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1. जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. ने यूपी में अपनी सरकार के दौरान पुलिस व पंचायती राज विभाग में लगभग सवादो लाख नये सरकारी पद सृजित करके तथा नौकरियों की भर्ती पर लगी रोक को भी हटाकर सर्वसमाज के कई लाख लोगों की सरकारी नौकरियों में बहाली की और फिर उसके बाद सरकार में ना रहने पर काफी लम्बे समय से देश में व ख़ासकर यूपी, उत्तराखण्ड व पंजाब अदि राज्यों में व्याप्त ज़बरदस्त महंगाई, अति-ग़रीबी, बेरोज़गारी, अशिक्षा, बदतर स्वास्थ्य व्यवस्था, पिछड़ापन एवं उनके मजबूरी के पलायन, महिला असुरक्षा, पेपरलीक व भ्रष्टा��ार आदि से त्रस्त लोगों के दुखी जीवन जैसे ज्वलन्त मुद्दों एवं गंभीर समस्याओं के निदान हेतु प्रभावी कदम उठाने की माँग केन्द्र व राज्य सरकारों से बार-बार करती रही है, लेकिन सभी सरकारें, पूर्व की कांग्रेसी सरकारों की तरह ही, ज़्यादातर मामलों में उदासीन व लापरवाह ही बनी हुई हैं, जो देश के बिगड़ते हुये राजनीतिक, आर्थिक, संसदीय व सामाजिक हालात के मद्देनज़र अति-दुखद एवं अत्यन्त चिन्तनीय।
2. और अब ज��कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नाम से विशेषकर बेरोज़गारी व अंधकार भविष्य आदि से पीड़ित व आहत शिक्षित युवा-युवतियों ने ख़ासकर दिल्ली में जंतर मंतर के 36 दिन तक चले अपने बहु-चर्चित आन्दोलन के ज़रिये इन ज्वलन्त मुद्दों को वास्तव में राष्ट्रीय महत्व क��� विशेष व गंभीर चर्चा का मुद्दा बना दिया है और जिसको लेकर देश के शिक्षा मंत्री को भी अपनी कुर्सी गवानी पड़ी है, केन्द्र व राज्य सरकारों को देश के क़रीब सवासौ करोड़ ग़रीबों, श्रमिकों, युवाओं, महिलाओं व अन्य मेहनतकश लोगों तथा ख़ासकर बेरोज़गारी की मार से पीड़ित लाखों परिवारों की वास्तविक चिन्ता, सब कुछ भुलाकर, तत्काल शुरू कर देनी चाहिये।
3. ऐसे में, अन्य बातों के अलावा, सरकारी नौकरियों पर खा़स ध्��ान देने की ज़रूरत है और इस क्रम में राष्ट्रीय सम्पत्तियों को निजी हाथों में बेचना बंद करके तथा सभी सरकारी विभागों में रिक्त पड़े लाखों पदों पर पेपरलीक व भ्रष्टाचार-मुक्त समयबद्ध भर्तियाँ तत्काल प्रारम्भ करके समस्या के फौरन निदान के प्रति गंभीर प्रयास शुरू कर दें तो यह उचित होगा।
4. इस प्रकार एक परिवार में अगर एक को भी सरकारी नौकरी मिल गयी तो लाखों परिवारों का सीधे तौर पर भला होगा और साथ ही ���ससे एससी, एसटी व ओबीसी समाज को भी वह ��ुरक्षा मिल पायेगी जो आरक्षण के काफी हद तक निष्प्रभावी व निष्क्रिय बना दिये जाने के कारण, संविधान प्रदत्त आत्म-सम्मान की ज़िन्दगी जीने के बजाय, ग़रीबी व लाचारी का त्रस्त जीवन जीने को ही मजबूर हैं।
5. कुल मिलाकर, सभी सरकारों को हर हाल में मुनाफाखोरी/लाभ कमाने वाली व्यापारिक सोच/प्रवृति को त्याग कर संविधान की सही मानवतावादी व कल्याणकारी नीति एवं सिद्धान्त को पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अमल ��रके आगे बढ़ाना होगा, जो ’हर हाथ को काम’ देने वाली व्यापक देश व जनहित में लाख दुखों की एक दवा है, यही सभी सरकारों से अपील।
