@goonjabhivyakti
जिंदगी ऊपरवाले की बनायी पीडीएफ़ है
हम बेवजह अपना पीडीएफ एडिटर
फँसा के बैठे हुए हैं!
अच्छे कर्म करते जायें
लगन ईमानदारी से
by default……
सब कुछ सटीक सकारात्मक
एडिट होता रहेगा।
#हिन्दी#जिंदगी
तुम्हारी यादों के झुरमुट
इस बरस की बारिश में
“काई नुमा”से हो गए हैं
इसकी फिसलन तकलीफ़ दे रही अब
निकले कोई नई सुनहरी धूप
इन झुरमुटों की तबीयत से
सफ़ाई ही इस बार कर डालूँ ।
@goonjabhivyakti@kavitaaGhar@ambwanik
@umda_panktiyaan शाम को याद आती है कि बस अब रात होने को है
फिर आज तन्हाइयों से मुलाक़ात होने को है ।
काश ऐसा हो जाता किसी शाम को ही
नया सवेरा छा जाता
रात की तन्हाई का एक अरसा तो बीत ही जाता ।
तन्हा बैठ करना इज़हारे मोहब्बत
उन्ही को आता है
जो सच में दीवाने ही होते हैं!
वरना तो…
फेसबुक और इंस्टा में लोगों के
यूँ ही कई हज़ारों अफ़साने होते हैं ।
#दीवाने#अलग@goonjabhivyakti@ambwanik
जो आयें हैं उन्हें जाना भी होगा,
जो जाएँगे जरूरी नहीं पुनः आएँ!
आने और जाने के बीच का ठहराव
ये तय करने का मौका देगा कि..
जाकर आना है या नहीं ?
पुनः जीवन?मुक्ति?..
#हिंदी#जीवन@goonjabhivyakti@jeevanyatraa@ambwanik
ख़ुद को माँजने के लिए वह
दुख ख़रीदने निकल पड़ा बाजार
मुफ्त में मिलने वाला दुख को भी
लोगों ने बेशकीमती बना डाला ।
-कमल अम्बवानी
@goonjabhivyakti@ambwanik#हिंदी#दुख
एक कुशल शल्य चिकित्सक की भाँति, चीर -फाड़ करो अपने बीते हुए समय की,
जो भी क्रूर और दयनीय स्मृतियाँ हैं
रफू कर सिलाई करो उनकी..
यादों के जख्म अब नासूर नहीं बनेंगे।
स्वच्छ साफ़ होता जाएगा अब आगामी समय ।
-कमल अम्बवानी
@goonjabhivyakti@ambwanik
केवल हम इंसान ही नहीं
वृक्ष से विस्थापित हुई
लकड़ियों में भी जान हुआ करती है,
बारिश की झड़ी क्या लगी
लकड़ी के दरवाजे भी
ख़ुशी से झूमते हुए फ़ैल जाते हैं
फूल से जाते हैं …!
-कमल अम्बवानी
@goonjabhivyakti@ambwanik#hindi#वृक्ष#हिंदी
मैं लिखूँ तुम पढ़ो ये क्या बात हुई ?
तुम मेरे मन को पढ़ो …
मेरे अंतर्मन में ख़ुद को लिखो
जिसे मैं और सिर्फ़ मैं पढ़ूँ ।।
@goonjabhivyakti@ambwanik@kavitaaGhar
@Tweetmukesh
मुसाफ़िर से हो गए हो तुम मेरे लिए
रात में आते हो कभी कभी
भोर होते ही चले जाते हो
मेरे ख्वाबों से ….
क्या हो सकता है ?कभी कि
नींद खुले ही नहीं या फिर…
दिन का उजाला ही न हो !
कमल अम्बवानी @ambwanik