Ambedkarite । Socio-Political Activist । Bhim Army । Azad Samaj Party(K) । बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे । बोल जबाँ अब तक तेरी है । @Bhimarmy_BEM @AzadSamajParty
मैं आपसे आग्रह करता हूं—कमर कस लो। इस साल हम इतनी मेहनत करेंगे कि जब अगली बार परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी जयंती आएगी, तो उसे पूरे सम्मान और धूमधाम से मनाया जाएगा। इतनी ताकत इस बार बना लो कि अगली बार किसी को भी परमिशन के लिए दफ्तरों के बाहर खड़ा न होना पड़े।
मैं आपको गारंटी देता हूं; उत्तर प्रदेश में जहां-जहां से जयंती के लिए आवेदन होगा, वहीं परमिशन मिलेगी। कार्यक्रम भी होगा और सम्मानपूर्वक पर्व के रूप में मनाया जाएगा।
परम पूज्य बाबा साहेब के सपनों को पूरा करने के लिए 10 महीने संघर्ष कर लो। मैं वादा करता हूं कि आने वाले समय में आपके साथ होने वाले जुल्म, अन्याय और अत्याचार की खबरें अखबारों में नहीं दिखेंगी।
मैं आपको विश्वास दिलाता हूं—मैं आपका भाई, एडवोकेट शेखर आजाद, आपके साथ खड़ा हूं।
कांशीराम (1934–2006) को भारत रत्न क्यों दिया जाना चाहिए. मेरे निजी विचार
मान्यवर Kanshi Ram जी महान इसलिए ही नहीं थे कि उन्होंने सिर्फ 11 साल में भारत की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी खड़ी कर दी, वह भी एक दबे-कुचले वर्ग से आने के बावजूद। उन्होंने उत्तर प्रदेश में सामंती कांग्रेस के वर्चस्व को भी खत्म किया। काग्रेस की यूपी में फिर कभी सरकार नहीं बनी। लेकिन केवल इसी आधार पर उन्हें सबसे महान नहीं कहा जा सकता।
उनका सबसे बड़ा योगदान भारत में DEEPENING DEMOCRACY यानी लोकतंत्र को और गहरा बनाने का काम है। ये बात उन्हें सबसे महान बनाती है।
उन्होंने देश के वंचित और दबे-कुचले लोगों के मन में भारतीय लोकतंत्र और संविधान के प्रति विश्वास और उम्मीद जगाई कि वे भी शासक बन सकते हैं। इससे लोकतंत्र मजबूत हुआ। वह भी इंदिरा इमरजेंसी के बाद, लोकतंत्र के संकट काल में।
इससे उत्तर भारत में नक्सलियों के फैलने की सारी उम्मीदें खत्म हो गईं। जनता ने देख लिया कि वोट से काम हो जाता है।
कांग्रेस के पास उन्हें भारत रत्न देने का अवसर था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाई। कांग्रेस का नसीब फूटा था।
मेरी व्यक्तिगत राय में, अब यह काम करने के लिए किस्मत यानी नियति ने Narendra Modi को चुना है, जैसा कि Karpoori Thakur के मामले में भी हुआ। कांग्रेस यहां भी चूक गई थी।
आज़ाद समाज पार्टी कांशीराम के प्रदेश महासचिव (उप्र) तथा मेरठ मंडल प्रभारी श्री निज़ाम चौधरी जी को बीएलओ द्वारा मृत घोषित करना सीधे उनके मताधिकार का हनन करने की मंशा जाहिर करता है, क्या इसीलिए SIR लाया गया था कि वोट का हनन होगा, जवाब दो?
उक्त के संबंध में तत्काल कार्यवाही की मांग!
