प्रिय @RahulGandhi
देश में जो हालात बन गए हैं उससे निपटने के लिए तुरंत "शांति यात्रा" निकालने की व्यवस्था करें।
मेरी अपील आपसे इसलिए है कि आपका संदेश देश-विदेश के कोने कोने में जाएगा।
अक्टूबर तक का इंतजार मत किजिए 🙏
आओ भारत जोड़ो यात्रा से पहले शांति का संदेश दे। #Udaipur
इस बार मोदी जी योग मुद्राएं ठीक करवा रहे हैं
12वां योग दिवस इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सल्तनत के नए सूबे पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मनाया है। हर साल योग दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी हमेशा सबसे अग्रिम पंक्ति में योग करते हुए देखे जाते हैं लेकिन इस बार वे योग करने वालों की योग मुद्राएं ठीक करवाते नजर आए। शायद यह पश्चिम बंगाल की नई शुभेंदु अधिकारी सरकार को संदेश भी हो सकता है।
वैसे नरेंद्र मोदी ने योगा इंस्ट्रक्टर का कोर्स भी किया हुआ है। स्वामी विवेकानंद योग एवं आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति एच आर नागेंद्र उनके योग गुरु हैं
Re-NEET देने वाले सभी छात्रों को मेरी अनेक शुभकामनाएँ।
पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दीजिए। कुछ भी हो, मैं हमेशा आपके साथ हूं और आपकी रक्षा करता रहूंगा।
सरकार से अपेक्षा है कि इस बार NEET बिना किसी गड़बड़ी के होगी। छात्र पहले ही बहुत तनाव झेल चुके हैं - अब किसी बच्चे की उम्मीद न टूटने पाए।
जब एक युवा कहता है, "मुझे नौकरी मिल गई"... तो वह सिर्फ़ अपनी नहीं, पूरे परिवार की ख़ुशी बयान कर रहा होता है!
आज Mega Job Fair में नौकरी पाने वाले युवाओं से IYC President @UdayBhanuIYC ने मुलाकात की!
यही वजह है कि भारतीय युवा कांग्रेस की यह पहल सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं, युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ने का प्रयास है! ❤️
Dear @RahulGandhi or as I'll call you, Rahul!
While many will wish you today, not all have been through the pain you have been, the times you've seen.
Brings tears to my eyes whenever I remember 2019-2022
But we fought it, we will fight & win!
Just keep going, I'm with you🤍
राहुल गांधी : धूप, धूल और लोकतंत्र में धीरे-धीरे खुलती हुई एक शख्सियत
आज राहुल गांधी का जन्मदिन है।
भारतीय राजनीति में वे उन दुर्लभ चेहरों में हैं, जिन्हें उनके विरोधियों ने जितना कार्टून बनाया, जीवन ने उन्हें उतना ही धीरे-धीरे एक गंभीर रेखाचित्र में बदल दिया।
वे किसी तैयार सिंहासन के राजकुमार से अधिक उस व्यक्ति की तरह दिखते हैं, जिसे इतिहास ने बहुत जल्दी शोक, सुरक्षा, अकेलेपन और सार्वजनिक अपमान की पाठशाला में बैठा दिया था।
राहुल गांधी के बारे में दस बातें ऐसी हैं, जिन्हें लोग अक्सर नहीं जानते या गंभीरता से नहीं पढ़ते।
पहली, उनकी प्रारंभिक पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलंबा स्कूल और फिर देहरादून के दून स्कूल में हुई।
दूसरी, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा कारणों से उन्हें और प्रियंका गांधी को घर पर पढ़ाया गया।
तीसरी, वे दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज में भी रहे।
चौथी, वे हार्वर्ड गए, लेकिन राजीव गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा के कारण अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित रोलिंस कॉलेज में शिफ्ट हुए।
