@PiyushGoyal should tell what steps the @narendramodi govt will take. Looking at the situation that is emerging after tariffs and penalties, it seems that America will now ask international financial institutions to stop giving loans to India, then!
गडकरी जी सबूत मांग रहे थे? यह रहा जीता-जागता सबूत!
इंजीनियर जनक भारद्वाज ने फ्यूल पंप को खोलकर E 20 का असली सच सामने रख दिया है।
वीडियो में साफ है कि E20 पेट्रोल गाड़ियों के लिए एक 'धीमे जहर' की तरह काम कर रहा है।
इसके अंदर का इथेनॉल गाड़ी के फ्यूल पंप में मौजूद सिंथेटिक रबर के हिस्सों और धातुओं के साथ ऐसा केमिकल रिएक्शन करता है कि अंदर ही अंदर भयंकर जंग (Corrosion) लग जाती है।
यह नुकसान रातों-रात नहीं दिखता। आप रोज़ गाड़ी में E20 पेट्रोल डलवाते हैं, और वह चुपचाप अंदर ही अंदर आपके फ्यूल सिस्टम को खोखला करता रहता है।
फिर एक दिन अचानक आपकी गाड़ी का फ्यूल पंप पूरी तरह दम तोड़ देता है।
#EthonolScam #NarendraModi
संदीप चौधरी और गरिमा सिंह की डिबेट इसलिए निष्पक्ष मानी जाती है कि वे सभी पेनलिस्ट को बराबर समय देते हैं । आमतौर पर ये दोनों एंकर हर पेनलिस्ट को एक बार ही बुलवाते हैं लेकिन पूरी बात कहने का मौका देते हैं ।
न्यूज़ 24 में सबसे बड़ा सवाल करने आए श्री अखिलेश आनंद दो बार बीजेपी के प्रवक्ता को बुलवाकर शो के करीब 25 मिनट बाद मेरे पास आए । मैंने अपनी बात कही । उसके जवाब में फिर भाजपा प्रवक्ता को बुलवाया । उन्होंने कुछ आपत्तिजनक बात कही तो मैंने जवाब के लिए 10 सेकेंड मांगे । मैं बार-बार उंगली उठाता रहा और चीखता रहा लेकिन अखिलेश आनंद जी ने समय नहीं दिया ।
इस पर मैंने शो का बहिष्कार कर दिया । गेस्ट कोऑर्डिनेटर हिमांशु जी ने समझा बुझाकर पुनः मुझे बैठाया । उसके बाद जो हुआ आप खुद सुन लीजिए ।
कल एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में MVA सरकार पर आरोप लगाया की सिद्धिविनायक दान पेटी की चोरी हुई थी
तब शिंदे हमारे साथ थे
क्या शिंदे को भी हिस्सा मिलता था ??
उसके बाद ढाई साल तक मुख्यमंत्री रहे
डेढ़ साल से उपमुख्यमंत्री है
कैसे हिंदू हैं
5 साल बाद भी न्याय नहीं कर पाए
सिद्धिविनायक के चोरों को जेल नहीं पहुंचा पाए
उसमें से अधिकतर है
हिस्सेदारों को अपने साथ ले गए
वाया सूरत गुवाहाटी टू मुंबई
धोखे वाले सोके सरकार चलाते हैं क्या
गणपति बप्पा को राजनीति के लिए
इस्तेमाल करते हैं क्या??
E20 पेट्रोल को यदि सरकार वापस लेती है, तो बैंकों के लाखों करोड़ रुपये डूब जाएंगे।
इथेनॉल को सिस्टम और सप्लाई चैन की मजबूरी बनाने के लिए बहुत ही ऊंची तरकीब अपनाई गई है।
इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों ने लाखों करोड़ रुपये का मोटा लोन बैंकों से उठाया है।
अब अगर इथेनॉल की बिक्री घटाई जाएगी, तो इसे बनाने वाली कंपनियां घाटे में चली जाएंगी और बैंक फंस जाएंगे।
अब इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों के मुनाफे और बैंकों को बचाने के लिए जनता को पीसा जाएगा। वाह मोदी जी वाह!
#E20 #Ethanol
ये ओवरब्रिज 858 करोड़ रुपए में बना है!
