WATCH HOW SUJEET KALKAL TURNED A 9-2 DEFICIT INTO ASIAN GAMES GOLD. 🎥🔥🇮🇳
DON’T BLINK. THIS COMEBACK HAPPENED IN REAL TIME. 🤼♂️
THE SCORE SAID 9-2.
THE CLOCK SAID “TOO LATE.”
SUJEET KALKAL SAID “WATCH ME.” 🇮🇳🔥🤼♂️
9-2 → 10-9. GOLD. 🥇
Eight points.
Two minutes.
One unbelievable comeback.
Tajikistan’s Abdulmajid Kudiev was seven points ahead in the Asian Games 65kg FINAL.
Sujeet Kalkal had almost no room left for error.
So he stopped defending the deficit…
and started hunting.
Attack after attack.
Point after point.
Until the scoreboard flipped:
9-9.
Then came the GOLDEN point.
10-9. SUJEET KALKAL. 🇮🇳🥇
And remember—
just hours earlier, Sujeet had eliminated reigning Olympic champion Kotaro Kiyooka in a 3-3 criteria thriller.
Olympic champion in the semifinal.
Seven-point comeback in the final.
This wasn't just a GOLD medal.
This was a refusal to lose.
9-2 से 10-9 — नागोया में सुजीत ने हार की कहानी को गोल्ड की कहानी बना दिया। 🇮🇳🔥
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#सुजीत
Every time Sri Lanka gets out for a low score against India, a part of me left broken by this as a 7 year-old gets healed. Bahot dard dia hai bhayee Jayasuriya ne.
बिहार की मछली: - दुनिया कितना भी बर्गर, पिज्जा, मोमोज, चाउमिन के दीवाने हो जाएं लेकिन बिहारी अपने देशी खाने को हमेशा सबसे पहले रखता है
गर्मी की छुट्टियाँ शुरू होते ही शहर का आदमी धीरे-धीरे गांव की ओर रुख करता है। और गांव, जो सन्नाटे में सोया पड़ा था, अचानक जाग उठता है। मैं भी इसी मौसम में पटना से गांव पहुंचा था। यहां पहुंचते ही लगता है, पूरा गांव अपना हो गया है। कोई दरवाजे पर आवाज दे जाता है, कोई खेत से लौटते हुए हाल-चाल पूछ लेता है, शाम ढलते ही चौकी-खटिया निकल आती है और पुरानी यादों की गपशप शुरू हो जाती है।
दोपहर की प्रचंड गर्मी थी। हवा ऐसे चल रही थी जैसे भट्ठी का मुंह खुल गया हो। तभी बगल के मनोहर साहनी जी बाल्टी में फड़फड़ाती **जिंदा मछली** लेकर आ पहुंचे। शहर में तो बर्फ पर सुलझी मछलियां मिलती हैं, लेकिन यहां की मछली अभी भी तालाब की मिट्टी की खुशबू लिए, ताज़ा और ज़िंदा थी।
बिहार की मछली का अपना अलग स्वाद
बिहार में मछली सिर्फ खाना नहीं, एक परंपरा है। यहां की मीठे पानी की मछलियाँ दुनिया में कहीं और वैसी नहीं मिलतीं। इनका स्वाद मिट्टी, तालाब के पानी और सदियों पुरानी रेसिपी का मिला-जुला कमाल होता है।
कुछ खास किस्में जो बिहार में सबसे प्रसिद्ध हैं
रोहू (Rohu): सबसे राजसी। मोटा, मीठा और गूदेदार। सरसों की ग्रेवी में बनाए तो स्वाद का राजा बन जाता है।
- कतला (Katla): बड़ा और मोटा, सिर वाला हिस्सा खासतौर पर लजीज।
- मागुर (Magur): कांटे कम, स्वाद बहुत गहरा। अक्सर रसेदार बनाई जाती है।
- सिंगhi (Singhi): छोटी लेकिन बेहद स्वादिष्ट, खासकर मसालेदार तड़का के साथ।
- झींगा (Prawns) और टेंगरा: इनका अलग ही कमाल है।
- कॉमन कार्प और ग्रास कार्प : तालाबों में आसानी से पाई जाने वाली, लेकिन सही हाथों में बनने पर कमाल कर जाती हैं।
बिहार में मछली बनाने का तरीका भी अनोखा है। यहां सिर्फ चुनिंदा मसाले ही डाले जाते हैं हल्दी, लहसुन, प्याज, हरी मिर्च, जीरा और सबसे खास सरसों। सरसों वाली ग्रेवी में पकी मछली का स्वाद सचमुच दुनिया में कहीं नहीं मिलेगा। सरसों का तेल, उसमें लहसुन-प्याज का छौंक, फिर मछली डालकर धीमी आंच पर पकाना -यह पूरी प्रक्रिया एक रस्म बन जाती है।
गांव की दोपहर और मछली ओह
उस दिन आंगन के किनारे ईंटों से चूल्हा बनाया गया। सूखी लकड़ियां सुलगाई गईं। सरसों के तेल में लहसुन-प्याज का तेज़ छनकना शुरू हुआ तो चारों तरफ खुशबू फैल गई। कोई मछली साफ कर रहा था, कोई मसाला पीस रहा था, कोई पंखा झलते हुए आग को तेज कर रहा था। बीच-बीच में राजनीति, बारिश, खेती और पुराने किस्सों पर बहस चलती रही।
घर के अंदर मांस-मछली बनाना अभी भी वर्जित है, इसलिए सब कुछ बाहर ही हो रहा था। पसीना बह रहा था, गर्मी असहनीय थी, लेकिन जब पहला निवाला मुंह में गया -गरमा-गरम भात के साथ सरसों वाली रोहू -तो सारी थकान गायब।
मेहमान भी थे। गांव में मेहमान का मतलब बोझ नहीं, रौनक होती है। कोई खटिया बिछा रहा था, कोई ठंडा पानी का लोटा भर लाया था। कोई पूछ रहा था - “भात और चढ़ाएं क्या?”
