बाराबंकी
PFपर न चोटहिल होने का डर न मौत का जैसे भी हो शाम को RPFप्रभारी या सब इंस्पेक्टर को₹500नामा प्रति वेंडर देना ही है इसी कारण हो रहा वेंडरो का मौत का खूनी खेल इन मौतो का जिम्मेदार कौन?
रेल महकमा कोई सख्तकार्रवाई क्यो नही?
आखिर मौते कब?
@drm_lko@RailMinIndia@RailwaySeva
बाराबंकी
रेलवे PF पर दिनांक 1/4/26 को गाड़ी13020 से एक अवैध वेंडर मौत के बाद भी नही जागे
RPF प्रभारी एवं सब इंस्पेक्टर आज भी चला रहे है सारे फर्जी अवैध वेंडर आखिर मौत का खेल कब बंद होगा?इस मौत का जिम्मेदार कौन कौन?
खबर का भी कोई असर नही।@PMOIndia@drm_lko@RailMinIndia@rpfnr_
@rpfnr_@RailwaySeva यह सत्य है क्योंकि इसकी पुष्टि दैनिक भास्कर खबर करता है 1/4/26 की गाड़ी सं०13020 सेअवैध वेंडर की कट कर मौत का जिम्मेदार कौन?RPF प्रभारी या सब इंस्पेक्टर BBK? आज भी BBK,PF पर सारे फर्जी अवैध वेंडर खेल रहे है मौत का खेल
मृत्यु के चार दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नही?
बाराबंकी
रेलवे PF का हाल बहुत ही बुरा है।
RPF प्रभारी एवं सब इंस्पेक्टर BBK,PF पर चला रहे है सारे फर्जी अवैध वेंडर दिन रात चलती ट्रेनों मे खेल रहे है खूनी खेल बीते दिन हुई वेंडर की मौत का जिम्मेदार कौन?
दैनिक भास्कर पर चली खबर का कोई असर नही।@PMOIndia@drm_lko@RailMinIndia
बाराबंकी
रेलवे प्लेटफार्म का हाल बहुत ही बुरा हो गया है।
RPF प्रभारी एवं सब इंस्पेक्टर BBKप्लेटफार्म पर चला रहे है सारे फर्जी अवैध वेंडर यह वेंडर दिन रात चलती ट्रेनों मे खेल रहे है खूनी खेल बीते दिन हुई वेंडर की मौत का जिम्मेदार कौन?
दैनिक भास्कर पर चली खबर का कोई असर नही दिखा।
रेलवे में सप्लाई होने वाला खाना आखिर किस मानक पर तैयार हो रहा है?
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने जिस दुकान से गंदे बोरे पर पड़े हुए समोसे पकड़े — क्या यही समोसे @IRCTCofficial के नाम पर यात्रियों को परोसे जा रहे थे?
कितने समय से यह गंदा और असुरक्षित खाना रेलवे स्टेशनों पर बेचा जा रहा है?
किसकी निगरानी में? कौन जिम्मेदार है?
जब लोकल अनऑथराइज्ड वेंडर बिना रोक-टोक प्लेटफॉर्म तक घुस जाते हैं, तो सुरक्षा और हाइजीन की क्या गारंटी बचती है?
और जो ऑथराइज्ड IRCTC वेंडर्स हैं — उनकी हाइजीन चेक कब और कितनी बार होती है?
क्या उनका कोई वास्तविक ऑडिट होता भी है?
यात्रियों को बार-बार खराब खाना और फूड पॉयज़निंग का खतरा क्यों झेलना पड़ता है?
रेलवे और IRCTC यह सुनिश्चित क्यों नहीं करते कि खाना मानक के अनुसार बने?
अगर खाद्य सामग्री गंदगी में रखी जा रही है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
कुछ दिन पहले हमारी टीम ने अनधिकृत वेंडरों पर सवाल उठाया था , जो ट्रेनों में यात्रियों को पानी, खाना और अन्य खाद्य सामग्री बेच रहे हैं। अब पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन का यह वीडियो देखिए — एक विक्रेता पटरी से खाली बोतलें उठाकर टोंटी का पानी भर रहा है और उसे “बिसलेरी” बताकर बेच रहा है।
🚨 रेल मंत्रालय और IRCTC से सीधे सवाल:
>• यात्रियों की ज़िंदगी किसके भरोसे छोड़ दी गई है?
