As a Shia Agakhani Ismaili Muslim, I understand people mourning the death of Ayatollah sahab & I even understand the protests. Indian democracy & our Constitution gives one the right to protest, but when some woman makes obnoxious statements like, we will take a sword & fight for #Iran, I want to tell her : sister the #IranIsraelWar is being fought with missiles & drones ! What will your sword do? Have you seen the kids of rich Indian Muslim for eg Shahrukh Khan or Salman Khan, or Owaisi or Azim Premji want to go on the streets and fight the #IranWar ? Please drop this, learn AI & get very very rich & keep loving India !
Posting without comments. I don't know who this person is but listen and take decisions as per your intelligence that what he is saying is true or false.
*थप्पड़ पर थप्पड़ - इसे कहते हैं बातों से थप्पड़ मारकर साम��े वाले को सोचने पर मजबूर करना।*.... MUST WATCH ...... MIND BLOWING *सभी ने पुरा सुनना चाहिये!*
BIG NEWS 🚨 Respected Journalist Palki Sharma busts fake propaganda against Modi Govt at Oxford Union Society 🔥🔥
She said "If India is a poor democracy, Did BJP win the Karnataka or Telangana elections. Were the EVMs faulty then as well?"
"Bharat’s per capita income has doubled since 2014"
"Modi’s India got its much-deserved political stability. India isn’t a troublemaker but a consensus builder.
"Modi’s Kashmir went through economic resurgence and landmark social reforms"
"Social media misinformtion campaign against the rising Bharat is fierce today" ⚡- Palki Sharma
Let me tell you a fact, if GOI sacks Brajbhushan Singh & appoint J. Praseeth (champion wrestler of Tamilnadu) in this post, these people who are protesting will come up with a new demand & allegations against him as well..
People aren't getting the real game. These people who are protesting want their own people as president, they want direct ticket to the Olympics & other such world championships without playing national level events.
असद के मरते ही पीड़िताओं की कहानियाँ सामने आने लगीं
आज उसकी आयु 23 की है, तब वह 18-19 की रही ह���गी। सामाजिक मानदंडों के आधार पर बहुत सुंदर थी। आयु ही ऐसी थी कि चर्चा में रहने का शौक था। सोशल मीडिया आदि के कारण कहें या कुछ और कारण, लड़की अतीक अहमद के बेटे की दृष्टि ��ें आ गई। अली नाम के बेटे के साथ, ब्वायफ्रेंड समझ कर घूमना-फिरना आदि होने लगा। शारीरिक संबंध भी बने।
समय के साथ ही इसका यह भ्रम टूटा और इसे समझ में आ गया कि इसे ये लोग भोग की ही वस्तु मानते हैं, और कुछ भी नहीं। इसने उनसे संबंध तोड़ना चाहा। अली के छोटे भाई असद और उसके दोस्त इसके घर के आगे पहरा देने लगे, हर तरह से समस्या उत्पन्न करने लगे।
कॉलेज के शिक्षक आदि भी सब अपने सामने होते देख, उसके बाप के आतं��� के कारण मूक दर्शक बने फिर रहे थे। असद अपने गैंग के साथ कक्षा में आ कर बैठ जाया करता था, क्लास बंद करा दी जाती थी। एक बार इसे यह कह कर बुलाया कि फाइनल बार मिले और सब समाप्त करे, वो पीछा छोड़ देगा। फिर असद ने इसके साथ ��ुष्कर्म किया।
वो दरिंदा यहाँ पर ही नहीं रुका, उसने अब ब्लैकमेलिंग आरंभ की कि उसे वह जब भी बुलाएगा, उसे आना ही होगा। तब इसने अपने पिता को बताया। पिता ने सोचा लड़के के सामने जा कर समझाएँगे तो कदाचित मान जाए। वहाँ उनसे कहा गया, “जब बेटी सुंदर हो तो परदे में रखा जाता है, बाहर छोड़ा है तो खाने के लिए ही ना?”