6. इसके साथ ही, जंतर मंतर में आन्दोलित छात्र-छात्राओं व बेरोजगार युवाओं आदि के मुद्दों को लेकर संसद के वर्तमान सत्र में अब तक लगातार जारी गतिरोध को भी समाप्त किया जाना ज़रूरी है, ताकि बिना समुचित बहस/चर्चा के सरकारी विधेयकों को पारित होकर कानून बनने की प्रक्रिया पर विराम लग सके।
1.जैसाकि विदित है कि दिनांक 10 अगस्त 2019 को दिल्ली के तुग़लकाबाद में संतगुरु श्री रविदास जी के पवित्र गुरुघर को बुलडोज़र और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ढहा दिया गया ��ा। इसके विरोध में देशभर की संगत जब लोकतांत्रिक ढंग से सड़कों पर उतरी तो तब उन्हें लाठीचार्ज, आँसूगैस, गिरफ्तारियाँ और मुकदमों आदि का सामना करना पड़ा। काफी लोगों को जेल भी जाना पड़ा।
2.इतना ही नहीं गुरुघर की भूमि भी छीन ली गई और आज भी संगत को लोहे के अस्थायी टीन शेड में अपने गुरुजी को माथा टेकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाली है और आज भी स���ाज की स्मृति में अंकित है।
3.अब पंजाब चुनाव नज़दीक आते ही वही भाजपा संतगुरु श्री रविदास जी के नाम पर कलश यात्रा निकालकर गुरुजी के बेगमपुर शहर के लक्ष्य से समाज को भटाकने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर पंजाब के धलेता गाँव में गुरुघर की दीवार गिराए जाने पर जब संगत और बसपा ने आवाज़ उठाई तो गिरफ्तारियाँ की गईं। अन्त में फिर आम आदमी पार्टी की सरकार को झुकना पड़ा और गुरुघर का पुननिर्माण कराना पड़ा।
4.ऐसे में समाज भाजपा और आम आदमी पार्टी की राजनीति से सतर्क रहें। पराधीनता का अन्त एवं बेगमपुरा का संकल्प संतगुरु श्री रविदास जी सम्मान यात्रा जो तुग़लकाबाद से धलेता गाँव तक पहुँच रही है, जिसमें समूह संगत सादर आमंत्रित हैं। और संतगुरु श्री रविदास जी बेगमपुरा के आदर्श, सम्मान, समानता और न्याय के संदेश को जन-जन तक पहुँचाए तथा गुरुघरों की गरिमा, धार्मिक अधिकारों और संतगुरु श्री रविदास जी के सपनों के अनुरूप पराधीनता मुक्त समाज के निर्माण के संकल्प को मज़बूत बनायें।
1.जैसाकि विदित है कि दिनांक 10 अगस्त 2019 को दिल्ली के तुग़लकाबाद में संतगुरु श्री रविदास जी के पवित्र गुरुघर को बुलडोज़र और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ढहा दिया गया था। इसके विरोध में देशभर की संगत जब लोकतांत्रिक ढंग से सड़कों पर उतरी तो तब उन्हें लाठीचार्ज, आँसूगैस, गिरफ्तारियाँ और मुकदमों आदि का सामना करना पड़ा। काफी लोगों को जेल भी जाना पड़ा।
2.इतना ही नहीं गुरुघर की भूमि भी छीन ली गई और आज भी संगत को लोहे के अस्थायी टीन शेड में अपने गुरुजी को माथा टेकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाली है और आज भी समाज की स्मृति में अंकित है।