शाम ढलते ही जनरेटर की आवाज आई, बच्चे आम के बगीचे से लौटे, और हम सब देर रात तक बाहर बैठे रहे।
बिहार की मछली सिर्फ खाना नहीं है। यह मेहनत है, इंतजार है, रिश्तों की गर्माहट है और मीठे पानी का वो स्वाद है जो कभी नहीं भूलता।
चाहे दिल्ली-मुंबई में कितने भी बर्गर, मोमोज और चाउमीन आ जाएं, बिहार का आदमी जब भी याद करता है - एक प्लेट गरमा-गरम सरसों वाली मछली और भात - तो उसका दिल गांव की ओर मुड़ ही जाता है।
क्योंकि कुछ स्वाद सिर्फ पेट नहीं, रूह को भी भाते हैं।
बिहार की बर्गर सैंडविच बड़े-बड़े कैफे में आपको भीड दिखाई दे या ना दें लेकिन आपको ढाबे पर हमेशा खाना खत्म मिलेगा क्योंकि लोग वहां डिमांड करते हैं देसी तारिका देसी स्वाद अपना अंदाज है
No IPL or World Cup could ever match the divine feeling of waking up at 4am on a freezing December Patna night, wrapped in a blanket, watching the Master Blaster hammer Australian fast bowlers on the old TV. Pure magic. Pure Sachin. Divine #Nostalgic
🚨CAPTAIN KOHLI IS BACK🚨
BCCI is reportedly trying to convince Virat Kohli to come out of Test retirement and lead Indian Test Team until the 2029 WTC Final.
एक समय था जब गांव में मलाई बर्फ़ चार आना या अनाज (गेहूं) देने पर भी मिलती थी। बच्चें और बूढ़े भी मलाई बर्फ़ खाने के लिए खाली पैर धूप में बाहर निकल आते थे। आपने कभी अनाज के बदले मलाई बर्फ़ खाया हैं?
जीवन में पहली बार इस सोमवार बाबा धाम देवघर गया.. सुल्तानगंज ( बिहार) से देवघर के 110 किमी के रास्ते में कांवड़ियों से बात करते .. मुझे जिज्ञासा थी कि पश्चिमी यूपी में कांवड़ियों का क्रोध सड़क पर रोज दिखता है और यहां इतनी शांति ? पर बात करने पर माजरा समझ आ गया .. देवघर पचास फ़ीसदी महिलाएं भी आतीं, कांवड़िए माँ, बहन बेटियों के साथ आते .. और भोले भक्तों की अगाध आस्था है कि कांवड खंडित हो गई तो ये उनसे कोई कमी हो गई, चाहे भले दूसरे की गलती से कांवड खंडित हुई पर वो उत्पात नहीं करते .. देवघर रास्ते भर कांवड जहां रखते वहां कान पकड़ कर उठक बैठक करते .. हमने पूछा ये क्यों .. उनका कहना था कि कोई गलती हुई हो तो भोले बाबा माफ करे .. इस मन:स्थिति से जाने वाला व्यक्ति कभी हिंसक नहीं हो सकता .. उत्पाती , कट्टर, चाहे किसी धर्म का मानने वाला हो , धार्मिक हो ही नहीं सकता .. जय बम भोले 🙏🙏
INDIAN NATIONAL ANTHEM IN MONACO 🇮🇳🥹
Kush Maini has created History by becoming the first Indian to win an F2 race at Monte Carlo! 🤯
ABSOLUTELY INCREDIBLE BY KUSH 🙌
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