@MORTHIndia My name is Aditya Singh,Learner's Licence No. UP26 /0000569/2026
When I click on 'Apply for Driving License' to apply for a DL, log in using my Learner's Licence number,and then click 'Submit', it shows the message: 'Applicant data should be same as LL data
Solve this
उनकी लाठी से टूटा हुआ ये हाथ, ये दर्द में बैठा हुआ शिक्षक अपने लिये लड़ाई नहीं लड़ रहा है...
बल्कि उन लाखों बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ न हो इसके लिये लाठी खा रहे हैं शिक्षक।
#SSCReforms#SSC_System_Sudharo#SSC_VENDOR_FAILURE
इस वीडियो का थंबनेल देखिए। इससे भी अधिक हास्यास्पद इस वीडियो का कंटेंट है। इस वीडियो में एंकर महिला- अनिरुद्धाचार्य को बार बार- संत, संत नाम से बोलती है। और पूरी वीडियो में आधा आधा काटकर कथित संत का पक्ष लेती है। वहीं अखिलेश यादव को पूर्वाग्रह के साथ लानत-मज़ामत करती है।
इसलिए मीडिया में हर वर्ग का व्यक्ति होना चाहिए। जब एक ही वर्ग के लोग मीडिया में होते हैं। साहित्य में होते हैं, संपादक पदों, रिपोर्टरों, एंकरों के पदों पर जब एक ही वर्ग के लोग होते हैं तो वे ऐसे ही नैरेटिव बनाते हैं। दूसरे पक्ष को देखने की नज़र उनमें नहीं होती। या वे इतने चालाक होते हैं कि सिर्फ़ अपने वर्ग के हितों की ही रक्षा करते हैं।
अगर इसी न्यूज़ रूम में अगर अन्य वर्ग के लोग भी होते, तो हेडलाइन कुछ और होती, कंटेंट कुछ और होता, नैरेटिव कुछ और होता। देश के नेरेटिव पर इनका इकतरफ़ा कंट्रोल है। साहित्य में, प्रकाशनों में, किताबों के छपने-छपाने में, टीवी में, अख़बारों में, पैनलों में, मंचों पर। लेफ्ट-राइट, सेंट्रल सब जगह। किसी भी वर्ग या जाति इकतरफ़ा वर्चस्व वह चाहें यादव हों, ठाकुर हों, जाट हों या ब्राह्मण हों। ये देशविरोधी है। समाजविरोधी है। ये गठबंधन इंसानियत विरोधी है। सभी समाज का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। जमीनों में, दुकानों में, व्यापार में, कॉर्पोरेट में, न्यायपालिका में, जमींदारी में, सब जगह। इस देश को पूरी तरह रिकंस्ट्रक्ट करने की जरूरत है। जमीनों, व्यापार, नौकरियों, न्यायपालिका, मीडिया, कॉर्पोरेट में अब देश के हर वर्ग को जगह मिलनी चाहिए। अन्यथा इस देश में ऐसे ही अन्याय, श्रम चोरी, उत्पीड़न अनवरत चलता रहेगा।
#Oxygen की कमी से कोई नहीं मरा,
समचार खत्म !
#कोरोना#वैक्सीन वजह नहीं है #heart attack की ,
समाचार खत्म !
भगदड़ की वजह से कोई नहीं मरा,
समाचार खत्म !
रेल #दुर्घटना में कोई नहीं मरा,
समाचार खत्म !
#एयरप्लेन दुर्घटना से कितने मरे?
अरे! दुर्घटना को कौन रोक सकता है,
1,2 साल में report दे देंगे
समाचार खत्म !
सड़क दुर्घटना गड्डो की वजह से हो रही , #YeThikKarkeDikhao चलो
अरे! सड़क रहेगी तो गड्डे तो होंगे ही ,
समाचार ख़त्म !
तुम किस लिए हो ? कुर्सी छोड़ो !
अरे! नेता है हम इस्तीफ़ा नहीं दिए जाते इस सरकार में
इस सरकार को जनता ने सिर पर चढ़ाया है इस्तीफ़ा क्यो देंगे ?
मास्टरस्ट्रोक, चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ,विश्वगुरु
ये वो ! पाकिस्तान,हिंदुस्तान , मराठी , तेलगू कन्नड़ हिंदी , भाषा, जात धर्म debate, लाल आँख
पीली आँख , लेजर निकलती हुई आँख
टेड़ी आँख !
