जीवन का उद्देश्य नहीं है, केवल खाना-पीना।
जीवन का उद्देश्य है जग में, जगना और जगाना।
जगने और जगाने का मतलब है संसार के लोगों को ईश्वरोन्मुख करना। यह कार्य वही कर सकता है जिसे ब्रह्म की अनुभूति हो और जिसमें सेवा समर्पण और परोपकार का भाव हो।
जय गुरुदेव
जय नीब करौरी महाराज
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अध्यात्म एक दिव्य विधा है। जो मनुष्य को हर दुःख,कष्ट,विपत्ति और चिंता से छुटकारा दिलाकर आनंद के राज्य में प्रवेश कराती है। केवल कुछ समय के लिये नहीं,बल्कि काल की सीमाओं से परे जाकर अनंतकाल के लिये भी। अध्यात्म आत्मा का विज्ञान है। इसे बाह��� नहीं खोजना है, यह हमारे अपने ही भीतर है।
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि । गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
भावार्थ :
तुम सृष्टि, पालन और संहार की शक्ति भूता, सनातनी देवी, गुणों का आधार तथा सर्वगुणमयी हो । नारायणि! तुम्हे नमस्कार है ।