राहुल गांधी को मनाने की मंत्री जितेंद्र सिंह की पहली कोशिश नाकाम।
मेरी इंट्यूशन कह रही है कि:- जब तक जंतर मंतर का आंदोलन नहीं ख़त्म होगा तब तक राहुल गांधी भी नहीं हटेंगे…..
कांग्रेस जंतर-मंतर नहीं जाएगी। फिर कह रहा हूँ कांग्रेस ने जंतर-मंतर के प्रदर्शन को डिकोड कर लिया है
आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी। आकांक्षा के पिता किसान हैं। बेटी के डॉक्टर बनने के सपने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर ₹3 लाख का कर्ज़ लिया। और नागपुर में खुद कुक की नौकरी कर ली, ताकि बेटी वहाँ coaching कर सके।
एक पिता ने जो कर सकता था, सब किया।
फिर NEET पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द हुई। उस अनिश्चितता में आकांक्षा हमें छोड़ कर चली गई।
आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं - मोदी जी की एक भ्रष्ट, टूटी हुई व्यवस्था की देन है।
और धर्मेंद्र प्रधान जी? आज भी कुर्सी पर हैं।
फिर वही कमेटी। वही ट्रांसफर। वही जाँच। न सुधार, न न्याय।
मोदी जी, कुर्सी स्थायी नहीं होती - आती-जाती रहती है। लेकिन आपने 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस हद तक बर्बाद किया है, उसकी कीमत भारत की एक पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है।
@vikasbha पत्रकार महोदय आप तो मध्यप्रदेश से है कृपा मंत्री जी से पूछे स्वास्थ्य मंत्री रहते क्या अमूल चूल परिवर्तन किया @brajeshpathakup जी ने उत्तर प्रदेश सरकार में शिवाय हर हफ्ते दिल्ली दरबार में योगी मंत्रिमंडल की खबर देने की जासूसी करते?
@myogioffice योगी जी आप या तो स्वयं नहीं आना चाहते २०२७ में या तो आपको आने नहीं देना चाहते केंद्र सरकार।
इतनी निकृष्ठ दर्जे के ऊर्जा मंत्री @aksharmaBharat है उत्तरप्रदेश सरकार के जनता बार बार शिकायत करने के बाद भी भीषण गर्मी में भी विद्युत आपूर्ति नगण्य है.
ले डूबेंगे ये बाबू!
सोमनाथ एक्सप्रेस : पैंट्री के लिए झगड़ा क्यों?
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वेरावल से जबलपुर (करीब 1400 किमी) का 28 घंटों का ट्रेन में सफ़र पिछले दिनों किया था. लंबी यात्रा में जब भी भूख लगी या चाय-कॉफ़ी की तलब हुई, ज़ेहन में प्रश्न आया कि #SomnathExpress में पैंट्री क्यों नहीं है. काफ़ी खोजबीन के बाद पता चला कि ट्रेन में शॉर्ट या अस्थाई पैंट्री है, जो विभिन्न स्टेशनों से खाने का सामान चढ़ाती है और इसमें गुजरात और मध्यप्रदेश के संबंधित वेंडर्स में न केवल झगड़ा है बल्कि वो इतने बाहुबली हैं कि लंबी दूरी की इस ट्रेन में पैंट्री लगने नहीं दे रहे. सत्यता जो भी हो लेकिन पैंट्री के अभाव में यात्रा एक चाय तक के लिए तरस जाते हैं.
वैसे भी इस ट्रेन की रफ़्तार बढ़ाने की ज़रूरत है. 1400 किमी से कुछ कम की दूरी तय करने में इस ट्रेन को 28 घंटे लगते हैं, अर्थात् औसत रफ़्तार हुई 50 किमी घंटा, जो कि किसी एक्सप्रेस ट्रेन की रफ़्तार नहीं कही जा सकती. हाँ, ट्रेन की ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस बेहतरीन है, जिसके कारण ट्रेन में गंदगी का अहसास नहीं होता, पर स्थायी पैंट्री लगाना और रफ़्तार में वृद्धि बेहद जरूरी है.
@RailMinIndia@wc_railway@Rail_Minister@RailwaySeva@WesternRly@Central_Railway@RAIL@PMOIndia@HMOIndia@mpashishdubey
Goa you seriously need an upgrade, damn upgrade when it comes to transport, most taxis charge exorbitant a 5 km ride and you end up paying nowhere less than ₹500.
No Ola and Uber, even @GOAMILES1 is pathetic, tried booking multiple times but not a single time could find a cab.
@DrPramodPSawant I wondered why people complained so much especially tourists, but now I realised how bad the state of affairs is in terms of public transport.
@narendramodi जी १२ साल सत्ता में रहते प्रधानमंत्री को ऐसी खबरों के लिए खंडन करना पड़ता है तो धिक्कार है सूचना प्रसारण मंत्रालय को बर्खास्त करो।
साथ में धर्मेंद्र प्रदान करो @dpradhanbjp को ये ले डूबेंगे
@upadhyayabhii आप तकरीबन साल भर से लगे हो रोज मुख्यमंत्री बदलेगा ये होगा वो होगा
यहां से हवा आ रही वहा से हिमपात गिरेगा!
भाई कुछ नहीं हो रहा भाजपा नेतृत्व बोल दिया है योगी के नेतृत्व में २०२७ का चुनाव होगा ही
तो आप "डिप्टी" ड्यूटी छोड़ दो नहीं तो पत्रकार की जगह कुछ और लगने लगे हो।
@TRPCHENNAI त्रिपुरारी भाई अनशन से कुछ नहीं होगा।
केस लग गया है तो अब लड़ो और अदालत से केस निरस्त करवा के धनाढ्यों को जवाब दो।
आपके साथ सच और जनता की ताकत है
मेरा नाम अनुराधा तिवारी है ।
मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव के ब्राह्मण परिवार से आती हूँ। बचपन से हमेशा यही सुनने को मिला - “तुम ब्राह्मण हो, तुम्हारे पास तो सब कुछ होगा”, जबकि हमारी वास्तविकता संघर्ष और सीमित संसाधनों से भरी थी।
बिना किसी Reservation या govt scholarship के मैंने पढ़ाई की, सरकारी कॉलेज से इंजीनियरिंग की, खुद का startup खड़ा किया और विदेश में काम किया। TEDx speaker रही और कई सम्मान प्राप्त किए।
एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में मैंने हमेशा उन मुद्दों पर आवाज़ उठाई जो आम लोगों को प्रभावित करते हैं - poor infrastructure, food adulteration, freebies, caste-based politics ब्राह्मणों व सवर्णों के खिलाफ बढ़ती नफरत। मैंने कभी किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बोला।
लेकिन समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय अब मेरे 3-4 साल पुराने tweets खंगाले जा रहे हैं। @NCSC_GoI और Delhi Police द्वारा SC/ST Act के तहत कार्रवाई की कोशिश यह दिखाती है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं।
क्या आज अपने विचार रखना भी अपराध है?
क्या आज के भारत में सवर्ण होना ही अपराध बन चुका है?