पाँचवीं, उन्होंने 1994 में स्नातक की डिग्री ली।
छठी, 1995 में ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज से डेवलपमेंट स्टडीज़ में एमफिल किया।
सातवीं, राजनीति में आने से पहले वे लंदन की मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म मॉनिटर ग्रुप में काम कर चुके हैं।
आठवीं, भारत लौटकर उन्होंने मुंबई में बैकऑप्स सर्विसेज नाम की टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग कंपनी शुरू की।
नौवीं, वे आइकिडो में ब्लैक बेल्ट हैं—यानी उनकी राजनीति में जो संयम दिखता है, उसके पीछे शरीर और मन की एक अनुशासित साधना भी है।
दसवीं, वे स्कूबा और फ्री-डाइविंग के शौकीन हैं; पानी की गहराई में उतरना शायद उन्हें भीड़ के शोर से बाहर अपना मौन देता होगा।
राहुल गांधी की खास बात यह है कि वे अब केवल एक परिवार के उत्तराधिकारी नहीं रह गए। भारत जोड़ो यात्रा के बाद वे उन पैरों वाले नेता बने हैं, जो सड़क की धूल से अपनी भाषा बनाते हैं। कोटा में छात्रों के बीच खड़े होकर जब वे शिक्षा-व्यवस्था की निर्ममता पर बोलते हैं, तो लगता है कि यह आदमी अपनी निजी त्रासदी से आगे बढ़कर अब सार्वजनिक पीड़ा की भाषा सीख चुका है।
उन्हें जन्मदिन की असीम शुभकामनाएँ।
@RahulGandhi
भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है।
ज़रा सोचिए - देशभर के परिवार जितना पैसा सिर्फ़ NEET की तैयारी पर ख़र्च करते हैं, वो भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है।
आज कोटा से, और देश के हर कोने से, लाखों युवा एक सुर में कह रहे हैं - इस व्यवस्था ने हमारे साथ अन्याय किया है।
हर युवा अलग है, पर सबकी कहानी एक - या तो सपने देखने नहीं दिए गए, या देखे हुए सपने तोड़ दिए गए।
‘छात्रों की गूंज’ सिर्फ़ अभियान नहीं - एक क्रांति है। हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी है जो आपको बड़े सपने देखने का हक़ दे और आपकी ज़िंदगी गिरवी रखे बिना, उन्हें पूरा करने में आपका साथ दे।
#ChhatronKiGoonj
56 साल के युवा राहुल गांधी...
बहुत सारे नेताओं को इस उम्र तक युवा नेता बता दिया जाता है लेकिन राहुल गांधी सच में 56 साल की उम्र में युवा नेता हैं। युवा बने रहना कोई आसान काम नहीं है। वह भी तब, जबकि परिस्थितियां युवावस्था की निर्धारित उम्र निकलने के बाद हमेशा आपके प्रतिकूल ही रही हों। यही जीवट है। इसीलिए राहुल गांधी मेरे पसंदीदा नेताओं में से एक हैं।
राहुल गांधी राजनीति के पेशे में हैं। राजनीति का यह काम बेहद थकाने वाला होता है। ऊपर से जब आप किसी राष्ट्रीय पार्टी के सबसे पावरफुल नेता होते हैं तो आपको आराम कम और तनाव ज्यादा मिलते हैं। बहुत सारे राज्यों में आपको एक साथ ध्यान देना पड़ता है। वहां चल रही साजिशों को भी नियंत्रित करना पड़ता है। राहुल गांधी को प्रतिद्वंद्वी पार्टियों से कम और अपनी ही पार्टी के नेताओं से ज्यादा तनाव मिला है।
अगर यकीन नहीं हो, तो आप राज्यों में नजर दौड़ा लीजिए। राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पार्टी पर वर्चस्व की जो लड़ाइयां चलती हैं, उनको हैंडल करना कोई आसान काम नहीं है। एक राष्ट्रीय पार्टी के सबसे बड़े नेता की जो ऊर्जा सरकार से लड़ने में खर्च होनी चाहिए, वह अपनी ही पार्टी के नेताओं की लड़ाई को सुलझाने में खर्च होना कितना दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन राहुल गांधी को यह सब करना पड़ता है और वे लगातार कर भी रहे हैं। हालांकि उनकी पार्टी के नेताओं ने उन्हें कभी चैन से बैठने नहीं दिया।
