बहुजन इतिहास के नज़रिए से 14 अक्टूबर का दिन का विशेष महत्व है. इसी दिन 1956 को डॉ अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म को अपनाया और 22 प्रतिज्ञा की.लेकिन किसी भी अखबार में इस ऐतिहासिक घटना को प्रकाशित नहीं किया जबकि इस घटना को सामाजिक जातिगत के खिलाफ़ एक ऐतिहासिक प्रतिरोध के रूप में देखी जानी चाहिए.@EditorRajan@ScienceJourney2@BasavanIndia
मेरी भविष्यवाणी.
1. नरेन्द्र मोदी 10 अगस्त 2027,रात्रि 12 बजे के बाद एक सेकंड भी कुर्सी पर नहीं रहेंगे.
2. मोदी के खिलाफ वोट चोरी का मुकदमा
दर्ज होगा, लेकिन राहुल गाँधी माफ़ी मांगने पर उन्हें छोड़ देंगे.
3. भारत में 2 माह के अंदर बड़ा भूकंप या महामारी का खतरा.
4. ज्ञानेश कुमार क़ो "देशद्रोह "के कारण आजीवन कारावास होगा.
5. दिसम्बर तक 2 बड़े राजनेता की मृत्यु.
6. 4 राज्य सरकारें बर्खाश्त हो जायेंगी.
7. राहुल गाँधी पर जानलेवा हमला हो सकता है.
8. योगी आदित्यनाथ अब कभी मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे.
सवर्ण पहले कांग्रेस को वोट करते थे. शाहबानों मामले के बाद सवर्ण समाज 1989 में BJP की ओर शिफ्ट हो गया.
आज भी BJP का कोर वोटर सवर्ण समाज है. इस बात पर शोध अध्ययन और डिबेट होनी चाहिए BJP सवर्ण समाज को ऐसा क्या देती है जो यह समाज BJP के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है.
इस बात पर बहस होनी चाहिए BJP सवर्णों की पार्टी है यह जानते हुए भी OBC SC ST BJP को क्यों वोट देता है ?
BJP केवल सवर्ण समाज के वोटों के बदौलत सत्ता में नही है. BJP को सत्ता में लाने का सबसे बड़ा श्रेय OBC और SC-ST को जाता है.
यह मुमकिन ही नही है 10% आबादी के दम पर कोई पार्टी सत्ता में आ जाए.
क्या बहुजन एकता, दलित एकता या ओबीसी एकता एक मिथ बन चुका है ?
सबसे ज्यादा बार प्रेस कांफ्रेंस करने वाले भारतीय प्रधानमंत्रियों की लिस्ट👇
1. डॉ मनमोहन सिंह — 144
2. नेहरू जी — 75
3. राजीव गांधी — 62
4. लाल बहादुर शास्त्री— 56
5. अटल बिहारी बाजपेयी — 55
6. इंदिरा गांधी — 42
7. नरसिम्हा राव— 40
8. नरेंद्र मोदी — 00*
1757 में भारत की आबादी 17-18 करोड़ के आसपास थी.
1857 में भारत की आबादी 24 करोड़ थी.
1925 में भारत की आबादी 32 करोड़ थी.
भारत की आबादी चाहे 18 करोड़ थी या कभी 32 करोड़ थी, भारत में अंग्रेजों की आबादी कभी 2,50,000 से ज्यादा नही थी.
0.07% अंग्रेज भारत पर राज करते थे. उसी तरह सवर्णों की आबादी कितनी भी हो, सत्ता ब्यूरोक्रेसी शिक्षा बैंकिंग मीडिया में बिना किसी परीक्षा के वही टॉप पोजीशन में हैं.
2012 में PSU बैंकों यानी राष्ट्रीय बैंकों के 293 Directors में सिर्फ 9 SC-ST थे.
2026 में 9 राष्ट्रीय बैंकों के कुल 98 बोर्ड मेंबर्स में
SC-6
ST-1
इन आंकड़ों को उल्टा कर दीजिए. 98 बोर्ड मेंबर्स में SC-ST 70, OBC 15 और जनरल केवल 3 ?
तब पता है क्या होता, न्यूज़ रूम का तापमान 44 डिग्री हो जाता. चारों तरफ हो हल्ला शुरू हो जाता कि ये तो जातिवाद है.
OBC SC ST नेताओं ने आप लोगों की सारी ऊर्जा केवल चुनावी राजनीति की ओर मोड़ दी है. विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपने गांव की चर्बी गला रहे हो. अपने अधिकारों के लिए खुद आवाज उठानी पड़ती है.
UPI का इस्तेमाल बहुत जरूरत पड़ने पर ही किया जाना चाहिए.
कैशलेस ट्रांजेक्शन से फायदा आपको नही, बैंक और उन उद्योगपतियों को मिलता है जिन्होंने बैंकों से हजारों करोड़ो रूपये कर्ज लिया है.
UPI क्या है ?
100 रुपया आपने किसी दुकानदार को भुगतान किया. 100 रुपया उस दुकानदार के बैंक अकाउंट में जाकर जमा हो जाएगा.
इस तरह रोज लाखों करोड़ों लोग UPI पेमेंट इस्तेमाल करते हैं. हर दिन 96,000 करोड़ रुपए बैंक में ट्रांसफर होते हैं.
यानी हर महीने 29,82,000 करोड़ रुपए का UPI से लेन देन होता है. बैंकों को इससे टॉनिक मिलती है और वो बड़े बड़े उद्योगपतियों को लोन दे पाते हैं.
UPI आपके फायदे के लिए नही बनाया गया है. केवल इतना ही कहना था.