लेकिन क्या आप ये मानेंगे कि 858 करोड़ से बने इस ओवरब्रिज का एक ही बारिश में आंचा-पांचा खुल गया.
ग्रेटर नोएडा के इस रेलवे ओवरब्रिज को 15 दिन पहले ही लोगों के लिए खोला गया था👇
राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO बनने की पात्रता पढ़िए…
नृपेन्द्र मिश्रा को ध्यान में रखकर ही specifications तैयार किया गया है…
इतना नाटक करने की क्या ज़रूरत है, बना दो उनको…जनता तो वैसे भी बेवकूफ है जो आप लोगों की बातों में आकर करोड़ों ₹ चंदा के नाम पर लुटा चुकी है !!
15 दिन हो गय हैं..मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही है..इतना दर्द हो रहा है..इससे अच्छा तो मुझे Goली मार दो..!
राजस्थान के मुख्यमंत्री काफिला निकलने के दौरान पुलिस कर्मियों की दबंगई के कारण सड़क पर रेडी लगाकर मोमोज बेचने वाली रेशु गुप्ता गरम पानी से झुलस गई थी...!.
घटना के 15 दिन बाद उन्होंने वीडियो जारी कर दर्द भरी पुकार लगाई है..!
आरोप है कि -
न ही उन्हें बेहतर स्वस्थ्य सुविधा मिल रही है न ही किसी पर कोई कार्यवाही हुई है..पीड़िता ने रोते हुए दर्द बयां किया है सुनिए...👇👇
बीएचयू के प्रोफेसर ओमशंकर जी का ये लेख पढ़िये।
BJP-RSS-Modi दौर में लोकतांत्रिक गिरावट।
न्याय केवल अदालतों में दिया जाने वाला निर्णय नहीं होता, बल्कि लोकतंत्र, कानून-व्यवस्था और नागरिक भरोसे की बुनियाद होता है।
जब किसी देश में न्याय देर से मिलता है, पुलिस-प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता है, और संवैधानिक संस्थाएँ दबाव में दिखती हैं, तब जनता का असंतोष स्वाभाविक रूप से बढ़ता है।
भारत में यह संकट केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि आँकड़ों में भी दिखता है। राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (NJDG) के अनुसार देश की अदालतों में 5 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं; इनमें अधीनस्थ अदालतों में 4.4 करोड़ से अधिक, उच्च न्यायालयों में 60 लाख से अधिक और सर्वोच्च न्यायालय में लगभग 80 हजार मामले शामिल हैं।
इतनी भारी लंबितता का अर्थ है कि न्याय कई नागरिकों के लिए समय पर मिलने वाला अधिकार नहीं, बल्कि वर्षों तक टलता हुआ संघर्ष बन गया है।
कानून-व्यवस्था की स्थिति भी इसी असंतोष को बढ़ाती है।
NCRB की ‘Crime in India 2022’ रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ 4.45 लाख से अधिक अपराध दर्ज हुए; दलितों और आदिवासियों के खिलाफ भी हजारों मामले दर्ज किए गए।
साइबर अपराध, आर्थिक अपराध, हिंसा और सामाजिक तनाव के बढ़ते आँकड़े यह संकेत देते हैं कि सुरक्षा और न्याय दोनों मोर्चों पर राज्य की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
जब आम नागरिक को लगता है कि सत्ता के निकट लोगों के लिए नियम अलग हैं और कमजोर वर्गों के लिए अलग, तब लोकतंत्र का नैतिक आधार कमजोर होने लगता है।
इसी पृष्ठभूमि में BJP-RSS-Modi दौर में लोकतांत्रिक गिरावट पर बहस तेज हुई है।
V-Dem की रिपोर्टों में भारत को ‘electoral autocracy’ यानी ‘चुनावी अधिनायकवाद’ की श्रेणी में रखा गया है, Freedom House ने भारत को ‘Partly Free’ यानी ‘आंशिक रूप से स्वतंत्र’ माना है, और Reporters Without Borders (RSF) के 2024 प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशों में 159वें स्थान पर रहा।
