आज इस देश में जो नेता विपक्ष के साथ किया गया है वह इस देश के लोकतंत्र के वर्तमान स्थिति का प्रतीक है। जैसा आज नेता विपक्ष राहुल गांधी जी के साथ किया गया है वो पिछले 75 साल में कभी नहीं हुआ। लोकतंत्र की हत्या का स्पष्ट नमूना है।
ये हमारा सिस्टम है और सामने ना झुकने वाला और जाग चुका भारत का नौजवान . जिसने इस वीडियो को रीट्वीट ना किया उस से दोस्ती ख़त्म . भारत में ये हर किसी को दिखनी चाहिए . इसने कोई गलती की है तो गिरफ्तार करते लाठीचार्ज कौन से नियम क़ानून तहत कर रहे हो वो भी तब जब वो खड़ा है ?
है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़
अहल-ए-नजर समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद
इमाम- ए- हिन्द पर छिड़ी चर्चा पर अचानक कमाल ख़ान साहब की NDTV की वो ऐतिहासिक रिपोर्ट याद आ गई।
अस्सी के दशक में जब से मंदिर आंदोलन शुरू हुआ है, तब से चंदे की चोरी का सिलसिला भी चलता आ रहा है। संभावना है कि इन लोगों ने अब तक कई हज़ार करोड़ रुपये चोरी किया। आज से 36 साल पहले 1990 के एक आयकर अधिकारी का इंटरव्यू सुनिए।
राम मंदिर ट्रस्ट में दान पात्र के पैसे चोरी का मामला सुर्खियों में है लेकिन ट्रस्ट ने कई बड़े बड़े कांड कर रखे है: सरकारी सुरक्षा के बावजूद सुरक्षा मद में 10 करोड़ खर्च। भोग प्रसाद के नाम पर 11 करोड़ का खर्चा दिखाया। किसको ठेका दिया कैसे दिया और किसलिए दिया इसका कोई ऑडिट नहीं। 15 सदस्यों में 12 को कुछ पता नहीं। कंट्रोल तीन का है। बाकी सब गोपाल का।
अयोध्या के राम मंदिर की दानराशि गड़बड़ी प्रकरण की जांच के बीच अब ट्रस्ट के खर्चों पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, 11 महीने में मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यानी ट्रस्ट के खाते से औसतन हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये सुरक्षा के नाम पर निकाले गए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब राम मंदिर परिसर में केंद्र और राज्य सरकार की सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस बल, अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था चौबीसों घंटे तैनात है, तो फिर ट्रस्ट के खाते से हर महीने करीब एक करोड़ रुपये किस सुरक्षा व्यवस्था पर खर्च किए गए? यह पैसा किसे दिया गया, किस प्रक्रिया से दिया गया और इसकी स्वीकृति किस स्तर पर हुई। अब यही जांच का अहम बिंदु बनता दिख रहा है।
दस्तावेजों के अनुसार, इसी अवधि में दान पेटियों से कथित चोरी और दानराशि में गड़बड़ी का मामला सामने आया। ऐसे में सवाल और गंभीर हो जाता है कि करोड़ों रुपये की सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद दान पेटियों की निगरानी में चूक कैसे हुई? क्या सुरक्षा मद में दिखाए गए खर्च और जमीन पर मौजूद व्यवस्था के बीच कोई बड़ा अंतर था?
ट्रस्ट की 21 मार्च की बैठक में पेश आय-व्यय विवरण के मुताबिक, 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 तक ट्रस्ट को दान से करीब 83 करोड़ रुपये की आय हुई। इसमें दान पेटियों से 55 करोड़ रुपये, दान काउंटरों से 18 करोड़ रुपये, ऑनलाइन माध्यम से 8 करोड़ रुपये, विदेशी श्रद्धालुओं से 78 लाख रुपये और अन्य स्रोतों से राशि प्राप्त होने का उल्लेख है। इसी अवधि में ट्रस्ट के बैंक खातों और निवेशों से करीब 138 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में प्राप्त हुए।
सवाल केवल सुरक्षा खर्च तक सीमित नहीं है। दस्तावेजों में भोग-प्रसाद पर भी 11 महीने में करीब 11 करोड़ रुपये खर्च दिखाया गया है। यानी भोग-प्रसाद के नाम पर भी औसतन हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये का खर्च दर्ज है। अब यह सवाल उठ रहा है कि यह खर्च किस मद में, किस व्यवस्था पर और किस निगरानी में किया गया?
