@umashankarsingh If you go into maths
एक लीटर E20 = 100₹
अगर ethanol नहीं चाहिए तो 800ml pure petrol = 100₹
जिसमे ethanol वापस करने का पैसा नहीं घटाया गया है. इस तरह कैलकुलेट करने पर प्योर पेट्रोल 125₹ लीटर आता है.
मालूम नहीं किसने सरकार और तेल कंपनियों के लिए यह कैलकुलेशन किया है ?
इटली की मैडम मेलोनी भी ईरान में बेकसूरों पर बमबारी के खिलाफ बोल रही है लेकिन क्या मजाल कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी कुछ बोल दें .
56 इंच सीना यूं ही नहीं होता किसी के पास.
जब रेप दोषियों को राहत मिलती है,तो डर सिर्फ एक परिवार में नहीं पूरे समाज में फैलता है।आज पीड़िता सड़कों पर है —और सवाल सिस्टम से है।
#JusticeForUnnaoVictim
अमेरिका में 33 साल से अपने परिवार के साथ रह रही 73 साल की महिला को अमेरिकी सरकार ने भारत डिपोर्ट कर दिया है
◆ आरोप है कि उनके पास अमेरिका में रहने के लिए वैध दस्तावेज नहीं थे, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई
◆ 73 साल की बुजुर्ग भारतीय महिला हरजीत कौर मूल रूप से पंजाब के मोहाली की रहने वाली है
◆ इस बीच महिला को अपने परिवार से भी मिलने नहीं दिया गया. उन्हें हथकड़ियों और बेड़ियों में बांधकर भारत डिपोर्ट किया गया
#America | #DonaldTrump | #SikhWoman | #Punjab | Donald Trump
अमेरिका में 33 साल से अपने परिवार के साथ रह रही 73 साल की महिला को अमेरिकी सरकार ने भारत डिपोर्ट कर दिया है
◆ आरोप है कि उनके पास अमेरिका में रहने के लिए वैध दस्तावेज नहीं थे, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई
◆ 73 साल की बुजुर्ग भारतीय महिला हरजीत कौर मूल रूप से पंजाब के मोहाली की रहने वाली है
◆ इस बीच महिला को अपने परिवार से भी मिलने नहीं दिया गया. उन्हें हथकड़ियों और बेड़ियों में बांधकर भारत डिपोर्ट किया गया
#America | #DonaldTrump | #SikhWoman | #Punjab | Donald Trump
चुनाव आयोग ने लंबे प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई बातें कहीं लेकिन इन सवालों के बाउंसर पर बचकर निकल गई
-अगर राहुल गांधी से शिकायत पर शपथ पत्र मांगा तो बीजेपी और दूसरे दलों के नेताओं से क्यों नहीं मांगा गया
-बिहार में कितने विदेशी वोटर मिले अभियान में? कोई जानकारी नहीं । पिछले दिनों चुनाव आयोग ने सोर्स ने जानकारी दी थी ऐसे खूब वोटर मिले हैं
-महाराष्ट्र पर उठे सवालों पर जवाब देने से बचते रहे
-चुनाव आयोग ने माना कि आधार को वह पहचान पत्र के रूप में मान्यता दे सकती है। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद
और सभी पत्रकार साथियों ने आज हर जरूरी सवाल पूछे। तारीफ़ के पात्र!
Hindenburg, SEBI और बजट में खेल !!
अभी हिंदेनबर्ग की नई रिपोर्ट से बवाल मचा हुआ है। उसको आसान शब्दों में समझें।
पिछले कुछ साल में भारत में REIT कंपनी खोलने की शुरुआत हुई। REIT मतलब होता है Real Estate Investment Trust. जैसे mutual funds शेयर में पैसा लगाते हैं , वैसे REIT real estate में पैसा लगाते हैं। उनसे होने वाली किराए की आय ही इनका आय स्रोत होती है। विदेशों में ये काफ़ी प्रचलित है - वहाँ बड़ी बड़ी rental organisations होती हैं जो सिर्फ़ किराए पर देने के लिए कमर्शियल और रहने के फ़्लैट्स बनाते हैं।
Blackstone दुनिया की सबसे बड़ी REIT investor और sponsor कंपनियों में से है। Blackstone ने भारत में दो REIT कंपजी को स्पान्सर किया। SEBI चेयरमैन माधवी बुच के पति धवल बुच इसी Blackstone ग्रुप में एडवाइजर नियुक्त किए गए थे।
अब कहानी ये है कि श्रीमान धवल को प्रॉपर्टी बिज़नेस का कोई आईडिया नहीं था। ना ही फाइनेंस का था। वो पेशे से इंजीनियर हैं और हिंदुस्तान लीवर में Chief Procurement officer थे। पर माधवी बुच को सेबी का सदस्य बनाने के पहले उनको ब्लैकस्टोन नेअपना एडवाइज़र बना लिया।
माधवी बुच सेबी की सदस्य रहने के बाद उसकी चेयरमैन भी बन गईं। इस दौरान उन्होंने देश में REITs से संबंधित कई regulatory changes किए जिनका सीधा फ़ायदा blackstone जैसे ग्रुप्स को हो रहा था।