ये आँकड़े बताते हैं कि केवल चुनाव होना ही लोकतंत्र की पर्याप्त गारंटी नहीं है; यदि विपक्ष पर दबाव, मीडिया पर अंकुश, संस्थाओं का राजनीतिकरण और संवैधानिक संतुलन का क्षरण बढ़े, तो व्यवस्था चुनावी होते हुए भी व्यवहार में अधिक केंद्रीकृत और अधिनायकवादी दिखने लगती है।
आलोचकों के अनुसार यही वह दौर है जिसमें संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर ‘संवैधानिक आवरण में निर्वाचित अधिनायकवाद’ जैसी प्रवृत्तियाँ उभरती हैं।
ऐसे माहौल में न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
हाल के वर्षों में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के प्रति कुछ वकीलों द्वारा असम्मानजनक भाषा, अपमानजनक संबोधन और खुलेआम चुनौतीपूर्ण व्यवहार ने गंभीर चिंता पैदा की है।
न्यायाधीशों को परंपरागत सम्मानसूचक संबोधनों के स्थान पर तिरस्कारपूर्ण शब्दों से संबोधित करना, या न्याय देने वाली संस्था को अपमानित करने वाली भाषा का प्रयोग करना, केवल शिष्टाचार का उल्लंघन नहीं बल्कि संस्थागत विश्वास पर हमला है।
आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन आलोचना और अपमान, असहमति और अवमानना, जवाबदेही और अराजकता के बीच स्पष्ट सीमा होनी चाहिए।
यदि न्याय समय पर, पारदर्शी और समान रूप से उपलब्ध हो; यदि कानून-व्यवस्था निष्पक्ष हो; और यदि संवैधानिक संस्थाएँ राजनीतिक दबाव से मुक्त रहें, तभी जनता का भरोसा लौटेगा और लोकतंत्र वास्तव में मजबूत होगा।
@omnamrata
सूत्र-
चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव तीनों को एक ही संदेश है।
चुप रखने का आदेश है।
कुछ दिनों बाद सब रफ़ा-दफ़ा हो जाएगा।
बालकनी के रास्ते से घर में फिर दबदबा हो जाएगा!!
“पुरी जी पर पूरी बात फिर कभी करेंगे लेकिन यहां बात कर रहे हैं गडकरी जी की।
दरअसल मोदी सरकार के किसी मंत्री ने सबसे तेज़ गति से अपनी विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा गंवायी है तो वे @nitin_gadkari हैं। एक समय वो भी था जब @narendramodi सरकार की धुर आलोचना करने वाले भी गडकरी की प्रशंसा करते थे। इनमें कई विरोधी दल के नेता भी शामिल थे।
लेकिन लगता है कि प्रशंसा पाकर ही गडकरी जी अहंकार से भर गए हैं... जनभावना से भटक गए हैं।”
https://t.co/B6TEtKgZbg
गडकरी का एक और हास्यास्पद बयान सामने आ रहा है
वे कह रहे हैं कि "कोई प्रिंट वाला नहीं छाप रहा, कोई टीवी वाला नहीं दिखा रहा, बस सोशल मीडिया इंफ़्लुएंसर्स मेरे ख़िलाफ़ रील बना रहे हैं..."
माननीय @nitin_gadkari जी, अधिकतर अख़बार और टीवी मीडिया तो गोदी मीडिया है, कैसे आपके ख़िलाफ़ लिखेगा बोलेगा? ये सोशल मीडिया वाले न होते तो आपकी इथेनॉल नीति और बहक गई होती... इसलिए प्लीज़ तोल मोल के बोलिए... सविनय निवेदन है।
पिछले साल नवंबर में 9 साल की बच्ची अमायरा मीणा ने अपने स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी.
अब उसके क्लास रूम का CCTV सामने आया है, जिसमें कुछ लड़के उसे परेशान करते दिख रहे हैं.
डिजिटल स्लेट पर अमायरा को कुछ दिखाया, जिससे वो परेशान हो गई.
अमायरा ने टीचर से कई बार शिकायत की, लेकिन टीचर ने खास ध्यान नहीं दिया. आखिर में उसे ही डांट भी दिया.
अमायरा इन सब से इतना परेशान हुई कि क्लास छोड़कर चली गई. टीचर को कोई फर्क नहीं पड़ा.
वो तमाम फ्लोर चढ़ती गई, परेशान रही, किसी ने पूछा तक नहीं और आखिर में उसने चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी.
बच्ची की मौत के बाद नीरजा मोदी स्कूल की बदमाशी देखिए - मीडिया में सिर्फ उतना वीडियो जारी किया, जिसमें अमायरा कूदते हुए दिख रही है.
