प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो।
अकेले शिक्षक ही दोषी नही है।
शिक्षक की हालत देखकर साफ़ पता चलता है कि उनके साथ भी कई लोगों द्वारा मारपीट किया गया है।BSAऑफिस के
सी सी टी वी की फुल रिकॉर्डिंग का जांच करके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही किया जाए
@Aamitabh2#Istandwithbrijendraverma
#Istandwithbrijendraverma
बीएसए महोदय (सीतापुर) पर हुआ हमला नि:संदेह अत्यंत निन्दनीय है। इस घटना ने पूरे शिक्षा विभाग को शर्मसार कर दिया है:
➡️ इस घटना के वास्तविक कारणों की गहन जांच विभागेतर उच्चतम अधिकारियों/जिलाधिकारी महोदय की अध्यक्षता में होनी चाहिए।
➡️ प्रधानाध्यापक बृजेंद्र वर्मा जी प्रकरण की पूरी सीसीटीवी फुटेज (लगभग 25–30 मिनट, आने से लेकर जाने तक) सार्वजनिक की जाए।
➡️ पीड़ित शिक्षक का पक्ष भी सुना जाए तथा उनकी डाक्टरी जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए, उसके बाद ही कोई कानूनी कार्रवाई की जाए।
मैं स्वयं इस घटना का प्रत्यक्षदर्शी हूँ। उस समय मैं बीएसए कार्यालय में ही मौजूद था और देखा कि लगभग 20–25 लोगों ने 10–15 मिनट तक लगातार उन्हें पीटा, यहाँ तक कि बन्द कमरे में भी मारपीट की गई।
यदि गैलरी और उस कमरे की पूरी फुटेज जारी हो जाए तो अनेक ऐसे चेहरे उजागर होंगे जो बाहर शिक्षकों के हितैषी बनकर घूमते हैं, लेकिन भीतर एक शिक्षक की पिटाई में शामिल थे।
📌 प्रत्येक दोषी चाहे वह कोई भी हो, उस पर कठोर विधिक कार्यवाही हो।
📌 बिना दोनों पक्षों की बात सुने, एकतरफा निर्णय लेना न केवल अनुचित बल्कि न्याय के विरुद्ध भी है।
सत्य सामने आना चाहिए, दोषी को दंड और निर्दोष को न्याय मिलना चाहिए।
साभार:
राजीव गौड़
परसेंडी-सीतापुर
आखिर अध्यापक की ये हालत किसने की?
इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, वेतन अवरूद्ध, निलंबन, प्रतिकूल प्रविष्टि, बर्खास्तगी.. ऐसे ना जाने कितने हथियार है जिनसे अध्यापकों को मानसिक प्रताड़ित किया जाता है।
हर चीज में अध्यापक दोषी नही होता।
#Istandwithbrijendraverma@Aamitabh2
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BSA सीतापुर अखिलेश सिंह,
बेल्ट चलाने वाले शिक्षक जेल में हैं,
अपने ऊपर आरोप लगने के बाद BSA ने
महिला शिक्षिका को निलंबित कर दिया है , BSA की भूमिका पूर्णतया संदिग्ध है , सख्त जाँच /कार्रवाई की दरकार है , उच्चाधिकारी सन्नाटे में हैं !!
#Istandwithbrijendraverma
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सीतापुर बीएसए-प्रधानाध्यापक बेल्ट कांड:
बेल्ट चलाने वाले शिक्षक जेल में हैं,
अपने ऊपर आरोप लगने के बाद BSA ने
महिला शिक्षिका को निलंबित कर दिया है, BSA की भूमिका पूर्णतया संदिग्ध है, सख्त जाँच/कार्रवाई की दरकार है, उच्चाधिकारी सन्नाटे में हैं!
