उप्र पॉवर कॉरपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों ने डिस्कॉम एसोशिएशन को एक करोड़ 30 लाख 80 हजार का भुगतान किया:घाटे के नाम पर निजीकरण की दलील देने वाले किस मद में डिस्कॉम एसोशिएशन को कर रहे हैं भुगतान-संघर्ष समिति
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज खुलासा किया कि विगत 03 जून 2025 को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन और उप्र के पांचो विद्युत वितरण निगमों ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को एक करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान किया है। संघर्ष समिति ने सवाल किया है कि एक ओर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन घाटे के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की दलील दे रहा है और दूसरी ओर एक निजी संस्था ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को करोड़ों रुपए का चंदा दे रहा है, यह बहुत गम्भीर मामला है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन से लेकर उप्र पॉवर कॉरपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों द्वारा डिस्कॉम एसोशिएशन को चंदा देने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाय।साथ ही हितों के टकराव को देखते हुए उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल को निर्देश दिया जाय कि वे या ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री का पद छोड़ दें या पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद से उन्हें हटा दिया जाय।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन और चंदे की ऊपर से दिखाई दे रही रकम "टिप ऑफ द आईस बर्ग" है। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे मेगा घोटाला है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों को बहुत बड़े घोटाले से बचाने के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाय।
संघर्ष समिति ने यह आरोप पुनः लगाया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन विद्युत वितरण निगमों में समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन कर रही है और विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण में पूरी मदद कर रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन के पीछे देश के बड़े कॉर्पोरेट घरानों का हाथ है और इस एसोसिएशन का गठन विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण हेतु किया गया है।आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर इसीलिए निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि को नियुक्त किया गया है। इस एसोसिएशन में निजी क्षेत्र की कई विद्युत वितरण कंपनियां सम्मिलित हैं और उप्र सहित अन्य प्रांतों में निजीकरण हेतु दस्तावेज तैयार कराने में उनकी अहम भूमिका है।
संघर्ष समिति ने बताया कि उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सदस्यता लेने के लिये 10 लाख रुपए और 01.80 लाख रुपए जी एस टी मिलाकर 11.80 लाख रुपए का भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त इनीशियल कॉन्ट्रिब्यूशन के रूप में 10 लाख रुपए का अलग भुगतान किया है।इस प्रकार उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को कुल 21.80 लाख रुपए का भुगतान विगत 03 जून 2025 को किया।
उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के निर्देश पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम,दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम,पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम,मध्यांचल विद्युत वितरण निगम और केस्को ने इसी प्रकार ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को अलग-अलग 21 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान 03 जून 2025 को किया है।
इस प्रकार उप्र पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड और उप्र के विद्युत वितरण निगमों ने कुल मिलाकर एक करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को किया।
संघर्ष समिति ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन यह बताये कि एक करोड़ तीस लाख अस्सी हजार रुपए के भुगतान हेतु पॉवर कारपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों ने उप्र राज्य विद्युत नियामक आयोग से पूर्व अनुमति ली है या नहीं।और यदि अनुमति नहीं ली है तो इस चंदे की धनराशि को खर्च में जोड़कर उपभोक्ताओं पर भार डालने का आधार क्या है ? संघर्ष समिति ने कहा कि घाटे के नाम पर एक निजी संस्था को करोड़ों रुपए का चंदा देना और उसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर डालना कितनी नैतिकता है?
