Promises पर भरोसा करके bankers ने आंदोलन तैयार किया। 27 September की late-night meeting में strike defer हो गई। अब assurance नहीं चलेगा—written commitment, timeline और accountability चाहिए। #UFBUBetrayersResign#5DaysBanking@ChVenkatachalam
संसद हो, लोकसभा हो, विधानसभा हो, सुप्रीम कोर्ट हो या हाईकोर्ट—महत्वपूर्ण कार्यवाहियों की वीडियो रिकॉर्डिंग और लाइव/डिजिटल रिकॉर्डिंग की व्यवस्था है। बैंक की शाखाओं तक में CCTV से गतिविधियाँ रिकॉर्ड होती हैं।
फिर UFBU और IBA के बीच होने वाली महत्वपूर्ण वार्ताओं की पारदर्शिता के लिए CCTV/वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था क्यों नहीं?
जब फैसले लाखों बैंककर्मियों को प्रभावित करते हैं, तो वार्ता का सत्यापित रिकॉर्ड होना भी जरूरी है।
वार्ता में क्या कहा गया, किसने क्या स्वीकार किया और किस बात पर सहमति बनी—यह सब रिकॉर्ड में क्यों नहीं होना चाहिए?
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27 सितंबर की रात बैंककर्मियों की पीठ में सिर्फ छुरा नहीं घोंपा गया, बल्कि उनके भरोसे, संघर्ष और सामूहिक शक्ति पर भी गहरा प्रहार हुआ। जिन लाखों कर्मचारियों ने हड़ताल के लिए मानसिक और व्यावहारिक तैयारी की, जिन्होंने 27 सितंबर को रविवार के दिन भी बैंकिंग सेवा दी, उन्हें अंतिम क्षण में लिए गए निर्णय के सामने खड़ा कर दिया गया। सवाल Five-Day Banking का ही नहीं है। सवाल यह है कि इतने बड़े आंदोलन को अचानक Defer करने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया? सदस्यों को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया? बदले में वास्तव में क्या हासिल हुआ? और यदि यह कोई उपलब्धि थी, तो उसकी स्पष्ट समयसीमा और लिखित प्रतिबद्धता कहाँ है? बैंककर्मी अब केवल आश्वासन नहीं चाहते। वे जवाबदेही चाहते हैं। वे पारदर्शिता चाहते हैं। वे अपने संघर्ष का सम्मान और अपनी मांगों का ठोस परिणाम चाहते हैं। भरोसा एक बार टूट जाए तो केवल शब्दों से वापस नहीं आता—उसे कार्रवाई से पुनः अर्जित करना पड़ता है। 27 सितंबर का घटनाक्रम इतिहास में केवल एक Deferred Strike के रूप में दर्ज नहीं होना चाहिए; यह उस जवाबदेही की शुरुआत बने, जिसकी मांग आज लाखों बैंककर्मी कर रहे हैं। #UFBUBetrayersResign #5DaysBanking
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तीन दिवसीय हड़ताल को टालना — बैंककर्मियों की भावनाओं का अपमान
तीन दिवसीय हड़ताल को अंतिम समय में टालने का निर्णय उन समस्त बैंककर्मियों के लिए अत्यंत निराशाजनक है, जिन्होंने संगठन के आह्वान पर पूरी निष्ठा, एकजुटता और प्रतिबद्धता के साथ स्वयं को तैयार किया था।
सबसे गंभीर बात यह है कि रविवार, जो साप्ताहिक अवकाश का दिन था, उसे भी हड़ताल के मद्देनज़र कार्यदिवस घोषित कर बैंककर्मियों से काम कराया गया, और उसके बाद प्रस्तावित हड़ताल भी स्थगित कर दी गई।
इस पूरे घटनाक्रम से बैंककर्मियों में स्वाभाविक रूप से असंतोष और आक्रोश उत्पन्न हुआ है। उनकी मेहनत, त्याग और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
बैंककर्मियों के सम्मान, अधिकार और भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।
BOIOA – Bihar Unit
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Honest negotiation efforts signaling 5 days of work week proved crucial to boosting morale; implement it to maintain that spirit. #5DayBankingNow#AIBOC@PMOIndia https://t.co/WPjsIqCxyv
"RBI has it. LIC has it. Central Government offices have it."
Public and commercial bank employees fulfilled their part of the deal on March 8, 2024. It is time the Ministry of Finance clears the pending file.
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