अखिलेश जी ये हमले भी संविधान के प्रति आपकी नफ़रत का परिणाम थे. ये तस्वीरे आज भी PDA के ज़ेहन में ज़िंदा है की कैसे 2012 में सपा सरकार आते ही सपा के लोगों ने बाबासाहेब अंबेडकर जी, मान्यवर काशीराम जी और बहन मायावती जी की मूर्तिया और स्थल तुड़वाये थे।आज जब सत्ता से बाहर है तो दलित और संविधान याद आ रहा है। पहले इसके लिए सार्वजनिक माफ़ी माँगिए. फिर बाद में नूराकुश्ती खेलिएगा।
अयोध्या : बीकापुर में बसपा का प्रबुद्ध संवाद आयोजन
➡️प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल रहे मुख्य अतिथि
➡️विश्वनाथ पाल ने चंद्रशेखर आजाद पर साधा निशाना
➡️पीडीए को विश्वनाथ पाल ने बताया ‘धोखा’
➡️2027 में बसपा सरकार बनाने का दावा किया
#Ayodhya#BSP#VishwanathPal#UPPolitics@bspindia
Ayodhya, Uttar Pradesh: The Bahujan Samaj Party (BSP) organised a Prabuddh Varg Samvad programme in the Bikapur Assembly constituency
BSP State President Vishwanath Pal says, "It is certain that across Uttar Pradesh, the Bahujan Samaj Party is currently ahead in finalising its candidates. And it is certain that when the elections are held, people from all sections of society will stand with the Bahujan Samaj Party..."
1. यूपीआई डिजिटल लेनदेन को पहले ख़ूब बढ़ावा देने के बाद अब सरकार द्वारा उस लेनदेन पर शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था लोगों की नज़र में प्रथमदृष्टया मुनाफाख़ोरी के पूंजीवादी रवैये के तहत जनता से दोनों हाथों से टैक्स वसूली है, जिससे जनता में बेचैनी व आक्रोश स्वाभाविक है।
2. वैसे तो जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की इस व्यवस्था को ’कर’ मानने को तैयार नहीं है, किन्तु दिनांक 15 अक्तूबर से लागू हाने वाली इस व्यवस्था को चाहे जो भी नाम दिया जाये जेब तो अन्ततः आमजनता की ही कटेगी, उसका ही ख़र्च बढ़ेगा।
3. साथ ही, यह भी सर्वविदित है कि देश की बहुसंख्यक जनता अपार ग़रीबी व ज़बरदस्त महंगाई आदि की मार से त्रस्त है व उनके बच्चे अशिक्षा, बेरोज़गारी व अव्यवस्था आदि से पीड़ित हैं, ऐसे में सरकार की नीति व कार्ययोजना लाभ कमाने वाली व्यावसायिक कम व कल्याणकारी ज़्यादा हो तो यह उचित होगा। जनता की तंगी, दुख-तकलीफ की अगर सरकार चिन्ता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा?
4. इसके साथ ही, यूपी सरकार द्वारा करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के कीरब 14,500 स्कूलों को ’स्मार्ट स्कूल’ बनाने की घोषणा अच्छी बात है, लेकिन बच्चों को कथित ’स्मार्ट पढ़ाई’ से पहले उन्हें बुनियादी शिक्षा आदि की ज़रूरतें अर्थात स्कूली बच्चों के सर पर छत, उनके लिये बेंच, कुर्सी, किताब, शौचालय, मैदान, साफ-सफाई आदि की सही व्यवस्था पूरी की जायें और यह सब प्रति स्कूल क़रीब दो लाख रुपये में क्या संभव हो पायेगा, इस पर भी सरकार सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर विचार करे।
1. बहुचर्चित सामाजिक न्याय की ज़रूरत व माँग भी यही है कि यूपी सरकार माननीय न्यायालय में यदि इस बात की पुरज़ोर पैरवी करती कि एससी समाज के हित व कल्याण हेतु ’स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान’ के धन से ज़िला सहारनपुर, अम्बेडकरनगर, क़न्नौज व जालौन में बनाये गये मेडिकल कालेजों में एससी वर्ग हेतु अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था 50 प्रतिशत के सामान्य आरक्षण से अलग है और इस व्यवस्था से स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान की भरपूर उपयोगिता साबित होती है, तो शायद माननीय कोर्ट इस पर ज़रूर सकारात्मक विचार करता और इस पर रोक नहीं लगाता।
