संघर्ष के हर दौर में मजबूती से साथ खड़े रहने वाले साथियों की शुभकामनाएं सिर्फ बधाई नहीं, मेरी ऊर्जा और हौसला है।
आप सभी का स्नेह, समर्थन, और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है... दिल से शुक्रिया🙏
साधारण से असाधारण होने की कहानी…
एक छोटे से कांग्रेस कार्यकर्ता से शुरू हुआ सफर—आज राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तक पहुँचा है।
हम बात कर रहे हैं गोविंद सिंह डोटासरा की।
जमीनी राजनीति से शुरुआत की, जनता का विश्वास जीता और लगातार आगे बढ़ते गए। पंचायत समिति सदस्य बने, प्रधान की जिम्मेदारी संभाली, फिर लगातार चार बार विधायक चुने गए और कांग्रेस सरकार में शिक्षा मंत्री रहे।
आज वे राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में संगठन की कमान संभाल रहे हैं और राजस्थान कांग्रेस के सबसे लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहने वाले नेताओं में शामिल होने जा रहे हैं।
उनकी पहचान सिर्फ पदों से नहीं, बल्कि मेहनत, संघर्ष, बेबाकी, जमीनी जुड़ाव, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और संगठन को मजबूत करने की क्षमता से बनी है।
आज उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
ईश्वर उन्हें स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन प्रदान करें और वे इसी तरह कांग्रेस के हर कार्यकर्ता को साथ लेकर संगठन को मजबूती देने और जनता की आवाज़ को बुलंद करने का काम करते है ।
यह सिर्फ राजनीतिक सफर नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और जनता के विश्वास की असाधारण कहानी है।
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं, गोविंद सिंह डोटासरा जी। 🌹
हर कार्यकर्ता का सम्मान, हर कार्यकर्ता का साथ—यही मजबूत संगठन की पहचान है।
@GovindDotasra@OfficeofGSD@INCRajasthan@INCIndia
आदरणीय श्री विश्वेंद्र सिंह जी,
भरतपुर-डीग में कांग्रेस की हार का पूरा ठीकरा जिलाध्यक्षों पर फोड़ देना आसान है, लेकिन जिम्मेदारी तह करने से पहले अपनी भूमिका पर भी जवाब देना चाहिए।
भरतपुर नगर निगम में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी श्रीमती विचित्रा सिंह जी का नामांकन वापस हुआ और भाजपा की अनुराधा सिंह जी निर्विरोध मेयर बनीं। मीडिया में दिए गए बयानों में श्री शिवसिंह जी के हवाले से कहा गया कि नामांकन वापसी का फैसला आपके दिशानिर्देशों पर हुआ था।
तो सवाल है—जब 36 निर्दलीय पार्षद मौजूद थे और मुकाबले की संभावना थी, तब भाजपा के निर्विरोध मेयर बनने की स्थिति कैसे बनी?
और सिर्फ भरतपुर नगर निगम ही क्यों—डीग-कुम्हेर आपकी अपनी विधानसभा है वहाँ भी निकाय स्तर पर कांग्रेस अपना बोर्ड नहीं बना सकी तो क्या वहाँ की राजनीतिक जिम्मेदारी भी केवल जिलाध्यक्षों की थी? अगर जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी तय हो रही है, तो वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक के रूप में आपकी भूमिका पर सवाल क्यों न हो?
दूसरों से जवाब मांगने से पहले इन सवालों के जवाब भी दीजिए—
नामांकन वापसी का फैसला किसका था?
डीग-कुम्हेर में संगठन की स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार था?
और भरतपुर-डीग में कांग्रेस की इस स्थिति की सामूहिक जिम्मेदारी कौन लेगा?