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पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा श्री निधि नारंग के सेवा विस्तार हेतु भेजे गए पत्र से बिजली कर्मचारियों में भारी गुस्सा व्याप्त : निजीकरण के नाम पर हो रही लूट को रोकने की मुख्य सचिव से अपील : निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के नए मुख्य सचिव श्री शशि प्रकाश गोयल से अपील की है कि वह पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा निदेशक वित्त निधि नारंग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी न दें और उत्तर प्रदेश में निजीकरण के नाम पर हो रही है भारी लूट को रोकने की कृपा करें।
संघर्ष समिति ने निधि नारंग को सेवा विस्तार देने का पत्र भेजने के मामले में डॉक्टर आशीष गोयल पर गंभीर आरोप लगाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसा लगता है कि पॉवर कारपोरेशन का अध्यक्ष रहते हुए डॉक्टर आशीष गोयल ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम कर रहे हैं और निजी घरानों का हित देख रहे हैं। संघर्ष समिति ने सवाल किया कि आखिर डॉक्टर आशीष गोयल एक व्यक्ति विशेष को बार-बार सेवा विस्तार देने के लिए क्यों लालायित हैं । कहीं यह सब निजी घरानों से मिली भगत का परिणाम तो नहीं है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि यह पता चला है कि पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल ने शासन को एक पत्र भेज कर पावर कॉरपोरेशन के निदेशक वित्त श्री निधि नारंग का कार्यकाल छह माह और बढ़ाए जाने का प्रस्ताव किया है।
उल्लेखनीय है कि 30 जुलाई को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा श्री निधि नारंग के कार्यकाल को बढ़ाए जाने के पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल के 14 जुलाई के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया गया है।
संघर्ष समिति ने बताया कि यह पता चला है कि श्री निधि नारंग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के प्रस्ताव में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल ने लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया अभी अधूरी है और श्री निधि नारंग निजीकरण हेतु बनाई गई टेंडर मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष है। अतः उनका कार्यकाल 06 महीने के लिए और बढ़ा दिया जाए जिससे निजीकरण की प्रक्रिया सुगमता से पूरी हो सके।
संघर्ष समिति ने नव नियुक्त मुख्य सचिव श्री शशि प्रकाश गोयल को प्रेषित पत्र में कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया में निदेशक वित्त श्री निधि नारंग की भूमिका प्रारंभ से ही बहुत विवादास्पद रही है।
संघर्ष समिति ने पत्र में लिखा है कि श्री निधि नारंग की निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसलटेंट नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया में हितों के टकराव का प्राविधान हटवाने में बड़ी भूमिका रही है। निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को झूठा शपथ पत्र देने के मामले में भी श्री निधि नारंग ने ही क्लीन चिट दी है।
संघर्ष समिति ने लिखा है कि निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन की निदेशक वित्त श्री निधि नारंग से बहुत व्यक्तिगत निकटता है। यह आम चर्चा रही है कि ग्रांट थॉर्टन के लोग अधिकांश समय श्री निधि नारंग के कमरे में ही बैठकर काम करते थे और श्री निधि नारंग उन्हें गोपनीय पत्रावली भी दिखते थे।
संघर्ष समिति ने कहा कि श्री निधि नारंग को तीसरी बार सेवा विस्तार देने का पत्र भेज कर पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल घोटाले के केंद्र बिंदु में आ गए हैं। निधि नारंग को निजीकरण के नाम पर पहले ही दो बार आशीष गोयल की अनुशंसा पर सेवा विस्तार दिया जा चुका है। अब एक बार फिर निजीकरण के नाम पर श्री निधि नारंग को छह माह का सेवा विस्तार देना सर्वथा अनुपयुक्त होगा। विशेषतया तब जब श्री निधि नारंग की कॉर्पोरेट घरानों के साथ निकटता जग जाहिर है और ट्रांजैक्शन कंसलटेंट, कॉर्पोरेट घराने, निधि नारंग और डॉ आशीष गोयल की निजीकरण की प्रक्रिया में मिली भगत है।
संघर्ष समिति ने मुख्य सचिव से मांग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए श्री निधि नारंग को किसी भी कीमत पर सेवा विस्तार न दिया जाय।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 246 वें दिन बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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निजीकरण की सारी प्रक्रिया रद्द करने की मांग: निदेशक वित्त श्री निधि नारंग द्वारा निजीकरण के सम्बन्ध में लिये गए सभी निर्णय निरस्त करने एवं उनके कार्यकाल में लिए गए वित्तीय फैसलों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग : निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी आंदोलन जारी