2. किन्तु अब जबकि मा. हाईकोर्ट ने इस पर पाबन्दी लगा दी है और मेडिकल दाख़िला भी अब यहाँ इससे प्रभावित है, तो ऐसे में यूपी सरकार तुरन्त मा. सुप्रीम कोर्ट में आपेक्षित राहत के लिये अपील करे तो यह उचित होगा।
1. आज मेरा पुनः पार्टी के लोगों से यही कहना है कि मेरे ख़ुद के अनुभव को मद्देनज़र रखते हुये यदि इनको राजनीति में कामयाब होना है और समाज के लिए कुछ करना है तो उन्हें मेरी तरह अपने भाई-बहिनों व नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि के मोह से ऊपर उठकर अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करना है,
* इसीलिए बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी ने राजनीति में आने के बाद, फिर अपने सभी नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि को राजनीतिक लाभ देने से हमेशा दूर रखा है। उन्हें केवल निःस्वार्थ भावना से पार्टी संगठन में कार्य करने की ही इजाज़त दी है। इतना ही नहीं बल्कि इन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी, अपना ख़ुद का परिवार ना बनाकर, ’बहुजन समाज’ के हित व कल्याण के लिए ही समर्पित की है।
2. जिनसे प्रेरित होकर फिर मैंने भी उन्हीं के ही पदचिन्हों पर चलने का फैसला लिया और अपनी पूरी ज़िन्दगी ’बहुजन समाज’ के लिए समर्पित कर दी है।
* लेकिन मैं एक लड़की होने की वजह से फिर मजबूरी में मुझे अपने किसी ना किसी भाई-बहिन आदि को हमेशा अपने साथ रखना पड़ा है, जिसके तहत् ही मेरा छोटा भाई श्री आनन्द कुमार यह पिछले काफी वर्षों से मेरी सेवा में कार्यरत है।
3. और इनके विशेष आग्रह करने पर फिर इनके परिवार में से मुझे इनके बड़े बेटे श्री आकाश आनन्द को राजनीति में आगे करना पड़ा है।
* जिनकी शादी होने के बाद से अब श्री आकाश आनन्द का क़दम-क़दम पर ऐसा रवैया व गतिविधियाँ आदि रही हैं कि जिसकी वजह से अभी कुछ दिन पहले फिर से इनको पार्टी से अलग भी करना पड़ा है।
* अर्थात् अब वह अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह से फंस चुके हैं, जिसे अब पार्टी में वापिस लेना यह पार्टी के लिए बहुत बड़ा विश्वासघात ही होगा, जो मैं यह पार्टी विरोधी ग़लत कार्य कदापि नहीं कर सकती हूँ।
4. ऐसे में अब मैं श्री आनन्द कुमार के परिवार में से किसको पार्टी में आगे करूँ या ना करूँ, यह मेरे लिए पिछले कुछ समय से काफी दुविधा सी बनी हुई है, जिस पर विराम देते हुए अब मैंने हर पहलू पर काफी गम्भीरता से सोच-विचार करने के बाद यह फैसला लिया है कि इनके परिवार में से ऐसे किसी सदस्य को अब पार्टी में आगे किया जाये, जो आकाश के नक्शेकदम पर बिल्कुल भी ना चले।
5. और जहाँ तक आगे चलकर, इनकी बेटी की मदद लेने का सवाल है तो इनकी शादी होने के बाद, फिर इनका मामला भी यदि श्री आकाश आनन्द की तरह ही निकल गया तो यह भी पार्टी हित में सही नहीं होगा।
* ऐसी सम्भावना को भी ध्यान में रखकर अब पार्टी हित में यही उचित होगा कि श्री आकाश आनन्द व इनकी बहिन को भी अब पार्टी की कोई भी ज़िम्मेवारी देने से इन दोनों को एकदम दूर रखा जाये अर्थात् अब इनके इस फैसले में कोई भी फेरबदल नहीं किया जायेगा।
6. और अब इन दोनों के स्थान पर श्री आनन्द कुमार के परिवार में से केवल श्री ईशान आनन्द को ही, पार्टी में सम्मानजनक ज़िम्मेवारी देकर इनको आगे किया जायेगा, जिसका श्री आकाश आनन्द व इनकी बहिन की तरह कभी भी कोई चक्कर नहीं रहेगा। अभी तक ऐसा ही लग रहा है। आगे तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है
7. फिर भी यदि इन्होंने पार्टी विरोधी ऐसा कोई भी गम्भीर कृत्य किया तो फिर इनको भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा, लेकिन तब ऐसी स्थिति में श्री आनन्द कुमार के परिवार में से अन्य किसी भी सदस्य को पार्टी की कोई भी छोटी-बड़ी ज़िम्मेवारी नहीं दी जायेगी।
