Nation First!Army Veteran.Alma Mater St. Mary's Academy. Decade+ in J&K n North East, BlackCat NSG Follower of Flowing Water philosophy Love Life Travel Driving
💯So true!
freebies are 😍
but people fail to appreciate that a collective burden based on use is far better than cumulative burden of all paying as tax even if you don’t use!!!
All freebies source out of your Tax🎯
जब आप BookMyShow से मूवी टिकट बुक करते हैं, तो ₹40 प्रोसेसिंग फीस लगती है;
अगर टिकट ₹200 का है, तो आप ₹240 देते हैं...
फिर भी, कोई शिकायत नहीं करता।
हम हर महीने IRCTC पर लगभग 13 करोड़ टिकट बुक करते हैं, जिस पर कम से कम ₹25 प्रति टिकट इंटरनेट चार्ज लगता है।
IRCTC ने सिर्फ इसी से पिछले तिमाही में ₹360 करोड़ कमाए...!!
फिर भी, कोई शिकायत नहीं करता।
अमेरिकन VISA और MasterCard हर ट्रांजैक्शन पर 2% सरचार्ज वसूलते हैं।
ब्लिन्किट पर भी चार्ज लेने लगे है तुरन्त डिलिवरी फ्री थी अब पाच रुपये दस रुपये फीस लेते हैं...
स्विगी जोमेटो भी चार्ज लेने लगे तो कोई नहीं बोलता और फिर भी लोग लेते हैं उनका काम बढ रहा है...
भारत के RuPay कार्ड ने उनकी मोनोपॉली तोड़ दी है,
फिर भी लोग वो चार्ज देते रहते हैं...!!
कोई शिकायत नहीं करता ।
लेकिन उन्हें UPI से दिक्कत है...!!
बस सरकार सब कुछ फ्री में दे... और कुछ भी नहीं ले... यदि ले तो हम विरोध करेगे... ये क्या कुतर्क हैं... ये सब विरोधियों के हथकण्डे हैं बस लोगो को भडकाओ कुतर्को द्वारा... !!!
वे ये सीधा सा लॉजिक समझ नहीं पाते कि हर टेक्नोलॉजी हमेशा के लिए फ्री नहीं रहती...!!
आपका पेमेंट बस कुछ सेकंड में क्लियर हो जाता है।
याद है जब एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर में 24 घंटे लगते थे? अब हम इस बारे में सोचते भी नहीं...!!
टेक्नोलॉजी कितनी आगे बढ़ गई है...!!
तो, थोड़ी सी रकम दे दीजिए। अरे भाई व्यापारी यदि दस रुपये मे कोई वस्तु बेचता है तो वो अब ग्यारह रुपये मे बेचे... और क्या... बिना बात का हल्ला नहीं करना चाहिए...
क्या व्यापारी अपने माल की कीमत बढा के नहीं बेचते हैं क्या...तो वैसे ही यहां भी एक रुपया या जो भी हो अपने माल की कीमत बढाकर बेचे... बस...
व्यापारी नहीं... ये विरोधीयो के एजेंण्ट सब भडकाने का काम करते है... बस और कुछ नहीं...
सोचिए उन लाइनों के बारे में जिनमें हम बिजली, पानी, गैस के बिल और मोबाइल रिचार्ज के लिए खड़े होते थे... जो अब सिर्फ एक धुंधली याद बन गई हैं...!!
बात का बतंगड़ क्यों बनाना?
यूरोप में भी ऐसी सुविधाएं नहीं हैं;
पाकिस्तान में लोग अभी भी लाइनों में खड़े होते हैं, और पुलिस उन्हें डंडों से पीटती है...
बीस साल पहले यहाँ भी यही हाल था; कर्मचारी कहते थे,
"लंच टाइम है; लंच के बाद आना"...!!
अब हर चीज का पेमेंट ऑनलाइन है...!!
जिंदगी अब आसान हो गई है, तो थोड़ी कीमत चुका दीजिए;
आप कब तक हर चीज फ्री में मिलने की उम्मीद करते रहेंगे...!!
हर बात पर भडकना नहीं चाहिए, न ही हर एक चीज की सिर्फ आलोचना करने के लिए आलोचना कीजिए...
अपनी आलोचना को बड़े, महत्वपूर्ण मुद्दों के लिए बचा कर रखिए।