अगर नामांकन वापसी में आपकी कोई भूमिका नहीं थी—तो स्पष्ट रूप से बताइए।
और अगर आपके निर्देश पर फैसला हुआ था—तो आपको इसकी वजह बतानी चाहिए।
आत्ममंथन सिर्फ जिलाध्यक्षों का नहीं, हर वरिष्ठ नेता का होना चाहिए। आप कॉंग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं पूर्ववर्ती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे आपको पार्टी नेतृत्व को मिलकर अवगत कराना चाहिए ना कि इस प्रकार सोशल मीडिया पर पोस्ट के माध्यम से।
कांग्रेस कार्यकर्ता अब आरोप नहीं, जवाब और जवाबदेही चाहता है।
@INCRajasthan
साम..दाम..दंड..भेद से सत्ता चल सकती है लेकिन लोकतंत्र नहीं। सच तो ये है कि ये सरकार एक भी चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शिता से कराने में असक्षम है।
निकाय चुनाव के बाद RCA चुनाव में भाजपा सरकार की बेईमानी खुलकर सामने आई, RCA की बंदरबांट में जिस तरह मंत्री पुत्रों और BJP नेताओं ने इसे राजनीति अखाड़ा बनाया वो प्रदेश के लिए शर्मनाक है।
जानकारी में आया है कि प्रत्याशियों ने चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कैबिनेट मंत्री का दर्जा रखने वाले भाजपा नेता अरूण चतुर्वेदी जी पर सरकार के इशारे पर लोकतांत्रिक मतदान प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगाया है।
आरोप है कि मतदान के समय जहां वोटर्स को बैठना चाहिए था वहां स्वयं चतुर्वेदी जी उपस्थित थे, और वोटर्स को डरा-धमका कर एक पक्ष में वोट एक तरफा डलवा गए।
मैं सरकार से पूछना चाहूंगा कि जब डराने धमकाने और सरकार के चहेते को चुनना था तो फिर चुनाव कराने का ढोंग क्यों किया गया?
नवनिर्मित जिला क्रिकेट संघ बालोतरा, डीडवाना-कुचामन और खैरथल-तिजारा को इस पूरी चुनाव प्रक्रिया से दूर रखा गया, और न ही अपने वोटों का इस्तेमाल करने दिया। अगर फैसला दिल्ली की पर्ची से ही होना था, तो फिर चुनाव कराने का ये तमाशा क्यों किया गया?
जिस तरह भाजपा सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था व मर्यादाओं की धज्जियां उड़ा रही हैं.. वो प्रदेश के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
गोविंद सिंह डोटासरा ने कभीभीकिसी भी मंच से ख़ुदकीदावेदारी सत्ता आने के बाद के शीर्षस्थ पद मुख्यमंत्री के प्रति ज़ाहिर नहीं की है लेकिन उनकी सांगठनिक कुशलता ने पहले से मौजूद राज्यकेदो क़द्दावर खेमों को उनकी निकट भविष्य में उत्पन्न होने वाली किसीभी दावेदारीके प्रति शंकितकर दिया है।
…………कमांडर डोटासरा…….
किसी भी पार्टी के संगठन में उस पार्टी का मूल होता है बाक़ी सब उसपर मंडराते भँवरे हैं जो कितना जियेंगे और कितना उड़ेंगे वह सब संगठन से मिलने वाले रस पर निर्भर करता है।
गोविंद सिंह डोटासरा की सांगठनिक कुशलता का मापन किसी भी परिपेक्ष्य में किया जाये तो वे सबसे बडी पार्टी कही जाने वाली बीजेपी के कमांडर इन चीफ मदन राठौड पर 21 नहीं 42 साबित हुए हैं लेकिन राज्य इकाई की ताक़तवर नेताओं का रवैया उनकी उपेक्षा का रहा है चाहे वह किसी धरना प्रदर्शन को लेकर हो या फिर अलग अलग सोशल मीडिया टीमों द्वारा उनके ख़िलाफ़ चलाए जाने वाले फेक नैरेटिव को लेकर।
गोविंद सिंह डोटासरा ने कभी भी किसी भी मंच से ख़ुद की दावेदारी सत्ता आने के बाद के शीर्षस्थ पद मुख्यमंत्री के प्रति ज़ाहिर नहीं की है लेकिन उनकी सांगठनिक कुशलता ने पहले से मौजूद राज्य के दो क़द्दावर खेमों को उनकी निकट भविष्य में उत्पन्न होने वाली किसी भी दावेदारी के प्रति शंकित कर दिया है।
आला कमान संगठन से जो अपेक्षा करता है केवल उसको परिणाम दर परिणाम और बेहतर करने मात्र ने डोटासरा के प्रति पहले से उपलब्ध खेमों को वह फ़ाउल मीन्स का उपयोग करने को मजबूर कर दिया है जो कांग्रेस के लिए सेल्फ़ गोल की तरह अधिक प्रतीत हो रहे हैं।
गोविंद सिंह डोटासरा ने संगठन के तौर पर BJP को सदन , सड़क और मुद्दों पर आलाकमान के दिशा निर्देश में उचित परिणाम की आकांक्षा लिए न केवल एकजुट किया है बल्कि अपने अपने क्षेत्रों में एक कमाण्डर के तौर पर उनकी राय को तरजीह दी है जो लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की दिशा में है कांग्रेस का नारा रहा है यही सब की काट BJP भले ही न ढूंढ पाई हो लेकिन कांग्रेस में ही उन्हें दोनों खेमों ने अपना घनघोर प्रतिद्वंदी स्वीकार कर लिया है और किसी भी सूरते हाल में उन्हें PCC चीफ़ के पद से अपदस्थ करने के लिए तैयार हैं।