* बल्कि इसके स्थान पर, तब फिर पार्टी में ही कार्यरत दलित वर्ग के किसी भी एक मिशनरी व वफादार कार्यकर्ता को ही आगे कर दिया जायेगा। इसलिए देश व जनहित के ज़रूरी मुद्दों के साथ-साथ इस ख़ास मुद्दे को भी लेकर अब दिनांक 23 सितम्बर की बी.एस.पी. की अत्यन्त ज़रूरी ऑल-इण्डिया की बैठक बुलाई गई है ताकि फिर पार्टी के लोग अपनी पार्टी के कार्यों में पूरे जी-जान से जुट जायें।
8. अन्त में अब मैं यही कहना चाहती हूँ कि ख़ासकर परिवार को लेकर पार्टी व मूवमेन्ट के हित में मैंने यह फैसला मान्यवर श्री कांशीराम जी से प्रेरित होकर तथा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी के भी लिखे गये एक पत्र से प्रभावित होकर लिया है, जिस पत्र का सारांश इस प्रकार से है:
9. बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने, दिनांक 23 फरवरी सन् 1956 को 26 अलीपुर रोड, सिविल लाइन्स, नई दिल्ली से बम्बई में अपने पुत्र श्री यशवन्त बी. अम्बेडकर को पत्र में लिखा है कि,
* मुझे तम्हें सूचित करना है कि श्री उपशम के कई पत्राचार मिले हैं कि तुम उन्हें बौद्ध भूषण प्रिन्टिंग प्रेस के एकाउण्टेन्ट व कैशियर के रूप में उनकी ड्यूटी नहीं करने दे रहे हो।
* तुम्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करके तुम प्रेस को अपने कब्जे में ले लोगे। मैं तुम्हें आगाह कर रहा हूँ कि प्रेस पब्लिक प्रापर्टी है, ना तुम्हारा है और ना मेरा, और एक पब्लिक अकाउण्ट में किसी भी प्रकार की अनियमितता की अनुमति देना संभव नहीं है।
* तुम्हारा आचरण उचित नहीं रहा है...अगर तुमने मेरी अन्तिम व फाइनल निर्देश की परवाह नहीं कि तो फिर मैं तुम्हें प्रेस से निकाल-बाहर करूंगा और इस चेतावनी के नहीं मानने पर फिर मैं आपके विरुद्ध अभियोजन (मुक़दमा) (prosecute) भी करूंगा।
10. संक्षेप में अब मैं अपने ख़ुद के बारे में भी यही कहना चाहती हूँ कि समस्त ’बहुजन समाज’ ही मेरा असली परिवार है तथा सत्ता की मास्टर चाबी के ज़रिये ही उन्हें ’शोषित से शासक वर्ग’ बनाकर उनका हित व कल्याण सुनिश्ति करना ही मेरा मिशनरी लक्ष्य व मेरी प्रतिज्ञा भी है, जिसके लिए मैं अपने भाई-बहिनों आदि के ख़िलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हूँ, जैसाकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने उदाहरण पेश किया, यही मेरा भी संकल्प है।
नेपाल में आई भयावह त्रासदी में हमारे रसड़ा विधानसभा क्षेत्र के रसड़ा कोतवाली निवासी श्री पन्नालाल चौरसिया जी के परिवार पर विगत दिनों को असहनीय दुःख का पहाड़ टूटा है, वह अत्यंत हृदयविदारक है। श्री पन्नालाल चौरसिया जी अपने परिवार के साथ नेपाल के त्रिशुली, नुवाकोट में रहकर कपड़े का व्यवसाय करते थे। इस भीषण त्रासदी में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती उषा देवी जी एवं पुत्र राहुल चौरसिया जी का दुःखद निधन हो गया था, इस आपदा में उनका वर्षों से स्थापित कपड़े का व्यवसाय भी पूरी तरह समाप्त हो गया, जिससे परिवार को अपूरणीय व्यक्तिगत क्षति के साथ-साथ गंभीर आर्थिक आघात भी पहुँचा है। परिवार के अन्य सदस्य नेपाल से सकुशल अपने घर रसड़ा लौट आए हैं।
आज शोकाकुल परिवार के बींच पहुँचकर शोक संवेदना व्यक्त की तथा परिवार को दो लाख रुपये (2,00,000 रुपये) की आर्थिक मदद, तथा श्री पन्नालाल जी को नौकरी का ऑफर लेटर एवं तेरहवीं का सम्पूर्ण सामान देकर मदद किया। तथा परिवार को आश्वस्त कराया कि दुःख और संकट की इस घड़ी में वे स्वयं को अकेला न समझें। हम सभी उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और आगे भी परिवार को जिस प्रकार की आवश्यकता होगी, यथासंभव हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति और संबल दें।
