1.देश में ’बहुजन समाज’ में से ख़ासकर एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के लिये आरक्षण ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ अर्थात् हमेशा से इनके आत्म-सम्मान की ज़िन्दगी से जुड़ा अति-महत्वपूर्ण व अत्यन्त संवेदनशील मामला है और जाति के आधार पर सदियों से यहाँ तोड़े, सताये व पछाड़े गये एससी व एसटी समाज के लिये तो यह अत्यन्त ज़रूरी मामला भी विशेषकर तब बन जाता है जब जातिवादी द्वेष, शोषण, प्रताड़ना, अन्याय-अत्याचार कम होने का नाम ना ले, और इसीलिये इसमें क्रीमी लेयर की बात करना अनुचित ही नहीं बल्कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी संविधान के पवित्र उद्देश्यों के भी विरुद्ध है, हालाँकि किसी को भी इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिये बल्कि सभी को देश व जनहित के मद्देनज़र अपनी पूूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ इस पर अमल भी ज़रूर करना चाहिये।
2.जबकि इस बारे में आरएसएस प्रमुख का अभी हाल में फिर से यह कहना कि, ’आरक्षण का जानबूझकर राजनीतिकरण किया गया है जिससे समाज में कड़वाहट भरी है तथा आरक्षण के लाभार्तियों को स्वेच्छा से इसका लाभ छोड़ देना चाहिये’, वास्तव में यह इनकी ऐसी जातिवादी सोच है जिससे संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति तो हो सकती है, किन्तु इससे संवैधानिक उद्देश्यों की अवहेलना होती है, क्योंकि आरक्षण मूलतः सदियों से जातिवादी व्यवस्था के शिकार करोड़ों शोषित-पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत लोगों को मानवीय आधार पर समता व समानता का संवैधानिक व कानूनी अधिकार देना है, और जिसे आर्थिक उन्नति से कतई भी नहीं आँका जा सकता है, क्योंकि जातिवाद का दंश जीवन के हर पहलू में उन्हें डसता ही रहता है और जो क्रम अभी भी हर स्तर पर लगातार जारी है, यह आरएसएस से ज़्यादा भला कौन जानता है?
3.इतना ही नहीं बल्कि केन्द्र में अभी तक रही सभी सरकारें भी इस कड़वी ज़मीनी वास्तविकता को भलीभाँति जानती और समझती भी हैं और इसीलिये अगर वर्तमान सरकार अपने वाजिब तर्कों के आधार पर इसकी प्रभावी व समुचित पैरवी करके एससी व एसटी समाज को क्रीमी लेयर से दूर रखने हेतु अपना पक्ष अदालत से मनवा लेती है तो यह पूर्णतः उचित व संवैधानिक होगा। वैसे अक्सर यही देखा गया है कि सरकारों के लचर रवैये व अच्छी कानूनी पैरवी के अभाव में ही अदालतें ’सामाजिक परिवर्तन’(Social Transformation) आदि के मामलों में सही से न्याय नहीं कर पाती हैं।
4.इस बारे में आरएसएस से भी यही कहना है कि वह परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी एवं कल्याणकारी संविधान को पूरा-पूरा आदर-सम्मान देते हुये आरक्षण को लेकर राजनीति करना छोड़ दे और साथ ही आरक्षण में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की वकालत बंद करके देश में ’समतामूलक समाज व्यवस्था’ (Equalitarian Social order) की स्थापना के संवैधानिक दायित्व/उद्देश्यों की पूर्ति में पूरी तरह से सहयोग करे तो यह बेहतर होगा, यही वक्त की ज़रूरत व समय की माँग भी है।
"जब अन्ना हजारे ने अनशन किया था, तो मीडिया में हमने उसे चौबीसों घंटे कवर किया था। सोनम वांगचुक के 15 दिन के अनशन का ज़िक्र तक नहीं। इससे पता चलता है कि 2011 के बाद से हालात कितने बदल गए हैं।"
- राजदीप सरदेसाई, वरिष्ठ पत्रकार | @sardesairajdeep
आज दिल्ली की तेज़ बारिश के बीच जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक जी के अनशन का 12वाँ दिन है।
देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चल रहा यह संघर्ष याद दिलाता है कि शिक्षा पर बोलने का हक़ उसे नहीं है जो सिर्फ़ परीक्षा पर चर्चा किया करता है; वह हक़ कमाया जाता है—और आज वह हक़ सोनम वांगचुक जी को है।
#StandWithSonamWangchuk
@Cockroachisback
दलित की बेटी की हत्या भी हो गई हो तो भी शांति से वह न्याय की मांग तक नहीं कर सकता! मेरठ SSP अविनाश पाण्डेय ने दलितों के साथ जो किया उसे कैसे भुलाया जा सकेगा?