गोविंद सिंह के प्रति एक स्वाभाविक असहजता दोनों खेमों यानी कि सचिन पायलट और अशोक गहलोत मैं इसलिए भी अधिक देखी जा रही है क्योंकि उनके कार्यकाल में लड़े गए लोकसभा विधानसभा और निकायों के चुनाव उम्मीद से बेहतर परिणाम देकर गये और कांग्रेस हाल में किसी भी खेमे की हाज़िरी से मुक्त है।
एक कमाण्डर जो आला कमान और सिपाहियों के बीच कड़ी और संवाद का माध्यम राज्यों में होता है है इस व्यवस्था को उनसे पूर्व के PCC चीफ़ों ने दरकिनार कर दिया था और शक्ति का संतुलन आलाकमान के ख़िलाफ़ ही बिठाने लगे थे जिसकी परिणीति होने मनीषा और 25 सितंबर वाली घटना घटित हुई क्योंकि दोनों खेर ने आलाकमान के ख़िलाफ़ ब्लैकमेलिंग पावर डेवलप कर चुके थे।
राज्य इकाई के वर्तमान कमांडर सदन के नेता के साथ जिस तरह तालमेल बिठाते हैं और उनके सम्मान का ख्याल रखते हैं वह राज्य इकाई को निरंतर मज़बूत कर रहा है यह दोनों खेमों को आला कमान की बढ़ती हुई शक्ति का संकेत प्रतीत होता है जो कि उन्हें स्वीकार्य नहीं है।
किसी भी संगठन को गोबिन्द सिंह डोटासरा जैसे विचारधारा पोषित मेहनती कमांडर की उपस्थिति युद्ध के किसी भी स्तर पर मज़बूत करती है और शायद कांग्रेस का शीर्ष आला कमान समझ गया है।
@INCRajasthan@INCIndia@GovindDotasra@RahulGandhi
30 सितंबर को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आदरणीय श्री गोविंद सिंह डोटासरा जी के जन्मदिन के उपलक्ष में पिंक सिटी ब्लड बैंक जयपुर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। अतः आप सभी से निवेदन है अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान शिविर में पहुंचकर सफल बनाएं।
@GovindDotasra
#रक्तदानमहादान
आज कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा जी, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली जी एवं कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह जी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
निकाय चुनाव में हुई बेईमानी, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी, SIR और वोट चोरी जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग के सामने मजबूती से अपना पक्ष रखा व आपत्तियां दर्ज कराई।
भाजपा द्वारा सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग और सत्ता के दबाव से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। वोट चोरी कर सत्ता हथियाई जा रही है, और जनता के जनादेश के खिलाफ जाकर सरकारें बनाई जा रही हैं।
@SecRajasthan@CeoRajasthan@ECISVEEP@GovindDotasra@TikaRamJullyINC
कांग्रेस अध्यक्ष श्री @kharge जी, नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi जी, कांग्रेस महासचिव (संगठन) श्री @kcvenugopalmp और कांग्रेस महासचिव श्रीमती @priyankagandhi जी ने प्रदेश के मुख्यमंत्रियों, शिक्षा मंत्रियों और AICC प्रभारियों के साथ बैठक की।
📍इंदिरा भवन, दिल्ली
लोकतंत्र की मजबूती एवं मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ आज जयपुर में राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह जी को ज्ञापन सौंपा।
निकाय चुनाव में हुई बेईमानी, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी, SIR और वोट चोरी जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली जी व कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ निर्वाचन आयोग के सामने अपनी बात मजबूती से रखी।
भाजपा द्वारा सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग और सत्ता के दबाव से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। वोट चोरी कर सत्ता हथियाई जा रही है, और जनता के जनादेश के खिलाफ जाकर सरकारें बनाई जा रही हैं।
लोकतंत्र की ऐसी लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मतदाता के अधिकार और जनादेश की रक्षा के लिए कांग्रेस का संघर्ष सड़क से लेकर संवैधानिक संस्थाओं तक जारी रहेगा।
@SecRajasthan@CeoRajasthan@ECISVEEP@TikaRamJullyINC