आदरणीय श्रीमान जी
धानेरा से मोकलसर हमारे रूट पर रेल गाड़ियों की बहुत कमी है
ट्रांस्पोर्ट यातायात सुविधाओं की भारी कमी है #मोदरान_स्टेशन पर #ठहराव दो आस पास के 150,गांवो का मुख्य स्टेशन है इसलिए #MON#STOP देने की कृपा करें SIR सबका का ख्याल रखें
साधारण गरीब लोग बहुतदुःखी हैं
रेल विभाग कृपया इस रूट पर विशेष ध्यान दें..
इस रूट को पूरी तरह से इग्नोर किया जा रहा हैं ऐसा प्रतीत होता हैं..
क्यो��कि जहां पहले से ही ट्रेनों की भरमार हैं वहां नई ट्रेनें संचालित की जा रहीं हैं लेकिन इधर नहीं??
वाया स��दड़ी भीलडी पाटन मेहसाणा रूट पर नई संचालित करें..
@GMNWRailway
@arvindchotia चुनाव के वक्त भर भर कर वादे करते है मगर काम न के बराबर हालात बहुत खराब है 3 3 ट्रेनें बदलनी पड़ती है बच्चे बुड्ढे महिलाएं सब परेशान है @arjunrammeghwal जी आपके वादे को पूरा कीजिए 🙏
वादे बहुत हुए, अब थोड़ी रहम करो प्रवासी बंधुओं पर!
आखिर कब मिलेगी वो खुशखबरी जिसका वर्षों से इंतजार है?
रामेश्वरम – मदुरई – कोयंबतूर – जालोर – जोधपुर – रामदेवरा
रूट पर नई सीधी ट्रेन सिर्फ एक मांग नहीं, लाखों प्रवासी परिवारों की जरूरत है।
दक्षिण भारत में बसे राजस्थान के हजारों श्रद्धालु और प्रवासी हर साल भारी परेशानी झेलते हैं।
ना सीधी रेल सुविधा, ना सुगम सफर…
कनेक्टिविटी की कमी से यात्रियों को कई बार ट्रेन बदलनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की भारी बर्बादी होती है। मौजूदा समय में रूट पर कोई भी कनेक्टिंग सेवाएँ नहीं हैं, आखिर सीधी सुविधा कब मिलेगी ।
रेल मंत्रालय से विनम्र आग्रह:
अब इंतजार खत्म करिए,
प्रवासी बंधुओं को
रामेश्वरम से रा��देवरा वाया मदुरई कोयंबतूर जालोर तक नई सीधी ट्रेन
की सौगात दीजिए।
“वादे नहीं, अब रेल ��ाहिए…
रामेश्वर से रामदेवरा सीधी रेल चाहिए!”
माननीय मंत्री जी @arjunrammeghwal फिर कोई ���रोसा नहीं करेगा आप प्रवासी बंधुओ को किए वादे को पूरा कीजिए बच्चे बुड्ढे महिलाएं 3 3 ट्रेनें बदलकर जाना पड़ता है बहुत दुखी है अब तो कुछ कीजिए राष्ट्रवाद का झंडा उठाकर गुम रहे प्रवासी बंधुओ की करुण पुकार सुनिए @AshwiniVaishnaw @ashokshera94
@AshwiniVaishnaw@RailMinIndia माननीय रेलमंत्रालय ध्यान दे भारत के मुख्य धाम को रेल मार्ग से जोड़े जो कि रामेश्वर मीनाक्षी तिरुपति देवस्थानम जैसे बड़े आस्था केंद्र है जल्द से जल्द फैसला करें और रूणेचा एक्सप्रेस गाड़ी चलाए
कॉइम्बतूर जालौर से बाड़मेर के लिए सीधी ट्रेन मिलने का सवाल पिछले कई वर्षों से सरकारी उपेक्षा और सियासी वादों के बीच उलझा हुआ है। जनता ने सांसद (MP) से लेकर विधायक (MLA), मंत्री से लेकर छोटे अधिकारियों तक सबको गुहार लगाई, प्रस्ताव दिए, हस्ताक्षर अभियान चलाए, सोशल मीडिया पर आवाज उठाई—मगर अभी तक ठोस नतीजा नहीं निकला। आजादी के बाद से बार-बार कॉइम्बतुर जालोर बाड़मेर को रेल बजट, नई ट्रेनों और रूट विस्तार में पीछे छोड़ दिया गया है।
- वर्तमान में "ED BME SF SPL" नामक एकमात्र साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन कोयंबटूर से बाड़मेर के बीच चलती थी उसको भी बंद कर दिया गया जबकि यात्री भार फुल था
- हर साल संसद और विधानसभा में मांगें उठती हैं, जनता का दबाव बनता है, लेकिन रेलवे बोर्ड और मंत्रालय ये मामला टालते हैं। ट्रेनों के विस्तार में चेन्नई, बेंगलुरु, कोट्टयम और अन्य शहरों को प्राथमिकता मिलती है, मगर कॉइम्बतुर हमेशा "सौतेला व्यवहार" झेलता है।
- नीतिगत अनदेखी के पीछे तर्क दिया जाता है कि 'यात्री भार' कम है, जबकि हकीकत यह है कि प्रवासी मजदूर, व्यापारी, विद्यार्थी और मनोरंजन/पर्यटन हेतु बाड़मेर जालोर से कोयंबटूर हजारों लोग हर साल सफर करते हैं।
- स्थानीय लोगों ने हर स्तर पर गुहार लगाई—सांसद, विधायक, मंत्री, डीआरएम ऑफिस, रेलवे मंत्रालय, पीएमओ तक पत्र लिखे, सोशल मीडिया पर ट्रेंड चलाया।
- मांग है—सीधी और नियमित सुप��फास्ट ट्रेन शुरू की जाए ताकि कोयंबटूर से जालोर बाड़मेर की दूरी और अवहेलना हमेशा के लिए खत्म हो।
हर बार वादा मिलता है, मगर रेल ट्रेन नहीं। प्रवासी जनता आखिर कब तक सौतेला व्यवहार झेलेगी? क्या सरकार की प्राथमिकता सिर्फ चुनिंदा बड़े शहर हैं—या मरुभूमि के लोग भी भारत का हिस्सा हैं? अब सिर्फ इंतजार की घड़ी खत्म होनी चाहिए। सरकार—रेल मंत्रालय और सभी जन प्रतिनिधि—जनता की आवाज को समझें और तुरंत सीधी, स्थायी ट्रेन आरंभ करें, ताकि कोयंबटूर जालोर बाड़मेर के बीच की दूरी इतिहास बन जाए।
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