वित्तीय विवरण के अनुसार, निर्माण कार्यों पर 152 करोड़ रुपये, परकोटा और दीवार निर्माण पर 87 करोड़ रुपये, अन्न भंडार पर 8 करोड़ रुपये, कर्मचारियों के वेतन पर 7.67 करोड़ रुपये और बिजली मद में 3.68 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा यात्री सुविधा केंद्र, अस्पताल और अन्य सुविधाओं के लिए दो भूखंडों की खरीद पर 26.69 करोड़ रुपये खर्च हुए।
सूत्रों का दावा है कि ट्रस्ट के भीतर खर्चों और फैसलों को लेकर कई सदस्य खुलकर सवाल नहीं उठा पा रहे हैं। आरोप यह भी है कि ट्रस्ट में फैसलों की प्रक्रिया कुछ चुनिंदा लोगों के इर्द-गिर्द सिमट गई है और वित्तीय निर्णयों पर वास्तविक सामूहिक निगरानी कमजोर पड़ी है। गोपाल राव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, हालांकि इस पर आधिकारिक रूप से कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
अब एसआईटी जांच के सामने बड़ा सवाल यह है कि दानराशि गड़बड़ी के साथ-साथ सुरक्षा खर्च, भोग-प्रसाद खर्च और ट्रस्ट की वित्तीय मंजूरियों की प्रक्रिया की भी गहराई से जांच होगी या नहीं। राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दानदाताओं के पैसे का हर रुपया पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदार निगरानी के दायरे में होना चाहिए।
#Ayodhya #RamMandir #Trust @ShriRamTeerth@LucknowDivision@igrangeayodhya@dmayodhya@ayodhya_police
एक ये है नेपाल के गृह मंत्री और एक हमारे यहां के है की कोई प्रोटेस्ट करे तो बिना लाठी डंडो के बात ही नहीं होती l
तो नेपाल की जनता ऐसी सरकार से खुश क्यों नहीं रहेगी।
15 लाख करोड़ के घोटाले का संदेह, सेबी की रिपोर्ट से हंगामा हो गया है ll
साधारण मामला नहीं है। एक कंपनी जो सोना के निर्यात में सबसे बड़ी कंपनी है उसने 15 लाख करोड़ का बिज़नेस दिखा दिया है। मगर यह बिज़नेस कैसे हुआ, किसके साथ हुआ, किसे पेमेंट किया गया, इन सबका कोई हिसाब नहीं है।
Big Breaking-
राम मंदिर में दान की चोरी को लेकर एक और बड़ी खबर।
अब दैनिक हिंदुस्तान की रिपोर्ट।
राम मंदिर चढ़ावे पर गोपनीय जांच हुई।
डेढ़ करोड़ बरामद।
रडार पर कई कर्मचारी।
सोचिए,
इतना सब होने के बावजूद सरकार मुंह में दही जमाकर बैठी है।
योगी आदित्यनाथ की पूरी सरकार, बीजेपी के नेता, पेड ट्रोल्स, कथित विचारक, सबके सब चिल्ला रहे हैं कि कुछ नहीं हुआ है।
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय कह रहे हैं कि कुछ उल्लेखनीय नहीं है।
इसी राम मंदिर के लेखा प्रभारी रहे महिपाल सिंह कल मेरे इंटरव्यू में पूरा कच्चा चिट्ठा खोल चुके हैं कि कैसे ये चोरी, गबन और अनाचार का ये खेल सालों से चल रहा था।
नकदी ही नहीं, भक्तों के मंदिर में समर्पित किए गहनों तक का हेरफेर होता था।
सबको सब पता था। सब चुप थे।
याद रखिए,
आज कानून, सत्ता, सत्ता की अंधी ताकत सब आपकी है।
मगर फिर भी प्रभु श्रीराम की मर्यादा के साथ ऐसा घिनौना खिलवाड़ मत कीजिए।
वो उस जगह मारती है, जहां काटने से रक्त भी नहीं निकलता है।
प्रभु श्रीराम के प्रकोप से डरिए!!
Super Exclusive-
“मेरे सामने हुई दान की चोरी
डिलीट किया गया CCTV
ये खेल आज का नहीं, सालों से चल रहा!!”
राम मंदिर दान चोरी का चश्मदीद कैमरे पर।
अयोध्या राम मंदिर के लेखा प्रभारी रहे महिपाल सिंह का टॉप सीक्रेट पर महाविस्फोटक खुलासा।
“मैंने सच बताया तो मुझे नौकरी से हटाया!!”
“नक़दी चोरी तो एक बात है, वे दानपात्र में आई धातु का कोई रिकॉर्ड नहीं रखते थे। कोई रसीद नहीं!!”
“मैं पुलिस को जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार।”
महिपाल सिंह ने लिए बड़ों बड़ों के नाम। दंग हो जाएंगे सुनकर!!
आनंद महिंद्रा इन्होंने छोटे बच्चे साहिल
का जादू देखा और
कर दिया बड़ा ऐलान,
आज से साहिल की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी
आनंद महिंदा उठाएंगे।
आनंद महिंद्रा ने खुद वीडियो शेयर करके का
इस लड़के talent है "
राजस्थान से प्रदर्शन में हिस्सा लेने आया एक युवक बता रहा है कि उसके पड़ोस के गांव के एक लड़का प्रदीप मेघवाल ने NEET का तीसरा अटेम्प्ट दिया था, पेपर लीक हो गया और वो तीन बहनों में अकेला भाई था। 💔😢
अब इस युवा का दुःख सुनकर भी क्या भाजपा की अनपढ़ जमात इसे पाकिस्तानी बताएगी?😠😡