ये प्रचारित करवा दिया कि बच्ची डिप्रेशन में थी, इसलिए ये कदम उठाया.
अब ये सच्चाई सामने आई है कि स्कूल कितना लापरवाह है, जो बच्चों का ख्याल तक नहीं रख पाता.
ऊपर से मक्कारी देखिए कि आधा अधूरा वीडियो मीडिया में रिलीज करके खुद की इमेज बचाने में लगा रहा.
विकास को सड़क निर्माण से जोड़ कर देखने की प्रवृति भारत जैसे देश के लिए विनाश का कारण बनती जा रही है। जरूरत से ज्यादा सड़क बनने से पूरा इकोसिस्टम चरमराता जा रहा है। उदाहरण के लिए अपने गृह जिले पूर्वी चंपारण को ही सामने रखता हूं। यहां पहले से एक फोर लेन सड़क (NH 27, ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) गुजरती है जो आमतौर पर खाली ही रहती है। अब बिना मतलब के इस सड़क के समानांतर 2 एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है जिसकी कोई जरूरत नहीं है। एक रामजानकी पथ के नाम से एक एक्सप्रेसवे ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के 10-12 किलोमीटर दक्षिण से और दूसरा एक्सप्रेसवे इसके 30 किलोमीटर उत्तर से गोरखपुर सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के नाम से बनाया जा रहा है। अब कोई बुद्धिमान व्यक्ति हमें ये बताए कि 40 किलोमीटर के दायरे में 3 समानांतर सड़के विकास है या विनाश? कायदे से तो 100 किलोमीटर के दायरे में 2 समानांतर एक्सप्रेसवे/फोर लेन कहीं भी नहीं बनना चाहिए। गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर (NH 27) की फोर लेन सड़क जा ही रही है फिर अलग से एक्सप्रेसवे की क्या जरूरत है? कुछ बेहतर करना था तो इसी फोरलेन को सिक्स लेन करा देते @nitin_gadkari जी। रही बात राम जानकी पथ कि तो जब वही ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर अयोध्या इलाके से आ ही रही है तो इसी में पिपराकोठी से जनकपुर तक फोर लेन की नई सड़क बना देते। क्या जरूरत थी 100 किलोमीटर के बदले 450 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे बनाने की? ठीक इसी तरह बिना मतलब का पटना बेतिया फोरलेन के प्रोजेक्ट पर जोर दिया जा रहा है जिसकी कोई जरूरत नहीं है क्योंकि उस रूट पर उतनी गाड़ियां कभी नहीं चलने वाली हैं। ये सब प्रोजेक्ट सिर्फ और सिर्फ जनता के पैसे और उपजाऊ जमीनों की बर्बादी है। पता नहीं PM @narendramodi और उनका @PMOIndia किस तरह से बिना सोचे समझे ऐसे फालतू के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे देता है! इतनी सड़कों के कारण पानी का स्वाभाविक बहाव भी प्रभावित होगा जिससे एक तरफ सूखा और दूसरी तरफ जलजमाव के हालात बनने से पूरा कृषि सेक्टर भी चरमरा जाएगा। हकीकत यह है कि जितना पैसा नए एक्सप्रेसवे/हाईवे में फालतू खर्च किया जा रहा है उसका 20% भी पुराने फोरलेन हाईवे पर खर्च कर दिया जाए तो ज्यादा बेहतर परिणाम सामने आएंगे। पर ये दौर विकास की परिभाषा को ही बदल देने का अमृतकाल है। अतः इसी को विकास समझिए और विश्वगुरु बनने की तैयारी कीजिए।
Breaking News 🔥
E20 पेट्रोल से मोदी सरकार पीछे हटने लगी है...