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में अव्यवस्था, अव्यवहारिक नियम, कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव, आत्महत्या/मृत्यु की घटनाएँ, एवं मतदाताओं द्वारा झेली जा रहीं गंभीर समस्याओं के संबंध में मुख्य चुनाव आयुक्त महोदय जी को पत्र लिखा।
@ECISVEEP
अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण के अधिकार की रक्षा और शीघ्र क्रियान्वयन हेतु माननीय मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी को पत्र लिखा।
@MP_MyGov@CMMadhyaPradesh
चित्रकूट जिले के कर्वी कोतवाली क्षेत्र के खोह गांव के पास झांसी–प्रयागराज एनएच-35 पर हुई भीषण सड़क दुर्घटना की खबर अत्यंत दुःखद है। इस दर्दनाक हादसे में चार निर्दोष लोगों की असमय मृत्यु और कई के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना से मन व्यथित है।
हम शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हैं।
प्रकृति से प्रार्थना है कि शोकसंतप्त परिवारों को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करे और घायल शीघ्र स्वस्थ हों।
@UPGovt से आग्रह है कि सभी घायलों का इलाज सरकारी खर्च पर सर्वोत्तम चिकित्सालयों में कराया जाए, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवज़ा और सरकारी सहायता प्रदान की जाए, तथा हादसे की पूरी जांच कर दोषियों पर सख़्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
@CMOfficeUP@myogiadityanath
EXCLUSIVE
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक में चर्चित रोहिणी घावरी पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है ! यह मुक़दमा नॉर्थ एवेन्यु थाने में दर्ज हुआ है।
मुकदमा भारतीय न्याय संहिता BNS की धारा - 3(5) संगठित/गिरोहबंद अपराध, 356(2) मानहानि, 351(2) आपराधिक धमकी, 308(2) जबरन वसूली/ रंगदारी के तहत दर्ज किया गया है, जिसका मतलब है रोहिणी घावरी की राह अब पथरीली हो गई है। पिछले कुछ दिनों से यह युवती एक सांसद को टारगेट करते हुए लगातार ऐसे आरोप लगा रही थीं जिसकी भाषा बेहद आपत्तिजनक और संदिग्ध थी। इसमे सबसे बड़ी बात यह है कि मुक़दमे में वादी सांसद चंद्रशेखर आज़ाद की पत्नी वंदना है, चंद्रशेखर के साथ अब उनकी पत्नी खुलकर सामने आ गई है, अब उनका कोई कुछ नही बिगाड़ पाएगा !
भारत का इतिहास है सावित्री यमराज से लड़कर अपने पति सत्यवान के प्राण तक बचा लाई थी।
@BhimArmyChief@AzadSamajParty
#EXCLUSIVE
#rohini
पहले विदेश में बैठकर बहुजन मिशन को बर्बाद करने के लिए “जय श्रीराम–जय भीम” जैसा विरोधाभासी नारा, फिर "सवर्ण–दलित एकता मिशन" का ख्याली पुलाव, उसके बाद जाटव बनाम वाल्मीकि के बीच खाई गहरी करने के लिए “द ग्रेट चमार” बनाम “द ग्रेट वाल्मीकि” की नाकाम कोशिश और अब जाटव बनाम जाटव यानि बसपा अध्यक्ष मायावती और आसपा अध्यक्ष सांसद चंद्रशेखर आजाद समर्थकों के बीच झगड़े की साजिश।
अब समाज के जिम्मेदार लोगों को सोचना है क्या यह सब केवल संयोग है, या फिर कोई गहरी साजिश? जो बहुजन आंदोलन की दिशा को भ्रमित करके बहुजन एकता को भीतर से कमजोर करने का काम कर रही है? इस साजिश का डायरेक्टर कोई है लेकिन मोहरा है एक बेहद शातिर या बेवकूफ लेकिन अति महत्वाकांक्षी विष कन्या रोहिणी घावरी जिसकी आज पहचान सिर्फ इतनी है कि उसने आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, सांसद चंद्रशेखर आजाद को बदनाम करने की सुपारी ले रखी है। जिसे संदिग्ध रूप से बीजेपी के कई बड़े नेताओं के साथ देखा जा सकता है और जिसे बीजेपी सरकार ने ही एक करोड़ की स्कॉलरशिप देकर विदेश भेजा। खुद को बसपा अध्यक्ष मायावती का परम हितैषी दिखाने का ढ़ोंग कर रही रोहणी से पूछा जाना चाहिए कि तुम्हारे खुद के पिता इस मिशन को बढ़ाने के लिए बहुजन समाज पार्टी में शामिल न होकर मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी क्यों हैं?