#meerut
दिल्ली में लगातार बारिश हो रही है।
छात्र सिर्फ़ अपने बचाव के लिए एक तिरपाल की मांग कर रहे हैं।
Sonam Wangchuk और छात्र पिछले 12 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
कई छात्रों की हालत ऐसी है कि वे ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे।
आरोप है कि ACP अजय शर्मा ने इस अनशन को "रील कटिंग" कहकर मज़ाक उड़ाया।
अभिजीत का जवाब: "अगर आपको यह सिर्फ़ 'रील कटिंग' लगता है, तो मंच पर आइए और सिर्फ़ एक दिन का उपवास करके दिखाइए। आपकी भी रील बनाएंगे और पूरे देश को दिखाएंगे।"
"जो दर्द सह रहा है, वही उसकी कीमत जानता है। भूख हड़ताल का मज़ाक उड़ाना नहीं, उसकी संवेदनशीलता को समझना ज़रूरी है।"
जब जब @abhijeet_dipke का ये वीडियो देख रहा हूँ, दिल से पीड़ा हो रही है।
मोदी जी आपने देश के युवाओं को ग़ुलाम बना दिया है।
नौकरी हो या पेपर लीक युवा जब भी आवाज़ उठाये उसको लाठी डंडे से पीटो मुक़दमा लिखो उसकी ज़िंदगी बर्बाद करके घर बिठा दो।
यह मुर्दों का देश है साधो।।
सोनम वांगचुक की हालत और ज्यादा गंभीर। अब तो खङे होने में भी मुश्किल हो रही है ।
पेपर लीक जैसे गंभीर मसले पर वांगचुक प्रोटेस्ट कर रहे हैं पर क्या मजाल जो सरकार पर असर पङे।
ऐसे सम्मानित व्यक्तित्व को इस स्थिति में देखकर मन व्यथित हो जाता है।🥺
लोकतंत्र की पहचान संवाद और जवाबदेही से होती है, उपेक्षा से नहीं।😳
इस्तीफा मिलने तक यही डटे रहेंगे।🤯
बहन जी ने अपने सरकार में क्या बनाया देखिए और शेयर करें यह भवन मुझे खुद नहीं पता था
"भागीदारी भवन"
इतना बड़ा कोचिंग संस्था जिसमें हजारों स्टूडेंट पढ़कर आईएएस आईपीएस बने।
बहन जी का काम बोलता है।।
मायावती ने BSP कार्यकर्ताओं को दिया नया नारा
‘हाथी पर बटन दबाना है,
सत्ता में वापस आना है’
लखनऊ में BSP की बड़ी बैठक में पार्टी प्रमुख मायावती ने कार्यकर्ताओं को विधानसभा चुनाव की तैयारी में पूरी ताकत से जुटने का संदेश दिया। बैठक में मायावती ने नया चुनावी नारा दिया “हाथी पर बटन दबाना है, सत्ता में वापस आना है।” उन्होंने कहा कि पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत करना होगा और जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाना होगा।
मायावती ने कहा कि देश और प्रदेश में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हालात कठिन हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि जनता के बीच जाकर BSP की नीतियों और पूर्व की सरकारों के कामों को बताएं। खासकर यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर मजबूत प्रत्याशियों के चयन और संगठन की तैयारी पर जोर दिया गया।
बैठक में मायावती ने कहा कि चुनाव में नई चुनौतियों को देखते हुए पार्टी की तैयारियों को और चुस्त-दुरुस्त करना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को वोट की सुरक्षा, जनसंपर्क और बूथ मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
#Breakingnews | @Mayawati
''अखिलेश कैसे PDA की बात कर सकते हैं। PDA का नुकसान सबसे अधिक सपा ने किया है। अखिलेश यादव ने उनका डिमोशन कर दिया था। SC/ST अधिकारियों का डिमोशन कर दिया था''
लखनऊ : बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल का बयान
#Lucknow#BSP#SamajwadiParty@PalVishwnathbsp