3.अब पंजाब चुनाव नज़दीक आते ही वही भाजपा संतगुरु श्री रविदास जी के नाम पर कलश यात्रा निकालकर गुरुजी के बेगमपुर शहर ���े लक्ष्य से समाज को भटाकने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर पंजाब के धलेता गाँव में गुरुघर की दीवार गिराए जाने पर जब संगत और बसपा ने आवाज़ उठाई तो गिरफ्तारियाँ की गईं। अन्त में फिर आम आदमी पार्टी की सरकार को झुकना पड़ा और गुरुघर का पुननिर्माण कराना पड़ा।
4.ऐसे में समाज भाजपा और आम आदमी पार्टी की राजनीति से सतर्क रहें। पराधीनता का अन्त एवं बेगमपुरा का संकल्प संतगुरु श्री रविदास जी सम्मान यात्रा जो तुग़लकाबाद से धलेता गाँव तक पहुँच रही है, जिसमें समूह संगत सादर आमंत्रित हैं। और संतगुरु श्री रविदास जी बेगमपुरा के आदर्श, सम्मान, समानता और न्याय के संदेश को जन-जन तक पहुँचाए तथा गुरुघरों की गरिमा, धार्मिक अधिकारों और संतगुरु श्री रविदास जी के सपनों के अनुरूप पराधीनता मुक्त समाज के निर्माण के संकल्प को मज़बूत बनायें।
1.देश में ’बहुजन समाज’ में से ख़ासकर एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के लिये आरक्षण ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ अर्थात् हमेशा से इनके आत्म-सम्मान की ज़िन्दगी से जुड़ा अति-महत्वपूर्ण व अत्यन्त संवेदनशील मामला है और जाति के आधार पर सदियों से यहाँ तोड़े, सताये व पछाड़े गये एससी व एसटी समाज के लिये तो यह अत्यन्त ज़रूरी मामला भी विशेषकर तब बन जाता है जब जातिवादी द्वेष, शोषण, प्रताड़ना, अन्याय-अत्याचार कम होने का नाम ना ले, और इसीलिये इसमें क्रीमी लेयर की बात करना अनुचित ही नहीं बल्कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी संविधान के पवित्र उद्देश्यों के भी विरुद्ध है, हालाँकि किसी को भी इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिये बल्कि सभी को देश व जनहित के मद्देनज़र अपनी पूूरी ईमा���दारी व निष्ठा के साथ इस पर अमल भी ज़रूर करना चाहिये।
2.जबकि इस बारे में आरएसएस प्रमुख का अभी हाल में फिर से यह कहना कि, ’आरक्षण का जानबूझकर र��जनीतिकरण किया गया है जिससे समाज में कड़वाहट भरी है तथा आरक्षण के लाभार्तियों को स्वेच्छा से इसका लाभ छोड़ देना चाहिये’, वास्तव में यह इनकी ऐसी जातिवादी सोच है जिससे संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति तो हो सकती है, किन्तु इससे संवैधानिक उद्देश्यों की अवहेलना होती है, क्योंकि आरक्षण मूलतः सदियों से जातिवादी व्यवस्था के शिकार करोड़ों शोषित-पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत लोगों को मानवीय आधा�� पर समता व समानता का संवैधानिक व कानूनी अधिकार देना है, और जिसे आर्थिक उन्नति से कतई भी नहीं आँका जा सकता है, क्योंकि जातिवाद का दंश जीवन के हर पहलू में उन्हें डसता ही रहता है और जो क्रम अभी भी हर स्तर पर लगातार जारी है, यह आरएसएस से ज़्यादा भला कौन जानता है?