अब UPI में 2000 के ऊपर जो 0.4% चार्ज दुकानदार से वसूला जाएगा, दुकानदार अपनी जेब से थोड़ी भरेगा. वो ग्राहकों से वसूलेगा.
चिंता का विषय यह नही है कि मेरी या आपकी जाति का CM या PM बनेगा या नही ?
चिंतन करने का विषय है OBC SC ST वर्ग का एक भी आदमी किसी भी मैनस्ट्रीम न्यूज़ चैनल में एंकर या एडिटर इन चीफ नही है.
चिंता का विषय है सुप्रीम कोर्ट में एक भी OBC SC ST जज नही है.
चिंता का विषय है देश के किसी भी राज्य में SC समाज का एक भी मुख्यमंत्री नही है.
इन सब मुद्दों पर ज्यादा लिखने या उठाने के बजाय 90% लोग अपनी अपनी जाति का CM PM बनाने के लिए रोज लोग चटनी रोटी और अचार खा कर पसीना बहा रहे हैं.
RSS और BJP ने MODI को OBC के रूप में प्रोजेक्ट कर, OBC SC ST जातियों की गोलबंदी तोड़ दी है.
इसका हल किसी नेता के पास नही है. विपक्ष का हर नेता RSS या BJP से लड़ने के बजाय आपस में ही एक दूसरे के वोट बैंक में सेंधमारी कर रहे हैं.
यही सच लिख देता हूँ तो Neo Manuwadiyon का कपार फटने लगता है. हम का करूं, हम ऐसा ही हूँ. और ऐसा ही लिखता रहूंगा, जगाते रहूंगा.
BJP के एक नारे ने पूरे देश में तहलका मचा दिया है।
“अनपढ़ रहेगा इंडिया, तभी तो अंधभक्त बनेगा इंडिया”
मोदी के इस सपने को पूरा करने के लिये योगी दिन रात मेहनत कर रहे हैं।
बाराबंकी,
25 प्रा.वि. 0 शिक्षक
200 प्रा.वि. एक-एक शिक्षक
15 जू.हाई 0 शिक्षक
80 जू.हाई एक-एक शिक्षक
उत्तर भारत में बुद्धा, रैदास, अम्बेडकरवाद, फुले और पेरियार के विचारों को फैलाने का श्रेय जाटव समाज को जाता है.
जाटव समाज ने ही अपनी कड़ी मेहनत से उत्तर भारत में अब तक सबसे बड़ा बहुजन आंदोलन खड़ा किया है.
जैसे ब्राह्मण समाज सवर्ण समुदाय का मार्गदर्शक है, उसी तरह जाटव समाज बहुजन समाज का मार्गदर्शक है.
ब्राह्मण समाज के साथ क्षत्रिय, बनिया, खत्री और कायस्थ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं.
इसी तरह दलित समाज की सभी जातियां को भी जाटव समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए.
इस समाज ने जो सहा है, जो जातीय अपमान झेला है और जो सामाजिक कार्य किया है वो किसी और जाति ने नही किया है.
अपने साथियों की इस बात से सहमत हूँ कि जाटव और वाल्मीकि समाज को छोड़कर बाकी दलित जातियां अंबेडकर जयंती भी नही मनाते.
इस समाज का मैं हमेशा कर्जदार रहूंगा.
I Love You, Brothers ❤️
EVM से चुनाव में वोटिंग नहीं होनी चाहिए।
क्योंकि EVM कंप्यूटर प्रोग्रामिंग से जुड़ा हुआ होता है और इसे हैक करना संभव है।
— Elon Musk
ये बात टेक्नोलॉजी का बादशाह कह रहा है लेकिन अंधभक्तों को लगता है कि ईवीएम सुरक्षित है।
क्षत्रियों के दिल इतने बड़े थे की उन्होंने अपनी सारी रियासते ब्राह्मणों को लोकतंत्र स्थापित करने हेतु सौप दी और ब्राह्मण-क्षत्रिय एकता का भी नैरेटिव चलाया गया।
अब हकीकत सुनो-
आजाद भारत में 53 भारत रत्न दिए गए जिसमे 32 से ज़्यादा ब्राह्मण है और राजपूत शून्य।
मसलन आजादी के बाद एक भी क्षत्रिय आज तक नहीं मिला जो देश के रत्न कहलाने लायक हो?
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में भी आरक्षण लागू होना चाहिए.
5 जजों की कोलेजियम में भी एक ओबीसी जज, एक एससी जज और एक एसटी जज होना चाहिए.
50% जज ओबीसी एससी और एसटी समुदाय से होने चाहिए.
लैटरल एंट्री में भी 50% आरक्षण होना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट और ब्यूरोक्रेसी में लैटरल एंट्री में आरक्षण नही है, इसी कारण 98% नियुक्तियों में एक भी ओबीसी एससी और एसटी नही होते हैं.
आरक्षण गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नही है. आरक्षण प्रतिनिधित्व है. विविधता के लिए अर्क7बहुत जरूरी व्यवस्था है.
एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी मुंबई के धारावी में हैं.
धारावी में सायन स्टेशन के पास के 90 फिट रोड पर जाटव जाति का चाय की दुकान है.
यहां चाय पीने केवल जाटव भाई लोग आते हैं. अन्य जाति के लोग नही आते हैं.
इसी कारण देश में अग्रवाल स्वीट्स की दुकान दिख जाएगी. लेकिन जाटव या मांझी स्वीट्स की दुकान नही दिखेगी.
खुल भी गयी तो भेदभाव केवल सवर्ण नही, OBC SC ST जातियां भी आपस में एक दूसरे से भेदभाव करते हैं.