आप जिद से परेशान कर सकते हो, लेकिन अंजाम बुरा भी भुगतना पड़ जाता है।
रात-दिन गाड़ियों के खराब होने की शिकायत इतनी ज्यादा है कि जनता ने सरकार के कानों को फोड़ दिया है।
बिना किसी तैयारी के नितिन गडकरी ने यह थोपा था।
जबकि यह गडकरी के मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र का मामला था ही नहीं।
अब बड़ा हंगामा हुआ तो पेट्रोलियम मंत्री की नींद टूटी।
इतनी जल्दबाजी की गई कि सरकार दो सालों में इथेनोल को ही फॉसिल फ्यूल का विकल्प बना देना चाहती थी।
पहले मैकेनिकों, फिर ऑटोमोबाइल कंपनियों के हाथ खड़े करते ही सरकार के कानों पर जूँ रेंगी।
यह आइडिया अच्छा हो सकता था अगर अच्छा होमवर्क किया होता, मगर आत्ममुग्धता से पीड़ित मोदी सरकार की डिक्शनरी में यह शब्द है ही नहीं।
#E20Fuel #FuelCrisis #NitinGadkari
इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने मंदिर निर्माण सामग्री और 40% कार्यों में कमीशनखोरी का आरोप डॉ. अनिल मिश्रा पर लगाया था। इसकी शिकायत चंपत राय से की थी। शिकायत के बाद इन्हें पहले चढ़ावा राशि की गणना के लिए लगाया गया। फिर धमकी देकर अयोध्या से ही भगा दिया गया। एसआईटी ने दीनानाथ वर्मा का बयान तक नहीं लिया।
ये तो ज़बरदस्त ख़बर है! इस रिपोर्ट के मुताबिक़ @nitin_gadkari ने अपनी यात्रा के लिए सड़क ठीक करवा ली… या उनके नीचे काम करने वाले ठेकेदारों ने ठीक कर के दे दी? और गडकरी सैकड़ों किलोमीटर नाप लिए लेकिन दूसरी तरफ़ वाली सड़क पर नहीं झाँका? @narendramodi जी पढ़ा आपने?
मध्य प्रदेश भाजपा में पहले कैलाश विजयवर्गीय का बाग़ी बयान और फिर नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का दतिया में टिकट न मिलने पर बवाल बताता है कि बस सत्ता का गोंद है जो चिपका के रखा है, वरना भीतरी घमासान जम के है।
शिवराज में चुनाव जिताने की क्षमता थी तो सब ठीक था, मोहन यादव केंद्र के थोपे नेता हैं। उनके ख़िलाफ़ ज़मीन घोटाले का मामला भी भीतर से लीक हुआ बताते हैं।
कल एक न्यूज़ चैनल पर बृजलाल इंटरव्यू दे रहे थे! उनका परिचय उत्तर प्रदेश के एक्स डीजीपी लिखा हुआ था! इंटरव्यू में वह समाजवादी पार्टी के समय के बारे में बोले जा रहे थे! हिन्दू मुस्लिम किये जा रहे थे! लेकिन उनके परिचय में कहीं एक बार नहीं लिखा गया था की वह एक्स डीजीपी थे लेकिन मौजूदा में बीजेपी के राज्यसभा सांसद हैं!
इसी तरह की हरकत से टीवी न्यूज़ वाले सुनते हैं लेकिन अब वे इतने आगे बढ़ चुके हैं की वहां से वे खुद भी वापसी के लिए तैयार नहीं हैं!
पंजाब में जूतम पैजार, दतिया में आंतरिक लोकतंत्र दिखा रहा दलाल मीडिया आपको नहीं बताएगा कि नरोत्तम मिश्रा का टिकट क्यों काटा गया? मैं बताता हूं।
1-नरोत्तम मिश्रा का जीतना तय था। जीतते तो पूर्व के यह सुपर सीएम मोहन यादव पर भारी पड़ते। उनका जीना दूभर करते।
2-पार्टी हाईकमान जानता था कि कैलाश विजयवर्गीय पहले से ही मोहन यादव पर हमलवार हैं। भाजपा दूसरा विरोधी नहीं पैदा करना चाहती थीं।
3-नरोत्तम का टिकट काटकर मोहन यादव को कांटीन्यू रखकर यूपी में संदेश दिया गया है कि भाजपा पिछड़ों के साथ है।
4-मोहन यादव और शिवराज को अलग अलग कहा गया है कि आपकी वजह से आपके सम्मान को देखते हुए नरोत्तम को दक्षिण दिशा में रखा गया।
5- अन्य राज्यों में भी यह संदेश दिया गया कि जो नबर दो चाहेगा वही होगा। उससे इतर कुछ नहीं। नंबर दो ही बीजेपी के भीतर का लोकतंत्र है।