विनम्र श्रद्धांजलि।
#PrinceYukeshSingh #UmaShankarSinghJi
SCST वर्गो के लिए बजट का प्रावधान सविधान मे हैं,जिसके तहत स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान के धन से #बहनजी ने 4 मेंडिकल कॉलेज बनाकर SC ST को 91% तक आरक्षण दिया था जो कि संविधान के अनुरूप ही था। SC ST के हजारो अतिरिक्त डॉक्टर #बहनजी की सोच समझ के कारण पैदा हुए लेकिन अब इलाहाबाद कोर्ट ने उसमे 50% की सीमा करके 50% सीटे जनरल के खाते में देने का काम किया है। पुरे देश मे बहनजी के अलावा किसी मुख्यमंत्री ने ऐसा कारनामा करके दिखाया हो तो हमारे भी नॉलेज मे लाया जाए। #बहनजी अलग क्यों हैं? पता लग जायेंगा। यूपी मे 403 विधानसभा सीटे है जो ज्यादातर भाजपा और सपा गुट के पास है जिसमे 86 सीटो पर SC ST विधायक है लेकिन इन पार्टियों के SC ST 86 विधायक और 17 सांसद इस मुद्दे पर मुँह पर टेप लगाकर बैठे हैं और विधानसभा हो या संसद मुद्दा तक नही उठा सकते..? क्या कांग्रेस भाजपा सपा आदि पार्टियों के आरक्षण वाले सांसद विधायक सिर्फ अपनी पार्टियों के ऐजेंडे पर ही मुंह खोलेंगे..? क्या SC ST के हितो से उनका कोई लेना देना नहीं है..? केजरीवाल की पार्टी के जितने भी सांसद विधायक आज संसद या दिल्ली पंजाब और गुजरात आदि राज्यों मे हैं वो बिना SC ST वोटो के ढंग से खाता तक खोलने की हैसियत मे नहीं थे, क्या उनके मुँह पर भी टेप लगी है..? बहुत से SC ST वर्ग के लोग भी कहते हुए मिल जाते है कि मायावती ने क्या किया है....मै उनसे यही कहना चाहता हूँ कि बहनजी ने ऐसा कुछ खास नही किया है जो संविधान के अनुरूप नहीं है,बस उन्होंने SC ST के लिए वही करने की कोशिश की है जो हर सरकार को करनी चाहिये थी लेकिन वो वोट लेकर करती नही है।अगर हर पार्टी वही काम करने की सोचे जो SC ST के लिए संविधान मे लिखा है,फिर हर प्रधानमंत्री,हर मुख्यमंत्री #बहनजी जैसा ही दिखेगा।
संविधान हाथ मे लेकर वोट मांगने वाले संविधान में दिए हक अगर SC ST को देने की सोच रखते तो ना कोई कांशीराम करोड़ो लोगो के लिए मान्यवर कहलाता और ना कोई मायावती बहनजी बन पाती_जय भीम 🙏
बीते दिनों बहुजन समाज पार्टी (BSP) के एकमात्र विधायक रहे स्वर्गीय उमाशंकर सिंह जी के निधन के बाद परसों बलिया के रसड़ा स्थित उनके पैतृक आवास पहुँचकर स्वर्गीय उमाशंकर सिंह जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किए और भावभीनी श्रद्धांजलि दी🙏
उनके जनसेवा और अपने क्षेत्र के लोगों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सदैव स्मरण किया जाएगा.....उनका सरल स्वभाव, सहज व्यक्तित्व और जनहित के लिए निरंतर सक्रिय रहने का भाव उन्हें लोगों के बीच विशेष स्थान देता था.. उनके निधन से न केवल उनके परिवार और शुभचिंतकों ने बल्कि कई असहाय लोगों ने मददगार खो दिया💔
विनम्र श्रद्धांजलि
हमारे आवास खनवर पर विधानसभा क्षेत्र रसड़ा सहित जनपद बलिया एवं अन्य जगहों से पधारे शुभचिंतकों, स्नेहीजनों एवं सम्मानित क्षेत्रवासियों ने पूज्य पिताजी को श्रद्धासुमन अर्पित कर अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी तथा इस अत्यंत दुःखद घड़ी में हमारे परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कर हमें आत्मीय संबल प्रदान किया।
दुःख के इस कठिन समय में आप सभी का स्नेह, अपनापन और आत्मीय उपस्थिति हमारे परिवार के लिए अत्यंत भावपूर्ण एवं संबल प्रदान करने वाला है।
आप सभी के आत्मीय प्रेम, संवेदना एवं संबल हेतु हृदय की गहराइयों से कोटिशः आभार।
#UmaShankarSinghJi #PrinceYukeshSingh