>• अगर फूड पॉइज़निंग हुई या किसी की जान गई तो जिम्मेदार कौन होगा?
>• जब टिकट के पैसे आप लेते हैं तो सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाते?
>• ऐसे अवैध वेंडरों को स्टेशन परिसर में घुसने से रोकने के लिए अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई?
>• क्या यात्रियों की सेहत से बड़ा कोई मुनाफा है?
जवाब चाहिए। बहाने नहीं।
छोटे रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन रुकते ही लोकल वेंडर बिना किसी पहचान के डिब्बों में घुसकर नमकीन, भुजिया, चने व अन्य खाद्य सामग्री बेचते हैं। नींबू निचोड़कर “स्वाद” तो दे दिया जाता है, लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य का क्या??
सवाल @RailMinIndia , @IRCTCofficial और RPF से 👇
>• इन वेंडरों के पास आधार , मेडिकल सर्टिफिकेट और रेलवे परमिट क्यों नहीं होता?
>• फूड पॉइज़निंग हुई तो जिम्मेदार कौन होगा?
>• कोई ज़हर मिलाकर उतर गया तो जवाबदेही किसकी?
>• चोरी, बच्चा गायब या छेड़छाड़ की घटना में कौन दोषी?
>• अगर कोई विस्फोटक छोड़ गया तो जिम्मेदारी किसकी?
>• क्या RPF वास्तव में पैसे लेकर इनकी एंट्री करवा रही है?
>• क्या सुरक्षा का ठेका किसी को दे दिया गया है?
यात्री टिकट भी देता है और रिस्क भी उठाता है।
फिर जवाबदेही कौन लेगा वेंडर , RPF , IRCTC या रेल मंत्रालय?
अब जवाब चाहिए , बहाने नहीं।
हर रेलवे स्टेशन के आसपास आपको 8 से 14 साल के मासूम बच्चे मिल जाएंगे — फटी बनियान, खाली पेट, हाथ में सुलेशन की बोतल और आंखों में धुंध।
हर दिन पुलिस , डॉक्टर , आरपीएफ , एनजीओ और अधिकारी इन बच्चों को देखते हैं, पर किसी को फर्क नहीं पड़ता।
क्योंकि ये उनके “एरिया ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी” में नहीं आता।
सवाल ये है —>>
अगर स्टेशन पर खाकी वर्दी है,
अगर वहां आरपीएफ गश्त करती है,
अगर वहां हर दिन हज़ारों कैमरे और वेंडर पास जारी होते हैं —>>
तो ये नशा कहां से और किसकी निगरानी में इन बच्चों तक पहुंचता है?
ये बच्चे अपराधी नहीं हैं — ये सिस्टम की लापरवाही के शिकार हैं।
गरीबी, भूख, और बेसहारा बचपन ने इन्हें इस हालत में पहुंचाया है।
किसी ने इनकी परवरिश नहीं की, किसी ने इनकी सुरक्षा नहीं की, और अब कोई इनकी सुध नहीं लेता।
क्या @RailMinIndia की ज़िम्मेदारी सिर्फ ट्रेन चलाने तक सीमित है?
क्या @NCPCR_ और @MinistryWCD को ये बच्चे दिखते नहीं?
क्या @DelhiPolice , @RailwayPolice और स्थानीय प्रशासन इन नशे के सप्लायरों को नहीं पकड़ सकते?
जब हर कोने में CCTV है तो ये ज़हर बेचने वाले अदृश्य कैसे हैं?
क्यों रेलवे स्टेशनों के आसपास पुनर्वास केंद्र या चाइल्ड हेल्प डेस्क सक्रिय नहीं हैं?
क्यों इन बच्चों के लिए स्कूल या स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं चल रहे?