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के निदेशक वित्त एवं निजीकरण हेतु बनाई गई टेंडर मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष श्री निधि नारंग का कार्यकाल न बढ़ाये जाने के उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा है कि निदेशक वित्त श्री निधि नारंग द्वारा निजीकरण संबंधी लिऐ गए सभी निर्णयों को तत्काल निरस्त कराने की कृपा करें। संघर्ष समिति ने यह भी मांग की है कि निदेशक वित्त श्री निधि नारंग के कार्यकाल में लिए गए टैंडर संबंधी सभी वित्तीय फैसलों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए क्योंकि यह चर्चा है कि उनके कार्यकाल में भारी घोटाला हुआ है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु बनाए गए सारे दस्तावेज एक बड़े घोटाले का अंग है अतः निजीकरण की सारी प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए और श्री निधि नारंग के कार्यकाल में निजीकरण के नाम पर किए गए सारे घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु जिस प्रकार से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई और झूठा शपथ पत्र देने की बात स्वीकार कर लेने के बावजूद ग्रांट थॉर्टन को कंसलटेंट बनाए रखा गया , इसके बाद ग्रांट थॉर्टन को श्री निधि नारंग ने ही क्लीन चिट दिया और ग्रांट थॉर्टन के जरिए निजीकरण के ऐसे दस्तावेज तैयार कराये गए जो कुछ चुनिंदा निजी घरानों को लाभ देने हेतु बनाए गए हैं। निजीकरण की वर्तमान में चल रही सारी प्रक्रिया इन्हीं दस्तावेजों पर आधारित है अतः इसे निरस्त किया जाय।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ने अपर मुख्य सचिव ऊर्जा को एक पत्र भेज कर यह मांग की है कि श्री निधि नारंग के कार्यालय को तत्काल सील किया जाए क्योंकि यह पता चला है कि श्री निधि नारंग निदेशक वित्त के कार्यालय से कई गोपनीय दस्तावेज की फोटो कॉपी करा रहे हैं और उसे बाहर ले जाना चाहते हैं।
अपर मुख्य सचिव ऊर्जा को भेजे गए पत्र में संघर्ष समिति ने लिखा है कि यह विदित हुआ है कि श्री निधि नारंग निदेशक वित्त उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन अपना कार्यकाल न बढ़ाये जाने के आदेश के आने के बाद से अपने कार्यालय में तमाम गुप्त गोपनीय दस्तावेजों की फोटो कॉपी करा रहे हैं। यदि यह सत्य है तो यह बहुत ही गंभीर बात है ।
संघर्ष समिति ने अपर मुख्य सचिव ऊर्जा से मांग की है कि वह इस प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप करने की कृपा करें और श्री निधि नारंग के कार्यालय को तत्काल सील कराने का निर्देश देने की कृपा करें। साथ ही यह सुनिश्चित कराने की कृपा करें कि निदेशक वित्त के कार्यालय से कोई भी गोपनीय दस्तावेज फोटोकॉपी होकर बाहर न जाने पाए जिससे पावर कॉरपोरेशन की गोपनीयता और पारदर्शिता प्रभावित न हो। खासकर ऐसे समय में जब पावर कॉरपोरेशन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण कर रहा है और श्री निधि नारंग को निजीकरण हेतु बनाई गई टेंडर मूल्यांकन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 245 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में निजीकरण के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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पॉवर कारपोरेशन में स्थानांतरण में बड़े पैमाने पर लेन देन के आरोप के बीच संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच कराने की मांग की: स्थानांतरण के विरोध में पूर्वांचल डिस्काम पर 19 जून से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह: प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन जारी:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि पावर कारपोरेशन में बड़े पैमाने पर किए गए स्थानांतरण में पैसे के लेनदेन के आरोप की सीबीआई से उच्च स्तरीय जांच कराएं। स्थानांतरण में लेनदेन और स्थानांतरण के नाम पर उत्पीड़न के विरोध में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर 19 जून से बिजली कर्मचारी अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करेंगे। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 203 वें दिन प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि पावर कारपोरेशन में हजारों की तादाद में किए गए नीति विरुद्ध स्थानांतरण आदेशों की उच्च स्तरीय सीबीआई जांच कराएं। संघर्ष समिति ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन में लगभग 1500 अभियंताओं को स्थानांतरित किया गया है, इतने ही जूनियर इंजीनियरों को स्थानांतरित किया गया है और कई हजार छोटे कर्मचारियों को स्थानांतरित किया गया है। इनमें से अधिकांश स्थानांतरण बिना किसी नीति की किए गए हैं।