3.इतना ही नहीं बल्कि केन्द्र में अभी तक रही सभी सरकारें भी इस कड़वी ज़मीनी वास्तविकता को भलीभाँति जानती और समझती भी हैं और इसीलिये अगर वर्तमान सरकार अपने वाजिब तर्कों के आधार पर इसकी प्रभावी व समुचित पैरवी करक�� एससी व एसटी समाज को क्रीमी लेयर से दूर रखने हेतु अपना पक्ष अदालत से मनवा लेती है तो यह पूर्णतः उचित व संवैधानिक होगा। वैसे अक्सर यही देखा गया है कि सरकारों के लचर रवैये व अच्छी कानूनी पैरवी के अभाव में ही अदालतें ’सामाजिक परिवर्तन’(Social Transformation) आदि के मामलों में सही से न्याय नहीं कर पाती हैं।
4.इस बारे में आरएसएस से भी यही कहना है कि वह परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी एवं कल��याणकारी संविधान को पूरा-पूरा आदर-सम्मान देते हुये आरक्षण को लेकर राजनीति करना छोड़ दे और साथ ही आरक्षण में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की वकालत बंद करके देश में ’समतामूलक समाज व्यवस्था’ (Equalitarian Social order) की स्थापना के संवैधानिक दायित्व/उद्देश्यों की पूर्ति में पूरी तरह से सहयोग करे तो यह बेहतर होगा, यही वक्त की ज़रूरत व समय की माँग भी है।
1.जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की न���ति व सिद्धान्त पर अमल करने वाली सर्वसमाज-हितैषी अम्बेडकरवादी पार्टी है और यूपी में चार बार रही सरकार भी इसी के आधार पर चलायी है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति व चुनावी स्वार्थ आदि की ख़ातिर जग ज़ाहिर तौर पर गिरगिट की तरह ही रंग बदलती रहती है।
2.इसी क्रम में सपा द्वारा प्रचारित इनका कथित ’पीडीए’ अर्थात् (पिछड़ा, दलित, अक्लियत) में पहले ’पी’ से ’पिछड़े’ प्रचारित करन�� के बाद अब, अपरकास्ट समाज में ख़ासकर ब्राह्मण समाज को बी.एस.पी. से तेज़ी से जुड़ता हुआ देख व उसी के आधार पर ही पार्टी उम्मीदवार भी बनाये जाने से विचलित होकर, सपा ने अब ’पी’ से ’पण्डित’ कर दिया है, जो इनके राजनीतिक छल व छलावे का एक और जीता-जागता प्रमाण नहीं तो और क्या है?
3.ऐसे राजनीतिक छल व छलावे कि राजनीति से किसी व्यक्ति विशेष का कुछ समय के लिए वक़्ती तौर पर थोड़ा भला तो हो सकता है, किन्तु इससे उस स���्पूर्ण समाज का भला कभी नहीं हो सकता है। इसलिए सर्वसमाज के लोगों को ऐसी छलावापूर्ण समाजवादी पार्टी (सपा) व उसकी ऐसी संकीर्ण जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहना चाहिये, यह समय की माँग व सर्वसमाज के हित में भी है।
-देश के छात्रों व युवाओं केे आन्दोलन के चलते आज केन्द्रीय शिक्षा मन्त्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा इस्तीफा दिये जाने का फैसला उचित, जो यह पहले ही ले लिया जाता तो बेहतर होता। साथ ही, हमारी पार्टी केन्द्र सरकार से यह भी अपेक्षा करती है कि जिन पुलिसकर्मियों ने जन्तर-मन्तर पर शान्तिमय ढंग से प्रदर्शन कर रहे निहत्ते लड़के �� लड़कियों पर बरबर्तापूर्वक लाठी, डन्डों आदि से च���ट पहुँचायी है जिससे ये बड़ी संख्या में गम्भीर रूप से घायल हुए, उनपर सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिये।
-और ख़ास तौर से जिन पुरूष पुलिसकर्मियों ने लड़कियों के साथ बेहूदा व शर्मनाक बदसलूकी की और बल प्रयाग किया, उनको चिन्हित करके, उनके खिलाफ अनुशासनिक एवं क्रिमनल केस चला कर सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जानी चाहिये, जिससे कि भविष्य में इस तरह की घिनौनी हरकत करने की कोई हिम्मत ना कर सके।
- इसक��� साथ-साथ, सरकार को आन्दोलन कर रहे छात्रों व युवाओं के ख़िलाफ जो भी FIR या complaint दायर की गई है, उन सभी को वापस ले लिया जाये, जिससे इनको आगे चलकर थानों व कोर्ट कचहरी के चक्कर ना काटने पड़े और इस वजह से उनका भविष्य भी ख़राब ना हो, जिससे फिर देश में सौहार्दपूर्ण वातावरण बन सके।
- साथ ही मेरा सभी आन्दोलनकारियों से यह कहना है कि वो इस मामले में किसी भी पार्टी को उनके इस संघर्ष का राजनीतिकरण ना करने दें ��था अपने भविष्य को भी ख़राब ना होने दें।
1.देश में नीट-य��जी सहित विभिन्न परीक्षाओं के पेपरलीक व उसके उपरान्त परीक्षार्थियों द्वारा होने वाली आत्महत्याओं से उपजे छात्र-छात्राओं/युवाओं के ’कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) आन्दोलन के नई दिल्ली जन्तर-मन्तर में लगातार जारी शान्तिपूर्ण धरना को हालाँकि लोगों की व्यापक सहानुभूति हासिल है, किन्तु सरकारी जवाबदेही के रूप में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उनकी ज़िद्दी माँग को लेकर विपक्ष व सरकार दोनों के बीच ज़बरदस्त राजनीति का बाज़ार काफी गर्म है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में ज़रूरी व्यापक सुधार का असली मुद्दा ही कहीं लुप्त ना हो जाये?