आज इस रोहिणी की कहानी एक विवाद बन चुकी है, क्योंकि सोशल मीडिया पर उसकी सक्रियता का मकसद कहीं से भी एक पीड़िता की तरह न्याय पाना नहीं बल्कि एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद पर गंभीर आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करके नई बहुजन राजनीति को खत्म करना ही नजर आता है। हालांकि समाज में रोहणी की विश्वनीयता अब खत्म हो चुकी है इसलिए उसके AI जनरेटेड दावों पर समाज का वो समर्थन उसे हासिल नहीं हो रहा जिसकी वो उम्मीद करके बैठी थी।
खैर विवाद की टाइमिंग पर गौर करें तो चंद्रशेखर आज़ाद के सांसद बनने के बाद जैस-जैसे उनकी समाज में सक्रियता और स्वीकार्यता बढ़ी इस विवाद को और हवा दी जाने लगी। सांसद के रूप में चंद्रशेखर आजाद ने जैसे ही सदन में वाल्मीकि समाज व सफाईकर्मियों के साथ हो रहे अमानवीय उत्पीड़न व गटर में उतरने को लेकर सवाल उठाने शूरू किए वैसे ही लिखी हुई पटकथा के तहत विदेश में बैठकर जय श्रीराम बोलने वाली पहले रोहणी ने खुद को “वाल्मीकि” समाज के गौरव से जोड़ा फिर चमार बनाम वाल्मीकि बहस को हवा देते हुए आरक्षण वर्गीकऱण के मसले पर जाटव बनाम गैर जाटव समाज को बांटने की नाकाम कोशिश की। जब इससे भी दाल नहीं गली तो AI जनरेटेड तकनीक का सहारा लेते हुए जाटव बनाम जाटव यानि कि सांसद चंद्रशेखर आजाद व मायावती जी के समर्थकों के बीच झगड़े की साजिश रच दी।
अब सवाल ये उठता है कि सांसद चंद्रशेखर आजाद पक्ष का दावा है कि उसने रोहिणी घावरी पर 2 FIR दर्ज करवा दी हैं, रोहणी के सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर, चंद्रशेखर आजाद पक्ष कोर्ट में भी गया है, इसके बावजूद रोहणी को इतना सब करने के लिए संरक्षण और पैसा कहां से मिल रहा है? रोहिणी के सोशल मीडिया अकाउंट पर खुलेआम बीजेपी के शीर्ष नेताओं को टैग करके गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं पर न तो उसका अकाउंट बंद हुआ, न कोई कार्रवाई हो रही है। वहीं दूसरी ओर, कई ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता जिनके पोस्ट सत्ता के खिलाफ जाते हैं, उनके अकाउंट तुरंत निलंबित कर दिए जाते हैं। यह दोहरा मापदंड और अधिक संशय पैदा करता है।
वैसे तो बहुजन विरोधी कई ताकतों का उसे समर्थन हासिल नजर आता है लेकिन ये संभव नहीं कि सत्ता के संरक्षण के बिना वो इतना सब कुछ कर पा रही हो, क्योंकि रोहणी की लड़ाई खुद के इंसाफ या विचारधारा की न होकर “कहां से और कैसे आगे बढ़ा जा सकता है” की नजर आती है।
बहुजन आंदोलन और नेताओं का इतिहास गवाह है कि जब भी उसने मुखर होकर सामंतवाद, मनुवाद, पाखंडवाद, अंधविश्वास के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष किया, तब तब उसके उभरते नेता के साथ इस तरह की साजिशों को पाला-पोसा जाने लगता है।
लब्बोलुआब यह है कि मैं जज की भूमिका में आकर व्यक्तिगत रूप से नहीं कहना चाहता कि सही कौन है और ग़लत कौन? लेकिन समाज के विवेक पर छोड़ता हूं कि क्या वास्तव में पीड़िता ऐसी होती है? जिसका एक मात्र मकसद चर्चा में बने रहकर अपने व अपने पिता की राजनीति को किसी चौखट पर टिका देना है। कारण केवल यह नहीं कि उस रहस्मयी किरदार के आरोप संदिग्ध हैं, बल्कि इसलिए भी कि आरोप लगाने वाली स्वयं विरोधाभासों में उलझी दिखाई देती हैं।
राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन समाज को विभाजित करने वाले का साथ देना अपराध के बराबर है। हमें सबको जोड़ना है, क्योंकि हमारी असली लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं-असमानता, अन्याय और भेदभाव से है।
मान्यवर काँशीराम के साथ काम करने वाला एक बहुजन सिपाही
संविधान सभा के अध्यक्ष डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा का समापन भाषण देते हुए स्पष्ट रूप से बता दिया है कि संविधान निर्माता कौन थे. ये भाषण सुबह ठीक 10 बजे शुरू हुआ.