इसके बाद इसके पिता से उसने कहा कि उन्हें जहाँ भी जाना हो, वह जा सकते हैं। पुलिस के पास जाना हो जाएँ पर होगा कुछ नहीं। धमकी दी गई कि उन्हीं लोगों को गायब करा दिया जाएगा। अंततः, पिता को परिवार समेत अपनी जन्मभूमि छोड़ कर महाराष्ट्र में शरण लेना पड़ा जहाँ उनके मित्र ने उनकी नौकरी आदि का प्रबंध करने में सहायता की। लड़की का विवाह कराया।
मेरे पास किसी ने इस पीड़िता की कहानी भेजी। मैं��े उस लड़की के चैट पढ़े हैं जहाँ उसने लिखा है कि वो पूरी रात रोती रही जिस दिन असद मारा गया। उसे उस नाम के साथ ही पाँच वर्ष पुराने घाव स्मरण हो आए जिसके कारण उसका जीवन नरक बन गया था। उसने लिखा कि उस सुबह उसके हृदय से एक बोझ हट गया और उसने स्वयं को आत्मीय रूप में मुक्त, हल्का अनुभव किया।
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जब कोई अतीक या असद के लिए ‘मुसलमान था इसलिए मार दिया’ का प्रयोग करता है, तो वो भूल जाते हैं कि इन दरिंदों ने कितनी बच्चियों का जीवन बिगाड़ा है, कितने दर्जन लोगों की सीधी हत्या की है, कितने लोगों की भूमि हड़पी है… इन दरिंदों के लिए जो भी समर्थन जुटा रहा है, वो स्वयं हत्यारे हैं, आतंकियों के हिमायती है और अतीक के पाप के भागीदार है।
एक ऐसे कथावाचक जिनके पास पत्नी के अस्थि विसर्जन तक के लिए पैसे नहीं थे ...तब मंगलसूत्र बेचने की बात की थी।
यह जानकर सुखद आश्चर्य होता है कि पूज्यनीय रामचंद्र डोंगरे जी महाराज जैसे भागवताचार्य भी हुए हैं जो कथा के लिए एक रुपया भी नहीं लेते थे 🙏 मात्र तुलसी पत्र लेते थे।जहाँ भी वे भागवत कथा कहते थे, उसमें जो भी दान दक्षिणा च��़ावा आता था, उसे उसी शहर या गाँव में गरीबों के कल्याणार्थ दान कर देते थे। कोई ट्रस्ट बनाया नहीं और किसी को शिष्य भी बनाया नहीं।
अपना भोजन स्वयं बना कर ठाकुरजी को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते थे।डोंगरे जी महाराज कलयुग के दानवीर कर्ण थे।
उनके अंतिम प्रवचन में चौपाटी में एक करोड़ रुपए जमा हुए थे, जो गोरखपुर के कैंसर अस्पताल के लिए दान किए गए थे।-स्वंय कुछ नहीं लिया|
डोंगरे जी महाराज की शादी हु�� थी। प्रथम-रात के समय उन्होंने अपनी धर्मपत्नी से कहा था-'देवी मैं चाहता हूं कि आप मेरे साथ 108 भागवत कथा का पारायण करें, उसके बाद यदि आपकी इच्छा होगी तो हम ग्रहस्थ आश्रम में प्रवेश करेंगे'।
इसके बाद जहाँ -जहाँ डोंगरे जी महाराज भागवत कथा करने जाते, उनकी पत्नी भी साथ जाती।108 भागवत पूर्ण होने में करीब सात वर्ष बीत गए।तब डोंगरे जी महाराज पत्नी से बोले-' अब ��गर आपकी आज्ञा हो तो हम ग्रहस्थ आश्रम में प्रवेश कर संतान उत्पन्न करें'।
इस पर उनकी पत्नी ने कहा,'आपके श्रीमुख से 108 भागवत श्रवण करने के बाद मैंने गोपाल को ही अपना पुत्र मान लिया है,इसलिए अब हमें संतान उत्पन्न करने की कोई आवश्यकता नहीं है'।धन्य हैं ऐसे पति-पत्नी, धन्य है उनकी भक्ति और उनका कृष्ण प्रेम।
डोंगरे जी महाराज की पत्नी आबू में रहती थीं और डोंगरे जी महाराज देश दुनिया में भागवत रस बरसाते थे।
पत्नी की मृत्यु के पांच दिन पश्चात उन्हें इसका पता चला।वे अस्थि विसर्जन करने गए, उनके साथ मुंबई के बहुत बड़े सेठ थे- रतिभाई पटेल जी |
उन्होंने बाद में बताया कि डोंगरे जी महाराज ने उनसे कहा था ‘कि रति भाई मेरे पास तो कुछ है नहीं और अस्थि विसर्जन में कुछ तो लगेगा। क्या करें’ ?फिर महाराज आगे बोले थे, ‘ऐसा करो, पत्नी का मंगलसूत्र और कर्णफूल- पड़ा होगा उसे बेचकर जो मिलेगा उसे अस्थि विसर्जन क्रि���ा में लगा देते हैं’।
सेठ रतिभाईपटेल ने रोते हुए बताया था....
जिन महाराजश्री के इशारे पर लोग कुछ भी करने को तैयार रहते थे, वह महापुरुष कह रहा था किपत्नी के अस्थि विसर्जन के लिए पैसे नहीं हैं।
हम उसी समय मर क्यों न गए l
फूट फूट कर रोने के अलावा मेरे मुँह से एक शब्द नहीं निकल रहा था।
* ऐसे महान विरक्त महात्मा संत के चरणों में कोटि-कोटि नमन भी कम है ।।