केशव मौर्य सिर्फ़ मदरसों पर हमला कर सकते हैं, क्योंकि उनकी कुर्सी दरअसल एक स्टूल है।
जिन्हें अंग्रेज़ों से मोहब्बत हो, उन्हें मदरसे कैसे पसंद आएँगे? मदरसे अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ साज़िशों और आज़ादी की जद्दोजहद के मरकज़ थे। उन्होंने बेशुमार मुजाहिदीन-ए-आज़ादी पैदा किए, जबकि सावरकर अंग्रेज़ों को माफ़ीनामे लिख रहे थे।
आज़ाद भारत का पहला दहशतगर्द गोडसे किसी मदरसे का तालीब-ए-इल्म नहीं था। लेकिन भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद मदरसे में पढ़े थे। मुंशी प्रेमचंद और राजा राम मोहन राय ने भी मदरसे में तालीम हासिल की थी।
दस्तूर का आर्टिकल 30 हर अक़ल्लियती बिरादरी को अपने तालीमी इदारे क़ायम करने और चलाने का हक़ देता है। ये बेहद शर्मनाक है कि एक दस्तूरी ओहदे पर बैठा शख़्स ऐसी ज़हरीली ज़बान इस्तेमाल करे।
मगर जब कुर्सियाँ कम हों, तो स्टूल वालों को अपनी सियासी अहमियत बनाए रखने के लिए ज़हर उगलना ही पड़ता है।
@ayodhya_police@dgpup@adgzonelucknow@Uppolice@igrangeayodhya सत्यापन के नाम पर ₹800 की मांग की गई, जिसमें ₹700 देने के बाद मात्र ₹100 कम होने पर आपत्ति लगाकर अनावश्यक रूप से लंबी और परेशान करने वाली प्रक्रिया में डाल दिया गया अयोध्या पुलिस से अनुरोध है कि थाना पूरा कलंदर को निष्पक्ष जांच कर सही पुलिस सत्यापन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दें
इबादत
सादिक
अब्दुल्ला
साहेब
फैजल
आजम
शब्बीर
इमरान
मुश्ताक और राजिक .
इनका नाम ही इनकी पहचान है और इनकी पहचान ही आज के दौर में इनकी सबसे बड़ी मुसीबत है . इस सबको एमपी पुलिस ने दंगा , आगजनी , मारपीट , घर में जबरन घुसने और विस्फोटक रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था , मध्यप्रदेश पुलिस के मुताबिक ये सारे दंगाई थे लेकिन मध्यप्रदेश की ही अदालत ने इन्हें हिंसा और दंगा के आरोपों से बरी कर दिया है . अदालत ने अपने फैसले में ये भी पूछा है कि पुलिस ने आखिर इन 11 लोगों को किस आधार पर दंगे का आरोपी बनाया ? आज इंडियन एक्सप्रेस ने विस्तार से पूरी रिपोर्ट छापी है .
कोर्ट का ये फैसला एमपी सरकार के मुंह पर तो तमाचा है ही इस बात का भी सबूत है कि कैसे इस देश में मुसलमानों को दंगाई घोषित करके सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है .
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर
After a youth's murder in Saharanpur, UP, Family members, along with local residents, staged a highway protest by placing the teenager's body on the road, demanding the arrest of all the accused. The protest turned violent and police resorted to a lathi charge and beat women protesters.
20 जुलाई की सुबह कॉकरोच जनता पार्टी ने एक Video जारी करके सवाल उठाये कि पत्थर से भरा ट्रक जंतर मंतर के पास क्या कर रहा है? आशंका जताई कि पुलिस खुद पथराव करके छात्रों को फंसा सकती है।
ट्रक कहां से आया? न्यूज़लॉन्ड्री रिपोर्टर अवधेश कुमार (@ImAvdheshkumar) ने इसकी पड़ताल की। पता चला कि 16 जुलाई को ट्रक और मारुति ईको वैन में टक्कर हुई थी। जिसके बाद दोनों वाहन संसद मार्ग थाने के पास खड़े कर दिए गए थे।
(यह घटना पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है)
शुरुआत में पुलिस ने न्यूज़लॉन्ड्री रिपोर्टर को बताया कि यह वैन प्रदर्शनकारियों ने तोड़ी है। जब रिपोर्टर ने प्रूफ सहित एक्सीडेंट वाली बात बताई तो पुलिस चुप हो गई।
इसके बाद पुलिस ने ट्रक की लोकेशन बदल दी। एक दिन यही ट्रक यूथ कांग्रेस दफ्तर के बाहर खड़ा मिला। सवाल यह है कि पुलिस बार बार पत्थर भरे ट्रक की लोकेशन क्यों बदल रही थी? और क्यों ट्रक के बारे में क्लियर नहीं बता रही थी? हालांकि न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद दिल्ली पुलिस ने इसका खंडन कर दिया है।
A BJP MP @rameshbidhuri calling Muslim MP "Bharwa (pimp), "Katwa" (circumcised), "Mullah" "Atankwadi" (Terrorist) & "Ugrawadi" (militant) ON RECORD in Lok Sabha while RaviShankar Prasad & Harsh Vardhan sitting next to him are laughing.