स्थानांतरण में बड़े पैमाने पर लेनदेन की बात भी सामने आ रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि लेनदेन को लेकर माननीय ऊर्जा मंत्री और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक का एक ऑडियो वायरल होने के बाद बिजली कर्मचारियों का गुस्सा और बढ़ गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि इस ऑडियो के वायरल होने के बाद स्थानांतरण के मामले में उच्च स्तरीय सीबीआई जांच बहुत जरूरी हो गई है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्व में भी पावर कारपोरेशन में स्थानांतरण को लेकर लगे आरोपों के चलते माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप किया था। इसके बाद से जो भी स्थानांतरण होते हैं वह माननीय सर्वोच्च न्यायालय की हाई पावर कमेटी के सामने रखे जाते हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के मौजूदा प्रबंधन द्वारा और खासकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा किए गए स्थानांतरण आदेशों में लेनदेन की बात सामने आने के बाद संघर्ष समिति माननीय सर्वोच्च न्यायालय को भी सारे घटनाक्रम से संज्ञानित कराएगी।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा निजीकरण हेतु उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए स्थानांतरण आदेशों के विरोध में 19 जून से वाराणसी के बिजली कर्मी प्रबंध निदेशक के कार्यालय पर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करेंगे। पूर्वांचल की संघर्ष समिति ने प्रबंध निदेशक को कल नोटिस दे दिया था जिसमें लिखा गया है कि यदि उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए तमाम स्थानांतरण आदेश निरस्त न किए गए तो 19 जून से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह किया जाएगा। इससे उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की सारी जिम्मेदारी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक की होगी।
संघर्ष समिति ने बताया कि स्थानांतरण के खेल में लेनदेन के आरोप तो लग ही रहे हैं । साथ ही उत्पीड़न की दृष्टि से भी बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किए गए हैं। यहां तक कि छोटे पदों पर कार्य करने वाली महिला कर्मियों को भी बड़ी संख्या में सुदूर स्थानांतरित किया गया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन में स्थानांतरण एक उद्योग बन गया है जिससे मुख्यमंत्री जी की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं।
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*उप्र के बिजली कर्मियों के समर्थन में दिल्ली में 09 जून को नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी की मीटिंग में लिया जाएगा निर्णय: संघर्ष समिति की ऑनलाइन मीटिंग में 22 जून की महा पंचायत की तैयारी: निजीकरण पर प्रबन्धन से पूछे पांच और सवाल*
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रांतीय पदाधिकारियों की आज ऑनलाइन मीटिंग हुई । इस मीटिंग में निजीकरण के विरोध में विगत छह माह से चल रहे आंदोलन की समीक्षा की गई और आगामी 22 जून को लखनऊ में होने वाली किसानों, उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों की महापंचायत की तैयारी और महापंचायत में रखे जाने वाले प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
ऑनलाइन बैठक में सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर से संकल्प व्यक्त लिया कि छह माह तो कुछ भी नहीं है, निजीकरण के विरोध में आंदोलन तब तक चलता रहेगा जब तक निजीकरण का फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता।
प्रत्येक सप्ताह के शनिवार और रविवार को निजीकरण पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे जाने वाले पांच प्रश्नों के क्रम में संघर्ष समिति ने कल पांच प्रश्न पूछे थे आज पांच और प्रश्न पूछे।
पहला प्रश्न - क्या निजी कॉरपोरेट घरानों की सहूलियत की दृष्टि से निजीकरण के पहले ही बड़े पैमाने पर लगभग 45% संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है, हटा दिया गया है ? भीषण गर्मी में अनुभवी संविदा कर्मियों को हटाए जाने से क्या बिजली आपूर्ति प्रभावित नहीं हो रही है ? क्या प्रबन्धन बिजली व्यवस्था बिगाड़ कर निजीकरण थोपना चाहता है?