राहुल गांधी ने अपने आप को पूरी तरह बदलने के लिए पूरे प्रयास झौंके हैं। वे एक ऐसे राजनीतिक परिवार में पैदा हुए हैं, जिसमें जन्म लेने वाले व्यक्ति का राजनीति से मन भर सकता है और वह पूरा जीवन समस्त सुख सुविधाओं के साथ आराम से बिता सकता है लेकिन राहुल गांधी ने सीखने और संघर्ष करने की राह चुनी। उन्होंने हजारों किलोमीटर की भारत जोड़ो यात्रा निकाली। समाज के एक-एक वर्ग के बीच जाकर उनके मन की थाह लेने की कोशिश की। हालांकि हर बार उनका मजाक बनाया गया लेकिन इसके बावजूद बंदे ने कभी हार नहीं मानी। यह राहुल गांधी के जीवट का प्रमाण है।
56 साल के राहुल गांधी
आप चीजों को कैसे देखते हैं, यह आपकी दृष्टि पर निर्भर करता है। एक बड़ा वर्ग यह बात करता है कि राहुल गांधी 56 साल के हो गए हैं लेकिन मैं इसे इस तरह देखता हूं कि राहुल गांधी अभी 56 साल के ही हुए हैं। राजनीति में 56 वर्ष की उम्र कोई बड़ी उम्र नहीं होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही देख लीजिए। वे भी 50 की उम्र में ही गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे और 63 की उम्र में जाकर देश के प्रधानमंत्री बन पाए थे। राहुल गांधी चाहते तो 2009 में करीब 40 की उम्र में भी प्रधानमंत्री बन सकते थे। उनके पास अवसर भी था और कोई रोकने वाला भी नहीं था। लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री बनना नहीं चुना। अगर नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री बनने की उम्र के आधार पर देखा जाए तो अभी उनके पास और 7 वर्ष उस उम्र तक पहुंचाने के लिए हैं। हालांकि प्रधानमंत्री बनना और नहीं बनना, यह सब भाग्य के अधीन भी होता है।
आज राहुल गांधी के जन्मदिन पर उन्हें कोटि-कोटि शुभकामनाएं
@RahulGandhi
कोटा, आप कमाल थे।
यकीन मानिए, कल हमने मिलकर इतिहास की शुरुआत की।
हज़ारों छात्र मैदान में थे, लाखों लोगों ने ऑनलाइन देखा - और देश को पहली बार खुलकर पता चला कि शिक्षा के नाम पर कितनी बड़ी वसूली चल रही है।
लेकिन यह तो सिर्फ़ शुरुआत है। कोटा में जो लौ जली है, उसे अब पूरे देश में बदलाव की मशाल बनाना है। और इस सफ़र में आपकी जगह तय है।
अपने सुझाव भेजिए। Petition पर अभी Sign कीजिए।
#ChhatronKiGoonj
VIDEO | Jharkhand Rajya Sabha Election Results: Congress Rajya Sabha candidate Pranav Jha says, "I would like to express my gratitude to my party for nominating an organisational worker like me as a candidate from Jharkhand. I also thank all our MLAs, who worked hard and left no stone unturned in their efforts. The number of votes received by each side determines who emerges victorious. There were two seats in the Rajya Sabha elections and three candidates in the fray. Based on the votes cast by the MLAs, two candidates won. One of them was our party's candidate from the Jharkhand Mukti Morcha, Baidyanath Ram. I extend my heartfelt congratulations and best wishes to him. The other was Independent candidate Parimal Nathwani. I also extend my best wishes to him. He received more votes than I did. I hope that he will work for the people of Jharkhand and contribute to their welfare."
