Place of supply of goods other than import and export [Section 10] (Pic 1)
Place of supply of goods imported into, or exported from India [Section 11] (Pic 2)
Place of supply of services where location of supplier AND recipient is in India [Section 12] (Pic 2)
Place of supply of services where location of supplier OR location of recipient is outside India [Section 13] (Pic 3)
Source @theicai
सर नमस्कार
निवेदन आप से जयपुर महल रोड स्थिति शांतिविहार कॉलोनी है,जिसमें JDA द्वारा सेन्ट्रल स्पाइन योजना के नाम से अधिग्रहित की जा रही है, परंतु न्यायालय के स्टे के बावजूद अधिकारियों द्वारा मनमानी करके प्लॉट धारी के हितों को दरकिनार Kiya जा रहा हैlउचित कार्यवाही करें।
धन्यवाद,
सर नमस्कार
निवेदन आप से जयपुर महल रोड स्थिति शांतिविहार कॉलोनी है,जिसमें JDA द्वारा सेन्ट्रल स्पाइन योजना के नाम से अधिग्रहित की जा रही है, परंतु न्यायालय के स्टे के बावजूद अधिकारियों द्वारा मनमानी करके प्लॉट धारी के हितों को दरकिनार Kiya जा रहा हैlउचित कार्यवाही करें।
धन्यवाद,
पांच मिनट की फिल्म है जिसका नाम है 'सॉरी'. इस फिल्म को बनाने में मात्र 30 मिनट का समय लगा। इस फिल्म ने इंटरनेशनल ऑस्कर अवॉर्ड भी जीता है.!
यह फिल्म एक पिता पर आधारित है।
बच्चे के जन्म से लेकर पिता के बुढ़ापे तक. भले ही आप भाषा नहीं समझते हों, फिर भी आप बहुत कुछ समझ जायेंगे। आख़िर पिता तो पिता ही होता है.
बहुत दिलच्स्ब!
अंत देखना न भूलें !
श्रीकृष्ण सदा सहायते 🙏💐
हनुमान चालीसा को सिद्ध करने की विधि....
बहुत से लोग बस हनुमान चालीसा रट लेते हैं और बस बोलते जाते हैं। बोलने से हनुमान चालीसा सिद्ध नहीं होगी, जप करने से होगी
जप का अर्थ होता है शब्द पर ध्यान देना। आप जो भी नाम का जप कर रहे हैं या यहाँ हम हनुमान चालीसा की ही बात कर लेते हैं, आपको अर्थ पता होना बहुत ही आवश्यक है।
मैं हर मंगलवार को मंदिर जाता हूँ। वहां बहुत हनुमान जी के भक्त आते हैं और जितना मैं समझ पाया हूँ, हो सकता हैं मैं गलत हूँ, वे लोग बस हनुमान चालीसा को बोल रहे होते हैं, जप नहीं कर रहे होते हैं।
हनुमान चालीसा बोलते हुए आपके मन में एक-एक शब्द का अर्थ आना चाहिए। धीरे - धीरे पढ़ें और अर्थ स्मरण करते रहे।
हनुमान चालीसा के यह अर्थ आपका जीवन बदल देंगे क्यूंकि हनुमान चालीसा हमें जीवन में दिशा देने के लिए ही लिखी हुई है।
यदि आपके जीवन में कोई लक्ष्य नहीं है तो हनुमान चालीसा का अर्थ सहित जाप आपको अपना लक्ष्य पहचानने में सहायता करेगा।
यदि आप अपने जीवन में दुखी हैं तो हनुमान चालीसा का अर्थ सहित जाप आपको दुखों से मुक्ति देगा।
यदि आप पूरी तरह से परिस्थितियों के सामने घुटने टेक चुके हैं तो हनुमान चालीसा का अर्थ सहित जाप आपको शक्ति देगा फिर से जीवन में आने वाली विपत्तियों से जीतने के लिए।
आपको कोई भी समस्या हो, कोई रोग हो, तकलीफ हो, दर्द हो, सब धीरे धीरे ठीक हो जाएगा।
हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास जी ने आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व लिखी थी।
हम सबके मन में यह प्रश्न स्वाभाविक ही उठ जाता है जब हम हनुमान चालीसा शब्द को सुनते हैं कि चालीसा का क्या अर्थ है ? हनुमान जी के लिए लिखी गयी इस स्तुति का नाम तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा ही क्यों रखा!!
