@AmanChopra_ कोर्ट में वकील मिल जाएंगे, और बाकी भी कई सारी व्यवस्थाएँ कर दी जाएंगी और पूरे समाज में चेहरा दिखाकर उनकी भर्त्सना करने को सय्यद रिजवान अहमद जैसे इक्का दुक्का ही लोग खड़े होंगे, जिनको बाकी दढ़ियल जमात सब के सामने स्क्रीन पर ही बेशर्मी से लतिया भी रही होगी।
@AmanChopra_ इन हत्यारों को इतना कान्फिडन्स कहाँ से आता है ? इस डिबेट को सुनेंगे तो जवाब मिल जाएंगे। जिस तरह अतीक उर रहमान और सय्यद जव्वाद पूरी बेशर्मी से बात को भटका रहे हैं, झूठी तुलनाएँ बैठा रहे हैं, ऐसे तमाम आफताब को सब्बल मिल जाता है कि ऑन कैमरा उनके लिए ऐसे लड़ा जाएगा,
@SudhanshuTrived जी, यूरी बेजमेनॉव ने डीमोरलाइजेशन के पहले की एक अवस्था का वर्णन नहीं किया, जिसे मैं disaffection कहूँगा। उसके चलते अपने जड़ों के प्रति अप्रीति, तिरस्कार उत्पन्न हो। IITs ने इसमें बडा योगदान दिया।