देश की असली तरक्की इन मासूमों के हाथ से बोतल छिनकर किताब देने में है।
जब तक ये बच्चे नशे में हैं, तब तक “विकसित भारत” सिर्फ एक नारा रहेगा।
#ChildRights #RailwayNegligence #YehThikKarKeDikhao
गोंडा में आरपीएफ की हिरासत में हुई संजय सोनकर की मौत के मामले में बड़ा खेल हुआ है। संजय की पत्नी गीता ने बताया कि बुधवार सुबह वह लोग आरपीएफ थाना पहुंचे। वहां बताया गया कि संजय बीमार हो गए हैं। उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। मेडिकल कॉलेज में पता चला कि आरपीएफ के तीन जवान मंगलवार रात संजय का शव लेकर आए थे। शव को मॉर्च्युरी में रखवाया गया है। यह सुनते ही चीख-पुकार मच गई।
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#AmarUjala
झांसी में अंडमान एक्सप्रेस में यात्री के पीठ में दर्द होने के बाद उसको लाठी से थाई मसाज देते वेंडर्स ,
कुछ फैक्ट चेकर कहेंगे कि लाठी से CPR दे रहे हैं।
एक X यूजर ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि रेलवे की AC क्लास बोगियों में जो अटेंडेंट की सीट होती है, उसे कई बार TT साहब “बेच” देते हैं। यानी जिस सीट पर सुरक्षा , सेवा और सफाई के लिए अटेंडेंट होना चाहिए , वहाँ अक्सर बिना टिकट यात्री पैसे देकर बैठा होता है।
ऐसे ही नज़ारे 3rd AC और स्लीपर क्लास में आम हैं —>
अटेंडेंट गायब, उसकी जगह TT का स्पेशल गेस्ट बैठा हुआ।
बिना टिकट यात्रियों से नकद वसूली, लेकिन कोई रसीद नहीं।
कई बार ये सीटें लंबी दूरी के लिए पहले से बुक कर दी जाती हैं।
और जब शिकायत करो तो जवाब मिलता है > सब सेट है भाई।
रेलवे के राजस्व की लूट हो रही है, यात्रियों की सुरक्षा दांव पर है, और जिम्मेदार अफसर चुप हैं।
यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, व्यवस्था की बेइज्जती है।
अब “टीम खुरपेंच” ने इस मामले की पड़ताल शुरू कर दी है —>
जल्द ही वीडियो और सबूत सामने आएंगे।
आप लोग भी अपनी ट्रेन यात्राओं के वीडियो , फोटो और अनुभव भेजते रहिए —>
क्योंकि हर टिकट की कीमत में जनता का भरोसा शामिल है।
अब वक्त है खुरपेंच करने का , डरने का नहीं।
हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर हुई घटना के संबंध में रेलवे प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई की है। सभी दोषी व्यक्तियों को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) द्वारा गिरफ्तार किया गया है।
संबंधित ठेकेदार पर पाँच लाख रुपये का दंड लगाया गया है तथा ठेका निरस्त करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा, चारों वेंडरों के परिचय पत्र (ID कार्ड) ज़ब्त कर उन्हें आरपीएफ द्वारा हिरासत में लिया गया है।
रेलयात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोपरि है।
भदोही रेलवे स्टेशन पर कल काशी एक्सप्रेस से 8 अवैघ वेंडर वाराणसी टीम द्वारा पकड़ी गई थी जिसमें 6 वेंडर को 3000 लेकर छोड़ दिया गया केवल दो के ऊपर कारवाई की गई ऐसा दुर्व्यवहार क्यों अवैध बंदरों को संरक्षित क्यों किया जाता है ? @RPF_INDIA@drmljn@RailwaySeva@RailMinIndia
रेलवे पुलिस का कर्मचारी किस तरह एक लड़के को चलती ट्रेन से फेंकने की कोशिश कर रहा है
यदि यह लड़का मर जाता तो कौन जिम्मेदार होता।
@RailMinIndia@RPF_INDIA@RPFCR
कल ट्रेन 12546 की #पावरकार का स्टाफ तीन लोगों को अपना स्टाफ बताकर अनधिकृत रूप से ले जा रहा था। गार्ड ने उनकी आईडी और अथॉरिटी मांगी-पता चला कि तीनों पावरकार का स्टाफ नहीं हैं।
पावरकार एस्कॉर्ट और कोच अटेंडेंट इस तरह लोगों को ले जाते हैं।
काँट्रेक्ट के दुष्परिणाम, सुरक्षा में सेंध!