उत्तर: बहुत ही सरल है । इस स्तुति में 40 पंक्तियाँ (lines) हैं । हर पंक्ति की संख्या भी 40 ही है।
गोस्वामी शब्द का अर्थ होता है जिसने अपनी इन्द्रियों को अपने वश (control) में कर लिया हो ।इसमें सबसे प्रमुख इन्द्रिय है वासना, स्त्री के लिए आकर्षण ।
स्तुति शब्द का अर्थ होता है ध्यान लगाना । जैसे यदि आप हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं तो स्वतः ही आपका ध्यान हनुमान जी पर चला जाएगा।
जब तक आप पाठ कर रहे हैं तब तक । यदि बिना अर्थ के बस पंक्तियों को पढ़ रहे हैं तो ऐसा नहीं होगा । परन्तु यदि सभी पंक्तियों का अर्थ आप जानते हैं और हनुमान चालीसा की पंक्तियाँ पढ़ते समय अर्थ भी साथ-साथ आपके मस्तिष्क (brain) में चल रहा हो तो जिसे अंग्रेजी में मैडिटेशन कहते हैं
वो घटित हो जाएगा आपके भीतर ।
हनुमान चालीसा के अर्थ के साथ पाठ करने से आप यह अनुभव करेंगे की सच में हनुमान जी आपके साथ हैं बस अपने कर्म अच्छे रखना और ध्यान रखना कि कर्म मन, वाणी और शरीर तीनों से होते हैं ।
तो मन में भी किसी प्रकार की कोई गन्दगी का प्रवेश मत होने देना जैसे किसी स्त्री को लेकर गंदे विचार या किसी को धोखा देने का विचार या फिर वाणी से कोई भी गाली या अपशब्द का प्रयोग और ना ही शरीर से कोई गलत कर्म करना जैसे हस्तमैथुन या किसी पर अनावश्यक शारीरिक बल का प्रयोग, इत्यादि ।
हनु शब्द का एक अर्थ होता है ठुड्डी और दूसरा अर्थ होता है हनन कर लेना। मान शब्द का अर्थ होता है सम्मान या यश। हनुमान जी पर दोनों ही अर्थ सटीक बैठते हैं।
सबसे पहले बात करते हैं की हनुमान जी का नाम हनुमान कैसे पड़ा।
हनुमान जी की ठुड्डी यानी जबड़ा थोड़ा विकृत था इसलिए उनको हनुमान कहा जाता है। ठुड्डी विकृत होने के बाद भी हनुमान जी सुन्दर ही दिखते थे। विकृत ठुड्डी उनकी सुंदरता को और निखारती ही थी जिस वजह से हनु शब्द के आगे मान जोड़ दिया गया।
हनुमान जी में अतुलित (unmatched) बल, बुद्धि और विद्या थी पर फिर भी उनके अंदर अहंकार नहीं था ।
इस प्रकार हनुमान जी का नाम हनुमान इसीलिए भी पड़ा क्यूंकि उन्होंने अपने अहंकार का हनन कर लिया था यानी बल, बुद्धि और विद्या होने के बाद भी हनुमान जी में 1 प्रतिशत भी घमंड नहीं था।
ये कोई साधारण बात नहीं है। जिसमें शरीर में बल भी हो , बुद्धि भी तेज़ हो और जिसके पास किसी भी कार्य को करने की विद्या भी हो यानी तीनों सर्वोत्तम गुण एक ही मनुष्य में हो तो क्या ऐसा हो सकता है की उस मनुष्य में अकड़ ना हो?
और जो अपने अहंकार को समाप्त कर देगा उसका समाज में मान तो होगा ही। अब यह मत बोलना की वो भगवान थे इसलिए उनके अंदर अहंकार नहीं था।
सच तो यह है की उन्होंने अपने भीतर अहंकार को कभी आने नहीं दिया इसीलिए वो भगवान कहलाये।
भारतीय संस्कृति में भगवान एक पद है ना की परमात्मा का दूसरा नाम। जैसे एक व्यक्ति मैनेजर से प्रमोट होकर डायरेक्टर बना दिया जाता है।
जय श्री राम 🚩जय हनुमान
सबसे बड़ा सर्वे..
आपकी नजर में इन चारों में बेस्ट सीएम कौन है.?
1-: योगी आदित्यनाथ जी
2-: अरविंद केजरीवाल
3-: शिवराज सिंह चौहान
4-: नीतीश कुमार
Rt कर के कमेंट में बताए