इस व्यक्ति ने जीवन में जितना श्रम, संघर्ष और समझदारी अर्जित की है उसका सौवां हिस्सा भी चित्रा त्रिपाठी इस जन्म में नहीं हासिल कर सकतीं।
न्यूज रूम में बैठकर थेथरई करना एक बात है, समाज में जाना, अपने लोगों की लड़ाई लड़ना एकदम अलग बात। योगेंद्र जी ने लगातार ऐसे लोगों का साथ दिया जिनमें उन्हें बदलाव कर सकने की कोई उम्मीद नजर आई।
हिंदी कवि नागार्जुन को कई आलोचकों ने अवसरवादी कहा सिर्फ इसलिए कि उन्हें ज़ब जिसका पक्ष सही लगा उसके साथ खडे रहे।
जनता के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए अगर अपनी विचारधारा से समझौता करना भी पड़े तो उसमें कोई बुराई नहीं। योगेंद्र जी ने सबकुछ किया लेकिन वैचारिक रूप से कभी पतित नहीं हुए। साम्प्रदायिक शक्तियों की तारीफ कभी नहीं की।
@_YogendraYadav@chitraaum
सुवेन्दु अधिकारी और मुकुल रॉय कैश डीलिंग करते स्टिंग में दिखे.
सीबीआई पीछे थी . बीजेपी में आए.
बच गए.
हेमंत विस्वा के पीछे सीबीआई थी .
बीजेपी में आए. सीएम बने.
नारायण राणे से लेकर प्रताप सरनाइक तक कई ऐसे हैं , जो मोदी की छतरी के नीचे आकर बचे भी बढ़े भी.
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