दूसरा प्रश्न - निजीकरण पर पॉवर कारपोरेशन द्वारा जारी frequently asked questions प्रपत्र में लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण नहीं हो रहा है अपितु पी पी पी मॉडल पर सुधार हेतु निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है जिसमें निजी क्षेत्र की 51% और सरकारी ।क्षेत्र की 49% भागीदारी होगी जो लगभग बराबर ही है। प्रश्न यह है कि जिसकी 51% भागीदारी होती है क्या उसका मालिकाना हक नहीं होता ? निजी क्षेत्र की 51% भागीदारी ग्रेटर नोएडा में है । क्या ग्रेटर नोएडा की कंपनी नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड निजी कंपनी नहीं है ?
तीसरा प्रश्न है - पॉवर कारपोरेशन कह रहा है कि निजीकरण इसलिए किया जा रहा है क्योंकि घाटा बढ़ता जा रहा है और घाटे की भरपाई के लिए सरकार को सब्सिडी एवं लास फंड देना पड़ रहा है जो बढ़ता ही जा रहा है और जिस बोझ को अब आगे सरकार वहन नहीं कर सकती । सब्सिडी को घाटा बताना और घाटे में जोड़ना एक बहुत गंभीर बात है। भारतीय जनता पार्टी ने 2017 में जारी किए गए अपने संकल्प पत्र में लिखा था कि गरीबी की रेखा के नीचे रहने वालों को मात्र 03 रुपए प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जाएगी। इसकी सब्सिडी देना सरकार की बाध्यता है। सवाल है कि पॉवर कारपोरेशन स्पष्ट करे कि क्या निजीकरण के बाद सरकार सब्सिडी की धनराशि नहीं देगी ? यदि निजीकरण के बाद सरकार सब्सिडी की धनराशि देगी तो सरकारी क्षेत्र को यह धनराशि देना बोझ कैसे है ?
चौथा प्रश्न है - 51% हिस्सेदारी बेचकर निजीकरण करने से क्या सुधार की गारंटी है ? उड़ीसा में 1999 में चार विद्युत वितरण कंपनियां बनाकर निजी क्षेत्र को 51% हिस्सेदारी दी गई थी। एक निजी कंपनी अमेरिका की ए ई एस कम्पनी ने चक्रवात में ध्वस्त हुए बिजली के नेटवर्क को बनाने से इनकार कर दिया और यह कंपनी एक साल बाद ही भाग गई। 16 साल के बाद फरवरी 2015 में उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग ने सुधार में पूर्णतया विफल रहने के कारण अन्य तीनों विद्युत वितरण कंपनियों का लाइसेंस निरस्त कर दिया था। क्या गारंटी है कि जो उड़ीसा में हुआ वह निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में नहीं होगा ?
पांचवां सवाल है - माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने ट्वीट किया है कि 2017 में 41% ए टी एंड सी हानियों से घटकर 2024 में ए टी एंड सी हानियां 16.5% रह गई हैं। यह उत्तर प्रदेश में बिजली सेक्टर में मा योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में बहुत बड़ा सुधार है। सवाल है कि ऊर्जा मंत्री इतने बड़े सुधार का दावा कर रहे हैं जो आंकड़ों की दृष्टि से सही भी है तो किस अन्य (?) सुधार के लिए उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों का एक साथ निजीकरण किया जा रहा है ?
