#NoTetBeforeRteAct
TET की अनिवार्यता ख़त्म करने के विषय में मा श्री सी आर पाटिल मंत्री भारत सरकार से अपने सहयोगी साथी श्री राम मूर्ति ठाकुर महासचिव,(झारखंड),श्री राहुल अंकुश गव्हाणे उपाध्यक्ष (गुजरात) एवं श्री राधे रमण त्रिपाठी उपाध्यक्ष (उत्तर प्रदेश) के साथ भेंट की ।
@TFI4India@UPPSS1921
@yadavakhilesh विभागीय नियमों के अनुकूल 25-30 वर्ष पूर्व में नियुक्त शिक्षकों से वर्तमान में एक और परीक्षा उत्तीर्ण कराने की अनिवार्यता शिक्षकों के साथ अन्याय है ।
#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@RahulGandhi@dpradhanbjp@myogiadityanath
"विचारणीय प्रश्न "
टीईटी से संबंधित पुनर्विचार याचिका निर्णय में टिप्पणी करते हुए माननीय न्यायाधीश महोदय ने कहा की टी ई टी पास न करने वाले शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए बच्चों का भविष्य खराब होगा अर्थात वह योग्य नहीं होंगे . यदि माननीय न्यायधीश महोदय के उक्त कथन को सत्य माना जाए तो निम्नलिखित गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं:
1. इस समय देश के तमाम प्रमुख पदों पर बैठे हुए, चाहे वह राजनेता हों, प्रशासनिक अधिकारी हों, इंजीनियर हों,डॉक्टर हों या व्यवसायी हों, क्या इन सभी लोगों को टीईटी पास शिक्षकों ने शिक्षा दी है?
2. यदि नहीं तो क्या अयोग्य शिक्षकों (नॉन टी ई टी )
द्वारा शिक्षित किए गए उपरोक्त देश के शीर्ष पदों पर बैठे हुए लोग योग्य हैं?
3. अब प्रश्न यह उठता है कि जब नान tet सभी टीचर्स अयोग्य हैं तो उनके द्वारा पढ़ाए गए सभी छात्रों को भी पुनः एक से लेकर अंतिम डिग्री तक की पढ़ाई tet उत्तीर्ण शिक्षकों से नहीं करनी चाहिए?
इस एक फैसले ने पूरे देश की जनता की योग्यता पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया.
@DrDCSHARMAUPPSS@RammurtiThakur
#Following
#highlightseveryonefollowers
#JusticeForTeachers
देश के सभी राज्यों में आरटीई लागू होने के पूर्व राज्यों द्वारा निर्धारित अर्हता रखने वाले अभ्यर्थियों को ही शिक्षक पद पर नियुक्त किया गया है जोकि 25-30 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं ।
परन्तु आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।
@PMOIndia@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@jayantrld@CMOfficeUP@myogiadityanath@rajnathsingh@aajtak@brajeshlive@Aamitabh2@ABPNews
@grok@DrDCSHARMAUPPSS दीपांकर दत्ता जी को शिक्षकों के TET पास करने से पहले ज्यूडिशियरी की प्री, मैंस और इंटरव्यू पास करके दिखाना चाहिय....
नहीं तो यह सिद्ध होगाकि
अंधेर पुर नगरी, चौपट राजा।
टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।।
हम सब शिक्षकों द्वारा पढ़ाया हुए बच्चे ही टेट पास करके शिक्षक बने हुए हैं। और भारत वर्ष में सरकारी सेवा क्षेत्र के विभिन्न पदों पर आसीन है।
माननीय जज साहब को शिक्षकों के अनुभव को नकारते हुए सरकार के प्राविजो को सही ठहराया जाना उचित नहीं है..
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ही संसद द्वारा पास किया गया इलेक्टोरल बांड कानून को निरस्त किया गया।
माननीय न्यायालय द्वारा ही कई आदेश सेवा शर्तों के बारे में जारी किए गए हैं कि निर्धारित सेवा शर्त के बीच में कोई शर्त नहीं थोपी जाएगी..
हम सब संघर्ष करेंगे निश्चित रूप से भेद-भाव युत कानून को वापस कराकर ही दम लेंगे।
@grok कृपया यह बताएँ कि माननीय Supreme court ke न्यायाधीश shri Deepanker Datta जी द्वारा हाईकोर्ट या Supreme court ke जज बनने ke लिए कभी कोई परीक्षा उत्तीर्ण की है अथवा नहीं