2.वैसे इस गर्म मुद्दे को भुनाने हेतु विशेषकर विरोधी पार्टियों ��ें सड़क से लेकर संसद तक में ज़बरदस्त होड़ लगी हुई है, उससे भी सरकार व विपक्ष के बीच तनाव व टकराव की भी परिस्थिति हिंसक होकर किसी न किसी रूप में राज्यों में भी फैल रही हैै, जिससे अपनी पार्टी के लोगों को सचेत व सजग रहने की सलाह।
3.इस प्रकार इस मुद्दे का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो जाने के साथ ही जन्तर-मन्तर में आन्दोलनकारियों के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाईयों ने स्थिति को और अधिक गर्म व गंभीर बना दिय�� है।
4.इस भारी तनाव व टकरावपूर्ण स्थिति के कारण संसद का वर्तमान मानसून सत्र अभी तक एक दिन भी सही व सुचारू रूप से नहीं चल पाया है, जिससे देश व जनहित के और भी अनेकों महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही एक प्रकार से रुक सी गयी है।
5.इसके साथ ही, सरकार सीजेपी के आन्दोलन से निपटने हेतु जो उपाय ढूंढने का प्रयास कर रही है वह भ्रष्टाचार एवं अयोग्यता आदि के कारण होने वाले पेपरलीक होने के बाद की सख़्त कार्रवाई के द्योतक हैं, जबकि पेपरलीक के जघन्य अपराध ना हों इसके नियंत्रण हेतु उचित उपाय नहीं होता दिखने से भी ��ोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
6.इसलिये वर्तमान राजनीतिक हालात में उग्र व निराश होने के बजाय अपने लागों को अपने मिशन के प्रति पूरी लगन व तन, मन, धन से लगातार डटे रहना है, यही अपील।
1.आज से जब संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, सदन से लेकर सड़कों व दिल्ली के जन्तर-मन्तर तक में विभिन्न ज्वलन्त मुद्दों को लेकर ज़बरदस्त टकराव की स्थिति है, जिसे देश के विकट राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक हालात के मद्देनज़र ज़रूर बेहतर सूझबूझ से टाला जाना चाहिये।
2.वैसे भी सर्वसमाज के करोड़ों परिवारों के लिये जीवनदायी मेडिकल आदि की अति-महत्वपूर्ण व विशेष आल-इण्डिया परीक्षायें सहित राज्यों में नौकरी सम्बंधी परीक्षायें आदि भी लगातार हो रहे पेपरलीक/गड़बड़ी आदि के कारण रद्द होने की अनिश्चितता ��े ख़ासकर युवा वर्ग व बेरोज़गार लोग लगातार काफी ज़्यादा परेशान हैं, जो विभिन्न जगहों पर अनेकों प्रकार से व्यक्त किये जा रहे उनके आक्रोश व आन्दोलन आदि से भी प्रकट है और यह देश व जनहित से जुड़ा ऐसा अति-गंभीर मामला है जिसपर पूरी तरह से क़ाबू में करने के लिये सरकारों को तत्काल सख़्त क़दम उठाना नितान्त आवश्यक है।
3.साथ ही, इसके लिये ज़िम्मेदारी भी ज़रूर तय होनी चाहिये तथा ख़ासकर परीक्षा व्यवस्था��ं से जुड़े उच्च पदों पर बैठे लोगों के विरुद्ध भी कड़ी क़ानूनी सज़ा हो ताकि देश की तरक्की की नींव युवा पीढ़ी का भविष्य इस प्रकार की अनिश्चितता और अंधकार से आगे बच पाये।
4.इसी क्रम में यूपी, राजस्थान, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों/शहरों में जिस प्रकार से, अच्छे सरकारी स्कूलों व सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई के घोर अभाव में, प्राइवेट स्कूल एवं बड़ी-छोटी कोचिंग संस्थायें, तेज़ी से पनप रही हैं, उससे यह स्पष्ट है कि देश का युवा वर्ग व उनका परिवार, ज़बरदस्त महंगाई के इस दौर में भी ��पना पेट काटकर एवं अन्य परेशानियों को झेलकर भी, अपने स्तर से पूरा जी-जान लगाकर आगे बढ़ने हेतु प्रतिबद्ध है।