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*निजीकरण के विरोध में 22 जून को होने वाली बिजली महापंचायत में किसानों और उपभोक्ताओं के बड़े राष्ट्रीय संगठन सम्मिलित होंगे: निजीकरण को लेकर संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे पांच सवाल*
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले आगामी 22 जून को लखनऊ में होने वाली बिजली महापंचायत में देश के किसानों और उपभोक्ताओं के कुछ बड़े संगठन सम्मिलित होंगे। संघर्ष समिति ने बताया कि बिजली महापंचायत का ऐलान होते ही कई संगठनों ने संघर्ष समिति से संपर्क किया है। संघर्ष समिति ने आज पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से निजीकरण पर पांच प्रश्न पूछे हैं। संघर्ष समिति ने कहा है कि प्रत्येक शनिवार और रविवार को संघर्ष समिति 5 - 5 प्रश्न निजीकरण को लेकर प्रबंधन से पूछेगी।
संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से आज पांच प्रश्न पूछे जो निम्नवत है।
पहला प्रश्न है कि ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी ने 06 जून को चंडीगढ़ में हुए विद्युत मंत्रियों के सम्मेलन में कहा है कि उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम है। सवाल यह है कि जब सरकारी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम हो गई है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
दूसरा प्रश्न है कि यदि घाटे के नाम पर निजीकरण किया जा रहा है तो चंडीगढ़ और दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव जहां ए टी एंड सी हानियां क्रमशः तीन प्रतिशत और 8% थी, और इन दोनों स्थानों पर विद्युत विभाग मुनाफे में था तो दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव और चंडीगढ़ का बिजली का निजीकरण क्यों किया गया ?
तीसरा प्रश्न है कि दिल्ली में निजीकरण के 22 साल बाद भी दिल्ली विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए उपभोक्ताओं के बिजली बिल में निजी कंपनियां 07% की दर से पेंशन का सरचार्ज वसूलती है तो सवाल है कि निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पेंशन देने के एवज में निजी कंपनियां उपभोक्ताओं से कितने प्रतिशत सरचार्ज वसूलेंगी ?
चौथा प्रश्न है कि निजीकरण के बाद बिजली कनेक्शन देने के लिए क्या निजी कंपनियों को उपभोक्ताओं से मनमाना बिल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा ? उदाहरण के तौर पर 12 फरवरी 2025 को आगरा में टोरेंट पावर के एक बिल की कॉपी संलग्न की जा रही है जिसमें 02 किलो वाट का कनेक्शन देने के लिए उपभोक्ता से 09 लख रुपए वसूल गया है । उपभोक्ता द्वारा 09 लाख रुपए के भुगतान की रसीद भी संलग्न है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। क्या निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल की गरीब जनता के साथ यही होने जा रहा है ?
और पांचवा प्रश्न यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण होने के बाद गरीब किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी या नहीं ? उदाहरण के तौर पर ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के 34 साल बाद भी किसानों को सब्सिडी नहीं मिलती जबकि पूरे प्रदेश में किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों के बारे में प्रत्येक शनिवार और रविवार को संघर्ष समिति पांच - पांच प्रश्न पूछेगी। शनिवार को आम उपभोक्ताओं के विषय में प्रश्न पूछे जाएंगे और रविवार को कर्मचारियों के विषय में प्रश्न पूछे जाएंगे।
आज अवकाश का दिन होने के कारण बावजूद बिजली कर्मचारियों ने सभी जनपदों परियोजनाओं और राजधानी लखनऊ आपस में बैठक कर निजीकरण के विरोध चल रहे आंदोलन को और तेज और सशक्त बनाने पर विचार विमर्श किया।
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@RubikaLiyaquat@RubikaLiyaquat kha se lati ho itni knowledge?
Sarkar ne lekhpaal police SDM DM lagaye the bikli chalane ko. Pta hai kyo na chala paye wo? Kahe ki tumhari tarah wo bhi bina padhe chale aaye
@RubikaLiyaquat agar privatisation ki itni himayati ho tum to batana zara tumhare security guard, driver, peon ko kitni salary milti hai? 5? 10? 12? Hazar. Privatisation shoshan hai janta ka. Ankhen kholo @RubikaLiyaquat. Shame on @ABPNews@RubikaLiyaquat
@RubikaLiyaquat 28 September ko jab giraftariya hui aur pure pradesh me jail bhar gai tab kha thi? Us samay aanken foot gai thi? Are thodi sharam kar lo. Jin dubey sahab se baat kar rahi thi na tum @RubikaLiyaquat unke pairo ki dhool bhi na hogi.