राग नंद में बड़ी सुंदर रचना है-अजहूं ना आए श्याम।कई गायकों ने इसे गाया है।जयपुर अतरौली घराने की सानिया पाटणकर ने इसे बहुत ख़ूबसूरती से निभाया है। मौजूदा समय में सानिया जी बहुत ही मेहनत और समर्पण के साथ अपने घराने की महक बिखेर रही हैं।
#Raaggiri@YRDeshmukh@hvgoenka@arunbothra
पं. छन्नूलाल मिश्र को बचपन से ही माता-पिता ने धार्मिक ग्रंथों की अच्छी शिक्षा दी थी।इसीलिए पूरब अंग की गायकी के साथ साथ उनके भक्ति गीतों में एक असर था। भक्ति के साथ लोकगीतों की मिठास।
आज दिन भी शुक्रवार का है -एक देवी गीत
#Raaggiri@YRDeshmukh@hvgoenka@BajpayeeManoj@sumrag
एक बार एक कवि हलवाई की दुकान पहुँचे, जलेबी ली और वहीं खाने बैठ गये।
इतने में एक कौआ कहीं से आया और दही की परात में चोंच मारकर उड़ चला....
हलवाई को बड़ा गुस्सा आया उसने पत्थर उठाया और कौए को दे मारा। कौए की किस्मत ख़राब, पत्थर सीधे उसे लगा और वो मर गया....
ये घटना देख कर कवि हृदय जगा। वो जलेबी खाने के बाद पानी पीने पहुँचे तो उन्होंने एक कोयले के टुकड़े से वहाँ एक पंक्ति लिख दी।
"काग दही पर जान गँवायो"
तभी वहाँ एक लेखपाल महोदय पहुंचे, जो कागजों में हेराफेरी की वजह से निलम्बित हो गये थे, पानी पीने आए।
कवि की लिखी पंक्तियों पर जब उनकी नजर पड़ी तो अनायास ही उनके मुँह से निकल पड़ा...
कितनी सही बात लिखी हैं ! क्योंकि उन्होंने उसे कुछ इस तरह पढ़ा :- "कागद ही पर जान गँवायो"
तभी एक मजनू टाइप लड़का, पिटा-पिटाया सा वहाँ पानी पीने आया। उसे भी लगा कितनी सच्ची बात लिखी हैं। काश उसे ये पहले पता होती, क्योंकि उसने उसे कुछ यूँ पढ़ा था :- "का गदही पर जान गँवायो" 😂
इसीलिए संत तुलसीदास जी ने बहुत पहले ही लिख दिया था :- "जाकी रही भावना जैसी... प्रभु मूरत देखी तिन तैसी"
बोलो श्री सत्यनारायण भगवान की जय, कथा समाप्त हुई। 😄😂
सच बोलने वालों के पास भीड़ नहीं होती, लेकिन सुकून ज़रूर होता है।
साइकोलॉजी कहती है जितना ज़्यादा कोई इंसान झूठ और दिखावे में जीता है उतनी बड़ी होती है उसकी मंडली क्योंकि हर झूठ हर नक़ाब कई झूठे रिश्तों को साथ बाँध लेता है
लेकिन जो इंसान सच्चा होता है वो भीड़ नहीं सच्चाई का बोझ उठाता है वो कम लोगों से जुड़ता है पर उन कुछ रिश्तों में ही पूरा संसार देख लेता है
आज के दौर में अगर तुम्हारे पास गिने-चुने लेकिन सच्चे लोग हैं तो समझो तुम अब भी असली ज़िंदगी जी रहे हो नकली नहीं
आँखों में दर्द है, लेकिन चेहरे पर मुस्कान है.
ज़िंदगी का मतलब ही यही है.... Show Must Go On.
संघर्ष कीजिये.. लड़िये परिस्थितियों से..... सफलता आज नहीं तो कल.. कल नहीं तो परसो... आपके कदम चूमेगी. असफलताओं से और दुःख से मत घबराइए... यह जीवन का अभिन्न अंग हैं.
फर्क पड़ता है 🙌🏻🙌🏻
हमारे आसपास का वातावरण साफ सुथरा रखने की जिम्मेदारी हमारी खुद की होनी चाहिए, सबकुछ प्रसाशन के भरोसे मत छोडो...
कितना खूबसूरत वीडियो है...
पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र नहीं रहे। वो संगीत जगत के एक ऐसे कलाकार के तौर पर याद किए जाएंगे जिनका अपने श्रोताओं से अद्भुत कनेक्ट था। पंडित जी को #Raaggiri परिवार की तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🏻🙏🏻
"नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि"..
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह प्रार्थना आपने अब तक सुबह सवेरे पार्क में मैदान में सुनी होगी। अब लंदन के ऑर्केस्ट्रा की धुन और शंकर महादेवन की आवाज में प्रार्थना सुनिए और हरीश भिमानी की आवाज में इसका अर्थ भी समझिए।
#RSS100Years
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दुःख में जो भी साथ रहे,उनका शुक्रिया हमेशा बनता है खासकर उन लोगों का जिनकी हमें उम्मीद भी नहीं होती ऐसे लोग आपकी बोझिल ज़िंदगी को थोड़ा हल्का कर देते हैं और फिर लगता है कि अभी भी जिया जा सकता है,और जिनसे उम्मीद थी,1/2
मूमल और महेंद्रा की प्रेम गाथा को इस तरह सुनना दिल को छू गया। मूमल जैसलमेर के लुद्रवा की राजकुमारी थी और राणा महेंद्रा वर्तमान पाकिस्तान के अमरकोट के राजकुमार थे। राजस्थान की यह प्रसिद्ध प्रेम कहानी किसी से भी अछूती नहीं हैं। आज भी राजस्थान के धोरों के कण कण में विरह वेदना की यह प्रेम गाथा गूंज रही हैं।
#Moomal #Mahendraa