भारतीय गैंडा (Rhinoceros unicornis) केवल जैव-विविधता का प्रतीक मात्र नहीं है, बल्कि यह प्रकृति का रक्षक भी है। यह मुख्य रूप से लंबी घास वाले मैदानों और दलदली क्षेत्रों में पाया जाता है। अपने मजबूत शरीर, अनोखी बनावट और एक सींग के कारण यह पूरे विश्व में जाना जाता है। यह शक्तिशाली शाकाहारी जीव घास, पत्तियाँ, टहनियाँ, फल और जलीय वनस्पतियाँ खाता है।
@mla_hayaghat@IPRDBihar@moefcc
#Rhinoceros #wildlifefacts #RhinoFacts #wildlifeconservation #Biodiversity
सिक्किम में बनी फीचर फिल्म नुमाहांगमा को दूसरे नेपाल इंडिजिनस फिल्म फेस्टिवल (एनआईएफएफ) 2026 के लिए चुना गया है। फिल्म का निर्देशन फिल्मकार नियारा सुब्बा ने किया है और इसके निर्माता एच.एम. सुब्बा हैं। यह महोत्सव 27 सितंबर को ब्रिटेन के लंदन में आयोजित किया जाएगा।
क्या आपने कभी 'हाथी सेब' का नाम सुना है?
इसके वृक्ष को चलता कहा जाता है। यह एक सुंदर पेड़ है, जिसके फल बड़े आकार के होते हैं। इसके फल हाथियों को बहुत पसंद है इसलिए इसे 'हाथी सेब' का नाम मिला है। इसे खास तौर पर आप बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगलों में देख सकते हैं। यह फल सिर्फ हाथियों का मनपसंद नहीं, बल्कि घर की रसोई का स्वाद बढ़ाने के भी बहुत काम आता है।
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#Chalta #Dilleniaindica #Savetree #Nature #GreenBihar
*Visit of UNDP Deputy Resident Representative (DRR) to National Biodiversity Authority (NBA), Chennai.*
🌿 On 22.07.2026, NBA welcomed Ms. Isabelle Tschan Harada, DRR, UNDP. Discussions with NBA focused on the implementation of projects under the GoI-UNDP Biodiversity Programme; GEF-7 BD; GEF-8 OECM; GBFF-CONSERVE and BIOFIN projects. The deliberations focussed on strengthening implementation modalities and deepening collaboration to advance India's biodiversity conservation goals.🌏
@JNU_official_50 Expecting JNU community to Refrain from participation in or visiting gathering (for the cause of education) along with encouraging to be responsible citizen...
Isn't both are contradictory to each other? A responsible academic student must not refrain from raising voice.
20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च पर चप्पल पहनकर, बिना वर्दी के एक व्यक्ति प्रदर्शनकारियों पर डंडे भांज रहा था.
लल्लनटॉप के पत्रकार अभिलाष ने सवाल किया तो केवल सवाल पूछने की वजह से ही रिपोर्टर को लाठी मार दी गई.
इसके बाद पुलिस ने भी लाठी मारने वाले का बचाव किया और बदतमीज़ी करते हुए माइक जमीन पर फेंक दिया.
@DelhiPolice
CJP | Delhi Police | Reporter
आज जंतर-मंतर से सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से लगभग 80 छात्रों को दिल्ली पुलिस छत्रसाल स्टेडियम लेकर गई। उन्हें वहाँ रात लगभग 9 से 9:30 बजे तक रखा गया और उसके बाद अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाकर विभिन्न पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया।
रात लगभग 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हमें कुछ छात्रों के परिवारजनों का फोन आया। उन्होंने बताया कि लगभग 6–7 छात्रों को मुखर्जी नगर थाने लाया गया है। परिवार वालों का आरोप था कि उन्हें अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा, कई छात्रों के फोन तोड़ दिए गए हैं और पुलिस अधिकारी यह तक बताने को तैयार नहीं हैं कि उन्हें केवल हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, अथवा उनके विरुद्ध कोई FIR दर्ज की गई है। यहाँ तक कि वकीलों को भी उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
रात लगभग 2 बजे हम मुखर्जी नगर थाने पहुँचे। वहाँ जो हुआ, उसे देखकर यकीन करना मुश्किल था कि जिस पुलिस को हम कानून का रक्षक मानते हैं, वह कभी-कभी नागरिकों के अधिकारों के प्रति इतना असंवेदनशील व्यवहार भी कर सकती है।
हमने पहले बिना कैमरा चालू किए लगभग 15 मिनट तक अधिकारियों से बातचीत करने और जानकारी लेने की कोशिश की। लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई उत्तर देने से इनकार कर दिया। मजबूर होकर हमें कैमरा चालू करना पड़ा।
हमने देखा कि छात्रों को अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाया जा रहा था और उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाने की तैयारी हो रही थी। जब पूछा गया कि उन्हें कहाँ और क्यों ले जाया जा रहा है, तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। कई पुलिस अधिकारी कैमरे से अपना चेहरा छिपाते दिखाई दिए। हमने थाना प्रभारी से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने भी मिलने से मना कर दिया।
इसी पुलिस स्टेशन में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई है और डी.के. बसु (D.K. Basu) दिशानिर्देशों का उल्लेख भी किया गया है। कानून स्पष्ट है—किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने पर उसके परिवार को सूचित किया जाना चाहिए और उसे अपनी पसंद के वकील से मिलने तथा कानूनी सलाह लेने का अवसर दिया जाना चाहिए।
पुलिस का कहना था कि छात्रों को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा है। लेकिन यदि उन्हें कई घंटे पहले ही हिरासत में लिया गया था, तो रात 2 बजे अचानक मेडिकल कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस प्रश्न का भी किसी के पास कोई उत्तर नहीं था।
यह वीडियो लगभग 17 मिनट का है, लेकिन यदि आप इसे पूरा देखेंगे तो समझ पाएँगे कि किस प्रकार जवाबदेही की जगह केवल “ऊपर से आदेश है” कहकर संवैधानिक और कानूनी दायित्वों से बचने की कोशिश की जाती है।
कई छात्रों ने आशंका व्यक्त की है कि जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए छात्रों के विरुद्ध झूठे या अनुचित FIR दर्ज किए जा रहे हैं। परिवारजनों ने हमें यह भी बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जानकारी माँगी तो उन्हें कहा गया कि “घर चले जाइए, नहीं तो आपके ऊपर भी FIR दर्ज कर दी जाएगी।”
यदि कोई सामान्य नागरिक अपने हिरासत में लिए गए बेटे, बेटी, भाई या बहन से मिलने की भी कोशिश न कर सके और पुलिस का रवैया ऐसा हो, तो सोचिए उन परिवारों पर क्या बीतती होगी।
यदि इस देश के युवा शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं, तो क्या उनके साथ लाठीचार्ज करना और आधी रात को इस प्रकार का व्यवहार करना उचित है? क्या पुलिस की भी कोई जवाबदेही नहीं है?
