लंबा लिख रहा हूँ, क्योंकि दर्द छोटा नहीं है पूरा पढ़िएगा
सरकारी बैंक (RRB) से Morgan Stanley और फिर अपना बिज़नेस - तीन दुनियाओं का सफर और मेरी कहानी
मैंने अपनी करियर की शुरुआत भारत के सरकारी बैंक (RRB) से फिर किस्मत ने मौका दिया यूरोप में पढ़ने और फिर वहाँ मॉर्गन स्टेनली में काम करने का।
फर्क क्या था?
सिर्फ सैलरी का नहीं।
सिर्फ नाम का नहीं।
सबसे बड़ा फर्क था - इज्जत, माहौल और इंसानियत का।
भारत के सरकारी बैंकों में क्या देखा?
🔻 रोज़ नए-नए टारगेट
🔻 सीनियर्स के धमकी भरे व्हाट्सएप मेसेज
🔻 “आज 20 PMJJBY अकाउंट क्यों नहीं खुले?” जैसे सवाल
🔻 ऑफिस की हालत - टूटी कुर्सियाँ, टपकती छत, न एसी, न इंटरनेट
🔻 मेमो, सस्पेंशन और ट्रांसफर की तलवार हर वक्त सिर पर
🔻 छुट्टी मांगो तो जुर्म मानो
🔻 काम करो चाहे जान चली जाए - कोई पहचान नहीं, कोई तारीफ नहीं
वहाँ हमें इंसान नहीं, टारगेट मशीन समझा जाता था।
मेंटल हेल्थ?
वर्क-लाइफ बैलेंस?
करियर डेवलपमेंट?
❌ भारतीय बैंकिंग में ये शब्द सुनने तक को नहीं मिलते।
फिर मैंने मॉर्गन स्टेनली यूरोप जॉइन किया।
वहाँ जाकर महसूस हुआ, बैंकिंग का असली मतलब क्या होता है।
✅ अगर किसी दिन देर तक काम करो, तो ओवरटाइम खुद सिस्टम में रिकॉर्ड होता था। फिर मैनेजर से पूछा जाता था - Why did he work late?
✅ अगर काम ज्यादा है, तो मैनेजर खुद कहते थे - Need more staff? Take it. But your team should have work-life balance.
✅ महीने का एंड बहुत बिज़ी होता था, पर फिर मैनेजर खुद कहते - Go for some holiday and we will partially pay.
✅ ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर - सब्सिडाइज़्ड।
✅ ऑफिस में जिम, पूल, स्पा।
✅ कोई ड्रेस कोड का झंझट नहीं।
✅ “मन नहीं है काम करने का, कोई बात नहीं, आज आराम कर लो। टीम में कोई और संभाल लेगा।
✅ प्रमोशन, इनक्रीमेंट सब कुछ सिर्फ परफॉरमेंस पर बेस्ड।
✅ अगर किसी को बीच में बिज़नेस करना है, या कोई दूसरा वेंचर ट्राय करना है, तो मैनेजर बोलते - जाओ, ट्राय करो। कभी भी वापस आना चाहो, दरवाज़ा खुला है
✅ बिना सीलिंग के फुल मेडिकल फैसिलिटी।
✅ तनाव हो रहा है तो थेरेपी की सुविधा उपलब्ध।
✅ कभी भी किसी से भी संपर्क करने की छूट, कोई हीरार्की नहीं - आप किसी से भी अपनी समस्या शेयर कर सकते हो
✅ रिजाइन करने के बाद भी HR और मैनेजर टाइम-टाइम पर टच में रहते है- सब ठीक तो है? किसी मदद की ज़रूरत है?
ये सब देखकर एक ही बात समझ में आई -
मॉर्गन स्टेनली में जो सपोर्ट और माहौल मिला, उसी ने मुझे कॉन्फिडेंस दिया कि मैं खुद का वेंचर शुरू कर सकूं।
जो आत्मविश्वास मुझे मॉर्गन स्टेनली में मिला, वो भारतीय बैंकिंग सिस्टम में कभी नहीं मिला।
शायद वही माहौल और जॉब सिक्योरिटी थी, जिसने मुझे अपना वेंचर शुरू करने की हिम्मत दी।
आज पिछले डेढ़ साल से यूरोप, अफ्रीका और इंडिया में छोटा ही सही, लेकिन अपना वेंचर चला रहा हूँ - और उस फाइनेंशियल लेवल पर हूँ, जिसकी सरकारी बैंकिंग में रहते हुए कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था।
सरकारी बैंकिंग में रहता, तो शायद आज इतनी हिम्मत नहीं होती।
बल्कि सच कहूँ, तो शायद डिप्रेशन में या सुसाइड की कगार पर पहुँच गया होता।
क्योंकि सरकारी बैंकिंग में तो सब कुछ उल्टा था:
❌ सबसे बहतरीन स्टाफ लेकिन सबसे ख़राब प्रबंधन
❌ देर तक काम करो, तो पूछने वाला कोई नहीं कि क्यों रुके
❌ स्टाफ कम है तो भी मैनेजर कहेंगे - काम तो करना ही पड़ेगा
❌ छुट्टी लेना जुर्म है
❌ घूमने-फिरने का तो सवाल ही नहीं।
❌ कोई सपोर्ट नहीं, कोई समझ नहीं।
❌ बस टारगेट, टारगेट, और धमकी।
❌ अपनी खुद की ग्रोथ के बारे में सोचना भी गुनाह।
❌ रिजाइन कर दो, तो बैंक के लिए तुम जैसे कभी थे ही नहीं
Morgan Stanley became a global investment bank not just because of capital and clients - but because it invests in people.