ये भाषण हर किसी को पढ़ना चाहिए.
पहले हिंदी अनुवाद, फिर मूल इंग्लिश-
"भाषण समाप्त करने से पहले, मैं इस गरिमामय सभा के सभी सदस्यों के प्रति अपना धन्यवाद व्यक्त करना चाहता हूँ, जिनसे मुझे सम्मान और स्नेह मिला। अध्यक्ष-पद पर बैठकर और प्रतिदिन कार्यवाही को देखते हुए, मुझे यह अनुभव हुआ कि मसौदा समिति के सदस्यों ने, और विशेष रूप से उसके अध्यक्ष डॉ. अम्बेडकर ने, अपने स्वास्थ्य अनुकूल न होने के बावजूद, कितने उत्साह और समर्पण के साथ काम किया है। (तालियाँ)"
"जब हमने डॉ. अम्बेडकर को मसौदा समिति में रखा और उसका अध्यक्ष बनाया, उससे अधिक सही निर्णय हम कभी न कर सकते थे, न कर सकते हैं।"
"उन्होंने न केवल अपने चयन को सार्थक सिद्ध किया, बल्कि अपने कार्य से उसकी गरिमा भी बढ़ाई। इस संदर्भ में समिति के अन्य सदस्यों के बीच कोई भेद करना अनुचित होगा। मैं जानता हूँ कि उन्होंने भी अध्यक्ष की ही तरह उसी उत्साह और समर्पण से काम किया है, और वे देश के धन्यवाद के पात्र हैं।"
In original Englsih-
"Before I close, I must express my thanks to all the Members of this august Assembly from whom I have received not only courtesy but, if I may say so, also their respect and affection. Sitting in the Chair and watching the proceedings from day to day. I have realised as nobody else could have, with what zeal and devotion the members of the Drafting Committee and especially its Chairman, Dr. Ambedkarin spite of his indifferent health, have worked. (Cheers)."
"We could never make a decision which was or could be ever so right as when we put him on the Drafting Committee and made him its Chairman."
"He has not only justified his selection but has added luster to the work which he has done. In this connection, it would be invidious to make any distinction as among the other members of the Committee. I know they have all worked with the same zeal and devotion as its Chairman, and they deserve the thanks of the country."
दोपहर में दिनदहाड़े उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बंथरा थाना क्षेत्र में 11वीं कक्षा में अध्ययनरत 17 वर्षीय दलित नाबालिग छात्रा के साथ हुआ सामूहिक बलात्कार केवल अत्यंत शर्मनाक और दण्डनीय अपराध ही नहीं, बल्कि अमानवीयता की पराकाष्ठा है!