जाइएगा नहीं समाचार देखते रहिए
Sabse तेज सबसे पहले ground reporting
zero रिपोर्टिंग , हेलीकॉप्टर से रिपोर्टिंग , धरती चंद्रमा मंगल ग्रह से रिपोर्टिंग ,
धन्य हो ! 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
ये लखनऊ का एक प्राइमरी स्कूल है. अब सरकार कह रही है कि स्कूलों में छात्र नहीं हैं, तो बंद कर दो. सरकार ये क्यों नहीं बता रही कि पहले इन सरकारी स्कूलों को इतना बर्बाद किया है, ताकि छात्र न आएँ. फिर यही बहाना बनाकर स्कूल बंद कर दो. स्कूल की ज़मीन बाद में अपने दोस्तों को बाँट दो. इस साज़िश के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ.
#मधुशाला_नहीं_पाठशाला_दो
यूपी में सरकारी स्कूलों के बंद किए जाने के ख़िलाफ़ अब एक जन आंदोलन खड़ा हो चुका है. गाँव-गाँव से आम लोगों द्वारा विरोध की अनगिनत वीडियो वायरल हो रही हैं. शिक्षकों द्वारा भी विरोध हो रहा है. आम लोग भी इसमें शामिल हैं. आप भी आज ज़ोर लगाओ, इसमें शामिल हो जाओ.
#मधुशाला_नहीं_पाठशाला_दो
आप सभी साथी इस ट्रेंड पर अधिक से अधिक #Railway_Reform ट्वीट करें।
उस दिन भी कहा था अब भी कह रहा हूँ, सभी रेलवे अभ्यर्थियों को चाहिए ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को फॉलो करके जोड़ लें ताकि इस पूरे महीने हर कुछ दिन पर ट्रेंड करवाने में सहायता मिल सके।
सरकार इतनी जल्दी नहीं सुनेगी।
शिक्षा ही विकास की सबसे बड़ी कसौटी होती है। भाजपा सरकार में शिक्षा और शिक्षकों की जो उपेक्षा हो रही है उसके पीछे एक गहरी साज़िश की ये आशंका बलवती हो रही है कि :
- भाजपा आनेवाली पीढ़ी से ‘शिक्षा का अधिकार’ छीनना चाहती है।
- जो शिक्षित होता है वह सकारात्मक भी होता है और सहनशील भी, ऐसे लोग भाजपा की नकारात्मक राजनीति को कभी भी स्वीकार नहीं करते हैं।
- शिक्षा से ही उनमें चेतना आती है और वो उत्पीड़न व शोषण के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाते हैं।
- शिक्षा से जो आत्मविश्वास आता है वह भाजपा जैसे वर्चस्ववादी दल के विरोध का कारण बनता है, इसीलिए न होंगे स्कूल, न होगा भाजपा का विरोध।
- आज गाँवों में स्कूल बंद होंगे कल को भाजपा के संगी-साथी सेवा के नाम पर अपने स्कूल वहाँ खोलने के लिए पहुँच जाएँगे। जिससे वो अपनी दरारवादी सोच के बीज बो सकें।
भाजपा अपनी प्रभुत्ववादी सोच को बनाए रखने के लिए अशिक्षित व अवैज्ञानिक लोगों की ताली बजाती, थाली पीटती अनपढ़ों की भीड़ चाहती है। नकारात्मक सोच के लिए प्रभुत्ववादी, घोर स्वार्थी व अनपढ़ों का समर्थन चाहिए होता है। सच में शिक्षित व परमार्थ से प्रेरित एक चैतन्य व जागरूक व्यक्ति कभी भी भाजपा जैसी सोच का समर्थक नहीं हो सकता है। जितनी शिक्षा प्रसारित होगी उतनी ही भाजपाई राजनीति की जड़ कमज़ोर होगी।
सब जानते हैं कि जो चीज निगाह से दूर हो जाती है, वो दिमाग़ से भी दूर हो जाती है। जब आसपास स्कूल ही नहीं दिखेंगे तो शिक्षा की साक्षात प्रेरणा ही समाप्त हो जाएगी।
हमारा तर्क ये है कि जब 1 मतदाता के लिए बूथ बनाया जा सकता है तो 30 बच्चों के लिए स्कूल चलाया क्यों नहीं जा सकता है।
ये पीडीए के वंचित समाज को और भी वंचित करने का एक बड़ा षड्यंत्र है।
मैं टॉप-10 टॉपर में नहीं था फिर भी मुझे अखिलेश का लैपटॉप मिला। मथुरा के BSA कॉलेज में 2012 में जब मुझे लैपटॉप मिला उस वक्त मेरे साथ 400-500 छात्र थे। मथुरा के और भी कॉलेजों में सैकड़ों छात्रों को लैपटॉप मिले थे। ये एक क्रांतिकारी काम था। हम अखिलेश यादव की वजह से लैपटॉप देख सके।