भारत की बैंकिंग सिस्टम टूट रही है, क्योंकि वो अपने ही लोगों को तोड़ रही है।
If you torture your employees with unrealistic targets, verbal abuse, and outdated systems - you destroy morale.
अगर आप लोगों को ही कुचल दोगे, तो कोई सिस्टम टिकेगा नहीं।
भारतीय बैंकिंग पॉलिसी मेकर्स से अपील है -
अगर आप सच में बैंकिंग सिस्टम को सुधारना चाहते हैं, तो शुरुआत उन लोगों से कीजिए, जो वहाँ दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
– कर्मचारियों को इज्जत दो।
– उनका वर्क-लाइफ बैलेंस बचाओ।
– मेंटल हेल्थ को सीरियसली लो।
– रोज-रोज के टारगेट और धमकियाँ बंद करो।
– उन्हें आगे बढ़ने का मौका दो।
बैंक सिर्फ अकाउंट खोलने से नहीं चलते।
बैंक चलते हैं इंसानों से।
उन्हें संभालो - इससे पहले कि देर हो जाए।
नितिन त्यागी
(एक पूर्व बैंककर्मी)
#IndianBanking #RRB #MorganStanley #Bankervoice
कुछ सिर इसलिए नहीं झुकते, क्योंकि उन्होंने दुनिया देखी नहीं – समझी है।
Pride isn’t arrogance. It’s awareness.
#Unshaken#UnionPower#WeUnderstandWeLead
जो समझते हैं, वो समझौता नहीं करते। यूनियन आपके आत्मसम्मान की आवाज़ है।
कुछ सिर इसलिए नहीं झुकते, क्योंकि उन्होंने दुनिया देखी नहीं – समझी है।
Pride isn’t arrogance. It’s awareness.
#Unshaken#UnionPower#WeUnderstandWeLead
जो समझते हैं, वो समझौता नहीं करते। यूनियन आपके आत्मसम्मान की आवाज़ है।
ये @TheLallantop के पत्तरकार, #ElectoralBondS पे लिखते है कि 👇 'अब SBI वाले लंच से वापिस आ जाएं तो शायद नाम भी सामने जाएगा'
राजनीतिक आकाओं पे एक लाइन न लिखने की औकात रखने वाले, सिर्फ बैंको पे तंज कसना जानते है। क्या इसे पत्रकारिता कहते है @saurabhtop
लानत है @Abhinav_Pan
Meet @navinjournalist,
Founding member of @Article19_India who have exp of some news channels as well.
But still dont knw that a branch manager dont have power to keep his branch close.
Have no clue that how bank holidays are announced.
This is how low journalism is these days.
प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक की रामपुर जिले की तहसील शाहबाद की शाखा कूप में शाखा परिसर के अंदर ही शाखा प्रबंधक पर हमला किया गया है। शाखा द्वारा ऋण खाता एनपीए होने पर बचत खाते पर रोक लगाई गई थी।जिससे गुस्साए युवक ने शाखा प्रबंधक पर हमला कर दिया।
आस पास की शाखाओं के सभी स्टाफ कोतवाली
Today, under the banner of #AIRRBEA, Gramin bank employees are protesting at Jantar Mantar,Delhi for their legitimate demands and for recruitment on more than 30,000 vacant posts in rural banks.
https://t.co/mlg79y0oBu
#Recruitment
Our @pupgboa association is doing every possible efforts for getting strictest action against the culprits.
The incident of attacks on bankers are continuously increasing. After all, bankers are only trying to recover public money from defaulters.
Its peak time to protect the bankers. Government should take steps towards enacting #BankersProtectionAct
@DFS_India@FinMinIndia@CMOfficeUP@dgpup@gondapolice