पीड़िता अपनी बड़ी बहन से मिलने जा रही थी, तभी हरौनी पेट्रोल पंप के पास रास्ते में उसे रोक लिया गया। उसके साथ आए परिचित युवक को पीटकर भगा दिया गया, और फिर पास के आम के बाग में ले जाकर बारी-बारी से दुष्कर्म किया गया।
यह घटना दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश में बेटियाँ कितनी असुरक्षित हैं — राजधानी में भी अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिनदहाड़े ऐसी दरिंदगी करने से नहीं चूकते।
हम @UPGovt से माँग करते हैं कि —
1. सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
2. मुकदमा SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, POCSO एक्ट और अन्य सख्त धाराओं के तहत चलाया जाए।
3. पीड़िता को सुरक्षा, चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक परामर्श एवं उचित मुआवज़ा प्रदान किया जाए।
4. यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर दोषियों को सख्त से सख्त सज़ा दी जाए।
@CMOfficeUP@myogiadityanath
बहुजन नायक, मान्यवर साहब कांशीराम जी के परिनिर्वाण दिवस पर जिला बिजनौर के इंदिरा बाल भवन में आयोजित आदरांजलि सभा में माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष @BhimArmyChief नगीना से लोकप्रिय सांसद भाई चंद्र शेखर आजाद जी ने उन्हें कृतज्ञता पूर्ण नमन एवं विनम्र आदरांजलि अर्पित कर संकल्प लिया कि आपके "बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय" के अधूरे सपने को मंजिल तक पहुंचा कर ही दम लेंगे।
मान्यवर कांशीराम साहब अमर रहें!
माननीय सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी. आर. गवई पर सुनवाई के दौरान जूता फेंकने की कोशिश बेहद गंभीर और शर्मनाक घटना है!
यह केवल न्याय व्यवस्था पर हमला नहीं, बल्कि जातिवाद और असहिष्णुता का भी प्रतीक है।
यह समझना ज़रूरी है कि जब न्याय के सर्वोच्च मंच पर बैठे व्यक्ति की सुरक्षा और गरिमा पर हमला होता है, तो यह पूरे न्याय व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश होती है।
ऐसी हरकतें न सिर्फ निंदनीय हैं, बल्कि यह संकेत हैं कि समाज में असहमति को अभद्रता और हिंसा के ज़रिए प्रकट करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है — जो किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।
हम इस जघन्य कृत्य की कट्टर निंदा करते हैं और @PMOIndia से मांग करते हैं कि आरोपी पर देशद्रोह और न्यायिक गरिमा भंग करने की सबसे सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर कोई भी हमला देश की आत्मा पर हमला है - और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
#SupremeCourt
#SupremeCourtOfIndia
#Cjigavai
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की सरकार द्वारा बरेली में किए जा रहे अन्याय के मौजूदा हालात का जायज़ा लेने और पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात करने जा रहे माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष @BhimArmyChief, नगीना से लोकप्रिय सांसद भाई चंद्रशेखर आज़ाद जी को सहारनपुर स्थित उनके निवास पर पुलिस द्वारा डिटेन करना साफ़ दर्शाता है कि सरकार और प्रशासन सच को सामने आने से रोकना चाहते हैं।
पीड़ितों की आवाज़ को दबाने और हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने की यह कोशिश किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आप आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद जी को सही तरीके से नहीं जान पाए हो जब वो चाहेंगे जहां पहुंचना होगा पहुंच जाएंगे आप उनको ज्यादा दिन तक नहीं रोक सकते।
#ReleaseChandrashekharAazad
#ReleaseChandrashekharAazad
लश्कर भी तुम्हारा है सरदार तुम्हारा है
तुम झूठ को सच लिख दो अखबार तुम्हारा है।
इस दौर के फरियादी जायें तो कहां जायें,
कानून तुम्हारा है दरबार तुम्हारा है।
सूरज की तपन तुमसे बर्दाश्त नहीं होती,
इक मोम के पुतले सा किरदार तुम्हारा है।
लेकिन पुलिस को आगे करके लोकतंत्र को कुचलने वालो तानाशाहो सुन लो,
तानाशाहों को अगर जिद है हम पर पहरा बैठाने की...
तो हमने भी ठानी है इस बहुजन समाज को न्याय दिलाने की...
अगर बरेली में मेरे मुस्लिम भाइयों के साथ कुछ गलत नहीं हुआ है? नाइंसाफी नहीं हो रही है? तो योगी सरकार अपनी पुलिस के दम पर मुझे वहां जाने से क्यों रोकना चाहती है?