हर अधिकारी का केवल एक ही उत्तर था - “ऊपर से आदेश है।” लेकिन यह “ऊपर” कौन है? आदेश किसने दिए? और क्या कोई भी आदेश संविधान और कानून से ऊपर हो सकता है?
यह वीडियो लंबा है, लेकिन यदि संभव हो तो इसे पूरा अवश्य देखिए। विशेष रूप से मेरे सभी अधिवक्ता साथियों और कानूनी समुदाय से मेरा आग्रह है कि इस पर अपनी आवाज़ उठाएँ। कानून-व्यवस्था की पहली सीढ़ी एक पुलिस थाना होता है। यदि राजधानी दिल्ली में, हर विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस मानवाधिकारों और कानूनी दिशानिर्देशों की अनदेखी करती रहे, तो यह केवल प्रदर्शनकारियों का नहीं बल्कि पूरे विधि-तंत्र का प्रश्न बन जाता है।
यदि देश की राजधानी में यह स्थिति है, तो देश के दूर-दराज़ इलाकों में नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।
सवाल बड़े हैं। लड़ाई लंबी है। लेकिन जहाँ भी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता होगी, हम अपने साथियों के साथ खड़े रहेंगे।
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The Centre has reached out to the Cockroach Janta Party ahead of its 'Chalo Sansad' march to Parliament. However, the CJP has rejected offers to meet the District Magistrate, a Union Government Secretary and a Minister of State, insisting on talks with the Prime Minister or a Cabinet Minister.
🎥: PTI
#CJP #NewDelhi #CJPProtest
Fearless protests hit Modi’s BJP in Rishikesh!
Common people are raging against 3,000 trees being slaughtered for road widening.
The “dead” public finally woke up - for trees.
Trees today.
Corruption tomorrow.
India is awakening
VIDEO | Delhi: At Jantar Mantar, Sonam Wangchuk's wife Gitanjali Angmo says, "Sonam will end his hunger strike tomorrow if political leaders meet him at hospital and assure him that they will raise the issue of education accountability during Parliament session."
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)
#WATCH दिल्ली: CJP द्वारा कल, 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित मार्च की खबरों पर नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा ने कहा, "CJP द्वारा 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित मार्च की खबरों को देखते हुए यह साफ तौर पर स्पष्ट किया जाता है कि दिल्ली पुलिस को ऐसी अनुमति के लिए कोई आवेदन नहीं मिला है और न ही ऐसी कोई अनुमति दी गई है। पूरे नई दिल्ली ज़िले में धारा 163 BNSS के तहत निषेधाज्ञा लागू है, इसलिए 5 या उससे ज़्यादा लोगों के इकट्ठा होने, विरोध मार्च या प्रदर्शन की अनुमति नहीं है, सिवाय जंतर-मंतर जैसी तय विरोध-प्रदर्शन की जगह के और वहां भी अनुमति मिलने के बाद ही ऐसा किया जा सकता है। कल से संसद का सत्र भी शुरू हो रहा है इसलिए आम जनता की सुरक्षा और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए जाएंगे। धारा 163 BNSS के लागू आदेशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस सभी नागरिकों से अपील करती है कि वे कानून का सम्मान करें, किसी भी गैर-कानूनी जमावड़े या मार्च में शामिल होने से बचें, सार्वजनिक शांति और सुरक्षा बनाए रखने में सहयोग करें।"
Madhya Pradesh Police on Sunday cleared the tribal protest site against the Ken-Betwa river link project in Chhatarpur and shifted protest leader Amit Bhatnagar, who had been on a 14-day hunger strike, to a hospital. Authorities said the action was taken due to rising river levels after heavy rainfall.
📹: by special arrangement
✍️: @MehulMalpani
https://t.co/nY13RXSqSX
Message from Sonam :
20th JULY
आज़ादी का दूसरा आन्दोलन
भय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत
Freedom from injustice (Like paper leaks)
Freedom from Fear (my illegal detention)
India’s 2nd FREEDOM MOVEMENT
March to the Parliament
Please make it a big success
Sent through Gitanjali
from my illegal detention at Safdarjung