुश होंगे. वे सरकार को मालिक मानना चाहते हैं.
3. वेतन भुगतान में विसंगति की शिकायत है. लेकिन इसका निपटारा इतना आसान नहीं है, यह हम भी समझते हैं. पर, सरकार से विचार की अपेक्षा सभी रखते हैं.
4. ���न्हें गुस्सा तब आता है, जब बेल्ट्रॉन कहता है, कंपनी से बात करो. और, कंपनी इन्हें सुनने को तैयार नहीं होता. कोई रिस्पांस सिस्टम नहीं है.
5. शिकायत है, सरकार को नियमानुकूल जांच करना चाहिए जीएसटी मामले की. वैसे भी मानदेय कम है, फिर 18 प्रतिशत की जीएसटी कटौती इसलिए हो रही, क्योंकि ज्ञात- अज्ञात कारणों से सरकार ने इन्हें निजी कंपनी के हवाले कर रखा है.
6. कम मानदेय, फिर भी बहुत देरी से भुगतान- बड़�� दर्द है. बेल्ट्रॉन कंपनी को पैसा देती है, फिर कंपनी अपनी सुविधा देखती है.
7. बहुतों ने कमेंट्स कर यह शिकायत की है कि फरवरी महीने का पेमेंट अब तक नहीं हुआ है. होली-ईद-नवरात्र सब ऐसे ही. जबकि इन्हीं डाटाकर्मियों ने सरकार के आदेश पर सभी परमानेंट कर्मियों की सैलरी होली के कारण फरवरी माह में ही तैयार की थी. सोचें, दूसरे की सैलरी बना रहे, खुद नहीं पा रहे.
8. बहुत सारे यह भी बता रहे कि उनका यूटीआर मार्च के पहले हफ्ते के बाद ही आ गया, ल���किन पेमेंट अब तक अप्राप्त है.
9. नौकरी की आस लगाए आवेदक बेल्ट्रॉन से इस बात की अपेक्षा भी रखते हैं कि वह 4808 क्वालिफाइड कैंडिडेट्स का पैनल तुरंत जारी करे.
आज के लिए इतना ही. इस पोस्ट के बाबत बेल्ट्रॉन व अन्य किसी भी पक्ष का जवाब मिलता है, तो उसे भी अवश्य अपडेट करेंगे.
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बिहार में सालों से Manpower Outsourcing का मतलब एक ही नाम रहा #Beltron.
सरकारी दफ्तरों में कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर डेटा एंट्री तक, हजारों युवा बिहार सरकार के तमाम विभागों का काम संभालते हैं.
अब खबर है कि सरकार Beltron की ये मोनोपॉली तोड़ने जा रही है. यानी अब सिर्फ एक एजेंसी नहीं, कई कंपनियां इस काम में आएंगी.
सवाल ये है- क्या इससे सिस्टम बेहतर होगा? या फिर बेल्ट्रोन कर्मियों की नौकरी और सुरक्षा पर नया खतरा खड़ा होगा?
हकीकत ये है कि ये कर्मचारी सालों से कम सैलरी, अस्थायी नौकरी और अनिश्चित भविष्य के साथ काम कर रहे हैं. और अब अगर नया सिस्टम आया, तो सबसे पहले असर इन्हीं पर पड़ेगा. है कि नहीं?
सरकार कह रही है- प्रतिस्पर्धा आएगी, पारदर्शिता बढ़ेगी. लेकिन कर्मचारी पूछ रहे हैं- हमारी गारंटी कौन देगा?
तो असली मुद्दा यही है —
मोनोपॉली टूटनी चाहिए, या फिर सरकार को उनका समायोजन करना चाहिए?
सबसे सबसे बड़ा सवाल तो यही है न भाई.
@officecmbihar@NitishKumar@samrat4bjp
BREAKING NEWS
सरकार की तैयारी से स्पष्ट संकेत. Manpower Outsourcing में Beltron की मोनोपॉली तोड़ी जाएगी. खास के लिए बहुत हो चुकी बदनामी. अब विभागों को मिल सकता अधिकार.
#Beltron#ManpowerOutsourcing#DataOperator
#Beltron कर्मियों की बीस साल की प्रतीक्षा और धैर्य को पुरस्कृत करने का समय आ गया है. बिहार की नई सरकार को अपनी पहली उपलब्धि के रूप में बेल्ट्रॉन कर्मियों का समायोजन दर्ज करना चाहिए.
https://t.co/45zNpQSAGA
Manpower Outsourcing Tender: IAS लॉबी में जीत की जंग है. दोनों ओर ही नहीं कई ओर हैं. लेकिन, सरकार भी इस बार Beltron को Urmila के कब्जे से मुक्त कराना चाहती है. बहुत बदनामी हो चुकी है. केस-मुकदमे भी. अविनाश सबको नचा देते हैं, कहा जाता है. श्रम विभाग में भी मामला फंस गया है. मुक्ति को बंद फाइलें तैयार हो रही है, लेकिन खरीद के तराजू का वजन भी बहुत बढ़ा दिया गया है. देखिए, आगे-आगे क्या होता है ?
बहुत जल्द ही #Beltron कर्मियों सत्ता में बने कुछ नेताओं के कमर तोड़ने का काम भी करेगी।
जिन #बेल्ट्रॉन_कर्मियों को सरकार अनदेखी कर रही है वही कर्मी अब विधानसभा #election में बताएगी कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के लोग यदि सरकार के सभी योजना को चला सकती है तो सरकार गिरा भी सकती है।
#Beltron कर्मियों द्वारा पिछले #10_दिनों से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल को सरकार के माननीय अधिकारी द्वारा 11 सूत्री मांगों पर समर्थन बनाते हुए अग्रेत्तर कार्रवाई हेतु 10 अगस्त तक हड़ताल को स्थगित किया गया।
उक्त तिथि तक कार्य नहीं होती है तो यह हड़ताल आगे भी हो सकती है।@NitishKumar
#beltron कर्मी के अनिश्चितकालीन हड़ताल आज #10वां दिन भी जारी...
सरकार हमारी मांगों को मानने के लिए तैयार है लेकिन इन #बेल्ट्रॉन के बिचौलियों द्वारा निश्चित समय सीमा के अंदर कार्य पूर्ण करने हेतु बिना लिखित दिए हड़ताल वापस नहीं होगा।
@NitishKumar@Jduonline@BJP4Bihar@gadbihar
बेल्ट्रॉन द्वारा कार्यरत सभी आशुलिपिक, प्रोगामर, डाटा एंट्री ऑपरेटर एवं आईटी ब्वॉय/गर्ल से अनुरोध है कि बेल्ट्रॉन द्वा��ा संचालित सभी संघ यथा विशाल कुमार, अशोक कुमार यादव, नीतीश झा, रामनारायण प्रसाद आदि सभी एकजुट होकर, एक मंच पर, अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल है।
सभी सहयोग करें