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)
पता है, भारत की सिर्फ़ 5 परीक्षाओं - NEET, JEE, SSC, UPSC और RRB की तैयारी पर छात्र और उनके परिवार हर साल कितना ख़र्च करते हैं?
₹3.5 लाख करोड़।
यानी भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट का लगभग तीन गुना। शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान और महिला-बाल विकास - इन पाँच मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर।
और बदले में करोड़ों युवाओं को क्या मिलता है? तनाव, अनिश्चितता, बेरोज़गारी, और टूटते सपने।
जो ख़र्च सरकार की ज़िम्मेदारी है, उसका बोझ आज परिवार उठा रहे हैं।
#ChhatronKiGoonj
Naidu ji, let’s try a thought experiment. Say your salary is 2 lakhs and your driver’s is 20,000. You announce a 50% increase for everybody. Your salary is now 3 lakhs and your driver’s is 30,000. The percentage or proportional increase is the same — but aren’t you much better off than your driver, than you used to be?
That’s what your fellow Southern CMs are concerned about. You don’t think there’s any difference between UP’s 80 MPs today versus Kerala’s 20 MPs, if it tomorrow becomes 120 vs 30? Some proportionate difference, huge difference in political weight — with 90 more UP MPs against 10 more Kerala MPs. Is that of no concern to you at all?
@ncbn@vdsatheesan@INCKerala
कोटा के लिए निकल चुका हूँ पर दिल में दो नाम गूंज रहे हैं: उमेश और रिया।
कल, सीकर में उमेश और देहरादून में रिया - दोनों ने Re-NEET के दबाव में अपनी ज़िंदगी ख़त्म कर ली।
22 और 23 साल के बच्चे - जिन्हें सपनों के खुले आसमान में उड़ना था वो इस अन्यायी व्यवस्था से हार गए।
ये मौतें एक टूटी, भ्रष्ट व्यवस्था की देन हैं। और इसके ज़िम्मेदार हैं मोदी सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जिन्होंने छात्रों की रक्षा करने के बजाय, बार-बार पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, और भविष्य के सदागरों को संरक्षण दिया।
आज कोटा से हम वो लड़ाई शुरू करेंगे जिसका एक ही मक़सद है - किसी बच्चे के सपने ऐसे टूटने न पाएं, किसी माँ-बाप को फिर कभी अपने बच्चे को इस तरह खोना न पड़े।
हर परिवार की यह पीड़ा अब ‘छात्रों की गूंज’ बनकर पूरे देश में गूंजेगी।
#ChhatronKiGoonj
अशोक गहलोत एवं शांति धारीवाल द्वारा कोटा के कोचिंग संस्थानों पर विद्यार्थियों को रैली में शामिल करने हेतु अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
मैं कोटा के सभी कोचिंग संस्थानों के निदेशकगण एवं प्रबंधन से विनम्र अपील करता हूँ कि वे किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव में न आएं तथा विद्यार्थियों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
- जवाहरसिंह बेढम (गृह राज्यमंत्री)
मेरे युवा और Gen Z साथियों,
एक बात मेरे मन में साफ़ है और आप भी इसे दिल में बैठा लीजिए: भारत के हर युवा का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की ज़िम्मेदारी है।
पर ज़िम्मेदारी और ईमानदारी - दोनों मोदी सरकार की सोच से परे हैं।
पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, रद्द होती भर्तियाँ, आसमान छूती फीस, निजीकरण, घोटाले - इन्हीं औज़ारों से वो हर दिन करोड़ों सपने तोड़ रही है।
याद रखिए, युवा का भविष्य ही देश का भविष्य तय करेगा। यही सब आपसे विस्तार से कहना है। इसलिए मैं आपको बुला रहा हूँ - देश की हर गली, हर कस्बे, हर शहर से उठती ‘छात्रों की गूंज’ को, आइए कोटा में हुंकार बनाएँ।
🗓️ 17 जून | छात्रों की गूंज | कोटा महारैली
#ChhatronKiGoonj