इसी दौरान Sebi ने ब्लैकस्टोन की दो कंपनी Mindspace और Nexus Select ट्रस्ट को IPO की मंज़ूरी भी दी। सात महीने पहले दिसंबर 2023 में ब्लैकस्टोन ने एक और REIT कंपनी Embassy REIT में अपना सारा हिस्सा क़रीब 710 करोड़ में बेच दिया। आरोप ये है कि जिस ग्रुप को सेबी के निर्देशों से फ़ायदा हो रहा था उसी ग्रुप ने सेबी की चेयरमैन के पति को अपना एडवाइज़र बना रखा था। माधवी बुच ने ये कहा है कि उनके पति अपनी expertise के चलते एडवाइज़र बने थे , उनके सेबी में आने से पहले बन गये थे और उन्होंने blackstone संबंधित मामलों से ख़ुद को recuse किया हुआ था।
माधवी बुच पर दूसरा आरोप गंभीर है। IIFL नामक एक भारतीय कंपनी ने Bermuda में एक फण्ड बनाया GOF. इस GOF ने एक sub fund बनाया GDOF. Hindenburg के अनुसार विनोद अड़ानी ने GDOF में पैसा लगाया। GDOF ने इस मॉरीशस के एक छोटे, गुमनाम फण्ड IPE Plus Fund में लगाया।
फिर इस पैसे को IPE ने भारत के शेयर बाज़ार में लगाया। आरोप है कि मार्केट में इससे unnatural तेज़ी आई।
इस IPE fund का फाउंडर-चीफ था अनिल आहूजा। आरोप है कि माधवी बुच का भी इस GDOF और IPE में पैसा लगा हुआ था। माधवी के अनुसार अनिल आहूजा उसके पति के बचपन के दोस्त हैं और वो Citibank, JP Morgan आदि में काम कर चुके थे।
खेल यहीं शुरू होता है। कहा जा रहा है कि अनिल आहूजा पहले Adani Power और Adani Enterprises दोनों में डायरेक्टर थे। हैरानी की बात है कि SEBI चेयरमैन माधवी बुच को ये नहीं पता था !!
माधवी बुच के सेबी सदस्य बनने से पहले माधवी ने अपने पति को GDOF का कंट्रोल ट्रांसफ़र कर दिया था। इसके एक साल बाद उनके पति ने सारा पैसा निकाल लिया। पर हैरानी की बात ये है कि पैसा निकालने की ईमेल माधवी बुच ने अपनी पर्सनल ईमेल से भेजी। अगर उन्होंने फण्ड पति को ट्रांसफ़र कर दिया था तो अपनी ईमेल क्यों भेजी ? ये सब डॉक्यूमेंट उपलब्ध हैं।
एक आरोप ये भी है कि उनका सिंगापुर में एक और फण्ड है Agora Partners जो 100% उनका है। सेबी चेयरमैन बनने के बाद इसके सारे शेयर उन्होंने अपने पति को ट्रांसफ़र कर दिए। इसमें कुछ ग़लत नहीं है पर लोग पूछ रहे हैं कि भारत में दुनिया भर के mutual fund हैं , रोज़ आप पब्लिक को सलाह देते हो कि “mutual fund सही है” पर अपना ख़ुद का पैसा सेबी चेयरमैन मॉरीशस , बरमूडा , सिंगापुर की shady companies में लगाती हैं।
अब बात बजट में खेल की। Long Term Capital Gains Tax का फ़ायदा उठाने के लिए पहले REIT यूनिट्स को 36 महीने तक रखना पड़ता था। उसके पहले बेचने पर आय अनुसार इनकम टैक्स लगता था। इस बजट में सरकार ने इस 36 महीने के period को कम करके 12 महीने कर दिया। यानी कि किसी भी Blackstone जैसी बड़ी कंपनी को सिर्फ़ 12 महीने बाद यूनिट्स बेचकर 35% corporate tax की जगह सिर्फ़ 12.50% LTCG टैक्स देना पड़ेगा।
अब जाँच इस बात की होनी चाहिए कि भारत की REIT कंपनियों में किस किस का पैसा लगा है और किसको इस LTCG पीरियड 12 महीने करने वाले ऑर्डर से फ़ायदा होगा।
सनद रहे कि माधवी बुच का SEBI से कोई लेना देना नहीं था। प्राइवेट सेक्टर से इस पद पर appoint होने वाली वो पहली चेयरमैन हैं। उनको सीधा सरकार ने बाहर से ला कर सेबी सदस्य और बाद में चेयरमैन बना दिया था।
#HindenbergReport
It’s 6 years today since Dad was wrongfully incarcerated for a crime he did not commit; his only crime, that he dared to stand up against this draconian regime …
6 years on, our fight for justice continues …
Unbroken, Unbent, Unbowed …
आप सभी के प्यार और सहयोग से नियमानुसार सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए मैंने नामांकन दाखिल कर दिया है, मेरा इस देश के लोकतंत्र पर अभी भी पुरा भरोसा है । अब आगे के दो तीन दिन महत्वपूर्ण होंगे।
आप सभी का सहयोग के लिए बहुत धन्यवाद ।
हमारे लोकतंत्र के पहरी सभी चुनाव अधिकारीयों के हाथ में मेरा चुनावी भविष्य है… वे सभी हमारे विश्वास को मजबूत करेंगे इस आशा सहीत,
आपका,
श्याम रंगीला