अतिथिर्यस्य भग्नाशो गृहात् प्रतिनिवर्तते।
स दत्त्वा दुष्कृतं तस्मै पुण्यमादाय गच्छति॥
(महाभारत, शान्तिपर्व १९१/१२)
अर्थात्- जिसके घर में आया हुआ अतिथि निराश होकर बिना सम्मान के लौट जाता है उस व्यक्ति को अपना पाप देकर उसका पुण्य लेकर वापस लौट जाता है।
@DharyaJakhar @SanjayY58262317 @pathak__saab @LG_73_ @LG_73_ इनकी उम्र के हिसाब से तो बिल्कुल घटिया काम किया है
शर्म आना चाहिए किसी भी बहन बेटी के बारे में कैसे ऐसा लिख सकते है।🤦😡