अब आदमी मुल्ला हो और G में क्रांतिकारी बनने का कीटा ना काटता हो तो बेकार है।
अब उदाहरण के लिए रफ़ीक चचा को देखलो, रोड ख़राब थी और इन्होंने वीडियो बनाकर डाल दिया।
सोचे थे वीडियो वायरल होने के बाद थोड़ी सहनभूति मिलेगी लेकिन क्या मिला? पुलिस का लट्ठा 😂
इसीलिए बार बार कहता हूँ की ये कांग्रेस की सरकार नहीं है ये BJP की सरकार है इसलिए अपने अंदर के कीड़ों को जगाने की कोशिश मत करो।
डबल इंजन-ट्रिपल इंजन लगाकर भी प्रदेश की राजधानी के रेलवे स्टेशन का ये हाल है। प्रदेश में मानसून अभी शुरू हुआ है और सरकारी भ्रष्टाचार तो थोड़े से पानी में ही ऊपर आने लगा है।
रायपुर जंक्शन
नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2026 को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया था।
लेकिन 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेस वे में 2 महीने बाद ही बड़े-बड़े गड्ढे हो गए।
ये दिखाता है कि इस एक्सप्रेस वे को बनाने में जमकर भ्रष्टाचार और पैसों का बंदरबांट किया गया है।
ये पहला ऐसा मामला नहीं है, पूरे देश में पुल हो या सड़क, हाईवे या पानी की टंकी, रेलवे स्टेशन हो या एयरपोर्ट की छत- हर ओर इंफ्रास्ट्रक्चर ढह रहा है।
कुल मिलाकर बात साफ है कि मोदी सरकार देश और जनता के लिए घातक है।
Delhi Police physically assaulted two young boys for setting up a library at Jantar Mantar.
These boys just wanted people to read books at the protest site. Why did the police assault them?
I’ve always been a huge fan of Iranian cinema but this is something else !
Never imagined that in the middle of a war, Iran would be producing high-quality, pro-level short films, directly taking on Donald Trump and Israel.
हमें किसी के “वंदे मातरम्” पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता। और “वंदे मातरम्” का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है, इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर “दुर्गा माता” से तुलना की गई है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। साथ ही “माँ, मैं तेरी पूजा करता हूँ” यही वंदे मातरम् का अर्थ है। यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है। इसलिए किसी को उसकी आस्था के खिलाफ कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। क्योंकि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) देता है।
वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना अलग बात है। मुसलमानों की देशभक्ति के लिए किसी के प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी कुर्बानियाँ इतिहास के सुनहरे पन्नो में दर्ज हैं।
हम एक खुदा (अल्लाह) को मानने वाले हैं, अल्लाह के सिवा न किसी को पूजनीय मानते हैं और न किसी के आगे सजदा करते हैं। हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क (खुदा के साथ किसी को शामिल करना) कभी स्वीकार नहीं!
#ArshadMadani
एक शिखर धवन नामी पूर्व क्रिकेटर है। ईडी ने इसकी क़रीब पांच करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की और अगले रोज़ वो धीरेंद्र शास्त्री की हिंदू राष्ट्र निर्माण यात्रा में शामिल हो गया। अब ईडी उस पर आगे की कार्रावाई करेगी?