दरअसल हम अभ्यस्त हो गए हैं अध्यापक का जो ट्रिपिकल प्रारूप 60,70, के दशक में गढ़ा गया वह यह था कि अध्यापक समाज का सबसे निरीह प्राणी है जो टूटी साइकिल स्कूल में पढ़ाने आ रहा हो, जिसके पास फटा हुआ छाता हो, जो अपनी सैलरी से सिर्फ दो लोगों का जीवन निर्वाह कर सकता हो, जिससे बच्चा पैदे होने पर वो अपने बच्चों की परवरिश खुद न कर पाये और उनकी परवरिश के लिए उनको ननिहाल भेजें।, बच्चों की परवरिश ननिहाल में हो, उसको अध्यापक कहा जाता था, ठीक है क्या हुआ जो एक अध्यापक इन सब दुसवारियों से निकल कर आधुनिक हुआ है उसने अपना घर बना लिया। उसके कपड़े पहनने का अंदाज बदल गया, अब वो कभी कभी जींस टी शर्ट भी पहन लेता है बुलेट से भी चलता है उसने कार भी ले ली है, आंखों में काला चश्मा भी लगाता है, ये सब बातें हमें फंस नहीं रही हैं क्योंकि हमें आदत है उसके संसत्तावन का अध्यापक देखने की हमें जलन है। हमें चिढ़ है उसने अपने आपको इतना कैसे बदल लिया, कितनी सैलरी आ गई, लेकिन आपने एक बार भी उसकी मेहनत की तरफ देखने का प्रयास नहीं किया, यदि आप देखते तो आपकी रूह काँप जाती इसका मतलब ये नहीं कि सन् 57 वाले नजरिए से ही हम अध्यापक को देखें, ओ भी एक इंसान है और मानव रूप में अवतरित होकर के इस जीवन के संसाधनों का उपयोग उपभोग करना सबका अधिकार है तो एक अध्यापक का भी ये ही अधिकार है उसको समाज से आप अलग क्यों करते हैं, केवल अध्यापक पे तोहमत लगाना ये उचित बात नहीं, आज पूरा समाज संक्रमण के दौर से गुजरा रहा है परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, अध्यापक ने भी अपनी आर्थिक उन्नति की है लेकिन अध्यापक की आंखों में काला चश्मा, जींस, टीशर्ट गाड़ियों से चलना कुछ लोगों को रास नहीं आ रहा है, जिनको रास नहीं आ रहा है वही कहते हैं कि अध्यापक स्कूल नहीं जाता, पढ़ाता नहीं, कुछ करता नहीं, जबकि हकीकत ये है कभी आपने देखा है कि प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले किसी बच्चे के लिए ट्यूटर लगे हों नहीं न, जो ट्यूटर पढ़ाता है उसकी भी पढ़ाई प्लस अपनी भी पढ़ाई हमारा शिक्षक अकेले ही इस अपने सरकारी स्कूल में करा देता है, लेकिन यदि आपने प्राइवेट स्कूल में आपने बच्चे का नामांकन कराया है, वो चाहे कितना भी नामचीन शहर का सबसे महंगा स्कूल हो, कितने बड़े शहर का हो, लेकिन यदि बच्चे के लिए आपने 1, 2 ट्विटर नहीं रखे तो फिर उसका बेड़ा राम ही पार करेंगे, उसका क्या होगा, कोई नहीं जानता, इसलिए मेरा आप सभी से अनुरोध है कि इन सरकारी स्कूल के शिक्षकों की महत्ता को पहचानिए वो अच्छे से जीवन जीना चाह रहे हैं उनको जीवन जीने दीजिए, उनके लिए और बेहतर संसाधन हम सभी को देना है, ताकि समाज को एक सुशिक्षित मानव संसाधन हमारे अध्यापक दे सके, जय हिंद जय भारत, जय शिक्षक, राकेश सिंह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़ 7/8/25
सैलरी1,5 लाख, केवल आना जाना और काम कुछ नहीं, जब हम यह बात एक सम्मानित शिक्षक के बारे में कहते हैं तब हमें पता होना चाहिए की 150000 यह संख्या बताना, आना जाना कुछ न करना, इन सारे शब्दों का ज्ञान हमें एक शिक्षक ने ही दिया है, जब हम कहते हैं कि एक शिक्षक काम नहीं करता, कामचोर है स्कूल में नहीं जाता जाता बच्चों को नहीं पढ़ाता तो हमें पता होना चाहिए यह विवेक और यह ज्ञान उसी शिक्षक ने हमें दिया है कि हम उसके बारे में ये टिप्पणी करने लायक हो गए हैं, या कर रहे, हैं जिस गुरु के दिए ज्ञान से हमें इस चर, अचर जगत के बारे में जानकारी मिलती है उसी गुरु के बारे में इतनी हल्की बात कहना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है ज्ञान की महत्ता तब भी थी, आज भी है, और कल भी रहेगी, ज्ञान तब भी राज करता था, आज भी राज कर रहा है, कल भी करेगा, ज्ञान की किसी से तुलना नहीं हो सकती है और ज्ञान को कोई उपदेश देने लायक इस जगत में कोई नहीं है, ज्ञान को उपदेश देने का अर्थ है कि अपने दामन में खुद झाँककर देख लेना चाहिए जब हम किसी पर एक अंगुली उठाते हैं तो 3 अंगुलियाँ कहती हैं पहले अपने आप को देखो और एक अंगुली ऊपर की तरफ इशारा करती है कहती है कम से कम ईश्वर से डरो जिन लोगों के मन में शिक्षकों के प्रति ये भाव हैं उनको अपने भी आत्मा में झांक के देखना चाहिए, और ईश्वर से डरना चाहिए , राकेश सिंह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़ 15/7/25
यूपी में सरकारी स्कूलों के बंद किए जाने के ख़िलाफ़ अब एक जन आंदोलन खड़ा हो चुका है. गाँव-गाँव से आम लोगों द्वारा विरोध की अनगिनत वीडियो वायरल हो रही हैं. शिक्षकों द्वारा भी विरोध हो रहा है. आम लोग भी इसमें शामिल हैं. आप भी आज ज़ोर लगाओ, इसमें शामिल हो जाओ.
#मधुशाला_नहीं_पाठशाला_दो