5.वे लोग आउटसोर्सिंंग की शोषणकारी छोटी-मोटी नौकरी आदि से आगे बढ़कर स्थाई व स्वाभिमानी नौकरी में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं ताकि इज्ज़त से दो वक्त की रोटी कमाकर अपना व अपने परिवार का पेट पाल सकें, जो सराहनीय है।
6.ऐसे में सरकारें कोचिंग संस्थाओं आदि पर भय भ्रष्टाचार-मुक्त कड़ी निगरानी ���़रूर रखें, किन्तु प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा स्तर पर सम्पूर्ण सरकारी शिक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर बेहतर बनाने के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को आगे बढ़ाने में भी अपना अहम् दायित्व निभाने का ईमानदार प्रयास ज़रूर करें।
7.वैसे भी यह सर्वविदित है कि देश व समाज को शिक्षित बनाना अनवरत प्रक्रिया है और जिसमें सरकारों द्वारा समुचित बजट प्रावधान के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता को भी अच्छे से अच्छा बनाने जैसी सही सोच रखना भी बहुत ज़रूरी है, तभी युवाओं के उज्जवल भविष्य के सहारे परिवार, समाज, प्रदेश व देश का भविष्य ��ंवर पायेगा, वरना जीडीपी ग्रोथ देश की नैया का सही खिवैया क्या बना पायेगा, इसमें शक है।
8.इसीलिये यूपी व देश में भी विकास का मूल आधार संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के उद्देश्यों के अनुसार शिक्षित, सुरक्षित, कल्याणकारी व सभ्य भारत हो तो यह हमेशा ही बेहतर होगा।
9.और अगर इन बातों पर तत्काल ज़रूरी ध्यान दिया जाये तो जन्तर-मन्तर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के हो रहे आन्��ोलन जैसी कार्रवाईयों के लिये लोगों में भी ख़ासकर युवा पीढ़ी को बाध्य नहीं होना पड़ेगा। सरकार इनके प्रति सहानुभूति का रवैया अपनाकर स्थिति का सही समाधान करें तो यह उचित होगा।
1. यू.पी. के अयोध्या में श्री राम मन्दिर के बाद अब उत्तराखण्ड स्टेट में भी बद्रीनाथ धाम चढ़ावा में चोरी व ग़बन आदि होने का मामला काफी सुर्ख़ियों में हैं। इन दोनों विख्यात धार्मिक स्थलों में इनके ट्रस्ट से जुड़े मुख्य प्रबन्धकों की भी सही से जाँच होनी चाहिये वरना फिर आगे चलकर इनकी आड़ में इनके स्थान पर दूसरे बने मुख्य प्रबन्धक भी इसका दुरुपयोग कर सकते हैं। क्योंकि ऐसी आम चर्चा ह�� कि निचले स्तर पर जो भी गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए या तो मुख्य प्रबन्धकों की मिलीभगत है या फिर उनकी लापरवाही की वजह से यह सब कुछ हुआ है। अतः इस प्रकरण की अब सही से जाँच होनी बहुत ज़रूरी है तथा इस मामले में सरकार व एस.आई.टी. को भी विशेष ध्यान देना है।
2. साथ ही सपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी आदि के जिन वरिष्ठ नेताओं द्वारा यहाँ (श्री राम मन्दिर) चढ़ावे में काफी मोटी रकम की चोरी व ग़बन आदि होने की बात कही जा रही है तो उनसे भी इसके पुख़्ता सबूत लेने चाहिये, ताकि कोई भी चोरी व ग़बनकर्ता बच ना सके, वरना इसकी आड़ में इसे कोरी राजनीति ही माना जायेगा अर्थात् श्रद्धा नहीं, जो जनहित के मुद्दों को दरकिनार करके, अब इस मुद्दे की आड़ में ये पार्टियाँ चुनाव में जाना चाहती हैं, ऐसी भी आम चर्चा है।
जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. देश में ’बहुजन समाज’ व अपरकास्ट समाज के ग़रीब शोषित-पीड़ित व उपेक्षितों द्वारा, उनके संवैधानिक हक़ व न्याय आदि के लिये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताये रास्तों पर चलने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सच्ची व ईमानदार अम्बेडकरवादी पार्टी है, जो दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के सहारे और उनके इशारे पर नहीं चलती है बल्कि अपने लोगों के ही तन, मन और धन के बलबूते पर चलती है, जो स्वाभाविक तौर पर संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व पूंजीवादी ताक़तों को यह फुटी कौड़ी नहीं सुहाता है और इसी लिये वे समय-समय पर और ख़ासकर चुनाव के नज़दीक आने पर क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करके बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट को तथा उसके आयरनलेडी नेतृत्व को भी बदनाम करने में लगे रहते हैं।
इसी क्रम में मीडिया के एक वर्ग द्वारा दूसरी पार्टियों की चुनावी जुगाड़ आदि पर से लोगों का ध्यान बाँटने तथा उन पर पर्दा डालने के लिये बी.एस.पी. पार्टी उम्मीदवार के चयन को लेकर सवालिया निश���न खड़े करते रहते हैं, जबकि बी.एस.पी. को जो भी आर्थिक सहयोग हासिल होता है वह पार्टी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने पर ही क़ानूनी तौर से ज़्यादातर ख़र्च कर दिया जाता है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। फिर भी उसको लेकर षडयंत्र के तहत् गुमराह करने वाली तरह-तरह की ग़लत बातें व अफवाहें आदि फैलाना मीडिया को शोभा नहीं देता है।
इसके साथ ही यहाँ यह भी सर्वविदित है कि केवल बी.एस.पी. यूपी स्टेट यूनिट के अध्यक्ष श्री विश्वनाथ पाल ही नहीं बल्कि पार्टी के अन्य सभी छ���टे-बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्तागण भी इस समय पार्टी संगठन की मज़बूती तथा पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के साथ-साथ आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव हेतु पार्टी उम्मीदवारों की संभावित सूची बनाने तथा उनकी ठोस स्क्रीनिग करने आदि में लगे हुये हैं और पार्टी की उम्मीदवारी को लेकर उनसे मिलने वालों से अन्य बातों के अलावा उनकी सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हैसियत के साथ ही उनके पार्टी के प्रति व��ादारी व टिकाऊपन आदि को भाँपने के लिये, कोर्ट में जिरह की तरह, उनसे तरह-तरह के सवाल-जवाब भी करते रहते हैं, जिसकी गहराई में गये बिना ही उसे उसके पूरे फेस वैल्यू पर अन्यथा लेना उचित नहीं है, यह मीडिया से भी अनुरोध है तथा पार्टी के लोगों से भी अपील है कि वे विरेाधी पार्टियों के ऐसे प्रायोजित किसी भी षडयंत्र का शिकार होकर गुमराह ना हों बल्कि अपने मिशन 2027 के लक्ष्य में पूरे जी-जान से लगे रहें, जिस बी.एस.प��� ज़िन्दाबाद की आपकी जबरदस्त तैयारी को देखकर ही विरोधियों की नींद काफी उड़ी हुई है। जय भीम जय भारत।
Congratulations to the Indian Women’s Cricket Team on a remarkable performance today. The skill, the composure, the way they played for each other, that’s what made it special to watch.
And to every young girl across India who tuned in, what you saw today is what’s possible when you trust your team and back yourself. Keep going, champions, we’re all rooting for you in the matches ahead.
यूपी के जिला मेरठ की सरधना विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चिरोड़ी की लगभग 17 वर्षीय बेटी एंव राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी अनुष्का पाल की ��दमाशों द्वारा की गई हत्या की खबर अत्यंत दुःखद एंव चिंताजनक है। यह घटना समाज को झकझोर देन��� वाली है। सरकार इस जघन्य अपराध में शामिल सभी दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करे, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके तथा भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृति न हो।
गॅस सिलेंडर तुटवड्याचा पहिला बळी!
गॅस सिलेंडरच्या तीव्र तुटवड्यामुळे आज एक दुर्दैवी घटना घडली. अन्वी मिर्जापुर, ता. अकोला येथील वंचित बहुजन आघाडीचे माजी सरपंच शंकरराव सिरसाठ यांचा जीव गेला आहे. सकाळी सुमारे नऊ वाजल्यापासून गॅस मिळवण्यासाठी रांगेत उभे असले��्या सिरसाठ यांना दुपारी दीड वाजण्याच्या सुमारास चक्कर आली आणि त्यातच त्यांचा मृत्यू झाला.
गॅस सिलेंडरचा तुटवडा होणार असल्याची पूर्वसूचना देण्यात आली होती. तरीही शासनाने योग्य नियोजन केले नाही. योग्य वेळी उपाययोजना केल्या असत्या तर शंकरराव सिरसाठ यांचा जीव वाचला असता!
केंद्र व राज्य सरकारच्या चुकीच्या धोरणापायी सामान्य नागरिकांचा जीव जातोय. सरकारचा तीव्र शब्दांत मी निषेध करतो.
@CMOMaharashtra @Dev_Fadnavis
रमज़ान के मुबारक/पवित्र महीने में एक महीना का रोज़ा और तरावीह आदि की इबादतों के बाद आज ईद-उल-फ़ित्र त्योहार के ख़ुशी की उत्तर प्रदेश व समस्त देशवासियों में भी ख़ासकर देश एवं दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय मुसलमान परिवारों को मेरी दिली मुबारकबाद तथा अन्य भारतीयों के साथ-साथ उन सभी के लिए भी अच्छी ज़िन्दगी की शुभकामनायें, जिसकी गारण्टी परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को दी है।
सभी लोग आपसी मेलजोल, भाईचारा, सौहार्द, संयम व सहनशीलता की परम्परा को बनाए रखने में अपना पूरा योगदान दें, ताकि देश में समतामूलक विकास की बात आगे बढ़े और यहाँ देश की ख़ुशी एवं ख़ुशहाली में सभी लोग उसके हिस्सेदार बनकर उस पर गर्व करें।
बहुजन समाज के मसीहा एवं सामाजिक परिवर्तन के महानायक मान्यवर साहेब श्री कांशीराम जी की जयंती पर आज आदरणीय बहन कु @Mayawati जी के निर्देशानुसार राजस्थान के भरतपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया।
हजारों की संख्या में पहुंचे मेहनतकश लोगों, युवा साथी,महिलाएं और बडे बुजुर्ग, मान्यवर साहेब के अनुयायी, बहुजन समाज पार्टी राजस्थान यूनिट के पदाधिकारी और बीवीएफ के वॉलंटियर्स का बहुत आभार शुक्रिया।